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शुक्रवार, 21 अगस्त 2015

इसे विपक्षी के द्वारा चुनावी रसगुल्ला परोसना करार दिया

बिहार के 21 जिलों को पिछड़े इलाके के रूप में अधिसूचित किया

पटना। पी.एम.नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को विशेष पैकेज के रूप में एक लाख करोड़ का तोहफा दिया। वहीं बुधवार को केन्द्र सरकार ने बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से राज्य के 21 जिलों को पिछडे इलाके के रूप में अधिसूचित किया है जिससे उन क्षेत्रों में विनिर्माण इकाई या उद्योग लगाने पर कर में 35 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। बिहार की दशा और दिशा में तरक्की लाने के क्रम में केन्द्र सरकार के द्वारा सुविधाओं को पहुंचायी जा रही है। इसे विपक्षी के द्वारा चुनावी रसगुल्ला परोसना करार दिया है। इन नेताओं का कहना है कि अगर एन.डी.ए. सरकार बिहार की तरक्की के प्रति कटिबद्ध है। तो सत्तासीन होने के 2014 के कुछ माह के अंदर लागू कर दिया जाता। इससे बिहारियों को अधिक फायदा हो जाता।

वित्त मंत्रालय ने आज यहां बताया कि वित्त  अधिनियम 2015 के जरिए आयकर अधिनियम 1961 को संशेाधित कर बिहार के लिए ये प्रावधान किये गये हैं। राज्य के उन 21 जिलो में 01 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2020 के दौरान जो भी विनिर्माण इकाई या उद्यम लगाए जाएंगे उन्हें आयकर अधिनियम की धारा 32 (1) (आईआईए) के तहत 15 प्रतिशत अतिरिक्त  मूल्य ह्रास और धारा 32 ए डी के तहत 15 प्रतिशत निवेश भत्ता मिलेगा। यह लाभ आवश्यक मशीनों को लगाने और संयंत्र की लागत पर दिया जाएगा। ये सारे प्रोत्साहन आयकर अधिनियम के अंतर्गत उपलब्ध अन्य कर लाभों के अतिरिक्त हैं।

इस तरह निर्धारित अवधि के अंतर्गत इन क्षेत्रों में जो भी निर्माण इकाईयां और उद्योग लगाए जाएंगे उन्हें  20 प्रतिशत के स्थान पर 35 प्रतिशत का अतिरिक्त  मूल्यो ह्रास प्रदान किया जाएगा। यह 15 प्रतिशत के सामान्य मूल्य ह्रास से अधिक है। इसके अलावा जो कम्पनी 25 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से विनिर्माण उद्यम लगायेगी उसे भी 01 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2017 के दौरान नये संयंत्र और मशीनरी के लिए निवेश पर 15 प्रतिशत के स्थान पर 30 प्रतिशत का निवेश भत्ता मिलेगा।

वित्त अधिनियम, 2015 के जरिए आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों में संशोधन किया गया है, ताकि बिहार सहित चिन्हित राज्यों में अधिसूचित पिछड़े इलाकों को कर लाभ प्राप्त हो सके और उनके विकास में गति आ सके। संशोधन के अनुरूप बिहार के 21 जिलों को पिछड़े इलाके के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिनमें पटना, नालंदा, भोजपुर, रोहतास, कैमूर, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, नवादा, वैशाली, शिवहर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, जमुई, लखीसराय, सुपौल और मुजफ्फरपुर शामिल है।


आलोक कुमार

शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

इंडिया ए ने ऑस्ट्रेलिया ए को 4 विकेटों से पराजित किया

इंडिया ए ने ऑस्ट्रेलिया ए को 4 विकेटों से पराजित किया
ट्राई सीरिज में ऑस्ट्रलिया ए ने दो बार इंडिया ए को पराजित किया
इंडिया ए ने साउथ अफ्रीका ए को दो बार पराजित कर फाइनल में पहुंचा

आलोक कुमार

शनिवार, 22 नवंबर 2014

स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह ने कहा कि एक और मौका देंगे

पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की नर्सेंस हड़ताल पर

पी.एम.सी.एच. में तीसरे दिन और ए.एन.एम.सी.एच.में दूसरे दिन
भी जारी

पटना/गया। स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह ने कहा कि पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पी.एम.सी.एच.और अनुग्रह नारायण मगध मेडिलक कॉलेजए.एन.एम.सी.एच.’,गया में संविदा पर बहाल नियुक्ति को स्थायीकरण की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। ढाई से तीन सौ की संख्या में नर्सेंस हड़ताल पर हैं। इसका असर अस्पताल पर नहीं पड़ रहा है। अभी घर जा रहा हूं। 24 नवम्बर को पटना लौटेंगे। स्वास्थ्य मंत्री को घर प्यारा है। हमेशा घर की ओर जाते अथवा रहते हैं।

मुख्यालय पटना में आवास देने के बाद भी सासाराम स्थित घर में ही रहना पसंद करते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि संविदा पर नर्सेंस आठ साल से काम कर रही हूं। उम्र 40-45 पार कर चुकी हैं। इसके आलोक में चिन्तित हूं। 12 सितम्बर को हड़ताल पर बैठी थीं। राज्य में जीएनएम 6758 को संविदा पर बहाल हैं। इन लोगों की परीक्षा ली गयी। राज्य कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा सवाल तय किया गया। जो नर्सेंस सेवारत हैं। इनके कार्यकाल के ही आठ साल को ही लेकर परीक्षा ली गयी। इसमें कुछ नर्सेंस फेल हो गयी हैं। ऐसे लोगों को परीक्षा में शामिल होने का मौका देंगे।किसी तरह से नर्सेंस पास हो जाए।

पी.एम.सी.एच.में संविदा पर 1000 नर्सेंस कार्यरत हैं। इसमें 347 स्थायी हैं। संविदा में 653 नर्सेंस हैं। सूबे के 6758 नर्सेंस परीक्षा दी थीं। इसमें से पी.एम.सी.एच. की 65 नर्सेंस फेल कर गयी। ए.एन.एम.सी.एच.में 170 है। जहां 35 फेल हैं। बिहार ग्रेड नर्सेंस एसोसिएशन के बैनर तले 20 नवम्बर से हड़ताल शुरू कर दी गयी। इसके अगले दिन 21 नवम्बर से गया में भी हड़ताल शुरू कर दी गयी। पटना और गया में हड़ताल जारी है। इस संदर्भ में बिहार ग्रेड नर्सेंस एसोसिएशन एवं बिहार अनुबंध परिचारिका संद्य की महामंत्री विथीका विश्वास का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह और प्रधान सचिव दीपक कुमार ने 12 सितम्बर से जारी हड़ताल के समय कहा कि इंटरव्यू लिया जाएगा। कागजात को देकर नौकरी स्थायी कर दी जाएगी। वादा तोड़कर परीक्षा ली गयी। इसमें नर्सेंस को फेल करार दिया जा रहा है। इसके खिलाफ हड़ताल पर हैं। स्थायी नर्सेंस का भी हड़ताल को समर्थन प्राप्त है। हमलोगों के समर्थन में हड़लाली स्थ्ल पर आकर बैठती हैं और नारा बुलंद करती हैं।

इसी तरह संविदा में बहाल ए.एन.एम.नर्सेंस की भी है। कई बार नौकरी स्थायीकरण करने की मांग को लेकर आंदोलन कर चुकी हैं। इनको भी प्रधान सचिव दीपक कुमार के द्वारा आश्वासन दिया गया है कि जीएनएम नर्सेंस की नौकरी स्थायीकरण करने के बाद ए.एन.एम. को भी विधिवत प्रक्रिया अपनाकर नौकरी स्थायी कर दी जाएगी।


आलोक कुमार

गुरुवार, 10 जुलाई 2014

विख्यात गांधीवादी नेता को देश-विदेश-प्रदेश में सत्य अहिंसा का पाठ पढ़ाने के लिए शांति पुरस्कार नहीं मिल सकता?



