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मंगलवार, 26 मई 2026

Bihar : कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में मलबे का ढेर लग गया

 पटना में अतिक्रमण पर चला बुलडोजर, कार शोरूम और सर्विस सेंटर ध्वस्त


पटना में गंगा तट के समीप अवैध निर्माणों के खिलाफ नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। कुर्जी क्षेत्र में चलाए गए इस अभियान में एक नामी कार कंपनी के शोरूम और दो सर्विस सेंटरों को ध्वस्त कर दिया गया। सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में मलबे का ढेर लग गया। नगर निगम ने दावा किया कि करीब एक बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को लेकर पूरे शहर में चर्चा तेज हो गई है।

पटना नगर निगम द्वारा चलाया गया यह अभियान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों और भवन निर्माण उपविधियों के उल्लंघन के खिलाफ था। निगम अधिकारियों के अनुसार गंगा तट के पास जिन इमारतों का निर्माण किया गया था, वे नियमों के विरुद्ध थीं। पर्यावरणीय मानकों और नदी तट संरक्षण संबंधी कानूनों का पालन नहीं किया गया था। इसी कारण नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।

नगर आयुक्त यशपाल मीणा की निगरानी में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अभियान सुबह करीब छह बजे शुरू हुआ और कई घंटों तक चला। कार्रवाई के दौरान निगम के सभी अपर नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त, पाटलिपुत्र, बांकीपुर और पटना सिटी अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहे। किसी प्रकार की अव्यवस्था या विरोध की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से लगभग 100 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी।

ध्वस्तीकरण अभियान में भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। छह जेसीबी, एक पोकलेन मशीन, एक हाइड्रा और एक वाइब्रेटर मशीन की मदद से अवैध निर्माणों को गिराया गया। विशाल भवनों के टूटने के बाद वहां ईंट, सीमेंट, लोहे की सरिया और अन्य निर्माण सामग्री का बड़ा ढेर लग गया। पूरे इलाके में धूल और मलबे का दृश्य दिखाई देता रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मशीनों की सहायता से भूमि को पूरी तरह खाली कराया गया।

इस अभियान की खास बात यह रही कि पूरी कार्रवाई की निगरानी ड्रोन कैमरे से की गई। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, नियमों के विरुद्ध निर्माण और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में भी ऐसे अवैध निर्माणों के खिलाफ नियमित और सख्त अभियान जारी रहेगा।

दरअसल, गंगा तट क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी पहले से चल रही थी। अप्रैल महीने में नगर निगम ने दीघा से बांस घाट तक सीमांकन अभियान चलाया था। नगर निगम मुख्यालय और संबंधित अंचल कार्यालयों की संयुक्त टीम ने गंगा किनारे स्थित भवनों और जमीनों का निरीक्षण किया था। उन निर्माणों को चिन्हित किया गया था जिन पर 2023 में विजिलेंस केस के तहत कार्रवाई के आदेश दिए गए थे।

नगर निगम के अनुसार जिन संपत्तियों पर अवैध निर्माण की शिकायतें थीं, उन्हें पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था। नोटिस के बाद संबंधित भवनों के अवैध हिस्सों का सीमांकन किया गया। कई स्थानों पर पूरी इमारत को अवैध घोषित किया गया, जबकि कुछ जगहों पर केवल कुछ मंजिलों या आंशिक हिस्सों को नियम विरुद्ध पाया गया। कुल 19 संपत्तियों पर विजिलेंस केस चलाया गया था और उनमें कार्रवाई के आदेश पारित किए गए थे। सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया गया है।

गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में निर्माण को लेकर भवन उपविधियों में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। नियमों के अनुसार गंगा नदी की बाहरी सीमा, जिसे सिंचाई विभाग निर्धारित करता है, से 200 मीटर की परिधि के भीतर किसी भी नए भवन के निर्माण या पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि विरासत भवनों की मरम्मत और जीर्णोद्धार को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।

इसी प्रकार अन्य नदियों के मामले में नदी की बाहरी सीमा से 100 मीटर की दूरी तक निर्माण पर रोक है। राज्य सरकार आवश्यकता के अनुसार दूरी तय कर सकती है और संबंधित नदियों की सूची अधिसूचित कर सकती है। नदी की वास्तविक सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित माना गया है। इन नियमों का उद्देश्य नदी तटों को सुरक्षित रखना, पर्यावरण संतुलन बनाए रखना और बाढ़ जैसी आपदाओं के जोखिम को कम करना है।

