बिहार में बढ़ती महंगाई से आम जनता परेशान, रोजमर्रा का खर्च संभालना हुआ मुश्किल
बिहार में लगातार बढ़ रही महंगाई ने आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। बाजार में खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामानों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर देखने को मिल रहा है। घर चलाने वाले लोगों का कहना है कि पहले जितने पैसे में पूरे महीने का राशन आ जाता था, अब उतने में आधा सामान भी नहीं मिल पा रहा है।
गांव से लेकर शहर तक लोग महंगाई की मार झेल रहे हैं। सब्जियों, दाल, तेल, गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी सामान की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कई परिवारों को अब खर्च कम करने के लिए अपनी जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है। बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर के अन्य जरूरी खर्चों को संभालना भी मुश्किल होता जा रहा है।
बाजार में खरीदारी करने पहुंचे लोगों का कहना है कि आमदनी उतनी नहीं बढ़ रही जितनी तेजी से महंगाई बढ़ रही है। मजदूरी करने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या घर का खर्च चलाने की बन गई है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि खेती से होने वाली आय पहले ही कम है, ऊपर से बढ़ती महंगाई ने परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
महिलाओं का कहना है कि रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है। पहले जो सामान आसानी से खरीद लिया जाता था, अब उसी सामान को खरीदने से पहले कई बार सोचना पड़ता है। कई घरों में लोग जरूरत का सामान कम मात्रा में खरीदने को मजबूर हो गए हैं।
युवाओं का कहना है कि बिहार में केवल नौकरी की बात करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ऐसी कंपनियों और उद्योगों की जरूरत है जो राज्य में रोजगार पैदा कर सकें। बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। अगर बिहार में फैक्ट्री और कंपनियां लगेंगी तो लोगों को अपने ही राज्य में रोजगार मिल सकेगा और आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
आम जनता का मानना है कि सरकार को महंगाई नियंत्रित करने और रोजगार बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में राहत देने वाली योजनाएं लागू की जाएंगी ताकि आम परिवारों को कुछ सहारा मिल सके।
आलोक कुमार
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