बिहार में अब नौकरी नहीं, रोजगार देने वाली कंपनियों की जरूरत, युवा भविष्य को लेकर चिंतित
बिहार के युवाओं के बीच अब एक नई सोच तेजी से उभर रही है। लोगों का कहना है कि केवल सरकारी नौकरी मांगने से राज्य का विकास संभव नहीं है, बल्कि बिहार को ऐसी बड़ी कंपनियों और उद्योगों की जरूरत है जो लाखों लोगों को रोजगार दे सकें। आज भी बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। रोजगार की कमी के कारण कई परिवार आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
राज्य के अलग-अलग जिलों से लगातार यह आवाज उठ रही है कि बिहार में उद्योगों का विस्तार होना चाहिए। युवाओं का कहना है कि अगर राज्य में फैक्ट्री, आईटी कंपनी, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और छोटे-बड़े उद्योग लगाए जाएं तो यहां के लोगों को अपने ही राज्य में रोजगार मिल सकता है। इससे पलायन भी कम होगा और बिहार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
आज बिहार का बड़ा युवा वर्ग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों बिता देता है। कई युवा दिन-रात मेहनत करने के बाद भी नौकरी पाने में सफल नहीं हो पाते। इससे मानसिक तनाव और निराशा भी बढ़ रही है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले युवाओं के सामने स्थिति और कठिन है क्योंकि वहां रोजगार के अवसर बहुत कम हैं। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई पर भारी खर्च करते हैं, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद भी नौकरी नहीं मिलने से चिंता बढ़ जाती है।
कई युवाओं का कहना है कि बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है। यहां के छात्र देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर अपनी मेहनत और क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर वही अवसर बिहार में उपलब्ध कराया जाए तो राज्य के युवा अपने घर के पास रहकर भी बेहतर काम कर सकते हैं। इससे परिवार भी मजबूत होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।व्यापार और उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि बिहार में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। अच्छी सड़क, बिजली, इंटरनेट और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से बड़ी कंपनियां राज्य में आने के लिए तैयार हो सकती हैं। अगर सरकार उद्योग लगाने वालों को सुविधाएं दे तो आने वाले समय में बिहार रोजगार का बड़ा केंद्र बन सकता है।
गांव के लोगों का कहना है कि रोजगार की कमी के कारण बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों में जाकर काम करते हैं। कई लोग परिवार से दूर रहकर मेहनत मजदूरी करने को मजबूर हैं। अगर बिहार में ही रोजगार के अवसर बढ़ें तो लोगों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह से फायदा होगा।
महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि छोटे उद्योग, सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, ऑनलाइन काम और स्वरोजगार योजनाओं को बढ़ावा देकर महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इससे परिवार की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, युवाओं को आधुनिक तकनीक और रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग भी मिलनी चाहिए। अगर राज्य में स्किल सेंटर और टेक्निकल संस्थानों का विस्तार होगा तो युवा निजी कंपनियों में भी आसानी से काम कर सकेंगे।
आज जरूरत इस बात की है कि बिहार में रोजगार को लेकर नई सोच विकसित की जाए। केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय उद्योग, व्यापार और निजी क्षेत्र को भी मजबूत बनाना होगा। जब राज्य में बड़ी कंपनियां आएंगी तो हजारों नहीं बल्कि लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे बिहार का विकास तेज होगा और युवाओं का भविष्य भी सुरक्षित हो सकेगा।
जनता का कहना है कि बिहार में प्रतिभा और मेहनत की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ सही अवसर और रोजगार देने वाली कंपनियों की है। अगर आने वाले वर्षों में उद्योगों का विस्तार होता है तो बिहार देश के विकसित राज्यों की सूची में तेजी से आगे बढ़ सकता
आलोक कुमार
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