हालांकि भवन उपविधियों में यह भी व्यवस्था है कि योजना प्राधिकरण या सरकारी एजेंसियां सरकार की मंजूरी से नदी तटों, घाटों के विकास और सुंदरीकरण से जुड़े कार्य कर सकती हैं। लेकिन निजी व्यवसायिक निर्माणों को इसके लिए सख्त नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

पटना नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद शहर में अवैध निर्माणों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर लोग इसे पर्यावरण संरक्षण और सरकारी जमीन बचाने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अचानक हुए ध्वस्तीकरण को लेकर प्रभावित पक्षों में नाराजगी भी देखी जा रही है। लेकिन प्रशासन का कहना है कि नोटिस, सीमांकन और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कार्रवाई की गई है।

कुर्जी क्षेत्र में बुलडोजर चलने के बाद यह साफ संकेत मिल गया है कि गंगा तट और सरकारी जमीनों पर अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ अब प्रशासन सख्त रुख अपनाने जा रहा है। आने वाले समय में दीघा से बांस घाट तक अन्य चिन्हित अवैध संरचनाओं पर भी कार्रवाई तेज होने की संभावना है।

आलोक कुमार

Bihar : यह विवाद और बड़ा सामाजिक आंदोलन बन सकता है

                             पटना के दीघा से राजापुल तक फैला जमीन विवाद 


पटना के दीघा से राजापुल तक फैला जमीन विवाद अब केवल भू-अधिकार का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह हजारों परिवारों के अस्तित्व, सम्मान और भविष्य से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। रजिस्टर-2 यानी जमाबंदी पंजी के कथित रूप से गायब होने और उसके बाद स्थानीय जमीनों को अचानक “खासमहाल” घोषित करने की कार्रवाई ने इलाके के लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। वर्षों से अपने घरों, दुकानों और पुश्तैनी जमीनों पर बसे लोग अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई बार स्थानीय लोग सड़कों पर उतर चुके हैं और सरकार से न्याय की मांग कर चुके हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता नागेंद्र सिंह ने इस मुद्दे को केवल जमीन विवाद नहीं, बल्कि “एक व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास को अवरुद्ध करने वाली सरकारी कार्रवाई” बताया है। उनका कहना है कि जब किसी व्यक्ति से उसकी जमीन, घर और मालिकाना अधिकार छीनने की कोशिश होती है, तो उसका आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान दोनों प्रभावित होते हैं। भूमि केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि परिवार की मेहनत, इतिहास और भविष्य की सुरक्षा का आधार भी होती है।

इस पूरे विवाद की जड़ में रजिस्टर-2 यानी जमाबंदी पंजी का गायब होना बताया जा रहा है। बिहार में इन दिनों भूमि सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। इसी दौरान दीघा-राजापुल इलाके से लगातार शिकायतें सामने आईं कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड के पन्ने गायब हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन जमीनों के दस्तावेज रिकॉर्ड से हटाए गए, उन्हें बाद में सरकारी जमीन यानी “खासमहाल” घोषित कर दिया गया। इससे दशकों से बसे हजारों परिवारों पर बेदखली का खतरा मंडराने लगा है।

स्थानीय रैयतों का कहना है कि उनके पास पुराने कर रसीद, बिजली बिल, मकान कर और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि वे लंबे समय से वहां रह रहे हैं। लेकिन जब सरकारी रिकॉर्ड में जमाबंदी ही गायब दिखा दी जाए, तो आम आदमी के लिए अपने अधिकार को साबित करना बेहद कठिन हो जाता है। लोगों का आरोप है कि यह सब किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसमें भू-माफिया और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत शामिल है।

दीघा क्षेत्र का महत्व भी इस विवाद को और गंभीर बनाता है। पटना का यह इलाका तेजी से विकसित हुआ है और यहां जमीन की कीमतें लगातार बढ़ी हैं। ऐसे में भूमि पर कब्जे और मालिकाना अधिकार को लेकर विवाद बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन यदि सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की बात सही साबित होती है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि जनता के भरोसे पर बड़ा हमला माना जाएगा।

इस मुद्दे को लेकर कई बार स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। लोगों का कहना है कि यदि उनके पूर्वजों के समय से बसे होने के बावजूद उन्हें अतिक्रमणकारी कहा जाएगा, तो यह अन्याय होगा। उनका सवाल है कि जब वर्षों तक सरकार उनसे टैक्स और विभिन्न शुल्क लेती रही, तब उनकी जमीन वैध थी, लेकिन अचानक अब उसे सरकारी जमीन कैसे बताया जा सकता है?

