आईपीएल कोई व्हाट्सएप ग्रुप या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं
भारत में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा एक विशाल उद्योग और सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है। ऐसे में जब किसी राज्य के लिए आईपीएल टीम की मांग उठती है, तो लोगों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं। बिहार जैसे बड़े और प्रतिभाशाली राज्य के क्रिकेट प्रेमियों की यह इच्छा स्वाभाविक है कि उनके राज्य की भी अपनी आईपीएल टीम हो। लेकिन वास्तविकता यह है कि आईपीएल टीम बनाना उतना आसान नहीं है, जितना सोशल मीडिया पोस्ट या राजनीतिक मंचों से बयान देकर दिखाया जाता है।
आईपीएल कोई व्हाट्सएप ग्रुप या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं है कि आज किसी नेता ने घोषणा कर दी और कल टीम तैयार हो गई। इंडियन प्रीमियर लीग पूरी तरह से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी Board of Control for Cricket in India के नियमों और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की प्रक्रिया से संचालित होती है। जब तक आधिकारिक रूप से नई टीमों के विस्तार यानी Expansion का फैसला नहीं लिया जाता, तब तक किसी भी राज्य को आईपीएल टीम दिलाने का दावा केवल राजनीतिक बयानबाजी या सोशल मीडिया नौटंकी ही माना जाएगा।
किसी भी नई आईपीएल टीम के लिए सबसे पहली जरूरत होती है आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की मंजूरी। यह परिषद तय करती है कि टूर्नामेंट में नई टीमों को शामिल करना है या नहीं। फिलहाल आईपीएल में दस टीमें खेल रही हैं और बीसीसीआई की ओर से नई टीमों को जोड़ने को लेकर कोई आधिकारिक चर्चा या प्रक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में “बिहार को जल्द आईपीएल टीम मिलेगी” जैसे बयान लोगों को भ्रमित करने वाले साबित हो सकते हैं।
दूसरी बड़ी शर्त होती है अरबों रुपये की बोली प्रक्रिया। आईपीएल फ्रेंचाइजी कोई साधारण क्लब नहीं होती। इसके लिए उद्योगपतियों और बड़े कारोबारी समूहों को हजारों करोड़ रुपये निवेश करने पड़ते हैं। नई टीमों के लिए बीसीसीआई टेंडर जारी करता है और फिर कंपनियां बोली लगाती हैं। पिछले विस्तार में लखनऊ और अहमदाबाद की टीमों के लिए रिकॉर्ड बोली लगी थी। इससे साफ है कि केवल राजनीतिक इच्छा से टीम नहीं बनती, बल्कि उसके पीछे बहुत बड़ा आर्थिक ढांचा चाहिए।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है विश्व स्तरीय स्टेडियम और बुनियादी ढांचा। आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए सिर्फ मैदान होना काफी नहीं है। आधुनिक ड्रेसिंग रूम, फ्लडलाइट, मीडिया सेंटर, सुरक्षा व्यवस्था, होटल सुविधा, एयर कनेक्टिविटी और दर्शकों के लिए उच्च स्तरीय इंतजाम जरूरी होते हैं। बिहार में लंबे समय तक क्रिकेट व्यवस्था अव्यवस्थित रही है। हालांकि पटना स्थित Moin-ul-Haq Stadium के पुनर्विकास की चर्चा चल रही है और राजगीर में भी खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास हो रहा है, लेकिन अभी राज्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं तक पहुंचने में काफी मेहनत करनी होगी।
सिर्फ स्टेडियम बन जाने से भी काम पूरा नहीं होता। किसी भी राज्य में क्रिकेट संस्कृति को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर अकादमी, प्रशिक्षक, फिटनेस सेंटर और प्रतियोगिताओं की जरूरत होती है। बिहार में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन उन्हें सही मंच और अवसर नहीं मिल पाता। यही कारण है कि कई युवा दूसरे राज्यों की ओर रुख करते हैं। यदि वास्तव में बिहार को भविष्य में आईपीएल टीम चाहिए, तो पहले मजबूत क्रिकेट सिस्टम तैयार करना होगा।
घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन भी बेहद जरूरी है। रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंटों में बिहार की टीम को प्रतिस्पर्धी बनना होगा। जब किसी राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तभी वहां की क्रिकेट पहचान मजबूत होती है। गुजरात, राजस्थान या उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने पहले घरेलू क्रिकेट में अपनी स्थिति मजबूत की, उसके बाद वहां क्रिकेट निवेश और आईपीएल की संभावनाएं बढ़ीं।
स्थानीय टी20 लीग का विकास भी महत्वपूर्ण है। तमिलनाडु प्रीमियर लीग, कर्नाटक प्रीमियर लीग और महाराष्ट्र प्रीमियर लीग जैसी प्रतियोगिताओं ने कई खिलाड़ियों को पहचान दिलाई है। बिहार में भी एक मजबूत और पारदर्शी राज्य स्तरीय टी20 लीग विकसित करनी होगी, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को स्काउट्स और चयनकर्ताओं तक पहुंचने का मौका मिले। केवल सोशल मीडिया पर “बिहार को आईपीएल टीम दो” लिख देने से खिलाड़ियों का भविष्य नहीं बनता।
आज राजनीति और सोशल मीडिया के दौर में हर मुद्दे को प्रचार का माध्यम बना दिया जाता है। कुछ नेता और प्रभावशाली लोग क्रिकेट प्रेमियों की भावनाओं को भड़काकर लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि क्रिकेट का विकास पोस्टर, बयान और वायरल पोस्ट से नहीं होता। इसके लिए वर्षों की योजना, निवेश और ईमानदार खेल नीति की जरूरत होती है। खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों को सपने दिखाने के बजाय उन्हें वास्तविक अवसर और संसाधन देने चाहिए।
यह भी सच है कि बिहार जैसे बड़े राज्य में अपार संभावनाएं हैं। यहां क्रिकेट के प्रति दीवानगी किसी बड़े क्रिकेट राज्य से कम नहीं है। गांव-गांव में प्रतिभाएं मौजूद हैं। जरूरत है उन्हें सही प्रशिक्षण, चयन प्रक्रिया और आधुनिक सुविधाएं देने की। यदि राज्य सरकार, उद्योग जगत और क्रिकेट प्रशासन मिलकर दीर्घकालिक योजना बनाएं, तो भविष्य में बिहार भी आईपीएल टीम पाने की दौड़ में शामिल हो सकता है।
लेकिन वर्तमान परिस्थिति में यह कहना कि केवल मांग उठाने से बिहार को आईपीएल टीम मिल जाएगी, वास्तविकता से दूर है। आईपीएल टीम पाने का रास्ता भावनाओं से नहीं, बल्कि मजबूत ढांचे, पारदर्शी प्रशासन, वित्तीय क्षमता और क्रिकेट प्रदर्शन से होकर गुजरता है। बिहार, झारखंड, अरुणाचल या किसी भी राज्य के क्रिकेट प्रेमियों को सिर्फ सपने नहीं, बल्कि एक स्पष्ट और आधिकारिक रोडमैप चाहिए। तभी क्रिकेट का वास्तविक विकास संभव होगा और भविष्य में किसी नए राज्य को आईपीएल में सम्मानजनक जगह मिल सकेगी।
आलोक कुमार
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