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रविवार, 26 अप्रैल 2026

“जिसका मुझे था इंतजार, जिसके लिए दिल था बेकरार…”

                               लगातार हार के बाद यह जीत किसी संजीवनी से कम नहीं थी

“जिसका मुझे था इंतजार, जिसके लिए दिल था बेकरार…” — यह पंक्ति जिसका मुझे था इंतजार की जरूर है, लेकिन हाल ही में यह भाव भारतीय महिला क्रिकेट टीम के प्रदर्शन में साकार होता दिखाई दिया। दक्षिण अफ्रीका दौरे पर खेली जा रही टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले में भारत ने जिस अंदाज में वापसी की, उसने न केवल मैच का रुख बदला, बल्कि पूरे अभियान में नई जान फूंक दी।

वांडरर्स स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने 14 रन से जीत दर्ज कर सीरीज में अपनी मौजूदगी मजबूती से दर्ज कराई। हालांकि सीरीज अभी भी दक्षिण अफ्रीका के पक्ष में 3-1 से थी, लेकिन यह जीत मनोबल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रही। टीम की कमान अनुभवी हरमनप्रीत कौर के हाथों में थी, और लगातार हार के बाद यह जीत किसी संजीवनी से कम नहीं थी।

टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवर में 185/5 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। शुरुआत में शेफाली वर्मा जल्दी आउट हो गईं, लेकिन इसके बाद जेमिमा रोड्रिग्स ने 29 गेंदों में 43 रन की शानदार पारी खेलकर टीम को संभाला। मध्यक्रम में कप्तान हरमनप्रीत ने योगदान दिया, लेकिन असली चमक अंत के ओवरों में देखने को मिली।

यहां दीप्ति शर्मा और ऋचा घोष की जोड़ी ने मैच का रुख बदल दिया। दोनों ने छठे विकेट के लिए 38 गेंदों में 65 रन की नाबाद साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। यह साझेदारी बाद में निर्णायक साबित हुई।

लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका ने तेज शुरुआत की। लौरा वोल्वार्ड्ट और सुने लूस ने आक्रामक बल्लेबाजी की और शुरुआती ओवरों में मैच पर पकड़ बना ली। लेकिन जैसे ही मैच संतुलन में आया, कहानी ने करवट ली।

गेंद थामी दीप्ति शर्मा ने—और यहीं से मैच भारत की ओर झुक गया। उन्होंने 5/19 का शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला पांच विकेट हॉल लिया। उनकी गेंदबाजी में नियंत्रण, विविधता और सटीक रणनीति का अद्भुत संगम देखने को मिला। उन्होंने एनेरी डेर्कसेन, कायला रेनेके, अयाबोंगा खाका और तुमी सेखुखुने जैसे अहम खिलाड़ियों को आउट कर विपक्ष को बैकफुट पर ला दिया।

परिणामस्वरूप, दक्षिण अफ्रीकी टीम 20 ओवर में 171/9 तक ही पहुंच सकी और भारत ने मुकाबला अपने नाम कर लिया।

इस मैच में ऋचा घोष ने एक और उपलब्धि हासिल की। उन्होंने 69वां डिसमिसल पूरा कर तान्या भाटिया के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया और भारतीय महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय में सबसे सफल विकेटकीपर बन गईं।

यह जीत केवल स्कोरबोर्ड पर दर्ज एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना है। यह दिखाता है कि यह टीम दबाव में टूटती नहीं, बल्कि और मजबूत होकर उभरती है।

अब अगला मुकाबला विलोमूर पार्क में खेला जाएगा। सीरीज भले ही दक्षिण अफ्रीका के पक्ष में हो, लेकिन momentum अब भारत के पास है।

इस पूरी कहानी की सबसे चमकदार कड़ी रहीं “शर्मा जी की बेटी” दीप्ति शर्मा—जिन्होंने यह साबित कर दिया कि असली खिलाड़ी वही होता है, जो सबसे कठिन समय में टीम के लिए खड़ा हो।

अंततः, यह जीत एक संदेश देती है—हार चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वापसी हमेशा संभव है। जरूरत होती है विश्वास, धैर्य और सही समय पर सही प्रदर्शन की। और इस बार, वह क्षण सचमुच आ ही गया।

आलोक कुमार

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