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शनिवार, 6 जून 2026

Bihar : जब सत्ता में बैठे लोग शिक्षा की बात करें-----

 गणित की यूनिवर्सिटी, इतिहास की राजनीति और बिहार का शिक्षा संकट: बयान से उठे बड़े सवाल

"जब सत्ता में बैठे लोग शिक्षा की बात करें, तो उम्मीद होती है कि वे भविष्य का रास्ता दिखाएंगे। लेकिन जब शिक्षा पर दिया गया बयान ही बहस और विवाद का विषय बन जाए, तो सवाल सिर्फ बयान का नहीं, बल्कि सोच और तैयारी का भी बन जाता है।"

बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बिहार में भविष्य में फिजिक्स, मैथमेटिक्स, केमिस्ट्री और आर्किटेक्चर जैसे विषयों के विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। उनका उद्देश्य शायद बिहार को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का था, लेकिन बयान के शब्दों ने राजनीतिक विरोधियों को हमला करने का मौका दे दिया।

सोशल मीडिया पर इस बयान के बाद तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने मुख्यमंत्री की अकादमिक समझ पर सवाल उठाए, जबकि विपक्ष ने इसे बिहार के नेतृत्व की "शिक्षा संबंधी जानकारी की कमी" का उदाहरण बताया। कुछ पोस्टों में तो यहां तक लिखा गया कि "बिहार का दुर्भाग्य है कि यहां मुख्यमंत्री नहीं बल्कि मूर्ख मंत्री शासन कर रहे हैं।"

हालांकि लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सबको है, लेकिन किसी भी राजनीतिक बहस को तथ्यों और तर्कों के आधार पर देखना अधिक उचित होता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि बिहार ज्ञान की भूमि है, लेकिन यहां गणित का विश्वविद्यालय नहीं है। उन्होंने ओडिशा और अहमदाबाद जैसे स्थानों का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में भी विशिष्ट विषयों पर आधारित संस्थानों की स्थापना की जाएगी। उनके बयान का मूल उद्देश्य राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार की घोषणा करना था।

लेकिन विपक्षी नेताओं और शिक्षा विशेषज्ञों ने इस पर आपत्ति जताई। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि दुनिया में कहीं भी "फिजिक्स यूनिवर्सिटी" या "केमिस्ट्री यूनिवर्सिटी" जैसी अवधारणा सामान्य रूप से नहीं होती। विश्वविद्यालयों में इन विषयों के विभाग होते हैं, स्वतंत्र विश्वविद्यालय नहीं। इसी तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिकांश विश्वविद्यालय बहुविषयक (Multidisciplinary) होते हैं, जिनमें विज्ञान, कला, वाणिज्य और तकनीकी विषयों के अलग-अलग संकाय संचालित होते हैं।

तेजस्वी यादव और आरजेडी के समर्थकों ने भी इस बयान को मुद्दा बनाया। उनका कहना है कि बिहार की वास्तविक समस्या विश्वविद्यालयों की संख्या नहीं, बल्कि मौजूदा संस्थानों की खराब स्थिति है। राज्य के कई विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं, परीक्षा सत्र नियमित नहीं हैं और शोध गतिविधियां अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच पाई हैं।

दरअसल, विवाद का केंद्र यह नहीं है कि बिहार में नए संस्थान बनने चाहिए या नहीं। लगभग हर व्यक्ति इस बात से सहमत होगा कि राज्य को अधिक गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की आवश्यकता है। विवाद इस बात को लेकर है कि क्या विषयों के नाम पर अलग-अलग विश्वविद्यालय स्थापित करने की अवधारणा व्यावहारिक है और क्या सरकार के पास इसके लिए कोई स्पष्ट खाका मौजूद है।