हालांकि, बिहार सरकार ने हाल के दिनों में खासमहाल जमीनों को लेकर राहतकारी नीति बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि जो लोग 50 से 100 वर्षों से खासमहाल जमीन पर बसे हुए हैं, उन्हें बेदखल करने के बजाय निर्धारित शुल्क लेकर पट्टा या मालिकाना हक दिया जाए। यदि यह नीति पारदर्शी तरीके से लागू होती है, तो हजारों परिवारों को राहत मिल सकती है। लेकिन लोगों का कहना है कि केवल नीति की घोषणा काफी नहीं है, बल्कि जमीन रिकॉर्ड में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है।

इस पूरे मामले में न्यायपालिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण बन जाती है। पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल रजिस्टर-2 में नाम दर्ज होना ही मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि जमीन का वास्तविक मालिक कौन है, इसका निर्णय दीवानी अदालत करेगी। इसका मतलब यह है कि यदि किसी व्यक्ति के पास अन्य वैध दस्तावेज और प्रमाण हैं, तो वह अदालत में अपने अधिकार की लड़ाई लड़ सकता है।

दीवानी न्यायालय यानी सिविल कोर्ट ऐसे ही नागरिक विवादों का निपटारा करता है। यहां संपत्ति, धन, अनुबंध, विवाह, पारिवारिक अधिकार और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है। इन अदालतों का उद्देश्य किसी को सजा देना नहीं, बल्कि पीड़ित पक्ष के अधिकारों की रक्षा करना और न्याय सुनिश्चित करना होता है। दीघा-राजापुल विवाद में भी अंततः अदालतों की भूमिका अहम रहने वाली है।

लेकिन सवाल केवल कानूनी नहीं, मानवीय भी है। जिन परिवारों ने अपनी पूरी जिंदगी किसी जमीन पर बिताई हो, जिनके बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और सामाजिक पहचान उसी घर से जुड़ी हो, उनके सामने अचानक बेघर होने का डर खड़ा हो जाए तो यह स्थिति बेहद पीड़ादायक होती है। विकास और शहरीकरण जरूरी है, लेकिन उसके नाम पर गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराए, गायब हुए रजिस्टर-2 के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी तय करे और निर्दोष लोगों को परेशान होने से बचाए। साथ ही, जिन परिवारों के पास वैध प्रमाण हैं, उन्हें कानूनी सुरक्षा दी जाए। प्रशासन और जनता के बीच भरोसा तभी कायम रहेगा जब न्याय निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होता दिखाई देगा।

दीघा से राजापुल तक उठ रही आवाजें केवल जमीन बचाने की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि यह नागरिक अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई बन चुकी हैं। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद और बड़ा सामाजिक आंदोलन बन सकता है।

आलोक कुमार 

India : वर्ष 2014 में भारत में नई राजनीतिक दिशा की शुरुआत

 26 मई : इतिहास, लोकतंत्र और नई उम्मीदों का विशेष दिन

26 मई का दिन भारत के इतिहास, राजनीति, विज्ञान, समाज और राष्ट्रीय चेतना के कई महत्वपूर्ण अध्यायों से जुड़ा हुआ है। यह दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि देश के बदलते दौर, लोकतांत्रिक परंपराओं और नई सोच का प्रतीक भी माना जाता है। हर वर्ष 26 मई हमें यह याद दिलाता है कि समय के साथ समाज और राष्ट्र लगातार आगे बढ़ते रहते हैं। यह दिन अनेक प्रेरणादायक घटनाओं और महत्वपूर्ण अवसरों का साक्षी रहा है।

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 26 मई का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन वर्ष 2014 में भारत में नई राजनीतिक दिशा की शुरुआत हुई थी। देश में आम चुनावों के बाद नई सरकार का गठन हुआ और विकास, डिजिटल भारत, आत्मनिर्भरता, स्वच्छता तथा आधुनिक भारत जैसे कई बड़े अभियानों की चर्चा तेज हुई। इसके बाद 26 मई को राजनीतिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण दिन माना जाने लगा। लोकतंत्र में जनता की शक्ति सबसे बड़ी होती है और यह दिन उसी जनमत की ताकत को दर्शाता है।

26 मई का संबंध राष्ट्रीय विकास की कई योजनाओं और उपलब्धियों से भी जोड़ा जाता है। पिछले वर्षों में देश ने तकनीक, अंतरिक्ष, शिक्षा, सड़क निर्माण, रेलवे, डिजिटल सेवा और स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। गांवों तक इंटरनेट पहुंचाना, गरीबों के लिए योजनाएं शुरू करना, किसानों और युवाओं के लिए नई पहल करना—ये सभी परिवर्तन आधुनिक भारत की तस्वीर को मजबूत बनाते हैं। इस दिन इन उपलब्धियों पर चर्चा होती है और आने वाले समय के लिए नए संकल्प लिए जाते हैं।

