बुधवार, 2 जुलाई 2025

विश्व की शिक्षा की राजधानी बिहार को भाजपा -जेडीयू ने बदहाल कर दिया: दिग्विजय सिंह

 

विश्व की शिक्षा की राजधानी बिहार को भाजपा -जेडीयू ने बदहाल कर दिया: दिग्विजय सिंह

युवाओं के भविष्य की लगाई बोली, पेपर माफिया की सत्ता से हमजोली!: दिग्विजय सिंह

भर्ती और प्रवेश परीक्षा का मोल लगाया, हर पेपर लीक कराया!: दिग्विजय सिंह

 पटना. बिहार की शिक्षा का परचम पूरे विश्व में लहराया था. नालंदा विश्वविद्यालय हो या विक्रमशिला विश्वविद्यालय तिब्बत, चीन, जापान, कोरिया, सुमित्रा, मंगोलिया आदि देशों से विद्यार्थी यहाँ शिक्षा लेने आते थे. चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuan Zang) और इत्सिंग (Yixing) ने इसके वैभव की बहुत प्रशंसा करते नहीं थकते थे. आज उसी बिहार को भाजपा और जेडीयू की सरकार ने युवाओं के भविष्य बेचने का केंद्र बना दिया है.भर्ती प्रवेश परीक्षा के घोटाले, जर्जर स्कूल भवन और युवाओं का पलायन ये बिहार की शिक्षा का भाग्य बन गया है -

         आज मोदी सरकार ख़ुद कह रही है की बिहार को बर्बाद भाजपा जेडीयू ने किया है ये बातें बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कही .

       राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने क्रमवार आंकड़े पेश करके विस्तार से निम्नांकित बातों को प्रमुखता से संवाददाता सम्मेलन में रखी .उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार की स्कूली शिक्षा की रिपोर्ट UDISE+ 2023–24 का बिहार के लिए चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों की बदहाली और ड्रॉपआउट रेट देश में सबसे ज़्यादा, न स्कूलों में बिजली न शिक्षक , न कंप्यूटर न लाइब्रेरी मौजूद है-

      यह प्रदर्शन पूरे देश में सबसे खराब है- बिजली की सुविधा से वंचित स्कूल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 78,120 में से 16,529 स्कूलों में अब भी बिजली नहीं है.कंप्यूटर रहित स्कूल और कुल 78,120 शासकीय स्कूलों में से मात्र 5,057 स्कूलों में कंप्यूटर हैं, अर्थात् मात्र 6.5% स्कूलों में यह सुविधा मौजूद है .

       बिहार में 2,637 स्कूल ऐसे हैं जहाँ सिर्फ एक शिक्षक है और इन स्कूलों में 2.91 लाख छात्र नामांकित हैं. वहीँ राज्य में 117 स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी छात्र नहीं पढ़ता है, फिर भी इन स्कूलों में 544 शिक्षक तैनात हैं. स्कूलों से ⁠ड्रॉप-आउट रेट भी सबसे अधिक बिहार का ही है जिसमें प्राइमरी (1–5): 8.9%, अपर प्राइमरी (6–8): 25.9%, सेकेंडरी (9–10): 25.63% ड्रॉप-आउट रेट है.

      बिहार में कुल स्कूल और सरकारी हिस्सेदारी राज्य में कुल स्कूल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 94,686, कुल स्कूल में सरकारी स्कूल 78,120 हैं,  यानी लगभग 82% स्कूल सरकारी हैं. 2025-26 के बजट में बिहार सरकार ने 60,954 करोड़ रुपए शिक्षा पर खर्च करने का दावा किया, मगर सच्चाई यह है कि यह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है.भाजपा जेडीयू सरकार ने उच्च शिक्षा में भी बिहार के भविष्य को बर्बाद कर दिया. AISHE 2021–22 (All India Survey on Higher Education) की हालिया रिपोर्ट ने बिहार में उच्च शिक्षा की दुर्दशा को फिर से उजागर कर दिया है.

     GER (Gross Enrolment Ratio) यानी कुल GER: 17.1% अर्थात, राज्य की 18–23 वर्ष की अनुमानित जनसंख्या 1.36 करोड़ है, लेकिन इनमें से केवल 23.33 लाख छात्र अंडर ग्रेजुएट में पढ़ रहे है .अर्थात 1.13 करोड़ युवा उच्च शिक्षा से वंचित है. देश में सबसे कम प्रति लाख जनसंख्या पर उच्च शैक्षणिक संस्थान बिहार में हैं जिसमें कुल 37 विश्वविद्यालय, 1092 महाविद्यालय, 315 स्टैंड-अलोन संस्थान के साथ कुल उच्च शिक्षण संस्थान 1,387 हैं लेकिन आबादी की तुलना में ये संख्या बेहद कम है.प्रति 1 लाख आबादी पर सिर्फ़ 7 कॉलेज हैं — जबकि राष्ट्रीय औसत 30 कॉलेज प्रति लाख है. यह पूरे भारत में सबसे कम है.

