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सोमवार, 24 अगस्त 2026

Bihar : दुनिया में विद्यार्थियों के लिए तर्कशक्ति, संवाद-कौशल, आत्मविश्वास, आलोचनात्मक चिंतन

  


किताबें ज्ञान देती हैं, लेकिन तर्क, संवाद और आत्मविश्वास उस ज्ञान को आवाज देते हैं। नोट्रे डेम एकेडमी, पटना में आयोजित इंटर-स्कूल ग्रेट डिबेट प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को इसी आवाज को मजबूत करने का मंच दिया।

पटना। आज शिक्षा का अर्थ केवल पाठ्यक्रम पूरा करना और परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं रह गया है। बदलती दुनिया में विद्यार्थियों के लिए तर्कशक्ति, संवाद-कौशल, आत्मविश्वास, आलोचनात्मक चिंतन और समसामयिक मुद्दों की समझ भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नोट्रे डेम एकेडमी, पटना ने अपने पेरेंट-टीचर एसोसिएशन (PTA) के सहयोग से इंटर-स्कूल ग्रेट डिबेट इंग्लिश प्रतियोगिता का आयोजन किया।

प्रतियोगिता में 14 प्रमुख विद्यालयों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। अलग-अलग विद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने अपने विचारों को अंग्रेजी भाषा में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया और यह दिखाया कि नई पीढ़ी केवल विषयों को पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन पर विचार करने और तर्क के साथ अपनी बात रखने की क्षमता भी विकसित कर रही है।

प्रतियोगिता को जूनियर और सीनियर—दो श्रेणियों में बांटा गया था। दोनों वर्गों के विषय विद्यार्थियों की उम्र और बौद्धिक स्तर को ध्यान में रखते हुए चुने गए थे। खास बात यह रही कि विषय ऐसे थे जिन पर केवल पक्ष या विपक्ष में बोलना पर्याप्त नहीं था। प्रतिभागियों को अपने तर्क के पीछे कारण, उदाहरण और विचार प्रस्तुत करने पड़े।

एआई के इस्तेमाल पर जूनियर वर्ग में जोरदार बहस

जूनियर वर्ग का विषय था—“स्कूल के असाइनमेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।”

आज जब एआई शिक्षा का हिस्सा तेजी से बनता जा रहा है, तब इस विषय ने विद्यार्थियों को तकनीक के लाभ और उसकी सीमाओं पर सोचने का अवसर दिया। सवाल यह था कि क्या एआई विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को बढ़ाने वाला उपकरण है या इसके अत्यधिक इस्तेमाल से मौलिक सोच प्रभावित हो सकती है।

विद्यार्थियों ने अपने-अपने पक्ष में तर्क प्रस्तुत किए और यह साबित किया कि कम उम्र में भी वे तकनीक से जुड़े जटिल प्रश्नों पर गंभीरता से सोच सकते हैं।

जूनियर वर्ग में नोट्रे डेम एकेडमी, पटना की अक्षिता सागर को प्रथम सर्वश्रेष्ठ वक्ता चुना गया। सेंट जोसेफ कॉन्वेंट हाई स्कूल की शनाया सिंह ने द्वितीय और नोट्रे डेम एकेडमी, पटना की कनिष्का मित्तल ने तृतीय सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार हासिल किया।

वहीं नोट्रे डेम एकेडमी, बाढ़ की आद्या श्री को प्रथम प्रोमिसिंग स्पीकर और सेंट माइकल्स हाई स्कूल के ऑडिटिक एडेन को द्वितीय प्रोमिसिंग स्पीकर चुना गया।

सीनियर वर्ग ने उठाया जीवन कौशल का सवाल

सीनियर वर्ग का विषय था—“जीवन कौशल अकादमिक सफलता से अधिक महत्वपूर्ण हैं।”

यह विषय सीधे विद्यार्थियों के भविष्य और सफलता की पारंपरिक धारणा से जुड़ा था। अच्छे अंक और शैक्षणिक उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन क्या केवल परीक्षा में सफलता ही जीवन में सफलता की गारंटी दे सकती है? निर्णय लेने की क्षमता, संवाद-कौशल, समस्या का समाधान, समय प्रबंधन और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने जैसे जीवन कौशल की भूमिका कितनी बड़ी है?