बिहार ऐतिहासिक रूप से शिक्षा का केंद्र रहा है। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों ने दुनिया भर के विद्यार्थियों को आकर्षित किया था। आज भी राज्य में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली छात्र हैं, लेकिन उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसरों के लिए उन्हें दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद या विदेशों का रुख करना पड़ता है। यह स्थिति बताती है कि समस्या केवल संस्थानों की संख्या नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता और संसाधनों की भी है।

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह विवाद केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। बिहार में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच हर बयान राजनीतिक हथियार बनता जा रहा है। विपक्ष मुख्यमंत्री के बयान को उनकी योग्यता पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे विकास के विजन के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। सोशल मीडिया ने इस बहस को और तेज कर दिया है, जहां तथ्य और व्यंग्य अक्सर एक-दूसरे में घुल-मिल जाते हैं।

एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी है कि क्या जनता केवल शब्दों की गलती पर ध्यान दे या फिर उस बड़े उद्देश्य पर भी विचार करे जिसके तहत नए संस्थानों की बात कही गई है। यदि सरकार वास्तव में विज्ञान, गणित, वास्तुकला और शोध के लिए विशेष केंद्र स्थापित करना चाहती है, तो यह स्वागत योग्य पहल हो सकती है। दुनिया के कई देशों में विशिष्ट शोध संस्थान और केंद्र मौजूद हैं जो किसी खास विषय में विशेषज्ञता विकसित करते हैं। हालांकि उन्हें विश्वविद्यालय कहना या न कहना अलग बहस का विषय हो सकता है।

दूसरी ओर, विपक्ष का यह तर्क भी महत्वपूर्ण है कि बिहार को सबसे पहले अपने मौजूदा शिक्षा ढांचे को मजबूत करना चाहिए। अगर विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी रहे, शोध के लिए पर्याप्त संसाधन न हों और छात्र बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहें, तो नए संस्थानों की घोषणा केवल राजनीतिक नारा बनकर रह सकती है।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। यह बहस किसी एक नेता या दल तक सीमित नहीं है। असली मुद्दा यह है कि क्या बिहार आने वाले वर्षों में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में फिर से अपनी ऐतिहासिक पहचान हासिल कर पाएगा।

अंततः, किसी भी राजनीतिक बयान का मूल्यांकन केवल उसके शब्दों से नहीं बल्कि उसके पीछे की नीयत और उसके बाद होने वाले कार्यों से किया जाना चाहिए। जनता को भी यह देखना होगा कि विवादों और कटाक्षों के बीच शिक्षा सुधार की वास्तविक दिशा क्या है। क्योंकि बिहार को आज सोशल मीडिया की ट्रेंडिंग बहसों से अधिक जरूरत बेहतर स्कूलों, मजबूत विश्वविद्यालयों, सक्षम शिक्षकों और शोध आधारित शिक्षा व्यवस्था की है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो इतिहास यह नहीं पूछेगा कि बयान में कौन-सा शब्द गलत था; वह यह देखेगा कि शिक्षा के क्षेत्र में वास्तव में कितना परिवर्तन हुआ।

आलोक कुमार

बुधवार, 25 मार्च 2026

टेस्ट क्रिकेट की 150वीं वर्षगांठ

टेस्ट क्रिकेट की 150वीं वर्षगांठ

रिपोर्टः आलोक कुमार


टेस्ट क्रिकेट, जिसे खेल की आत्मा कहा जाता है, 2027 में अपने इतिहास के एक असाधारण पड़ाव पर पहुंचने जा रहा है। Cricket Australia ने इस ऐतिहासिक अवसर—टेस्ट क्रिकेट की 150वीं वर्षगांठ—को भव्य और यादगार बनाने का निर्णय लिया है। यह केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि क्रिकेट की परंपरा, संघर्ष, कौशल और विरासत का उत्सव होगा, जो अतीत, वर्तमान और भविष्य को एक सूत्र में जोड़ता है।


टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत 15 मार्च 1877 को Melbourne Cricket Ground में हुई थी, जब Australia national cricket team और England national cricket team के बीच पहला टेस्ट मैच खेला गया। इस ऐतिहासिक मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने 45 रनों से जीत दर्ज की थी। इसी मैच में Charles Bannerman ने टेस्ट क्रिकेट का पहला शतक लगाया—एक उपलब्धि जो आज भी इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है। 

इस गौरवपूर्ण यात्रा के 150 वर्ष पूरे होने पर, 11 से 15 मार्च 2027 के बीच एमसीजी में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एक विशेष टेस्ट मैच खेला जाएगा। यह मुकाबला कई मायनों में अनूठा होगा, क्योंकि यह पुरुष टीमों के बीच एमसीजी पर खेला जाने वाला पहला डे-नाइट टेस्ट होगा, जिसमें पिंक बॉल का इस्तेमाल किया जाएगा। यह आयोजन 1977 में खेले गए प्रसिद्ध Centenary Test की यादों को भी ताजा करेगा, जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को ठीक 45 रनों से हराया था—एक ऐसा ऐतिहासिक संयोग, जिसने क्रिकेट प्रेमियों को आज भी रोमांचित कर रखा है।


शनिवार, 14 मार्च 2026

“आयुष्मान भारत योजना का लाभ कैसे लें

 


आयुष्मान भारत योजना का लाभ कैसे लें – पूरी जानकारी”

Narendra Modi द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है। इस योजना का उद्देश्य गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। आज भी देश में लाखों ऐसे परिवार हैं जो गंभीर बीमारी के इलाज का खर्च नहीं उठा पाते। ऐसे लोगों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए यह योजना शुरू की गई।

इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जाता है। यह इलाज सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कराया जा सकता है। आयुष्मान भारत योजना को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के नाम से भी जाना जाता है।

आयुष्मान भारत योजना क्या है?

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाता है। इस योजना में इलाज का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

इस योजना के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना

  • स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना

  • इलाज के खर्च से आर्थिक बोझ कम करना

  • गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद करना

इस योजना का लाभ पूरे भारत में लाखों परिवारों को मिल रहा है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाले लाभ

इस योजना के तहत पात्र परिवारों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं दी जाती हैं।

1. 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज

प्रत्येक पात्र परिवार को हर साल 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है।

2. सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज

इस योजना के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज कराया जा सकता है।

3. कई गंभीर बीमारियों का इलाज

इस योजना में कैंसर, हार्ट सर्जरी, किडनी रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का इलाज शामिल है।

4. कैशलेस इलाज

इस योजना की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि मरीज को अस्पताल में पैसे देने की जरूरत नहीं होती। इलाज कैशलेस होता है।

5. पूरे भारत में मान्य

आयुष्मान भारत कार्ड के जरिए देश के किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज कराया जा सकता है।

आयुष्मान भारत योजना के लिए कौन पात्र है?

इस योजना का लाभ मुख्य रूप से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को दिया जाता है। पात्रता का निर्धारण सामाजिक आर्थिक जनगणना (SECC) 2011 के आधार पर किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र लोग:

  • कच्चे घर में रहने वाले परिवार

  • भूमिहीन मजदूर

  • आर्थिक रूप से कमजोर परिवार

  • अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवार

शहरी क्षेत्रों में पात्र लोग:

  • मजदूर

  • रिक्शा चालक

  • घरेलू कामगार

  • निर्माण मजदूर

यदि आपका नाम पात्र सूची में है तो आप इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

आयुष्मान भारत योजना का लाभ कैसे लें?

इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ आसान प्रक्रियाएं हैं।

1. पात्रता जांचें

सबसे पहले यह जांचना जरूरी है कि आपका नाम इस योजना की सूची में है या नहीं।

आप इसे ऑनलाइन या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर जांच सकते हैं।

2. आयुष्मान कार्ड बनवाएं

यदि आप पात्र हैं तो आपको आयुष्मान कार्ड बनवाना होगा। यह कार्ड ही इलाज के समय उपयोग किया जाता है।

3. अस्पताल में कार्ड दिखाएं

इलाज के समय अस्पताल में अपना आयुष्मान कार्ड दिखाना होता है।

4. कैशलेस इलाज प्राप्त करें

कार्ड सत्यापन के बाद मरीज को बिना किसी भुगतान के इलाज की सुविधा मिलती है।

आयुष्मान कार्ड कैसे बनवाएं?

आयुष्मान कार्ड बनवाने की प्रक्रिया बहुत आसान है।

आप निम्न स्थानों पर जाकर कार्ड बनवा सकते हैं:

  • कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)

  • सरकारी अस्पताल

  • आयुष्मान मित्र हेल्प डेस्क

कार्ड बनवाने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की जरूरत होती है।

आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए जरूरी दस्तावेज

कार्ड बनवाने के लिए आमतौर पर ये दस्तावेज मांगे जाते हैं:

  • आधार कार्ड

  • राशन कार्ड

  • मोबाइल नंबर

  • पहचान पत्र

इन दस्तावेजों के आधार पर आपका आयुष्मान कार्ड बनाया जाता है।

आयुष्मान भारत योजना में कौन-कौन से इलाज शामिल हैं?

इस योजना में कई प्रकार के इलाज शामिल किए गए हैं, जैसे:

  • हार्ट सर्जरी

  • किडनी ट्रांसप्लांट

  • कैंसर का इलाज

  • न्यूरोलॉजी से जुड़ी बीमारियां

  • दुर्घटना से जुड़े इलाज

इसके अलावा कई प्रकार की सर्जरी और मेडिकल प्रक्रियाएं भी इस योजना में शामिल हैं।

आयुष्मान भारत योजना की खास बातें

इस योजना की कुछ विशेषताएं इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती हैं।

  • गरीब परिवारों के लिए मुफ्त इलाज

  • पूरे देश में लागू

  • सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज

  • कैशलेस सुविधा

  • बड़ी बीमारियों का कवर

इन सुविधाओं के कारण यह योजना लाखों लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है।

आयुष्मान भारत योजना का समाज पर प्रभाव

इस योजना के कारण कई गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली है। पहले जहां इलाज के खर्च के कारण लोग कर्ज में डूब जाते थे, वहीं अब उन्हें मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।

इस योजना के कारण:

  • गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं

  • गंभीर बीमारियों का इलाज संभव हो रहा है

  • स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार हो रहा है

यह योजना भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आई है।

निष्कर्ष

आयुष्मान भारत योजना आज भारत की सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं में से एक बन चुकी है। यह योजना गरीब और जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करती है।

यदि आप इस योजना के पात्र हैं, तो आपको इसका लाभ जरूर लेना चाहिए। इससे न केवल आपको बेहतर इलाज मिलेगा बल्कि गंभीर बीमारी के समय आर्थिक बोझ भी कम होगा।

स्वास्थ्य हर व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, और आयुष्मान भारत योजना इस दिशा में एक बड़ा कदम है।

आलोक कुमार

शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

हिलकर -डूलकर चलती हैं राजमंति कुमारी को इलाज की जरूरत

पटना। बिन्द टोली में हिलती-डूलती चलती हैं राजमंति कुमारी। अभी वह तेरह साल की हैं। जब चार साल की थीं तो शरीर से धात गिरने लगा। इसके बाद माहवारी होने लगा। अभी भी माहवारी की दौर से गुजरती हैं। इसके कारण काफी कमजोर हो गयी हैं। वह हिलती-डूलती चलती है। राजमंति कुमारी की दीदी आशा देवी कहती हैं कि स्नायु में खराबी जाने के कारण शरीर हिलता है। दीघा अल्पना सिनेमा हॉल के सामने डाक्टर विनय कुमार सिंह से दिखाया गया। दवा-दारू चला और अब राशि नहीं रहने के कारण इलाज नहीं करा पा रहे हैं।

