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सोमवार, 8 जून 2026

India : "हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए

         "हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए,  इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए..."

महान कवि दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियाँ "हो गई है पीर पर्वत-सी, पिघलनी चाहिए..." — श्रीगंगानगर से उठी एक नई क्रिकेट क्रांति का नाम है मानव सुथार। उस युवा क्रिकेटर पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, जिसने वर्षों की मेहनत, संघर्ष और धैर्य के बाद भारतीय क्रिकेट के दरवाजे पर ऐसी दस्तक दी कि पूरा देश उसकी ओर देखने लगा। जून 2026 की वह सुबह भारतीय क्रिकेट के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी, जब मुल्लांपुर (न्यू चंडीगढ़) के मैदान पर भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच में 23 वर्षीय मानव सुथार ने भारतीय टेस्ट टीम की कैप पहनकर अपने सपनों को हकीकत में बदल दिया।

जब कुलदीप यादव ने उनके सिर पर भारत की 319वीं टेस्ट कैप सजाई, तब यह केवल एक खिलाड़ी का डेब्यू नहीं था, बल्कि भारतीय क्रिकेट को एक नए स्पिन ऑलराउंडर की सौगात मिलने का क्षण था। यह उस युवा की कहानी थी जिसने राजस्थान की धरती से निकलकर राष्ट्रीय टीम तक का सफर अपने प्रदर्शन के दम पर तय किया।

डेब्यू मैच में ही बना दिया इतिहास

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करना हर खिलाड़ी का सपना होता है, लेकिन बहुत कम खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो अपने पहले ही मैच में इतिहास रच देते हैं। मानव सुथार ने अफगानिस्तान के खिलाफ अपने पहले टेस्ट में यही कर दिखाया।

अपने करियर के पहले ही ओवर की चौथी गेंद पर उन्होंने अफगानिस्तान के सलामी बल्लेबाज अब्दुल मलिक को आउट कर दिया। इसके साथ ही वे टेस्ट क्रिकेट में अपने पहले ओवर में विकेट लेने वाले भारत के चुनिंदा गेंदबाजों की सूची में शामिल हो गए।

यह विकेट केवल एक आंकड़ा नहीं था, बल्कि यह संकेत था कि भारतीय क्रिकेट को एक ऐसा खिलाड़ी मिल गया है जो बड़े मंच पर दबाव से घबराने वाला नहीं है।

गेंदबाजी में दिखी अनुभवी खिलाड़ी जैसी परिपक्वता

डेब्यू मैच में अक्सर खिलाड़ी घबराहट का शिकार हो जाते हैं, लेकिन मानव सुथार ने जिस संयम और नियंत्रण के साथ गेंदबाजी की, उसने सभी को प्रभावित किया।                             


दूसरे दिन तक उनके आंकड़े बेहद प्रभावशाली रहे—

15.5 ओवर

7 मेडन

21 रन

3 विकेट

इकोनॉमी रेट 1.33

उन्होंने सिर्फ विकेट ही नहीं लिए, बल्कि अफगानिस्तान के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका भी नहीं दिया। अब्दुल मलिक, रहमानुल्लाह गुरबाज और अफसर जजई जैसे बल्लेबाजों के विकेट लेकर उन्होंने साबित कर दिया कि उनकी फिरकी में दम है।

उनकी गेंदबाजी में धैर्य, सटीक लाइन-लेंथ और स्पष्ट रणनीति दिखाई दी, जो किसी भी सफल टेस्ट गेंदबाज की सबसे बड़ी पहचान होती है।

बल्ले से भी दिखाया दम

मानव सुथार केवल एक स्पिनर नहीं हैं। वे आधुनिक क्रिकेट की सबसे बड़ी जरूरत—एक भरोसेमंद ऑलराउंडर—के रूप में उभर रहे हैं।

भारत की पहली पारी जब 564/8 पर घोषित हुई, तब निचले क्रम में उन्होंने 41 गेंदों में 28 रन बनाए। उनकी पारी में दो चौके और दो शानदार छक्के शामिल थे।

उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच साफ दिखाई दी। उन्होंने संकेत दे दिया कि जरूरत पड़ने पर वे बल्ले से भी मैच का रुख बदल सकते हैं।

