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शनिवार, 5 सितंबर 2026

Bihar : स्कूल में पढ़ाई या लापरवाही का अड्डा? चार शिक्षक निलंबित, छात्रा से मालिश कराने का आरोप भी

 


स्कूल में पढ़ाई या लापरवाही का अड्डा? चार शिक्षक निलंबित, छात्रा से मालिश कराने का आरोप भी

बक्सर। डुमरांव प्रखंड के नथुनी अहीर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय में छात्राओं से कथित आपत्तिजनक व्यवहार की घटना के बाद शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ ही रहे थे कि अब ब्रह्मपुर प्रखंड के एक अन्य सरकारी विद्यालय में सामने आई अनियमितताओं ने व्यवस्था को फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। मध्य विद्यालय गरहथा कला में एक साथ चार शिक्षकों का निलंबन केवल विभागीय कार्रवाई नहीं, बल्कि विद्यालयों में पढ़ाई, अनुशासन, प्रशासन और निगरानी की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि निलंबित शिक्षकों में एक शिक्षक पर निरीक्षण के दौरान एक छात्रा से अपने कंधे की मालिश कराने का आरोप सामने आया। यह आरोप छात्र-शिक्षक संबंधों की मर्यादा और विद्यालय में बच्चों की गरिमा से जुड़ा संवेदनशील विषय है। हालांकि, आरोप की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।

जिला शिक्षा पदाधिकारी इंद्र कुमार कर्ण के कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, 25 अगस्त को मध्य विद्यालय गरहथा कला का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और मध्याह्न भोजन से जुड़े कर्मियों की मौजूदगी भी बताई गई। निरीक्षण के बाद तैयार प्रतिवेदन में विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, शिक्षकों की कार्यशैली और प्रशासनिक गतिविधियों से संबंधित कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया।

चार शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई

निरीक्षण के बाद कार्रवाई की जद में प्रभारी प्रधानाध्यापक राधामोहन यादव तथा विशिष्ट शिक्षक रामबचन यादव, राकेश सिंह और योगेंद्र यादव आए हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से 3 सितंबर को जारी अलग-अलग आदेशों के तहत चारों शिक्षकों को बिहार सरकारी सेवक नियमावली के प्रावधानों के तहत निलंबित किए जाने और विभागीय कार्रवाई शुरू किए जाने की बात सामने आई है।

निलंबन का अर्थ यह नहीं है कि लगाए गए प्रत्येक आरोप अंतिम रूप से सिद्ध हो चुका है। विभागीय प्रक्रिया में संबंधित शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। लेकिन निरीक्षण के दौरान दर्ज की गई शिकायतें विद्यालय की व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जरूर पैदा करती हैं।

छात्रा से मालिश कराने का आरोप सबसे संवेदनशील

निलंबित शिक्षक रामबचन यादव के खिलाफ दर्ज आरोपों में सबसे संवेदनशील मामला एक छात्रा से अपने कंधे की मालिश कराने का है।

यदि किसी विद्यालय में शिक्षक और विद्यार्थी के बीच ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो यह केवल व्यक्तिगत आचरण का मामला नहीं रह जाता। यह विद्यालय के वातावरण, बच्चों की गरिमा और शिक्षकों की जिम्मेदारी से भी जुड़ जाता है।

इसके अलावा संबंधित शिक्षक पर पाठटीका तैयार नहीं करने, विद्यार्थियों को गृहकार्य नहीं देने और निर्धारित समय-सारणी के अनुसार कक्षाओं का संचालन नहीं करने जैसे आरोप भी निरीक्षण के दौरान दर्ज किए गए हैं।

सवाल यह है कि जिस शिक्षक को बच्चों को पढ़ाने, मार्गदर्शन देने और अनुशासन का वातावरण तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, वहां ऐसी शिकायत सामने आने से पहले निगरानी व्यवस्था क्या कर रही थी?

यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा और सम्मान किसी भी शैक्षणिक व्यवस्था की पहली शर्त होनी चाहिए।

मोबाइल में व्यस्त रहने का आरोप

निरीक्षण प्रतिवेदन में विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां सामने आई हैं। जांच के दौरान कुछ शिक्षकों के पढ़ाई कराने के बजाय मोबाइल फोन में व्यस्त पाए जाने की बात कही गई है। कक्षाओं के संचालन में भी अनियमितता का उल्लेख किया गया है।

यदि किसी विद्यालय में शिक्षक नियमित रूप से कक्षा का संचालन नहीं कर रहे हैं, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। खासकर उन विद्यार्थियों पर, जिनके परिवार अतिरिक्त ट्यूशन या निजी शिक्षण की सुविधा उपलब्ध नहीं करा सकते।

