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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

सेवा से प्रोफेशनलिज्म तक

 कुर्जी होली फैमिली अस्पताल: सेवा से प्रोफेशनलिज्म तक — बदलती पहचान पर सवाल

पटना। राजधानी पटना के कुर्जी मोहल्ले में स्थित कुर्जी होली फैमिली अस्पताल लंबे समय से सेवा, समर्पण और संवेदना का प्रतीक रहा है। वर्ष 1958 में मेडिकल मिशन सिस्टर्स सोसाइटी द्वारा स्थापित इस अस्पताल का मूल उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि मानवता की सेवा करना था। दशकों तक यह संस्थान गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की एक मजबूत किरण बना रहा।

         बदलती व्यवस्था, बदलता माहौल

हाल के वर्षों में अस्पताल की कार्यशैली में एक स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है। जब से इसका संचालन सिस्टर्स ऑफ नाजरेथ, मोकामा के साथ साझा रूप में होने लगा है, तब से प्रशासनिक ढांचे और कार्य संस्कृति में परिवर्तन सामने आए हैं।

यह बदलाव केवल प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पताल के मूल मानवीय दृष्टिकोण पर भी असर डालता दिख रहा है। जहां पहले सेवा और सहानुभूति प्राथमिकता थी, वहीं अब “प्रोफेशनलिज्म” का जोर बढ़ता नजर आता है।

कर्मचारियों की स्थिति: चिंता के संकेत

अस्पताल की पहचान उसके डॉक्टरों और कर्मचारियों से होती है। लेकिन अब जो तस्वीर सामने आ रही है, वह चिंताजनक है—

पहले कर्मचारियों की नियमित स्वास्थ्य जांच होती थी

अब सालाना मेडिकल चेकअप बंद कर दिए गए हैं

कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान कम हुआ है

हाल ही में एक महिला कर्मचारी के साथ हुई घटना—जिसमें वह उच्च रक्तचाप के कारण गिरकर घायल हो गई—इस कमी को उजागर करती है। समय पर जांच होती तो शायद इस स्थिति को टाला जा सकता था।

संवेदनशीलता की कमी?

सबसे गंभीर आरोप यह है कि ऐसी परिस्थितियों में भी प्रबंधन का रवैया सहानुभूतिपूर्ण नहीं रहा।

घायल कर्मचारी को सहयोग देने के बजाय दबाव का सामना करना पड़ा

अंततः उसे इस्तीफा देना पड़ा

यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि कार्यस्थल के माहौल पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

आउटसोर्सिंग का बढ़ता प्रभाव

अस्पताल में एक और बदलाव तेजी से देखने को मिल रहा है—आउटसोर्सिंग की प्रवृत्ति।

पुराने कर्मचारियों को हटाने की आशंका

नई व्यवस्था में स्थायित्व की कमी

अनुभव और समर्पण की अनदेखी

यह प्रवृत्ति न केवल रोजगार के लिए, बल्कि संस्थान की गुणवत्ता और स्थिरता के लिए भी खतरा बन सकती है।

 भय का माहौल?

कुछ घटनाएं यह भी संकेत देती हैं कि कर्मचारियों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

एक कर्मचारी ने विवाद के बाद यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि वह सम्मान के साथ जाना चाहता है, क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसे आरोप लगाकर निकाला न जाए।

यह बयान कार्यस्थल के वातावरण की गंभीरता को दर्शाता है।

क्या प्रोफेशनलिज्म ही सब कुछ है?

यहां सबसे बड़ा सवाल यही उठता है—

क्या “प्रोफेशनलिज्म” का मतलब केवल नियम, अनुशासन और लाभ तक सीमित है?

या इसमें संवेदना, सहानुभूति और मानवीय जिम्मेदारी भी शामिल होनी चाहिए?

अस्पताल जैसे संस्थानों में केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण भी उतना ही जरूरी होता है।

 सुधार की जरूरत

स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं—

कर्मचारियों की नियमित स्वास्थ्य जांच फिर से शुरू हो

सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण बनाया जाए

पुराने कर्मचारियों के अनुभव को महत्व दिया जाए

प्रबंधन में पारदर्शिता और संवाद बढ़ाया जाए

निष्कर्ष

कुर्जी होली फैमिली अस्पताल केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि विश्वास और सेवा का प्रतीक रहा है।

लेकिन यदि मानवीय मूल्यों का क्षरण होता है, तो सबसे आधुनिक संस्थान भी अपनी आत्मा खो देते हैं।

आज जरूरत है कि यह संस्थान अपने मूल उद्देश्य—सेवा, संवेदना और मानवता—को फिर से केंद्र में लाए और प्रोफेशनलिज्म के साथ-साथ मानवीयता को भी समान महत्व दे।


आलोक कुमार

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