गरीबी के दलदल में राजमंति कुमारी के परिवार हैं। दीघा बिन्द टोली के झुग्गी -झोपड़ी में रहते हैं अदिया महतो और परमशीला देवी। इनके पांच संतान हैं, चार लड़की और एक लड़का। सबसे छोटी लड़की राजमंति कुमारी हैं। इस बीच अदिया महतो की मौत हो गयी। विधवा परमशीला देवी को पेंशन मिलती है। राजमंति कुमारी को भी पेंशन मिलने की संभावना है। कुछ रकम संग्रह करने के बाद चिकित्सक से दिखाने का प्रस्ताव है। शास्त्री नगर में स्थित जयप्रकाश हड्डी रोग हॉस्पिटल में स्नायु रोग विशेषज्ञ से दिखाया जाएगा।
आलोक कुमार


मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

राष्ट्रीय महिला बैठक में बिहार से चार नेत्री शिरकत करेंगी


पटना। राष्ट्रीय महिला बैठक में एक साथ एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही.राजगोपाल, एकता परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रनसिंह परमार, एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी और राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य रमेश शर्मा नजर आएंगे। राष्ट्रीय महिला बैठक में शामिल होने बिहार से मंजू डूंगडूंग, सिंधु सिन्हा, देवन्ती देवी और मीना देवी जा रही हैं। बिहार की सभी नेत्री 26 अप्रैल की शाम अथवा 27 अप्रैल की सुबह रिसोर्स सेंटर, ग्वालियर, मध्यप्रदेश में प्रवेश कर जाएंगी। 27 से 29 अप्रैल तक राष्ट्रीय बैठक की जाएगी।
विख्यात गांधीवादी और एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही.राजगोपाल के द्वारा मूल रूप से अहिंसात्मक आंदोलन पर ध्यान केन्द्रित कर प्रशिक्षण देंगे। अंहिसात्मक आंदोलन क्या है। यह क्यों जरूरी है। कहां से शुरू और कहां पर अंत किया जा सकता है। यह अंहिसात्मक आंदोलन किसके लिए किया जाएगा। इसके बाद स्वयं के जीवन एवं सामाजिक जीवन में अहिंसा का महत्व क्या है? इसके पहले 27 अप्रैल को आगत अतिथियों का स्वागत पुष्पा सिंह करेंगी और बैठक का उद्देश्य श्रद्धा कश्यप पेश करेंगी।
राष्ट्रीय महिला बैठक के दूसरे दिन 28 अप्रैल को राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य रमेश शर्मा के द्वारा एकता परिषद रजत जयंती वर्ष में महिलाओं की भूमिका एवं कार्यक्रमों पर फोकस डालेंगे। उसके बाद वनाधिकार अधिनियम 2006 एवं भूमि मुद्दे पर चर्चा करेंगे। एकता परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रनसिंह परमार सक्रिय एवं द्वितीय स्तर के लीडरषीप को तैयार करने की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। राष्ट्रीय महिला बैठक के तीसरे दिन 29 अप्रैल को एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी एकता परिषद के संगठनात्मक कार्यों में आने वाली समस्याएं,उनके समाधान और विकल्पों पर चर्चा करेंगे।
बिहार से राष्ट्रीय महिला बैठक में शामिल होने जा रही मंजू डूंगडूंग ने कहा कि  एकता महिला मंच का पुर्नगठन एवं भावी स्वरूप, जन संगठन का भावी स्वरूप, ग्राम वापसी अभियान एवं महिला आर्थिक समूह को सशक्त बनाने पर चर्चा होगी। इसके अलावे 5 वर्षों की क्रमबद्ध योजना बनायी जाएगी। इसके आलोक में अन्तरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन की तैयारियों पर भी चर्चा की जाएगी।

आलोक कुमार