शिविर का मुख्य उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना
बिहार सरकार द्वारा शुरू की गई ‘सहयोग शिविर’ योजना अब ग्रामीण जनता के लिए उम्मीद की नई किरण बनती जा रही है। इसी क्रम में चुहड़ी पंचायत स्थित संत आग्नेस स्कूल चुहड़ी परिसर में एक भव्य सहयोग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर अपनी समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना तथा सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना था।
इस शिविर में प्रभारी सचिव श्री अभय कुमार सिंह एवं उप विकास आयुक्त श्री काजले वैभव नितिन विशेष रूप से उपस्थित रहे। दोनों अधिकारियों ने शिविर में आए लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार सरकार प्रशासन को जनता के दरवाजे तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने उपस्थित लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और कई मामलों का ऑन-द-स्पॉट समाधान भी किया। जिन मामलों में तत्काल समाधान संभव नहीं था, उन्हें संबंधित विभागों को सौंपते हुए शीघ्र कार्रवाई का निर्देश दिया गया।
शिविर में सबसे अधिक शिकायतें भूमि विवाद, राशन कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन, आवास योजना, जन्म प्रमाणपत्र, बिजली एवं पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं से संबंधित थीं। अधिकारियों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए। उन्होंने कहा कि अब प्रशासनिक कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है ताकि आम लोगों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
इस अवसर पर कई लाभुकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र दिया गया, वहीं लोहिया स्वच्छ योजना के अंतर्गत शौचालय निर्माण से संबंधित प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। कुछ लोगों को राशन कार्ड एवं जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए। प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले लाभुकों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। ग्रामीणों ने कहा कि पहले छोटी-छोटी समस्याओं के लिए महीनों तक कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही समाधान मिलने लगा है।
यह सहयोग शिविर इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि बिहार सरकार ने इसे जनसमस्याओं के समाधान की एक महत्वाकांक्षी योजना के रूप में लागू किया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि सहयोग शिविर में प्राप्त आवेदनों का 30 दिनों के भीतर निष्पादन अनिवार्य रूप से किया जाए। यदि किसी अधिकारी द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं की जाती है तो 31वें दिन वह स्वतः निलंबित माना जाएगा। मुख्यमंत्री की इस सख्ती का असर अब प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
मुख्यमंत्री द्वारा इस योजना की औपचारिक शुरुआत 19 मई 2026 को डुमरी बुजुर्ग पंचायत से की गई थी। तब से पूरे बिहार में पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य यह है कि जनता की समस्याओं का समाधान गांव स्तर पर ही हो जाए और लोगों को जिला या राज्य मुख्यालय तक जाने की आवश्यकता न पड़े। इस योजना के तहत हर पंचायत में महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को शिविर आयोजित करने का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने शिकायतों के निपटारे के लिए एक व्यवस्थित मॉनिटरिंग प्रणाली भी तैयार की है। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारी को 10वें, 20वें और 25वें दिन रिमाइंडर नोटिस भेजा जाएगा ताकि समय सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। केवल न्यायालय से जुड़े मामलों को इस व्यवस्था से अलग रखा गया है। बाकी सभी शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है, क्योंकि अब उन्हें उम्मीद जगी है कि उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हो सकेगा।
शिविर के दौरान अधिकारियों ने लोगों को हेल्पलाइन नंबर 1100 के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सड़क, बिजली, पानी, पेंशन तथा अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतें लोग घर बैठे भी दर्ज करा सकते हैं। इससे दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। साथ ही प्रशासन द्वारा शिकायतों की ऑनलाइन निगरानी भी की जाएगी।ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि इसी प्रकार प्रशासन गांव-गांव जाकर जनता की समस्याओं का समाधान करता रहा तो लोगों का विश्वास शासन-प्रशासन पर और मजबूत होगा। सहयोग शिविर केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास कायम करने का एक मजबूत माध्यम बनता जा रहा है।
चुहड़ी पंचायत में आयोजित यह शिविर इस बात का उदाहरण है कि यदि प्रशासन संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करे तो आम लोगों की समस्याओं का समाधान तेजी से संभव है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना आने वाले समय में बिहार के ग्रामीण प्रशासन की तस्वीर को किस हद तक बदल पाती है।
आलोक कुमार
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