पटना। क्या केन्द्र सरकार भी विख्यात गांधीवादी नेता पी.व्ही.राजगोपाल को शांति पुरस्कार से विभूषित करने जा रही है। अगर ‘हां’ तो केन्द्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिए। आप लोगों ने सही व्यक्ति का चयन किया है। जो सदैव देश-विदेश-प्रदेश में भ्रमण करके सत्य अहिंसा का पाठ पढ़ाया है। अभी जश्न आजादी का समय भी आने वाला है।

खैर, अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने वर्ष 2013 के लिए अनुव्रत अहिंसा अंतरर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार के लिए एकता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष और विख्यात गांधीवादी विचारक एवं अहिंसात्मक संघर्षकर्ता पी.व्ही.राजगोपाल जी को सम्मानित करने के लिए चयन किया है।
ब्ताते चले कि अहिंसा के क्षेत्र में अपनी लेखनी, भाषणों एवं अहिंसक गतिविधियों द्वारा सामाजिक सौष्ठम एवं अहिंसक समाज के निर्माण में विशिष्ट योगदान देने वाले किसी एक व्यक्ति को  अनुविभा प्रतिवर्ष यह पुरस्कार प्रदान करती है। पुरस्कार में एक लाख की राशि , प्रशस्ति पत्र तथा स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है। वर्ष 2009 तक इस पुरस्कार को केवल तीन व्यक्तियों को ही नवाजा गया है। वर्ष 2010 से यह पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है। वर्ष 2013 का  अणुव्रत अहिंसा अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार एकता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष पी.व्ही.राजगोपाल को प्रदान किया जा रहा है।

आखिर क्यों चयन किया गया पी.व्ही. राजगोपाल कोः एकता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष पी.व्ही.राजगोपाल जी हैं। कुछेक लोगों में एक है जिनकी प्रेरणा से चम्बल घाटी के 500 डाकूओं ने शस्त्रों सहित समर्पण किया। सन् 1999-2000 से वे विभिन्न राज्यों में लम्बे कूच आयोजित करते रहे हैं। सन् 2007 में 25 हजार और सन् 2012 में उनके नेतृत्व में भूमि एवं आजीविका संसाधनों पर नियंत्रण की मांग को लेकर एक लाख लोगों ने दिल्ली की ओर कूच किया। देश-प्रदेश के सुदूर गांवों के लोगों के बीच में पहचान कायम करने में सफल हो चुके हैं। ये किसी की पहचान करवाने के मोहताज नहीं है। जल,जंगल,जमीन की जंग लड़ने वाले के रूप में प्रचलित हैं। भूमिहीन एवं गरीबों के मसीहा के रूप में भी राजगोपाल जी पहचाने जाते हैं। आज कई देशों में भी राजगोपाल जी उर्फ राजा जी के प्रशंसक फैले हुए हैं।

13 जुलाई को पुरस्कार वितरण समारोहः वर्ष 2013 का  अणुव्रत अहिंसा अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार का वितरण 13 जुलाई 2014 को 3 बजे से अध्यात्म साधना केन्द्र, नयी दिल्ली में होगा। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि गांधी शांति प्रतिष्ठान की अध्यक्ष राधा भट्ट हैं। इसमें भाग लेने के लिए ग्वालियर से एकता परिषद के कार्यकारी  अध्यक्ष रनसिंह परमार, एकता परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक प्रदीप प्रियदर्शी, बिहार से प्रस्थान कर चुके हैं। एकता परिषद के राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य अनीस के, , निर्भय सिंह आदि उपस्थित रहेंगे।

आलोक कुमार



गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

यू.के.सरकार के अन्तरराष्ट्रीय विकास विभाग से संचालित पैक्स कार्यक्रम के बढ़ते कदम


जहानाबाद। यू.के.सरकार के अन्तरराष्ट्रीय विकास विभाग से संचालित पैक्स कार्यक्रम है। इसके तहत भारत में नागर समाज के संगठनों के माध्यम से सामाजिक बहिष्करण भेदभाव के मुद्दों को सामाने लाना और उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
पूअरेस्ट एरियाज सिविल सोसाइटी (पैक्स) के निदेशक राजन खोसला ने कहा कि पैक्स कार्यक्रम के अन्तर्गत आजीविका के अधिकार   मूलभूत सेवाओं के अधिकार पर क्रेन्दित होकर देश के सात राज्यों के 90 निर्धनतम जिलों में कुल 225 स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। आजीविका के अधिकार में मनरेगा सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से एक है। मनरेगा सिर्फ 100 दिन के रोजगार की गारंटी नहीं देता बल्कि उपयोगी परिसंपतियों के सृजन के माध्यम से स्थाई विकास की राह बनाता है जिससे वंचित समुदायों को लाभ मिल सके।
बिहार झारखंड में 2012 में पैक्स मनरेगा अभियान की शुरूआत हुई जिसके तहतकाम मांगोअभियान और सामाजिक अंकेक्षण पर एक साक्षा पहल की गई। अभियान में राज्य जिलों के स्तर पर प्रशासन का भी सहयोग प्राप्त हुआ। एक निश्चित अवधि में 70,000 से अधिक काम के आवेदन और 170 ग्राम पंचायतों में सामाजिक अंकक्षेण किए गए। अभियान के प्रभाव के रूप में कुछ जिलों में पैक्स कार्यक्रम और जिला प्रशासन के द्वारा संयुक्त रूप से नई पहल की गई। मनरेगा मेट तैयार करना भी उन्हीं पहलकदमियों का हिस्सा है।
पैक्स कार्यक्रम जहानाबाद जिला प्रशासन के मध्य एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है और संयुक्त प्रयास से जहानाबाद में मनरेगा अन्तर्गत 1,000 महिला मेट तैयार की जा रही हैं। जिला स्तर पर पैक्स की सहयोगी संस्था प्रगति ग्रामीण विकास समिति के द्वारा परियोजना का संचालन किया जा रहा है। मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी काफी अहम है। मेट के रूप में महिला होना,महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चत करने में सहायक होगा।
महिला मजदूर और काम का अधिकार को लेकर महिला मेट प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया है। इसमें महिला मेटों के प्रशिक्षण के उद्ेश्य से प्रस्तुत दो दिवसीय मॉड्यूल तैयार किया गया है।काम के अधिकारके व्यापक संदर्भ तथा मनरेगा की अहमियत पर चर्चा,मेट की भूमिका की अहमियत,खासकर जेंडर के मुद्दों से निपटने में, मनरेगा की मुख्य प्रक्रियाएं तथा मेट की भूमिका, अलग अलग प्रकार के कार्यों की नापी तथा विवरणों की प्रविविष्ट, मेट द्वारा विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर मजदूरों का शिक्षण और शिकायतों के निपटारे तथा जनतांत्रिक जांच पड़ताल की व्यवस्थाएं को प्रथम दिन विस्तार से बताया जाएगा। द्वितीय दिन जॉब कार्ड आवेदन के लिए संयुक्त पारिवारिक फोटों का, मनरेगा कार्यक्रम में उपयोग होने वाले मस्टर रोल का, मनरेगा कार्यक्रम में उपयोग होने वाली दैनिक गणना प्रपत्र, मनरेगा कार्यक्रम में उपयोग होने वाली उपस्थिति का और मनरेगा कार्यक्रम में उपयोग होने वाले सामग्री पंजी का प्रारूप पर चर्चा होगी। इसके अलावे प्रशिक्षण को रूचिकर बनाने के लिए खेल भी प्रस्तुत की जाएगी। विशेष तौर पर खुदाई के लिए निर्धारित मिट्टी की मात्रा,परिवार नियोजन एवं स्वास्थ्य मातृत्व से संबंधित,मनरेगा कार्यस्थलों पर आवश्यक सुविधाएं सामग्रियां आदि पर चर्चा की जाएगी।
आलोक कुमार

रविवार, 16 फ़रवरी 2014

टेम्पों चालक की जिंदगी में ब्रेक


राजधानी के ही समीप है पश्चिमी उत्तरी मैनपुरा ग्राम पंचायत। फिलवक्त मैनपुरा ग्राम पंचायत के मुखिया निलेश कुमार हैं। पंचायत के मुखिया ने जिस संभावित भय के कारण शराब की दुकानों को बंद करवाने का आग्रह किए थे। कुर्जीवासी उससे बेहाल होने लगे हैं। अभी एक टेम्पों चालक बेहाल है। इसके कारण टेम्पों चालक राजेश चौधरी की जिंदगी में ब्रेक लग गयी है।
  