     पेपर लीक पर बोलते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि युवाओं के भविष्य की लगाई बोली, पेपर माफिया की सत्ता से हमजोली! बिहार में भाजपा-जेडीयू की सत्ता की सरपरस्ती में सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में घोटालों का गोरख धंधा चल रहा है। पिछले सात वर्षों में प्रदेश में 10 से अधिक परीक्षा पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं। नीचे हम पिछले वर्षों में सामने आए प्रमुख घोटालों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर रहे हैं:


 2017: सिपाही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया था, जिसके कारण परीक्षा को रद्द करना पड़ा.इस मामले में  21 एफआईआर दर्ज की गयी. मगर जांच अभी भी जारी है.

2019 और 2021: इन वर्षों में बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर लीक हुए-

2021-22: बिहार उत्पाद विभाग की परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया.ईओयू द्वारा जांच जारी है .2022: बहुचर्चित बीपीएससी 67वीं प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया.इस मामले में 21 एफआईआर दर्ज की गयी मगर जाँच अभी जारी है.

2023: फरवरी 2023 में सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया, जिसके चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी. ईओयू द्वारा BPSC के केंद्राधीक्षक को गिरफ्तार किया गया.

2023: अमीन भर्ती परीक्षा का प्रश्न पत्र सोशल मीडिया के जरिए वायरल हो गया था.इस मामले में पटना समेत कई जिलों में एफआईआर दर्ज की गयी.

2023: देशभर में बहुचर्चित NEET परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया. पटना से पेपर आउट होने की पुष्टि .यह मामला पूरे देश में सुर्खियों में रहा.

2024: बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई.

2024: राज्य स्वास्थ्य समिति की सीएचओ भर्ती परीक्षा में भी प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही व्हाट्सऐप के जरिए लीक हो गया.

    भर्ती और प्रवेश परीक्षा का मोल लगाया, हर पेपर लीक कराया.बिहार में शिक्षा की गौरवशाली और वैभवशाली विरासत को कलंकित करने वाले “पेपर माफिया” का नेटवर्क लगातार सक्रिय होता जा रहा है.एक चौंकाने वाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के लिए पेपर लीक करने और उसमें मदद दिलाने के बदले में प्रति छात्र भारी-भरकम रकम वसूली जाती है.इन माफियाओं का कारोबार हजारों करोड़ का है .

        नीचे दी गई सूची में विभिन्न परीक्षाओं के लिए पेपर माफिया द्वारा ली जाने वाली दरों का विवरण प्रस्तुत है:

NEET PG ₹70-80 लाख,NEET UG, ₹30-40 लाख, बैंकिंग परीक्षा (Bank PO) ₹15-20 लाख, एसएससी (SSC) ₹15-20 लाख, साक्षात्कार सहायक ₹25-30 लाख, पुलिस SI ₹25 लाख, पुलिस सिपाही ₹10-15 लाख ,पटवारी ₹10-15 लाख, टेट/रीट ₹10 लाख, अन्य ₹10 लाख.


       चुनाव आयोग के द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सत्यापन पर बोलते हुए राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि बिहार में हो रहे वोटर लिस्ट पुनरीक्षण कार्य भाजपा के निर्देशन पर चुनाव आयोग की मनमानी है जिसमें केवल 28 दिनों में 11 दस्तावेजों के साथ मतदाता सत्यापन का जो दावा चुनाव आयोग कर रही है वो सीधे तौर पर गरीब, आदिवासी, युवा, बाढ़ प्रभावित जनता और पलायन का दंश झेल रहे मतदाताओं को आगामी बिहार विधान सभा चुनावों में मतदान से रोकने की कवायद है.

           संवाददाता सम्मेलन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व विधान परिषद् में कांग्रेस के नेता डॉ मदन मोहन झा, राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दूबे, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अशोक राम, प्रेमचंद मिश्र, पूर्व मंत्री अवधेश कुमार सिंह, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, पूर्व विधायक प्रमोद सिंह, ब्रजेश प्रसाद मुनन, डॉ स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, सौरभ सिन्हा, असित नाथ तिवारी, ज्ञान रंजन, रीता सिंह सहित अन्य नेतागण मौजूद रहें.


आलोक कुमार


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