घरेलू क्रिकेट में पहले ही बजा चुके थे सफलता का बिगुल

टीम इंडिया तक पहुंचने का रास्ता कभी आसान नहीं होता। मानव सुथार ने भी घरेलू क्रिकेट के कठिन संघर्षों से गुजरकर यह मुकाम हासिल किया है।

उनके प्रथम श्रेणी क्रिकेट के आंकड़े उनकी प्रतिभा को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं—

फॉर्मेट मैच विकेट औसत सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी रन बल्लेबाजी औसत सर्वोच्च स्कोर

फर्स्ट क्लास 29 129 25.76 8/33 945 25.54 120

ये आंकड़े बताते हैं कि मानव केवल विकेट लेने वाले गेंदबाज नहीं हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर शतक लगाने की क्षमता भी रखते हैं।

रणजी ट्रॉफी से शुरू हुई पहचान

मानव सुथार पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आए जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी 2022-23 में शानदार प्रदर्शन किया।

उस सीजन में उन्होंने केवल 6 मैचों में 39 विकेट हासिल किए और 20.33 की औसत से बल्लेबाजों को परेशान किया। वे राजस्थान के सबसे सफल गेंदबाज बने और चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे।

यहीं से भारतीय क्रिकेट के गलियारों में उनका नाम गूंजने लगा।

संकट में टीम को बचाने वाला शतक

एक सच्चे ऑलराउंडर की पहचान यह होती है कि वह मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभाल सके।


हिमाचल प्रदेश के खिलाफ एक मुकाबले में राजस्थान की टीम 98 रन पर 5 विकेट गंवाकर संकट में थी। ऐसे समय में मानव सुथार ने जिम्मेदारी उठाई और शानदार 120 रन की पारी खेली।

उनकी इस पारी ने न केवल टीम को संकट से बाहर निकाला बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वे केवल गेंदबाज नहीं, बल्कि भरोसेमंद बल्लेबाज भी हैं।

दिलीप ट्रॉफी में मचाया तहलका

2024 की दिलीप ट्रॉफी मानव सुथार के करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई।

इंडिया-सी के लिए खेलते हुए उन्होंने एक पारी में 7 विकेट लेकर विरोधी टीम की बल्लेबाजी को तहस-नहस कर दिया। उनका 7/49 का शानदार स्पेल चयनकर्ताओं को यह संदेश देने के लिए काफी था कि वे अगले स्तर के लिए तैयार हैं।

आईपीएल ने दिया नया आत्मविश्वास

घरेलू क्रिकेट में सफलता के बाद मानव को आईपीएल में भी अवसर मिला। गुजरात टाइटन्स के साथ जुड़कर उन्हें विश्व स्तरीय खिलाड़ियों के साथ काम करने का मौका मिला।

राशिद खान और नूर अहमद जैसे दिग्गज स्पिनरों के साथ समय बिताने से उनकी गेंदबाजी में और निखार आया। उन्होंने दबाव में प्रदर्शन करना सीखा और अपनी कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

भारत को मिला भविष्य का ऑलराउंडर

भारतीय क्रिकेट में समय-समय पर ऐसे खिलाड़ी उभरते रहे हैं जिन्होंने अपने प्रदर्शन से नई उम्मीदें जगाई हैं। मानव सुथार का नाम भी अब उसी सूची में तेजी से शामिल होता दिखाई दे रहा है।

श्रीगंगानगर की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, अनुशासन और निरंतर मेहनत की मिसाल है। डेब्यू टेस्ट में गेंद और बल्ले दोनों से प्रभाव छोड़कर उन्होंने यह संकेत दे दिया है कि वे केवल एक उभरते हुए स्पिनर नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के संभावित ऑलराउंडर भी हैं।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानव सुथार इसी निरंतरता और समर्पण के साथ आगे बढ़ते रहे, तो आने वाले वर्षों में वे भारतीय टीम के अहम स्तंभ बन सकते हैं।

फिलहाल इतना तय है कि राजस्थान की धरती से निकला यह युवा खिलाड़ी करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदों का नया चेहरा बन चुका है। मानव सुथार की कहानी यह साबित करती है कि सपने बड़े हों, मेहनत सच्ची हो और हौसला अडिग हो, तो श्रीगंगानगर की गलियों से भी भारतीय क्रिकेट के शिखर तक पहुंचा जा सकता है।

उनकी कहानी अभी शुरू हुई है, लेकिन शुरुआत इतनी शानदार है कि भविष्य सुनहरा दिखाई देता है।


आलोक कुमार