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सोमवार, 25 मई 2026

Bihar : बिहार में भीषण गर्मी का कहर

 बिहार में भीषण गर्मी का कहर, लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

बिहार इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। राज्य के कई जिलों में तापमान लगातार 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। सुबह से ही तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, जबकि दोपहर होते-होते सड़कें लगभग सूनी हो जा रही हैं। खासकर दक्षिण बिहार के जिलों—रोहतास, डेहरी, बक्सर, औरंगाबाद और पटना—में गर्म हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

पटना सहित कई शहरों में अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। हालांकि थर्मामीटर कुछ और दिखा रहा है, लेकिन उमस और तेज धूप के कारण लोगों को तापमान 45 डिग्री से भी अधिक महसूस हो रहा है। न्यूनतम तापमान भी 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही। बिजली की खपत बढ़ गई है और लोग एसी, कूलर और पंखों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर बिहार और सीमांचल के कुछ हिस्सों—जैसे किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार—में हल्की बारिश और तेज हवा चलने की संभावना है। 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे वहां के लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन दक्षिण बिहार में अभी भी लू का प्रकोप जारी रहने की आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ‘नौतपा’ की शुरुआत के साथ गर्मी का असर और अधिक बढ़ सकता है।

गर्मी का सबसे अधिक असर मजदूरों, रिक्शा चालकों, किसानों और बाहर काम करने वाले लोगों पर पड़ रहा है। दोपहर के समय सड़क पर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। अस्पतालों में भी हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने जैसी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में पानी की कमी होने से लोग तेजी से बीमार पड़ सकते हैं। ऐसे में लोगों को अधिक से अधिक पानी पीने और धूप से बचने की सलाह दी जा रही है।

सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचें। यदि बहुत जरूरी हो तभी बाहर जाएं और सिर को कपड़े या टोपी से ढंककर रखें। नींबू पानी, छाछ, ओआरएस और नारियल पानी जैसे पेय पदार्थों का सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है क्योंकि वे गर्मी से जल्दी प्रभावित होते हैं।

सोशल मीडिया पर भीषण गर्मी को लेकर कई तरह के पोस्ट और संदेश वायरल हो रहे हैं। एक पोस्टर में मजाकिया अंदाज में दिखाया गया है कि “सब लोग एसी और कूलर में रहें, सिर्फ ANM बाहर निकले क्योंकि ANM ने अमृत पी रखा है।” यह पोस्ट भले ही हास्य के रूप में बनाया गया हो, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा संदेश छिपा है। दरअसल, इतनी भयंकर गर्मी में भी स्वास्थ्यकर्मी, विशेषकर ANM और आशा कार्यकर्ता, गांव-गांव जाकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। वे टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और जागरूकता अभियान में लगातार जुटी हुई हैं।

इसी भीषण गर्मी के बीच स्वास्थ्य विभाग महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर भी महत्वपूर्ण अभियान चला रहा है। सरकार द्वारा 14 वर्ष तक की बालिकाओं को गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन लगाई जा रही है। यह टीका सरकारी स्तर पर निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूलों और गांवों में जाकर टीकाकरण अभियान चला रही है ताकि भविष्य में महिलाओं को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सके। निजी अस्पतालों में भी यह वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन वहां इसके लिए शुल्क देना पड़ता है।

गर्मी के इस दौर में स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। एक ओर उन्हें लू और धूप का सामना करना पड़ रहा है, दूसरी ओर लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचानी हैं। ANM और आशा कार्यकर्ताओं की मेहनत को देखकर लोग उनकी सराहना भी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ये महिलाएं स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल गर्मी का स्वरूप अधिक खतरनाक होता जा रहा है। पहले जहां मई-जून में सीमित दिनों तक लू चलती थी, अब अप्रैल से ही तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। पेड़ों की कटाई, बढ़ता प्रदूषण और शहरीकरण भी गर्मी बढ़ने के बड़े कारण हैं। ऐसे में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर कदम उठाने होंगे।