बताया गया है कि विद्यालय की स्थिति को लेकर छात्र-छात्राओं में नाराजगी इतनी बढ़ी कि उन्होंने विद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी तक कर दी

बच्चों का इस तरह विरोध करना सामान्य स्थिति नहीं माना जा सकता। इसके पीछे उनकी पढ़ाई, विद्यालय के वातावरण या व्यवस्था को लेकर असंतोष हो सकता है। इसलिए ऐसी घटनाओं को केवल अनुशासनहीनता मानकर समाप्त करने के बजाय उसके कारणों की भी जांच जरूरी है।

प्रधानाध्यापक पर प्रशासनिक और वित्तीय सवाल

प्रभारी प्रधानाध्यापक राधामोहन यादव के खिलाफ भी कई तरह के आरोप सामने आए हैं। इनमें विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था के अलावा प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े सवाल शामिल हैं।

निरीक्षण के दौरान कुछ महत्वपूर्ण पंजी उपलब्ध नहीं मिलने की बात सामने आई। कंपोजिट ग्रांट के खर्च से जुड़े दस्तावेजों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं पाए जाने का उल्लेख किया गया है।

विद्यालय में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी निरीक्षण प्रतिवेदन में असंतोष दर्ज होने की बात कही गई है।

इसके अलावा विद्यालय की खेल सामग्री और विद्यार्थियों की कॉपियां शौचालय में बंद मिलने की बात भी सामने आई है।

यदि यह स्थिति जांच में सही पाई जाती है, तो सवाल केवल सामान रखने की जगह का नहीं है। यह विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों के प्रबंधन और उनके उपयोग की व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है।

निलंबन के बाद असली परीक्षा

चार शिक्षकों का निलंबन विभाग की ओर से तत्काल कार्रवाई जरूर है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है।

क्या विद्यालय में नियमित पढ़ाई बहाल होगी?

क्या बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलेगा?

क्या मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की निगरानी मजबूत होगी?

क्या वित्तीय और प्रशासनिक अभिलेख व्यवस्थित किए जाएंगे?

क्या विद्यालय में उपलब्ध खेल सामग्री और अन्य संसाधनों का बच्चों के हित में उपयोग होगा?

और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—क्या भविष्य में ऐसी शिकायतों को समय रहते पहचानकर रोका जा सकेगा?

निलंबन किसी मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इससे अपने आप विद्यालय की पूरी व्यवस्था नहीं सुधरती। इसके लिए लगातार निरीक्षण, शिकायतों की त्वरित जांच, शिक्षकों की जवाबदेही और विद्यालय प्रबंधन की सक्रिय भूमिका जरूरी है।

सरकारी स्कूलों में निगरानी क्यों जरूरी?

बक्सर के गरहथा कला मध्य विद्यालय का मामला एक स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई जरूर है, लेकिन इसके भीतर सरकारी स्कूलों की निगरानी से जुड़ा बड़ा सवाल छिपा है।

विद्यालय में शिक्षक की उपस्थिति हो, कक्षा में पढ़ाई हो, बच्चों के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो, सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल हो और अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए—ये सभी शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी जरूरतें हैं।

डुमरांव के विद्यालय में सामने आई घटना और अब गरहथा कला में चार शिक्षकों पर कार्रवाई, दोनों मामलों को एक ही घटना मानना उचित नहीं होगा। लेकिन दोनों से बच्चों की सुरक्षा, शिक्षक की जवाबदेही और शिक्षा विभाग की निगरानी पर सवाल जरूर उठते हैं।

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे किसी व्यवस्था के बोझ नहीं, बल्कि समाज के भविष्य हैं। इसलिए उनके लिए स्कूल केवल भवन और उपस्थिति रजिस्टर नहीं होना चाहिए। वह ऐसा स्थान होना चाहिए जहां उन्हें शिक्षा के साथ सम्मान, सुरक्षा और अवसर मिले।

सरकारी स्कूल बच्चों का भविष्य गढ़ने की जगह हैं, किसी की मनमानी का मैदान नहीं।

गरहथा कला की कार्रवाई को इसी व्यापक नजरिए से देखना होगा। चार शिक्षकों का निलंबन खबर जरूर है, लेकिन उससे बड़ा सवाल यह है कि क्या अब विद्यालय की व्यवस्था बदलेगी?

क्योंकि कार्रवाई तभी सार्थक मानी जाएगी, जब उसके बाद बच्चों की कक्षा में पढ़ाई लौटे, विद्यालय में अनुशासन लौटे और अभिभावकों का भरोसा भी वापस आए।

आलोक कुमार

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