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बुधवार, 29 अप्रैल 2026

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार पर बड़ी खबर


वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद 29 महत्वपूर्ण विभागों को अपने पास रखा

बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजीनामा के बाद 15 अप्रैल 2026 को भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने बिहार के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद मुख्यमंत्री पद से अलग हो गए, जिसके बाद सम्राट चौधरी ने विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शपथ ग्रहण की। शपथ लेने के तुरंत बाद बिहार विधानसभा का एक दिवसीय सत्र बुलाकर उन्होंने विश्वासमत भी प्राप्त कर लिया।अब नई सरकार पूरे जोर-शोर से काम कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों और विभागीय समीक्षाओं में व्यस्त हैं। उसी क्रम में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं जोरों पर हैं। सूत्रों के मुताबिक, नए मंत्रियों की सूची पर विचार-विमर्श अंतिम चरण में पहुंच गया है। पार्टी संगठन, वरिष्ठ नेताओं और
सहयोगी दलों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं।विस्तार का मकसद और संभावित समयराजनीतिक विशेषज्ञों का


मानना है कि यह विस्तार सिर्फ़ मंत्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर क्षेत्रीय, जातीय और सामाजिक संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद 29 महत्वपूर्ण विभागों को अपने पास रखा है, जबकि शेष विभागों का बंटवारा विस्तार के बाद होगा। जेडीयू के दो वरिष्ठ नेताओं विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। भाजपा को लगभग 15 मंत्रियों (सीएम सहित), जेडीयू को 17 (दो उपमुख्यमंत्री सहित), एलजेपी (राम विलास) को 2, हम और आरएलएम को 1-1 मंत्री का प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। विस्तार की संभावित तिथि मई 2026 के पहले सप्ताह में, खासकर 4 मई को कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद मानी जा रही है।पटना की दो सीटों का राजनीतिक महत्वपटना की पश्चिमी सीट को विभक्त कर बांकीपुर और दीघा विधानसभा क्षेत्र बनाए गए। इस विभाजन का सबसे बड़ा लाभ बांकीपुर क्षेत्र को मिला। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के पिता बांकीपुर से विधायक और मंत्री रहे थे। उनके निधन के बाद नितिन नवीन को भी इसी क्षेत्र से राजनीतिक मौका मिला। जब तक वे बांकीपुर के विधायक रहे, उन्हें मंत्री पद की सौगात मिलती रही। अब नितिन नवीन पार्टी के उच्च पद पर पहुंच गए हैं, तो बांकीपुर की जगह दीघा पर फोकस बढ़ गया है।दीघा विधानसभा के वर्तमान विधायक डॉ. संजीव चौरसिया (संजीव चौरसिया) काफी समय से सक्रिय हैं। स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता संजय राय, अरविंद कुमार वर्मा, राजन क्लेमेंट साह आदि लगातार मांग कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस बार दीघा के विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल करें। डॉ. संजीव चौरसिया तमोली (पान वाले) समुदाय से आते हैं, जो अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) का हिस्सा है। उन्हें व्यवसायी पृष्ठभूमि भी है, जिससे वे बनिया समुदाय से भी जुड़ाव रखते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जातीय संतुलन और पटना क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को देखते हुए उनका नाम मंत्रिमंडल विस्तार में मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहा है।क्या कहते हैं सूत्र और स्थानीय कार्यकर्ता?स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का तर्क है कि बांकीपुर को पहले पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल चुका है। अब दीघा को भी विकास और प्रशासनिक निर्णयों में भागीदारी मिलनी चाहिए।

डॉ. संजीव चौरसिया लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। 2015 से दीघा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और 2025 के चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीते।

मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और नए चेहरों को मौका देने का फॉर्मूला अपनाया जा सकता है, ताकि NDA का सामाजिक आधार और मजबूत हो।


हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में उच्च नेतृत्व से मुलाकात की है और नितिन नवीन, नीतीश कुमार आदि से चर्चा भी की है। विस्तार कब और कैसे होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।निष्कर्षबिहार में नीतीश कुमार युग के समाप्त होने और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा के सीधे सत्ता संचालन की शुरुआत हो चुकी है। मंत्रिमंडल विस्तार इस नए दौर की पहली बड़ी परीक्षा होगी। अगर दीघा के डॉ. संजीव चौरसिया को मंत्री बनाया जाता है, तो यह पटना के दोनों हिस्सों के बीच संतुलन का प्रतीक भी बन सकता है। बिहार की जनता विकास, सुशासन और जाति-धर्म से ऊपर उठकर समावेशी सरकार की उम्मीद कर रही है। सम्राट चौधरी की सरकार कितना क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाए रख पाती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।


आलोक कुमार


 

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