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West Bengal: “29 वर्षों बाद भाजपा सत्ता में”

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पश्चिम बंगाल की राजनीति पिछले तीन दशकों में जिस तरह बदली है, उसमें ममता बनर्जी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। 1990 के दशक के अंत में जब उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी बनाने का फैसला लिया, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह कदम राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल देगा। 1997 में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की स्थापना ममता बनर्जी ने मुकुल रॉय के साथ मिलकर की। उस समय पश्चिम बंगाल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा मजबूत स्थिति में था और लगातार चुनाव जीत रहा था। टीएमसी के गठन का उद्देश्य टीएमसी के गठन के पीछे मुख्य उद्देश्य था वामपंथी दलों—खासतौर पर CPM—की लंबे समय से चली आ रही सत्ता को चुनौती देना। साथ ही कांग्रेस, जो कभी राज्य की प्रमुख पार्टी हुआ करती थी, वह भी कमजोर हो चुकी थी। ममता बनर्जी ने खुद को एक आक्रामक और जनसंवादी नेता के रूप में प्रस्तुत किया, जो आम जनता के मुद्दों को सीधे उठाती थीं। भाजपा के साथ शुरुआती संबंध                                  ...

Kurji: मौसम की कठोरता को भी मानवीय भावनाओं के सामने छोटा कर दिया।

                           ईसाई समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई राजधानी पटना में 4 मई का दिन एक ओर मौसम की उथल-पुथल और दूसरी ओर गहरे मानवीय संवेदनाओं का साक्षी बना। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही दिन में तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताते हुए अलर्ट जारी कर दिया था। लोगों को घरों में सुरक्षित रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई थी। लेकिन इसी चेतावनी के बीच शहर में एक ऐसी घटना घटी, जिसने मौसम की कठोरता को भी मानवीय भावनाओं के सामने छोटा कर दिया। संत विंसेंट डी पॉल समाज से जुड़े कुर्जी कॉन्फ्रेंस के सक्रिय अध्यक्ष और पटना सेंट्रल काउंसिल के अध्यक्ष रहे भाई जोसेफ फ्रांसिस का निधन हो गया था। उनके निधन की खबर से ईसाई समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। समाजसेवा और धार्मिक जीवन के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें एक सम्मानित व्यक्तित्व बना दिया था। उनके अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े, जिन्होंने मौसम की चेतावनियों के बावजूद अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। भाई...

Bihar: साल 2005 का बिहार विधानसभा चुनाव राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़

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           ऐसे माहौल में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जनता दल (यूनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी (एनडीए गठबंधन) ने चुनावी मैदान में कदम रखा और एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत की साल 2005 का बिहार विधानसभा चुनाव राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया। यह वही दौर था जब लंबे समय से चल रही राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों से जनता परेशान हो चुकी थी। ऐसे माहौल में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जनता दल (यूनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी (एनडीए गठबंधन) ने चुनावी मैदान में कदम रखा और एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत की। फरवरी 2005 में हुए पहले चरण के चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका। राष्ट्रीय जनता दल, जिसका नेतृत्व लालू प्रसाद यादव कर रहे थे, वह भी बहुमत से दूर रह गई। परिणामस्वरूप बिहार में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बनी रही और सरकार गठन संभव नहीं हो पाया। इस स्थिति ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की नौबत ला दी। जनता के बीच यह स्पष्ट हो गया कि एक मजबूत और स्थिर सरकार की आवश्यकता है, जो राज्य को विकास के रास्ते पर ले जा सक...

Iindia: 5 मई को अंतरराष्ट्रीय दाई दिवस मनाया जाता

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            हमें यह भी याद दिलाता है कि सुरक्षित मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की कितनी आवश्यकता है 5 मई का दिन इतिहास, समाज और वैश्विक जागरूकता के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन दुनिया भर में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ घटी हैं, साथ ही कुछ विशेष दिवस भी मनाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और मानव जीवन को बेहतर बनाना है। आइए 5 मई के दिन के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हैं। सबसे पहले, 5 मई को हर साल International Midwives Day यानी अंतरराष्ट्रीय दाई दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दाइयों (मिडवाइफ) के योगदान को सम्मान देना है, जो गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल में अहम भूमिका निभाती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में दाइयों का योगदान विशेष रूप से ग्रामीण और विकासशील क्षेत्रों में बहुत महत्वपूर्ण होता है, जहां डॉक्टरों की कमी होती है। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि सुरक्षित मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की कितनी आवश्यकता है। इसके अलावा, कई वर्षों में 5...

India: सोना-चांदी के दाम: 4 मई 2026 का ताजा भाव

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                        निवेशकों के रुझान के चलते कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है सोना और चांदी भारतीय बाजार में हमेशा से निवेश और परंपरा का मजबूत आधार रहे हैं। 4 मई 2026 को इन दोनों की कीमतों में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की मजबूती, और निवेशकों के रुझान के चलते कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में अगर आप निवेश करने या खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो ताजा भाव जानना बेहद जरूरी है। आज का ताजा भाव (4 मई 2026) राजधानी दिल्ली में आज सोने की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 24 कैरेट सोना: लगभग ₹72,000 प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोना: लगभग ₹66,000 प्रति 10 ग्राम वहीं, चांदी की कीमत में भी बदलाव देखने को मिला है: चांदी (Silver): लगभग ₹85,000 प्रति किलोग्राम मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी कीमतें लगभग इसी स्तर पर बनी हुई हैं, हालांकि स्थानीय टैक्स और मांग के कारण मामूली अंतर हो सकता है। कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह सोना और चांदी के दाम कई घरेलू और अंतरराष...

Bihar: तेज आंधी और बारिश की संभावना

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चेतावनी के बाद प्रशासन भी सतर्क हो गया   बिहार में एक बार फिर मौसम ने अचानक करवट ले ली है, जिससे आम जनजीवन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 4 और 5 मई के लिए राज्य के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और वज्रपात (बिजली गिरने) का अलर्ट जारी किया है। इस चेतावनी के बाद प्रशासन भी सतर्क हो गया है और लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और दरभंगा समेत कई जिलों में तेज हवा के साथ मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है, जो पेड़ों और कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा, आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं, जो ग्रामीण और खुले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। इस मौसम परिवर्तन का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव माना जा रहा है। इन दोनों कारकों के मिलन से वातावरण में अस्थिरता बढ़ गई है, जिससे आंधी और बारिश की स्थिति बन रही है। विशेषज्ञों का कहन...

Nepal: कई घरों और इमारतों के साथ एक चर्च को भी गिरा दिया

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                                       सख्त प्रशासनिक शैली और अतिक्रमण के खिलाफ तेज कार्रवाई नेपाल की राजनीति में हाल के दिनों में जिस नाम ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं, वह हैं बालेन शाह। अपनी सख्त प्रशासनिक शैली और अतिक्रमण के खिलाफ तेज कार्रवाई के कारण वे पहले ही चर्चा में थे, लेकिन अब एक नए विवाद ने उनकी छवि और सरकार दोनों को कठिन स्थिति में ला खड़ा किया है। यह विवाद भक्तपुर क्षेत्र की मनोहरा बस्ती में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान से जुड़ा है, जहां कई घरों और इमारतों के साथ एक चर्च को भी गिरा दिया गया। अतिक्रमण हटाओ अभियान और विवाद की शुरुआत नेपाल सरकार द्वारा हाल ही में अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना था। इसी क्रम में मनोहरा बस्ती में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कई संरचनाओं को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का दावा है कि ये सभी निर्माण बिना कानूनी अनुमति के किए गए थे और सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाए...