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सोमवार, 20 अप्रैल 2026

बेतिया धर्मप्रांत में 23 बच्चों को दृढ़करण संस्कार प्रदान

बेतिया धर्मप्रांत में 23 बच्चों को दृढ़करण संस्कार प्रदान, आत्मिक जीवन में महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पड़ाव

बेतिया धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर सेबेस्टियन गोवियस ने कहा कि दृढ़करण संस्कार (Confirmation) आत्मा को दृढ़ करने और जीवन को ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पड़ाव है। यह संस्कार विश्वासियों के जीवन में आस्था की परिपक्वता का प्रतीक माना जाता है, जिसमें व्यक्ति अपने ईसाई विश्वास को और अधिक गहराई से स्वीकार करता है तथा उसे जीवन में उतारने का संकल्प लेता है।

इसी अवसर पर ऑवर लेडी ऑफ असम्पशन चर्च, चुहड़ी में 23 बच्चों एवं किशोरियों को दृढ़करण संस्कार प्रदान किया गया। इस पवित्र समारोह में बेतिया धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर गोवियस सहित कई पुरोहितगण उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिकता, प्रार्थना और भक्ति से परिपूर्ण रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत में धर्माध्यक्ष पीटर गोवियस एवं उपस्थित सभी पुरोहितों ने दृढ़करण संस्कार ग्रहण करने वाले सभी बच्चों एवं किशोरियों के सिर पर हाथ रखकर विशेष प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने उनके जीवन में पवित्र आत्मा की कृपा, शक्ति और मार्गदर्शन के लिए आशीर्वाद प्रदान किया। यह क्षण सभी प्रतिभागियों और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक अनुभव से भरपूर रहा।

इसके बाद धर्माध्यक्ष द्वारा पुण्य सप्ताह के पवित्र अवसर पर क्रिस्म तेल (Holy Chrism Oil) से सभी 23 बच्चों एवं किशोरियों के ललाट पर क्रूस का चिन्ह बनाकर उनका अभिषेक किया गया। यह अभिषेक ईसाई परंपरा में पवित्र आत्मा की उपस्थिति और ईश्वर की कृपा का प्रतीक माना जाता है। इसके पश्चात विशेष प्रार्थना के माध्यम से सभी को दृढ़करण संस्कार प्रदान किया गया।

अपने संदेश में धर्माध्यक्ष पीटर गोवियस ने कहा कि आज का दिन चुहड़ी पल्ली के इन बच्चों और किशोरियों के लिए अत्यंत विशेष और ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि दृढ़करण संस्कार जीवन में केवल एक बार प्राप्त किया जाता है और यह आत्मा पर एक अमिट आध्यात्मिक छाप छोड़ता है। यह संस्कार व्यक्ति को ईश्वर के प्रति अधिक निष्ठावान और कलीसिया के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाता है।


उन्होंने आगे कहा कि कैथोलिक कलीसिया में दृढ़करण संस्कार बपतिस्मा की कृपा को पूर्ण करता है। इस संस्कार के माध्यम से विश्वासियों को पवित्र आत्मा के विशेष वरदान प्राप्त होते हैं, जिससे वे ख्रीस्त के सच्चे साक्षी बनकर अपने विश्वास में और अधिक मजबूत होते हैं। यह संस्कार धर्माध्यक्ष द्वारा तेल के अभिषेक और विशेष प्रार्थनाओं के माध्यम से संपन्न किया जाता है।

धर्माध्यक्ष ने यह भी कहा कि यह संस्कार युवाओं को एक संस्कारी, जिम्मेदार और आध्यात्मिक रूप से मजबूत व्यक्ति बनने में सहायता करता है। इसके माध्यम से ईश्वर के साथ उनका संबंध और अधिक गहरा होता है तथा वे समाज में अच्छे मूल्यों के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित होते हैं।

चुहड़ी पल्ली के पुरोहित फादर हरमन रफाएल ने बताया कि दृढ़करण संस्कार प्राप्त करने से एक दिन पूर्व सभी बच्चे, किशोर-किशोरियां, उनके माता-पिता तथा गॉडमदर एवं गॉडफादर ने पापस्वीकार संस्कार (Confession) में भाग लिया। यह प्रक्रिया उन्हें आत्मिक रूप से शुद्ध और संस्कार ग्रहण के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण चरण होता है।

कार्यक्रम के अंत में धर्माध्यक्ष ने सभी बच्चों एवं किशोरियों को प्रमाण पत्र, पवित्र बाइबल और रोजरी देकर सम्मानित किया। यह उपहार उनके आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक बने। इसके बाद सभी उपस्थित पुरोहितों ने संयुक्त रूप से ख्रीस्तयाग (Holy Mass) का मिस्सा बलिदान अर्पित किया और सभी के कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की।

पूरे समारोह में संगीत मंडली द्वारा सुंदर और भक्तिमय क्वायर प्रस्तुत किया गया, जिसने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक एवं भावपूर्ण बना दिया। सैकड़ों की संख्या में ईसाई श्रद्धालु इस पवित्र आयोजन में उपस्थित रहे और इन 23 विश्वासियों के दृढ़करण संस्कार के साक्षी बने।


इसी अवसर पर लौरेंस परिवार के पाँच बच्चों ने भी बेतिया धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर गोवियस से दृढ़करण संस्कार ग्रहण किया। इनमें रुप्रिंस कैनिस, प्रेरणापरी, जेसिका पलक, कैथरीन प्रिसा और रुपा रुलमारिया शामिल हैं।

इन सभी बच्चों को दृढ़करण संस्कार प्राप्त करने पर विशेष बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। यह अवसर उनके जीवन में ईश्वर के प्रेम, अनुग्रह और कलीसियाई समुदाय में पूर्ण रूप से शामिल होने का प्रतीक बना। सभी से यह अपेक्षा की गई कि वे सदैव बुराई से दूर रहकर अच्छे कार्यों और पुण्य मार्ग पर आगे बढ़ते रहें तथा अपने जीवन को ईश्वर की सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित करें।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि यह विश्वास, समर्पण और आध्यात्मिक विकास का एक सशक्त संदेश भी था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक बना रहेगा।

आलोक कुमार

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