बिहार में भीषण गर्मी का कहर, लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
बिहार इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। राज्य के कई जिलों में तापमान लगातार 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। सुबह से ही तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, जबकि दोपहर होते-होते सड़कें लगभग सूनी हो जा रही हैं। खासकर दक्षिण बिहार के जिलों—रोहतास, डेहरी, बक्सर, औरंगाबाद और पटना—में गर्म हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
पटना सहित कई शहरों में अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। हालांकि थर्मामीटर कुछ और दिखा रहा है, लेकिन उमस और तेज धूप के कारण लोगों को तापमान 45 डिग्री से भी अधिक महसूस हो रहा है। न्यूनतम तापमान भी 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही। बिजली की खपत बढ़ गई है और लोग एसी, कूलर और पंखों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर बिहार और सीमांचल के कुछ हिस्सों—जैसे किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार—में हल्की बारिश और तेज हवा चलने की संभावना है। 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे वहां के लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन दक्षिण बिहार में अभी भी लू का प्रकोप जारी रहने की आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘नौतपा’ की शुरुआत के साथ गर्मी का असर और अधिक बढ़ सकता है।
गर्मी का सबसे अधिक असर मजदूरों, रिक्शा चालकों, किसानों और बाहर काम करने वाले लोगों पर पड़ रहा है। दोपहर के समय सड़क पर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। अस्पतालों में भी हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में पानी की कमी होने से लोग तेजी से बीमार पड़ सकते हैं। ऐसे में लोगों को अधिक से अधिक पानी पीने और धूप से बचने की सलाह दी जा रही है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचें। यदि बहुत जरूरी हो तभी बाहर जाएं और सिर को कपड़े या टोपी से ढंककर रखें। नींबू पानी, छाछ, ओआरएस और नारियल पानी जैसे पेय पदार्थों का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है क्योंकि वे गर्मी से जल्दी प्रभावित होते हैं।
सोशल मीडिया पर भीषण गर्मी को लेकर कई तरह के पोस्ट और संदेश वायरल हो रहे हैं। एक पोस्टर में मजाकिया अंदाज में दिखाया गया है कि “सब लोग एसी और कूलर में रहें, सिर्फ ANM बाहर निकले क्योंकि ANM ने अमृत पी रखा है।” यह पोस्ट भले ही हास्य के रूप में बनाया गया हो, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा संदेश छिपा है। दरअसल, इतनी भयंकर गर्मी में भी स्वास्थ्यकर्मी, विशेषकर ANM और आशा कार्यकर्ता, गांव-गांव जाकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। वे टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और जागरूकता अभियान में लगातार जुटी हुई हैं।
इसी भीषण गर्मी के बीच स्वास्थ्य विभाग महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर भी महत्वपूर्ण अभियान चला रहा है। सरकार द्वारा 14 वर्ष तक की बालिकाओं को गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन लगाई जा रही है। यह टीका सरकारी स्तर पर निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूलों और गांवों में जाकर टीकाकरण अभियान चला रही है ताकि भविष्य में महिलाओं को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सके। निजी अस्पतालों में भी यह वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन वहां इसके लिए शुल्क देना पड़ता है।
गर्मी के इस दौर में स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। एक ओर उन्हें लू और धूप का सामना करना पड़ रहा है, दूसरी ओर लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचानी हैं। ANM और आशा कार्यकर्ताओं की मेहनत को देखकर लोग उनकी सराहना भी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ये महिलाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल गर्मी का स्वरूप अधिक खतरनाक होता जा रहा है। पहले जहां मई-जून में सीमित दिनों तक लू चलती थी, अब अप्रैल से ही तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। पेड़ों की कटाई, बढ़ता प्रदूषण और शहरीकरण भी गर्मी बढ़ने के बड़े कारण हैं। ऐसे में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर कदम उठाने होंगे।
फिलहाल बिहार के लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को सुरक्षित रखना है। मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना, पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचना और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है। आने वाले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
आलोक कुमार
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