यह दिन युवाओं के लिए भी प्रेरणा का संदेश देता है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है और देश की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा पीढ़ी है। आज के युवा शिक्षा, तकनीक, खेल, विज्ञान, कला और उद्यमिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। 26 मई हमें यह प्रेरणा देता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो सफलता जरूर मिलती है। आज के समय में युवा केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले भी बन रहे हैं। स्टार्टअप संस्कृति और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

सामाजिक दृष्टि से भी 26 मई का महत्व कम नहीं है। यह दिन हमें समाज में एकता, भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करने की सीख देता है। भारत विविधताओं का देश है, जहां अलग-अलग भाषा, धर्म, संस्कृति और परंपराएं होने के बावजूद लोग मिलजुल कर रहते हैं। यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। जब समाज एकजुट होकर आगे बढ़ता है तो देश भी तेजी से प्रगति करता है। इसलिए यह दिन सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी देता है।

पर्यावरण और प्रकृति की दृष्टि से भी वर्तमान समय में जागरूकता बहुत जरूरी हो गई है। लगातार बढ़ती गर्मी, जल संकट और प्रदूषण जैसी समस्याएं मानव जीवन को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में 26 मई जैसे विशेष अवसर हमें यह सोचने का अवसर देते हैं कि विकास के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। पेड़ लगाना, जल संरक्षण करना और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना आज हर नागरिक की जिम्मेदारी बन गई है।

अगर विश्व इतिहास की बात करें तो 26 मई को दुनिया में भी कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं। विज्ञान, राजनीति, खेल और संस्कृति से जुड़ी अनेक उपलब्धियां इस तारीख से जुड़ी हुई हैं। इतिहास हमें केवल अतीत की जानकारी नहीं देता, बल्कि भविष्य के लिए सीख भी देता है। इसलिए ऐसे विशेष दिनों पर इतिहास को याद करना और उससे प्रेरणा लेना जरूरी है।

मीडिया और पत्रकारिता के लिए भी यह दिन महत्वपूर्ण माना जा सकता है। आज सूचना का दौर है और हर व्यक्ति मोबाइल तथा इंटरनेट के माध्यम से दुनिया से जुड़ा हुआ है। सही और निष्पक्ष जानकारी समाज को जागरूक बनाती है। पत्रकारिता लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है और समाज को सही दिशा देने में इसकी बड़ी भूमिका होती है। इसलिए आज के समय में सत्य, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ खबरों को प्रस्तुत करना बहुत आवश्यक हो
गया है।

26 मई हमें यह भी सिखाता है कि बदलाव समय की मांग है। जो समाज और राष्ट्र समय के साथ खुद को बदलते हैं, वही आगे बढ़ते हैं। शिक्षा, तकनीक और सकारात्मक सोच किसी भी देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। भारत आज दुनिया के बड़े देशों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और इसमें देश के नागरिकों की मेहनत तथा सहभागिता की बड़ी भूमिका है।

अंत में कहा जा सकता है कि 26 मई केवल एक तारीख नहीं, बल्कि प्रेरणा, संकल्प, विकास और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। यह दिन हमें अपने कर्तव्यों को याद दिलाता है और देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर काम करने का संदेश देता है। जब हर नागरिक ईमानदारी, मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेगा, तब भारत और भी मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर राष्ट्र बन सकेगा।

आलोक कुमार

सोमवार, 25 मई 2026

Bihar : बिहार में भीषण गर्मी का कहर

 बिहार में भीषण गर्मी का कहर, लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

बिहार इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। राज्य के कई जिलों में तापमान लगातार 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। सुबह से ही तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, जबकि दोपहर होते-होते सड़कें लगभग सूनी हो जा रही हैं। खासकर दक्षिण बिहार के जिलों—रोहतास, डेहरी, बक्सर, औरंगाबाद और पटना—में गर्म हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

पटना सहित कई शहरों में अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। हालांकि थर्मामीटर कुछ और दिखा रहा है, लेकिन उमस और तेज धूप के कारण लोगों को तापमान 45 डिग्री से भी अधिक महसूस हो रहा है। न्यूनतम तापमान भी 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही। बिजली की खपत बढ़ गई है और लोग एसी, कूलर और पंखों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर बिहार और सीमांचल के कुछ हिस्सों—जैसे किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार—में हल्की बारिश और तेज हवा चलने की संभावना है। 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे वहां के लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन दक्षिण बिहार में अभी भी लू का प्रकोप जारी रहने की आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘नौतपा’ की शुरुआत के साथ गर्मी का असर और अधिक बढ़ सकता है।