फिलहाल बिहार के लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को सुरक्षित रखना है। मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना, पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचना और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है। आने वाले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।


आलोक कुमार

Bihar : बिहार के युवाओं के बीच अब एक नई सोच तेजी से उभर रही है

 बिहार में अब नौकरी नहीं, रोजगार देने वाली कंपनियों की जरूरत, युवा भविष्य को लेकर चिंतित

बिहार के युवाओं के बीच अब एक नई सोच तेजी से उभर रही है। लोगों का कहना है कि केवल सरकारी नौकरी मांगने से राज्य का विकास संभव नहीं है, बल्कि बिहार को ऐसी बड़ी कंपनियों और उद्योगों की जरूरत है जो लाखों लोगों को रोजगार दे सकें। आज भी बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। रोजगार की कमी के कारण कई परिवार आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

राज्य के अलग-अलग जिलों से लगातार यह आवाज उठ रही है कि बिहार में उद्योगों का विस्तार होना चाहिए। युवाओं का कहना है कि अगर राज्य में फैक्ट्री, आईटी कंपनी, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और छोटे-बड़े उद्योग लगाए जाएं तो यहां के लोगों को अपने ही राज्य में रोजगार मिल सकता है। इससे पलायन भी कम होगा और बिहार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

आज बिहार का बड़ा युवा वर्ग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों बिता देता है। कई युवा दिन-रात मेहनत करने के बाद भी नौकरी पाने में सफल नहीं हो पाते। इससे मानसिक तनाव और निराशा भी बढ़ रही है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले युवाओं के सामने स्थिति और कठिन है क्योंकि वहां रोजगार के अवसर बहुत कम हैं। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई पर भारी खर्च करते हैं, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद भी नौकरी नहीं मिलने से चिंता बढ़ जाती है।

कई युवाओं का कहना है कि बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है। यहां के छात्र देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर अपनी मेहनत और क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर वही अवसर बिहार में उपलब्ध कराया जाए तो राज्य के युवा अपने घर के पास रहकर भी बेहतर काम कर सकते हैं। इससे परिवार भी मजबूत होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।

व्यापार और उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि बिहार में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। अच्छी सड़क, बिजली, इंटरनेट और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से बड़ी कंपनियां राज्य में आने के लिए तैयार हो सकती हैं। अगर सरकार उद्योग लगाने वालों को सुविधाएं दे तो आने वाले समय में बिहार रोजगार का बड़ा केंद्र बन सकता है।

गांव के लोगों का कहना है कि रोजगार की कमी के कारण बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों में जाकर काम करते हैं। कई लोग परिवार से दूर रहकर मेहनत मजदूरी करने को मजबूर हैं। अगर बिहार में ही रोजगार के अवसर बढ़ें तो लोगों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह से फायदा होगा।

महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि छोटे उद्योग, सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, ऑनलाइन काम और स्वरोजगार योजनाओं को बढ़ावा देकर महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इससे परिवार की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, युवाओं को आधुनिक तकनीक और रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग भी मिलनी चाहिए। अगर राज्य में स्किल सेंटर और टेक्निकल संस्थानों का विस्तार होगा तो युवा निजी कंपनियों में भी आसानी से काम कर सकेंगे।

आज जरूरत इस बात की है कि बिहार में रोजगार को लेकर नई सोच विकसित की जाए। केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय उद्योग, व्यापार और निजी क्षेत्र को भी मजबूत बनाना होगा। जब राज्य में बड़ी कंपनियां आएंगी तो हजारों नहीं बल्कि लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे बिहार का विकास तेज होगा और युवाओं का भविष्य भी सुरक्षित हो सकेगा।

जनता का कहना है कि बिहार में प्रतिभा और मेहनत की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ सही अवसर और रोजगार देने वाली कंपनियों की है। अगर आने वाले वर्षों में उद्योगों का विस्तार होता है तो बिहार देश के विकसित राज्यों की सूची में तेजी से आगे बढ़ सकता

आलोक कुमार