प्रतिभागियों ने इसी विषय के अलग-अलग पहलुओं को सामने रखा। किसी ने अकादमिक उपलब्धियों के महत्व को रेखांकित किया तो किसी ने जीवन में व्यवहारिक कौशल और मानवीय गुणों को अधिक महत्वपूर्ण बताया।

सीनियर वर्ग में सेंट जोसेफ कॉन्वेंट हाई स्कूल की शनाया सिंह प्रथम सर्वश्रेष्ठ वक्ता रहीं। नोट्रे डेम एकेडमी, पटना की स्नेहा घोष ने द्वितीय और नोट्रे डेम एकेडमी, बाढ़ के हर्ष राज ने तृतीय सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार हासिल किया।

नोट्रे डेम एकेडमी, पटना की हर्षिता सिन्हा को प्रथम प्रोमिसिंग स्पीकर और सेंट कैरेंस हाई स्कूल की प्रतीक्षा राज को द्वितीय प्रोमिसिंग स्पीकर का पुरस्कार दिया गया।

नोट्रे डेम एकेडमी ने जीती रनिंग ट्रॉफी

प्रतियोगिता की रनिंग ट्रॉफी नोट्रे डेम एकेडमी, पटना ने अपने नाम की। मेजबान विद्यालय के लिए यह उपलब्धि विशेष गौरव का अवसर रही।

विद्यालय की प्राचार्य सिस्टर मैरी नेहा SND ने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, निर्णायकों, मुख्य अतिथि और कार्यक्रम समन्वयक श्री देवव्रत के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद-कौशल और आलोचनात्मक चिंतन को लगातार विकसित करने का आह्वान किया। उनके अनुसार, ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा सामने रखने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं।

निर्णायकों ने परखी प्रतिभा

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में पटना वीमेंस कॉलेज के सांख्यिकी विभाग की प्रमुख डॉ. मून, पटना साइंस कॉलेज के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. सोवन चक्रवर्ती तथा मनेर हाई स्कूल की पूर्व प्राचार्य डॉ. शगुफ्ता यासमीन शामिल थीं।

मुख्य अतिथि के रूप में रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल के एमडी डॉ. सत्यजीत कुमार सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतियोगिता की सराहना की और आयोजन के लिए सहयोग भी प्रदान किया।

प्रतियोगिता का समन्वय PTA कोषाध्यक्ष श्री देवव्रत ने किया। PTA की पूरी टीम ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया। PTA अध्यक्ष श्रीमती संचिता घोष के साथ श्री संभव गुप्ता, श्रीमती खुशबू चौधरी, श्रीमती श्वेता, श्रीमती सुभुही, श्रीमती चित्रा, मोहम्मद तनवीर, श्री आर.के. झा, मोहम्मद नायर और मोहम्मद मुशीर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

ट्रॉफी से आगे की कहानी

किसी डिबेट प्रतियोगिता को केवल पुरस्कारों और ट्रॉफी के नजरिए से देखना उसके वास्तविक महत्व को छोटा कर देना होगा। मंच पर खड़ा विद्यार्थी जब किसी कठिन विषय पर बोलता है, सामने बैठे लोगों के सवालों और तर्कों का सामना करता है तथा अपने विचारों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करता है, तब उसके व्यक्तित्व का निर्माण होता है।

डिबेट विद्यार्थियों को केवल बोलना नहीं सिखाती। यह उन्हें सुनना, असहमति को समझना और दूसरे पक्ष के तर्क का सम्मान करना भी सिखाती है।

आज सोशल मीडिया के दौर में किसी मुद्दे पर तुरंत राय बना लेना आसान है, लेकिन तथ्य समझकर तर्कपूर्ण राय बनाना कठिन। ऐसे समय में स्कूल स्तर की डिबेट प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में विचारों की परिपक्वता विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।

नोट्रे डेम एकेडमी की यह पहल इसी दृष्टि से उल्लेखनीय है। जूनियर वर्ग में एआई जैसे आधुनिक विषय पर बहस और सीनियर वर्ग में जीवन कौशल जैसे व्यापक विषय पर विचार-विमर्श ने विद्यार्थियों को किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया के प्रश्नों से जोड़ने का काम किया।

कक्षा की किताबें ज्ञान का आधार बनाती हैं, लेकिन तर्क, संवाद और आत्मविश्वास उस ज्ञान को जीवन से जोड़ते हैं।

यही कारण है कि ऐसी प्रतियोगिताएं केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं होतीं। मंच पर बोले गए कुछ मिनट किसी विद्यार्थी के भीतर वर्षों तक आत्मविश्वास पैदा कर सकते हैं।

और जब शिक्षा विद्यार्थी को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि सवाल पूछने, तर्क करने, असहमति समझने और अपनी बात जिम्मेदारी से रखने के लिए तैयार करती है, तभी शिक्षा वास्तव में जीवन की तैयारी बनती है।


आलोक कुमार