गर्मी का सबसे अधिक असर मजदूरों, रिक्शा चालकों, किसानों और बाहर काम करने वाले लोगों पर पड़ रहा है। दोपहर के समय सड़क पर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। अस्पतालों में भी हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में पानी की कमी होने से लोग तेजी से बीमार पड़ सकते हैं। ऐसे में लोगों को अधिक से अधिक पानी पीने और धूप से बचने की सलाह दी जा रही है।

सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचें। यदि बहुत जरूरी हो तभी बाहर जाएं और सिर को कपड़े या टोपी से ढंककर रखें। नींबू पानी, छाछ, ओआरएस और नारियल पानी जैसे पेय पदार्थों का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है क्योंकि वे गर्मी से जल्दी प्रभावित होते हैं।

सोशल मीडिया पर भीषण गर्मी को लेकर कई तरह के पोस्ट और संदेश वायरल हो रहे हैं। एक पोस्टर में मजाकिया अंदाज में दिखाया गया है कि “सब लोग एसी और कूलर में रहें, सिर्फ ANM बाहर निकले क्योंकि ANM ने अमृत पी रखा है।” यह पोस्ट भले ही हास्य के रूप में बनाया गया हो, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा संदेश छिपा है। दरअसल, इतनी भयंकर गर्मी में भी स्वास्थ्यकर्मी, विशेषकर ANM और आशा कार्यकर्ता, गांव-गांव जाकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। वे टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और जागरूकता अभियान में लगातार जुटी हुई हैं।

इसी भीषण गर्मी के बीच स्वास्थ्य विभाग महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर भी महत्वपूर्ण अभियान चला रहा है। सरकार द्वारा 14 वर्ष तक की बालिकाओं को गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन लगाई जा रही है। यह टीका सरकारी स्तर पर निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूलों और गांवों में जाकर टीकाकरण अभियान चला रही है ताकि भविष्य में महिलाओं को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सके। निजी अस्पतालों में भी यह वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन वहां इसके लिए शुल्क देना पड़ता है।

गर्मी के इस दौर में स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। एक ओर उन्हें लू और धूप का सामना करना पड़ रहा है, दूसरी ओर लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचानी हैं। ANM और आशा कार्यकर्ताओं की मेहनत को देखकर लोग उनकी सराहना भी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ये महिलाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल गर्मी का स्वरूप अधिक खतरनाक होता जा रहा है। पहले जहां मई-जून में सीमित दिनों तक लू चलती थी, अब अप्रैल से ही तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। पेड़ों की कटाई, बढ़ता प्रदूषण और शहरीकरण भी गर्मी बढ़ने के बड़े कारण हैं। ऐसे में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर कदम उठाने होंगे।

फिलहाल बिहार के लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को सुरक्षित रखना है। मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना, पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचना और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है। आने वाले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।


आलोक कुमार

Bihar: एससीएन प्रोविंशियल हाउस के नवनिर्मित बी ब्लॉक का आशीर्वाद समारोह

 एससीएन प्रोविंशियल हाउस के नवनिर्मित बी ब्लॉक का आशीर्वाद समारोह 

एससीएन प्रोविंशियल हाउस के नवनिर्मित बी ब्लॉक का आशीर्वाद समारोह अत्यंत श्रद्धा, आनंद और कृतज्ञता के वातावरण में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक एवं यादगार अवसर पर अनेक फादर, सिस्टर्स, अतिथि, मित्र तथा शुभचिंतक उपस्थित होकर इस खुशी के पल के सहभागी बने। पूरे परिसर में उत्सव का माहौल था और सभी के चेहरों पर नई उपलब्धि की प्रसन्नता झलक रही थी।

कार्यक्रम की शुरुआत सिस्टर सोनाली सोरेन के स्वागत संबोधन एवं परिचय से हुई। उन्होंने बी ब्लॉक निर्माण परियोजना के इतिहास और उसकी यात्रा को संक्षेप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार इस भवन के निर्माण का सपना धीरे-धीरे ईश्वर की कृपा, दूरदर्शी योजना और अनेक उदार लोगों के सहयोग से साकार हुआ। उन्होंने निर्माण कार्य के प्रारंभिक चरण से लेकर इसके पूर्ण होने तक की यात्रा को याद करते हुए उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कार्य में योगदान दिया।

आशीर्वाद समारोह का नेतृत्व चाकराम पल्ली के पल्ली पुरोहित फादर बारथालोमियो लकड़ा ने किया। उन्होंने नए भवन तथा उसमें निवास करने और आने वाले सभी लोगों के लिए ईश्वर से विशेष आशीष की प्रार्थना की। प्रार्थना और पवित्र जल के छिड़काव के साथ भवन को प्रभु को समर्पित किया गया। यह अवसर और भी विशेष बन गया जब सिस्टर रोज मेरी लकड़ा एवं सिस्टर मेरी जोसेफ ने फीता काटकर नए बी ब्लॉक का औपचारिक उद्घाटन किया। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत किया।

धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान प्रोविंशियल सिस्टर लतिका कोट्टुप्पल्लिल ने उन सभी लोगों के प्रति विशेष आभार प्रकट किया, जिन्होंने इस परियोजना की योजना और पूर्णता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि यह भवन केवल ईंट और पत्थरों से बना ढांचा नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास, विश्वास और सेवा भावना का प्रतीक है। उन्होंने विशेष रूप से सिस्टर फ्लाविया रोड्रिक्स की सराहना की, जिन्होंने निर्माण कार्य के दौरान निरंतर निगरानी, समर्पण और सक्रिय भागीदारी निभाई। उनकी मेहनत और जिम्मेदारी ने इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस अवसर पर भवन के वास्तुकार श्री रमन के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की गई। उनके रचनात्मक डिजाइन और पेशेवर विशेषज्ञता ने भवन को सुंदर एवं उपयोगी स्वरूप प्रदान किया। साथ ही ठेकेदार श्री रंजीत की भी प्रशंसा की गई, जिन्होंने पूरे निर्माण कार्य के दौरान ईमानदारी, सहयोग और अथक परिश्रम के साथ सभी कार्यों का समन्वय किया।

भोजन कक्ष में उपस्थित सभी अतिथियों के बीच निर्माण कार्य से जुड़े बिल्डरों की टीम को सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। कार्यक्रम में उन मजदूरों और श्रमिकों को भी विशेष रूप से याद किया गया, जिनके कठिन परिश्रम और त्याग के बिना इस भवन का निर्माण संभव नहीं हो सकता था। उनके योगदान को सम्मानपूर्वक स्मरण करते हुए सभी ने उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

पूरा समारोह भाईचारे, एकता और सहयोग की भावना से ओत-प्रोत था। यह केवल एक भवन के उद्घाटन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि विश्वास, समर्पण और सामूहिक प्रयास की सफलता का उत्सव था। उपस्थित सभी लोगों ने इस अवसर को ईश्वर की विशेष कृपा का प्रतीक माना।

अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थित सिस्टर्स के साथ सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। प्रेम, आत्मीयता और खुशी से भरे इस मिलन ने पूरे समारोह को और भी यादगार बना दिया। नए बी ब्लॉक का यह उद्घाटन आने वाले समय में सेवा, प्रार्थना और सामुदायिक जीवन के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में सदैव स्मरण किया जाएगा।

आलोक कुमार

Bihar : बिहार के युवाओं के बीच अब एक नई सोच तेजी से उभर रही है

 बिहार में अब नौकरी नहीं, रोजगार देने वाली कंपनियों की जरूरत, युवा भविष्य को लेकर चिंतित

बिहार के युवाओं के बीच अब एक नई सोच तेजी से उभर रही है। लोगों का कहना है कि केवल सरकारी नौकरी मांगने से राज्य का विकास संभव नहीं है, बल्कि बिहार को ऐसी बड़ी कंपनियों और उद्योगों की जरूरत है जो लाखों लोगों को रोजगार दे सकें। आज भी बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। रोजगार की कमी के कारण कई परिवार आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

राज्य के अलग-अलग जिलों से लगातार यह आवाज उठ रही है कि बिहार में उद्योगों का विस्तार होना चाहिए। युवाओं का कहना है कि अगर राज्य में फैक्ट्री, आईटी कंपनी, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और छोटे-बड़े उद्योग लगाए जाएं तो यहां के लोगों को अपने ही राज्य में रोजगार मिल सकता है। इससे पलायन भी कम होगा और बिहार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

