पटना में अतिक्रमण पर चला बुलडोजर, कार शोरूम और सर्विस सेंटर ध्वस्त
पटना नगर निगम द्वारा चलाया गया यह अभियान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों और भवन निर्माण उपविधियों के उल्लंघन के खिलाफ था। निगम अधिकारियों के अनुसार गंगा तट के पास जिन इमारतों का निर्माण किया गया था, वे नियमों के विरुद्ध थीं। पर्यावरणीय मानकों और नदी तट संरक्षण संबंधी कानूनों का पालन नहीं किया गया था। इसी कारण नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
नगर आयुक्त यशपाल मीणा की निगरानी में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अभियान सुबह करीब छह बजे शुरू हुआ और कई घंटों तक चला। कार्रवाई के दौरान निगम के सभी अपर नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त, पाटलिपुत्र, बांकीपुर और पटना सिटी अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहे। किसी प्रकार की अव्यवस्था या विरोध की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से लगभग 100 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी।
ध्वस्तीकरण अभियान में भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। छह जेसीबी, एक पोकलेन मशीन, एक हाइड्रा और एक वाइब्रेटर मशीन की मदद से अवैध निर्माणों को गिराया गया। विशाल भवनों के टूटने के बाद वहां ईंट, सीमेंट, लोहे की सरिया और अन्य निर्माण सामग्री का बड़ा ढेर लग गया। पूरे इलाके में धूल और मलबे का दृश्य दिखाई देता रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मशीनों की सहायता से भूमि को पूरी तरह खाली कराया गया।
इस अभियान की खास बात यह रही कि पूरी कार्रवाई की निगरानी ड्रोन कैमरे से की गई। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, नियमों के विरुद्ध निर्माण और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में भी ऐसे अवैध निर्माणों के खिलाफ नियमित और सख्त अभियान जारी रहेगा।
दरअसल, गंगा तट क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी पहले से चल रही थी। अप्रैल महीने में नगर निगम ने दीघा से बांस घाट तक सीमांकन अभियान चलाया था। नगर निगम मुख्यालय और संबंधित अंचल कार्यालयों की संयुक्त टीम ने गंगा किनारे स्थित भवनों और जमीनों का निरीक्षण किया था। उन निर्माणों को चिन्हित किया गया था जिन पर 2023 में विजिलेंस केस के तहत कार्रवाई के आदेश दिए गए थे।
नगर निगम के अनुसार जिन संपत्तियों पर अवैध निर्माण की शिकायतें थीं, उन्हें पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था। नोटिस के बाद संबंधित भवनों के अवैध हिस्सों का सीमांकन किया गया। कई स्थानों पर पूरी इमारत को अवैध घोषित किया गया, जबकि कुछ जगहों पर केवल कुछ मंजिलों या आंशिक हिस्सों को नियम विरुद्ध पाया गया। कुल 19 संपत्तियों पर विजिलेंस केस चलाया गया था और उनमें कार्रवाई के आदेश पारित किए गए थे। सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया गया है।
गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में निर्माण को लेकर भवन उपविधियों में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। नियमों के अनुसार गंगा नदी की बाहरी सीमा, जिसे सिंचाई विभाग निर्धारित करता है, से 200 मीटर की परिधि के भीतर किसी भी नए भवन के निर्माण या पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि विरासत भवनों की मरम्मत और जीर्णोद्धार को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
इसी प्रकार अन्य नदियों के मामले में नदी की बाहरी सीमा से 100 मीटर की दूरी तक निर्माण पर रोक है। राज्य सरकार आवश्यकता के अनुसार दूरी तय कर सकती है और संबंधित नदियों की सूची अधिसूचित कर सकती है। नदी की वास्तविक सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित माना गया है। इन नियमों का उद्देश्य नदी तटों को सुरक्षित रखना, पर्यावरण संतुलन बनाए रखना और बाढ़ जैसी आपदाओं के जोखिम को कम करना है।
हालांकि भवन उपविधियों में यह भी व्यवस्था है कि योजना प्राधिकरण या सरकारी एजेंसियां सरकार की मंजूरी से नदी तटों, घाटों के विकास और सुंदरीकरण से जुड़े कार्य कर सकती हैं। लेकिन निजी व्यवसायिक निर्माणों को इसके लिए सख्त नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।
पटना नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद शहर में अवैध निर्माणों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर लोग इसे पर्यावरण संरक्षण और सरकारी जमीन बचाने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अचानक हुए ध्वस्तीकरण को लेकर प्रभावित पक्षों में नाराजगी भी देखी जा रही है। लेकिन प्रशासन का कहना है कि नोटिस, सीमांकन और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कार्रवाई की गई है।
कुर्जी क्षेत्र में बुलडोजर चलने के बाद यह साफ संकेत मिल गया है कि गंगा तट और सरकारी जमीनों पर अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ अब प्रशासन सख्त रुख अपनाने जा रहा है। आने वाले समय में दीघा से बांस घाट तक अन्य चिन्हित अवैध संरचनाओं पर भी कार्रवाई तेज होने की संभावना है।
आलोक कुमार