मैनपुरा ग्राम पंचायत के पूर्व मुखिया भाई धमेन्द्र की दुकान के पीछे राजेश चौधरी का घर है। वह किसी तरह से एक घर ढलवा सका है। उसी छत पर राजेश चौधरी बैठा रहता है। चलना - फिरना नहीं हो पाता है। बस समझ लीजिए कि टेम्पों चालक की जिंदगी में लग गयी ब्रेक। महादलित परिवार के घर में कोई कमाऊं व्यक्ति नहीं रहने के कारण विकास का रफ्तार थम गया। उम्र के ढलान के बाद भी बुजुर्ग महिला काम करने जाती हैं। पुत्र वधू भी जरूरत पड़ने पर मासूम बच्चे को साथ में लेकर काम करने जाती हैं। दोनों पटना दियारा क्षेत्र में खेत में काम करने जाती हैं। किसान मात्रः 50 रूपए देकर टरका देते हैं। महिलाओं की खुबसूरती को चार चांद लगाने वाले मांग टीका बेच दिया गया। अब किसानों ने बुजुर्ग महिला के माथे पर टीका लगा दिया है कि वह जल्दी - जल्दी पैसे की मांग करती हैं। उसी तरह घर की छत पर बैठकर राजेश चौधरी भी किसी मसीहा की तलाश करता है। जो नदी के मझधार में फंस गयी जिदंगी को किनारा ले दें।

खैर , कुर्जी निवासी महरूम राजेन्द्र चौधरी के पुत्र राजेश चौधरी को जानलेवा टी . बी . बीमारी हो गयी है। 27 वर्षीय राजेश को टेम्पों चालन विरासत से प्राप्त हुआ है। आरंभ में उनके पिता राजेन्द्र चौधरी वेंकौंस कम्पनी में कार्यरत थे। ठीक से वेतनादि नहीं मिलने के कारण वेंकौंस कम्पनी की नौकरी छोड़ने के बाद टेम्पों चलाने लगे। बाबू जी के हाथ और हुनर बेटा जी को प्राप्त हुआ। बेटा जी कमाते थे और गमाते भी थे। घर में खर्ची देने के बाद रकम को सीधे शराब भट्टी में लूटा आते। राजेश चौधरी धीरे - धीरे रोग की चपेट में गए। आज तीन साल से टी . बी . रोग से बेहाल हैं। 

मजे की बात है कि परिवार वालों ने उसे टी . बी . रोग से निदान करवाने के लिए बेहतर जगह पर कदम बढ़ाए। कुर्जी के डा . सुनील कुमार के पास ले गए। दवा शुरू की गयी। यहां से दवा खाने के बाद ठीक हुआ तो दवा सेवन करना बंद कर दिया। कुछ माह के बाद पुनः बीमार पड़ा। अबकी बार कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के सामुदायिक स्वास्थ्य एवं ग्रामीण विकास समिति में ले गए। यहां पर संचालित डॉट्स केन्द्र से दवा शुरू की गयी। यहां की दवाई खाने के बाद कुछ ठीक हुआ तो पुनः दवा खाना ही छोड़ दिया। इसके बाद अगमकुआं स्थित टी . बी . अस्पताल में गया। फिर वहीं बात हुई। फिर डाक्टर सुनील कुमार के क्लिनिक पर दस्तक दिया। इसके बाद पी . एम . सी . एच . चला गया। यहां से लौटने के बाद घर पर काफी गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। इसके बाद दीघा हाट पर स्थित डाक्टर केशव के क्लिनिक में गया। अभी डाक्टर केशव के पास से दवा - दारू चल रहा है। इस तरह दवा खाओं और कुछ बेहतर होने के बाद दवा छोड़ दो और बीमार पड़ने के बाद फिर दवा शुरू करो। इस तरह एक बीमारी का इलाज बदल - बदलकर 6 जगहों से किया।

