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गुरुवार, 21 मई 2026

Bihar : बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज

बाराचट्टी विधायक ज्योति मांझी के काफिले पर हुए हमले से जुड़ा हुआ 

जीतन राम मांझी ने गया जिले के मानपुर थाना क्षेत्र में हुए विवाद को लेकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यदि सात दिनों के भीतर संबंधित दरोगा को निलंबित नहीं किया गया और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपने समर्थकों के साथ एसपी तथा अन्य अधिकारियों के घरों का घेराव करेंगे। मांझी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और महादलित राजनीति से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

पूरा मामला हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो और बाराचट्टी विधायक ज्योति मांझी के काफिले पर हुए हमले से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि 17 मई 2026 को गया जिले के मोहनपुर इलाके में विधायक ज्योति मांझी के काफिले को कुछ लोगों ने रोक लिया था। आरोप है कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, गाली-गलौज की गई और माहौल को तनावपूर्ण बना दिया गया। इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया।

इस मामले में पुलिस ने अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी इससे संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस पूरी गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर रही और कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। मांझी का कहना है कि यदि पुलिस निष्पक्ष होती, तो अब तक मुख्य आरोपियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जा चुके होते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मानपुर के दरोगा की भूमिका संदिग्ध है और उन्हीं की वजह से अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है।

विवाद तब और बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को अपमानजनक भाषा में संबोधित करते हुए जान से मारने की धमकी देता दिखाई दिया। गया साइबर थाना पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए राजेश राव उर्फ सरदार नामक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

जीतन राम मांझी ने इस घटना को केवल व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि पूरे महादलित समाज के सम्मान से जुड़ा मामला बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें बार-बार इसलिए निशाना बनाया जाता है क्योंकि वे महादलित समुदाय से आते हैं। मांझी का कहना है कि समाज के कमजोर वर्गों की आवाज उठाने पर कुछ लोगों को परेशानी होती है और इसी कारण उन्हें अपमानित करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि सामाजिक मानसिकता का भी मामला है।

मांझी ने अपने बयान में प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सात दिनों के भीतर दरोगा को निलंबित नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को अपनी बात कहने का अधिकार है और यदि प्रशासन निष्क्रिय रहेगा तो लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। मांझी ने यह भी कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करेंगे, लेकिन अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

इस पूरे घटनाक्रम पर बिहार की राजनीति भी दो हिस्सों में बंटी दिखाई दे रही है। मांझी समर्थक इसे महादलित सम्मान का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे कानून-व्यवस्था की विफलता से जोड़कर सरकार पर हमला बोल रहे हैं। कई नेताओं ने कहा है कि यदि एक केंद्रीय मंत्री खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

दूसरी ओर पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया वीडियो की जांच साइबर टीम कर रही है और आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस का यह भी कहना है कि विधायक के काफिले पर हमले के मामले में जिन लोगों की संलिप्तता सामने आई है, उनके खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है।

गया जिला लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक तनाव का केंद्र रहा है। यहां जातीय और सामाजिक समीकरणों का प्रभाव काफी गहरा माना जाता है। ऐसे में जीतन राम मांझी का यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से बड़ा मुद्दा बन सकता है। खासकर महादलित समुदाय के बीच इसका असर देखने को मिल सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मांझी अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अन्याय और अपमान के खिलाफ खुलकर आवाज उठाते रहेंगे। वहीं प्रशासन के सामने भी चुनौती है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह मामला और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।

फिलहाल सबकी नजर पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। सात दिनों की चेतावनी के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी अपने आंदोलन की घोषणा को आगे बढ़ाते हैं। बिहार की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

आलोक कुमार

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