आज बिहार का बड़ा युवा वर्ग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों बिता देता है। कई युवा दिन-रात मेहनत करने के बाद भी नौकरी पाने में सफल नहीं हो पाते। इससे मानसिक तनाव और निराशा भी बढ़ रही है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले युवाओं के सामने स्थिति और कठिन है क्योंकि वहां रोजगार के अवसर बहुत कम हैं। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई पर भारी खर्च करते हैं, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद भी नौकरी नहीं मिलने से चिंता बढ़ जाती है।

कई युवाओं का कहना है कि बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है। यहां के छात्र देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर अपनी मेहनत और क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर वही अवसर बिहार में उपलब्ध कराया जाए तो राज्य के युवा अपने घर के पास रहकर भी बेहतर काम कर सकते हैं। इससे परिवार भी मजबूत होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।

व्यापार और उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि बिहार में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। अच्छी सड़क, बिजली, इंटरनेट और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से बड़ी कंपनियां राज्य में आने के लिए तैयार हो सकती हैं। अगर सरकार उद्योग लगाने वालों को सुविधाएं दे तो आने वाले समय में बिहार रोजगार का बड़ा केंद्र बन सकता है।

गांव के लोगों का कहना है कि रोजगार की कमी के कारण बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों में जाकर काम करते हैं। कई लोग परिवार से दूर रहकर मेहनत मजदूरी करने को मजबूर हैं। अगर बिहार में ही रोजगार के अवसर बढ़ें तो लोगों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह से फायदा होगा।

महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि छोटे उद्योग, सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, ऑनलाइन काम और स्वरोजगार योजनाओं को बढ़ावा देकर महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इससे परिवार की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, युवाओं को आधुनिक तकनीक और रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग भी मिलनी चाहिए। अगर राज्य में स्किल सेंटर और टेक्निकल संस्थानों का विस्तार होगा तो युवा निजी कंपनियों में भी आसानी से काम कर सकेंगे।

आज जरूरत इस बात की है कि बिहार में रोजगार को लेकर नई सोच विकसित की जाए। केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय उद्योग, व्यापार और निजी क्षेत्र को भी मजबूत बनाना होगा। जब राज्य में बड़ी कंपनियां आएंगी तो हजारों नहीं बल्कि लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे बिहार का विकास तेज होगा और युवाओं का भविष्य भी सुरक्षित हो सकेगा।

जनता का कहना है कि बिहार में प्रतिभा और मेहनत की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ सही अवसर और रोजगार देने वाली कंपनियों की है। अगर आने वाले वर्षों में उद्योगों का विस्तार होता है तो बिहार देश के विकसित राज्यों की सूची में तेजी से आगे बढ़ सकता

आलोक कुमार

World : इतिहास, संस्कृति और प्रेरणा का विशेष दिवस

जीवन को सार्थक बनाने, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और मानवता की सेवा करने का प्रयास करना चाहिए

समय निरंतर आगे बढ़ता रहता है, लेकिन कैलेंडर की कुछ तिथियाँ अपने भीतर इतिहास, संघर्ष, उपलब्धि और प्रेरणा की अनेक कहानियाँ समेटे रहती हैं। 25 मई भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण तिथि है, जिसने विश्व और भारत के इतिहास में कई उल्लेखनीय घटनाओं को जन्म दिया। यह दिन राजनीतिक परिवर्तन, वैज्ञानिक उपलब्धियों, सांस्कृतिक विकास और सामाजिक चेतना के अनेक अध्यायों का साक्षी रहा है।

25 मई केवल एक साधारण दिन नहीं, बल्कि यह हमें अतीत से सीख लेकर वर्तमान को बेहतर बनाने और भविष्य के लिए प्रेरणा प्राप्त करने का अवसर देता है। इस दिन घटी घटनाएँ हमें यह समझाती हैं कि समाज और राष्ट्र निरंतर परिवर्तनशील होते हैं तथा मानव प्रयास ही प्रगति का आधार बनते हैं।

विश्व इतिहास में 25 मई का महत्व

विश्व इतिहास में 25 मई कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन वर्ष 1963 में अफ्रीकी देशों ने मिलकर “ऑर्गेनाइजेशन ऑफ अफ्रीकन यूनिटी” (OAU) की स्थापना की थी, जिसे आज अफ्रीकी संघ के रूप में जाना जाता है। इसका उद्देश्य अफ्रीकी देशों में एकता, स्वतंत्रता और विकास को बढ़ावा देना था। इस ऐतिहासिक कदम ने उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष कर रहे अनेक देशों को नई शक्ति प्रदान की। इसलिए 25 मई को “अफ्रीका दिवस” के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन विश्व को भाईचारे, सहयोग और सामूहिक विकास का संदेश देता है।

