भारत के कैथोलिक बिशप सम्मेलन द्वारा आर्चबिशप लियोपोल्डो गिरेली को भावभीनी विदाई
एक गरिमामय और भावनात्मक समारोह में Conference of Catholic Bishops of India (सीसीबीआई) ने भारत और नेपाल में अपोस्टोलिक नुंसियो के रूप में सेवाएं देने वाले Archbishop Leopoldo Girelli को सम्मानपूर्वक विदाई दी। उन्होंने 13 मार्च 2021 से 23 अप्रैल 2026 तक इस महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन किया। यह विदाई समारोह नई दिल्ली स्थित Apostolic Nunciature द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें चर्च और समाज के अनेक विशिष्ट व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
इस विशेष अवसर पर Cardinal Filipe Neri Ferrão, जो सीसीबीआई के अध्यक्ष हैं, Archbishop Peter Machado, उपाध्यक्ष के रूप में, और Archbishop Anil Couto, दिल्ली के आर्चबिशप, प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त Cardinal Baselios Mar Cleemis, Archbishop Kuriakose Bharanikulangara, Archbishop Raphy Manjaly तथा उत्तरी भारत के 15 से अधिक बिशप भी समारोह में शामिल हुए। Rev. Dr. Stephen Alathara ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विभिन्न देशों के राजदूतों और दिल्ली के कई प्रतिष्ठित नागरिकों ने भी इस कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।
अपने संबोधन में कार्डिनल फिलिप नेरी फेराओ ने आर्चबिशप गिरेली की भारत में दी गई सेवाओं को कृतज्ञतापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने विशेष रूप से गरीबों और वंचितों के प्रति उनकी संवेदनशीलता तथा समाज और चर्च में एकता स्थापित करने के उनके निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आर्चबिशप गिरेली ने अपने कार्यकाल में केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां ही नहीं निभाईं, बल्कि मानवीय मूल्यों और करुणा का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
कार्डिनल फेराओ ने आगे कहा कि आर्चबिशप गिरेली का नेतृत्व भारतीय चर्च के लिए प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने विभिन्न परंपराओं, भाषाओं और संस्कृतियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने का जो प्रयास किया, वह अत्यंत सराहनीय है। उनके कार्यकाल के दौरान चर्च ने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उनके मार्गदर्शन में इन चुनौतियों को अवसरों में बदला गया।
अपने उत्तर भाषण में आर्चबिशप गिरेली ने भारतीय चर्च नेतृत्व और बिशप समुदाय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत में उनका अनुभव न केवल चुनौतीपूर्ण रहा, बल्कि अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायक भी रहा। उन्होंने भारतीय चर्च को “जीवंत और सुंदर” बताते हुए कहा कि यहां की विविधता — चाहे वह धार्मिक परंपराओं की हो, भाषाई हो या सांस्कृतिक — इसे विशेष बनाती है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत में सेवा करते हुए उन्हें विभिन्न समुदायों के बीच गहरी आस्था और भाईचारे की भावना देखने को मिली, जो विश्व के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि भारत में बिताया गया समय उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहेगा, जिसे वे सदैव संजोकर रखेंगे।
समारोह के दौरान आभार स्वरूप कार्डिनल फेराओ ने आर्चबिशप गिरेली को एक स्मृति-चिह्न भेंट किया। इसके अलावा आर्चबिशप पीटर मचाडो और आर्चबिशप अनिल कूटो ने उन्हें पारंपरिक भारतीय शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। यह सम्मान भारतीय संस्कृति की गर्मजोशी और सम्मान की परंपरा का प्रतीक था।
Rev. Dr. Stephen Alathara ने भारत की लैटिन चर्च की ओर से एक औपचारिक धन्यवाद-पत्र भी उन्हें सौंपा। इस पत्र में उनके योगदान, समर्पण और नेतृत्व की सराहना की गई थी। यह क्षण समारोह का एक भावनात्मक और स्मरणीय हिस्सा रहा, जिसमें उपस्थित सभी लोगों ने आर्चबिशप गिरेली के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
समारोह के अंत में सभी अतिथियों ने आर्चबिशप गिरेली को उनके आगामी मिशन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने 24 अप्रैल 2026 को भारत से प्रस्थान किया, जहां वे पूर्वी यूरोप के देश Croatia में अपनी नई पोन्तिफिकल जिम्मेदारी संभालेंगे।
आर्चबिशप गिरेली का कार्यकाल भारतीय चर्च के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। उनकी सेवाएं, उनकी सादगी, और उनकी नेतृत्व क्षमता आने वाले समय में भी लोगों को प्रेरित करती रहेंगी। यह विदाई समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व को सम्मान देने का अवसर था, जिसने अपने कार्यों से अनेक दिलों को छुआ और एक स्थायी छाप छोड़ी।
आलोक कुमार
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