✦ Latest News Loading...
कृषि समाचार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कृषि समाचार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 7 जून 2026

World : जापान में भारतीय आमों की एंट्री क्यों है मुश्किल?

जापान में भारतीय आमों की एंट्री क्यों है मुश्किल? जानिए सख्त नियमों की पूरी कहानी

भारत को आमों का देश कहा जाता है। यहां उगने वाले अल्फांसो, दशहरी, लंगड़ा, चौसा और केसर जैसे आम दुनिया भर में अपनी मिठास और स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं। इसके बावजूद दुनिया के कुछ बड़े बाजारों में भारतीय आमों को प्रवेश पाने के लिए कड़े मानकों से गुजरना पड़ता है। जापान भी ऐसे ही देशों में शामिल है।

अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि क्या जापान ने भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगा रखा है। इस प्रश्न का सीधा उत्तर यह है कि जापान ने भारतीय आमों पर कोई स्थायी प्रतिबंध नहीं लगाया है। हालांकि, कुछ अवसरों पर नियमों के उल्लंघन, निरीक्षण संबंधी कमियों या सुरक्षा मानकों पर खरा न उतरने वाली खेपों को अस्थायी रूप से रोका गया है।

जापान का कृषि और खाद्य सुरक्षा तंत्र दुनिया के सबसे सख्त तंत्रों में माना जाता है। वहां आयात होने वाले फलों, सब्जियों और खाद्य पदार्थों की अत्यंत सावधानी से जांच की जाती है। जापानी अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि आयातित उत्पादों में किसी प्रकार के हानिकारक कीट, रोग या निर्धारित सीमा से अधिक रासायनिक अवशेष मौजूद न हों।                                                                                           

भारतीय आमों के मामले में सबसे बड़ी चिंता फल मक्खी (फ्रूट फ्लाई) और अन्य कृषि कीटों को लेकर रही है। यदि किसी खेप में ऐसे कीट या उनके अंश पाए जाते हैं, तो जापानी अधिकारी उसे अस्वीकार कर सकते हैं। यही कारण है कि निर्यात से पहले आमों का विशेष उपचार और वैज्ञानिक परीक्षण किया जाता है।

जापान केवल फलों की गुणवत्ता ही नहीं देखता, बल्कि उनकी पूरी यात्रा का रिकॉर्ड भी चाहता है। इसे ट्रेसबिलिटी कहा जाता है। इसके तहत यह जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए कि आम किस बाग से आया, उसकी देखभाल कैसे हुई, उसका उपचार कब किया गया और पैकिंग की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई। दस्तावेजी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कमी निर्यात को प्रभावित कर सकती है।

भारत और जापान के बीच कृषि व्यापार को लेकर लगातार सहयोग और संवाद होता रहा है। भारतीय एजेंसियों ने निर्यात मानकों को बेहतर बनाने, निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करने और पैकिंग प्रक्रियाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय आमों की कई खेपें सफलतापूर्वक जापानी बाजार तक पहुंची हैं।

यह कहना सही नहीं होगा कि जापान भारतीय आम नहीं खरीदना चाहता। वास्तव में जापानी उपभोक्ता भारतीय आमों के स्वाद और गुणवत्ता को पसंद करते हैं। लेकिन जापान केवल उन्हीं उत्पादों को स्वीकार करता है जो उसके सख्त स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों को पूरा करते हैं।

इस पूरे मामले से एक महत्वपूर्ण सीख मिलती है। आज के वैश्विक बाजार में केवल अच्छा उत्पादन ही पर्याप्त नहीं है। गुणवत्ता नियंत्रण, वैज्ञानिक परीक्षण, पारदर्शिता, ट्रेसबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन भी उतना ही आवश्यक है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफलता के लिए उत्पाद की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी विश्वसनीयता भी महत्वपूर्ण होती है।

भारतीय आमों की मिठास और लोकप्रियता पर दुनिया को कोई संदेह नहीं है। यदि किसान, निर्यातक और सरकारी एजेंसियां मिलकर अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करती रहें, तो जापान ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बाजारों में भी भारतीय आमों की मांग लगातार बढ़ सकती है।


आलोक कुमार