इतिहास में यह दिन वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से भी जुड़ा हुआ है। विभिन्न देशों में इस तिथि पर अनेक महत्वपूर्ण अनुसंधान, आविष्कार और तकनीकी उपलब्धियाँ दर्ज हुईं, जिन्होंने मानव जीवन को सरल और आधुनिक बनाने में योगदान दिया। आधुनिक युग में विज्ञान और तकनीक ने जिस प्रकार दुनिया को बदल दिया है, उसमें ऐसे दिनों की स्मृतियाँ हमें नवाचार के महत्व का एहसास कराती हैं।

भारत के संदर्भ में 25 मई

भारत के इतिहास में भी 25 मई अनेक कारणों से उल्लेखनीय रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश में सामाजिक और राजनीतिक चेतना तेजी से विकसित हो रही थी। अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया। मई का महीना विशेष रूप से संघर्ष और आंदोलन की स्मृतियों से जुड़ा रहा है।

भारत में यह समय शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सुधार आंदोलनों के विकास का भी रहा। देश के विभिन्न हिस्सों में समाज सुधारकों ने जाति, भेदभाव, अशिक्षा और कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई। इन आंदोलनों का प्रभाव आज भी भारतीय समाज में दिखाई देता है। 25 मई हमें उन सभी महापुरुषों और महिलाओं को याद करने का अवसर देता है जिन्होंने समाज को बेहतर दिशा देने के लिए संघर्ष किया।

साहित्य और संस्कृति की दृष्टि से

भारतीय संस्कृति सदैव विविधता और सहिष्णुता की प्रतीक रही है। वर्ष भर आने वाली तिथियाँ केवल ऐतिहासिक घटनाओं की याद नहीं दिलातीं, बल्कि वे सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करती हैं। 25 मई का दिन साहित्य, कला और सामाजिक मूल्यों की दृष्टि से भी प्रेरणादायक माना जा सकता है।

भारतीय साहित्य में समय-समय पर ऐसे लेखकों और कवियों ने जन्म लिया जिन्होंने समाज की वास्तविक समस्याओं को अपनी रचनाओं के माध्यम से सामने रखा। उनकी लेखनी ने जनता को जागरूक किया और सामाजिक परिवर्तन की राह दिखाई। आज डिजिटल युग में भी साहित्य की भूमिका कम नहीं हुई है। बल्कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से विचारों का प्रसार और तेज हुआ है। इसलिए यह दिन हमें सकारात्मक लेखन, सत्य सूचना और सामाजिक जिम्मेदारी की भी याद दिलाता है।

युवा पीढ़ी के लिए संदेश

आज का युवा आधुनिक तकनीक, शिक्षा और अवसरों से जुड़ा हुआ है। लेकिन केवल तकनीकी प्रगति ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का पालन भी आवश्यक है। 25 मई जैसे अवसर हमें यह सोचने का मौका देते हैं कि हम अपने समाज और देश के लिए क्या योगदान दे सकते हैं।

युवाओं को चाहिए कि वे इतिहास से प्रेरणा लें और अपने जीवन में अनुशासन, परिश्रम तथा ईमानदारी को स्थान दें। आज भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। यदि यही युवा शक्ति सही दिशा में कार्य करे तो देश को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।

पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी

मई का महीना प्रकृति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होता है। गर्मी के इस मौसम में जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण सुरक्षा का महत्व और बढ़ जाता है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे।

25 मई का अवसर हमें यह संदेश भी देता है कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। यदि मानव केवल संसाधनों का दोहन करेगा और प्रकृति की उपेक्षा करेगा, तो भविष्य संकट में पड़ सकता है। इसलिए जल बचाना, पेड़ लगाना और प्रदूषण कम करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है।

निष्कर्ष

25 मई इतिहास, प्रेरणा और जागरूकता का प्रतीक दिवस है। यह दिन हमें अतीत की महत्वपूर्ण घटनाओं, महान व्यक्तित्वों और सामाजिक संघर्षों की याद दिलाता है। साथ ही यह वर्तमान में अपनी जिम्मेदारियों को समझने और भविष्य के लिए सकारात्मक संकल्प लेने का अवसर भी प्रदान करता है।

हर दिन की तरह 25 मई भी हमें यह सिखाता है कि समय कभी रुकता नहीं है। इसलिए हमें अपने जीवन को सार्थक बनाने, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और मानवता की सेवा करने का प्रयास करना चाहिए। इतिहास केवल पढ़ने की चीज नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ने का माध्यम है। यही इस विशेष दिवस का सबसे बड़ा संदेश है।

आलोक कुमार