जानकार लोगों का कहना है कि डॉट्स ट्रीटमेंट के तहत प्रावधान बनाया गया है कि टी . बी . मरीज को स्वास्थ्यकर्मी अथवा जानकार व्यक्ति के सामने ही नियमित दवा ढंग से दवा सेवन करानी है। सरकार ने जानलेवा टी . बी . को उन्मूलन करने की दिशा में कदम उठाए है। गांवघर में आशा कार्यकर्ताओं टी . बी . मरीजों को ढूढ़ कर निकालना और मरीज को चिकित्सक से दिखाने के बाद नियमित दवा खिलाने की जिम्मेवारी सौंपी गयी है। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं को राशि भी दी जाती है। आशा स्वास्थ्य प्रक्षेत्र के लिए रोल मॉडल है। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में जो सुधार आया है , उसका काफी श्रेय आशा का है। इस के आलोक में स्वास्थ्य विभाग ने पैकेज दे रखा है। एक बंध्याकरण करवाने पर 150 रूपए , एक नसबंदी करवाने पर 200 रूपए , टीकाकरण सत्र के दौरान 21 बच्चों का एक टीकाकरण करवाने पर 200 रूपए , टी . बी . नियंत्रण ( डॉट्स ) के तहत प्रति रोगी 250 रूपए , कुष्ठ रोगी लाने पर 300 रूपए , मोतियाबिन्द ऑपरेशन करवाने पर 175 रूपए , कालाजार रोगी को लाने पर 100 रूपए गांवघर में सेनिटरी नैपकिन का वितरण करने पर 1 रू . ( पैक ), किशोर के साथ बैठक करने पर 50 रूपए ( बैठक ), मृत्यु निबंधन करवाने पर 50 रूपए   ( प्रति निबंधन ) पोलियो टीकाकरणा 75 रूपए ( प्रति दिन ) और आशा दिवस में भागीदारी करने पर 100 रूपए देय होगा। इसके अलावे आदर्श दंपति योजना के तहत परिवार नियोजन सुनिश्चित करवा देने पर आशा को 1000 रूपए प्रोत्साहन राशि मिलनी है। शादी के दो वर्ष बाद पहला जन्म सुनिश्चित कराने पर 500 और पहले बच्चे के जन्म में तीन वर्ष का अंतराल सुनिश्चित कराने पर 500 रूपए आशा को मिलना तय है। सुरक्षित प्रसव कराने के लिए आशा को गांवों में 600 रूपए और शहरों में 200 रूपए प्रोत्साहन राशि मिलती है।

टेम्पों चालक की पत्नी मंजू देवी और रोगग्रस्त की मां कौशल्या देवी परेशान हैं। मंजू देवी और राजेश चौधरी के दो संतान हैं। चांदनी कुमारी सात साल और कविता कुमारी तीन साल की हैं। चांदनी कुमारी पढ़ने जाती थीं। हालात खराब होने से पढ़ाई छुट गयी है। कौशल्या देवी कहती हैं कि पटना दियारा क्षेत्र के खेत में कार्य करने जाती हैं। मजदूरी में 80 रूपए देते हैं। नियमित मजदूरी नहीं मिलती है। इसी से किसी तरह से दो जून की रोटी जुगाड़ होती है। अभी 50 हजार रूपए कर्ज हो गया है। एक हजार रूपए का 100 रूपए व्याज देना पड़ता है। पुत्र की बीमारी के बारे में कहती हैं कि टी . बी . के कीटाणुओं ने बाये और दाये फेफड़ों पर कब्जा कर लिए थे। अभी दवा - दारू करने के बाद दाये फेफड़े में कीटाणु बरकरार हैं। लोग हाई प्रोटीन डायट देने पर जोर देते हैं। साहब जो जेवरात था उसे बेच दिया गया है। बस घर ही शेष है।

कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल में पोषाहार का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी जुली कुमारी का कहना है कि हम अपने दैनिक आहार में प्रोटीन प्राप्त कर सकते हैं। दाल खाने से प्रोटीन प्राप्त हो सकता है। मैं जानती हूं कि इसके पास पर्याप्त रकम नहीं है। इसी से दाल आदि सेवन करके प्रोटीन को प्राप्त किया जा सकता है।

Alok Kumar



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