नकटा दियारा की उम्मीदें और नेताओं के पत्र: क्या अब बनेगा एप्रोच रोड?
लोकतंत्र में जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों और सरकार की ओर आशा भरी निगाहों से देखती है। जब कोई समस्या वर्षों तक बनी रहती है और उसके समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठते हैं, तब लोगों में निराशा और असंतोष स्वाभाविक रूप से बढ़ने लगता है। कुछ ऐसी ही स्थिति पटना और सारण जिले के बीच स्थित नकटा दियारा क्षेत्र के लोगों की दिखाई दे रही है। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि जिस प्रकार अदालतों में किसी मामले की सुनवाई के दौरान बार-बार "तारीख पर तारीख" मिलने से न्याय में देरी होती है, उसी प्रकार उनकी समस्या के समाधान के लिए केवल "लेटर पर लेटर" भेजे जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई परिणाम दिखाई नहीं दे रहा है।
नकटा दियारा नया टोला से पिलर संख्या-16 के बीच एप्रोच रोड अथवा रैम्प निर्माण की मांग कोई नई नहीं है। यह मांग वर्षों से स्थानीय लोगों द्वारा उठाई जाती रही है। क्षेत्र के ग्रामीणों का मानना है कि यदि दीघा-सोनपुर छह लेन पुल के साथ इस स्थान पर एप्रोच रोड और रैम्प का निर्माण हो जाए तो हजारों लोगों का जीवन आसान हो जाएगा। इससे न केवल आवागमन की सुविधा बढ़ेगी बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार से जुड़े अवसर भी विकसित होंगे।
इस मुद्दे को लेकर दियारा विकास संघर्ष समिति लगातार सक्रिय रही है। समिति ने जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के समक्ष अपनी बात रखी है। आंदोलन, ज्ञापन और पत्राचार के माध्यम से इस मांग को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। समिति का तर्क है कि जब इतना बड़ा राष्ट्रीय महत्व का पुल बन रहा है तो उसके आसपास रहने वाले लोगों को भी उसका लाभ मिलना चाहिए। यदि स्थानीय लोगों के लिए पहुंच मार्ग ही उपलब्ध नहीं होगा तो विकास की इस विशाल परियोजना का पूरा लाभ क्षेत्रवासियों तक नहीं पहुंच पाएगा।
इस मामले में पहले पटना साहिब संसदीय क्षेत्र के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इस मांग का समर्थन किया था। इससे क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब उनकी समस्या का समाधान होगा। हालांकि समय बीतता गया और निर्माण कार्य को लेकर कोई स्पष्ट प्रगति सामने नहीं आई। परिणामस्वरूप लोगों की बेचैनी बढ़ती गई।
अब इस मुद्दे को एक नया राजनीतिक और सामाजिक समर्थन तब मिला है जब पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को स्मरण पत्र भेजा है। 1 जून 2026 को भेजे गए इस पत्र में उन्होंने ग्राम पंचायत नकटा दियारा नया टोला से पिलर संख्या-16 के बीच एप्रोच रोड और रैम्प निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह पत्र केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि स्थानीय जनता की वर्षों पुरानी मांग को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास माना जा रहा है।
पप्पू यादव ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि दियारा विकास संघर्ष समिति द्वारा पूर्व में भी इस विषय पर निवेदन किया गया था। उन्होंने कहा कि दीघा-सोनपुर छह लेन पुल के निर्माण के साथ यदि स्थानीय लोगों के लिए उचित संपर्क मार्ग नहीं बनाया गया तो क्षेत्र की बड़ी आबादी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने से वंचित रह जाएगी। उन्होंने इस समस्या को जनहित से जुड़ा विषय बताते हुए शीघ्र प्रशासनिक और तकनीकी कार्रवाई की मांग की है।
वास्तव में दियारा क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति ऐसी होती है कि वहां रहने वाले लोगों को वर्षभर अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बाढ़, कटाव, परिवहन की कमी और सीमित सरकारी सुविधाएं यहां के जीवन को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। ऐसे में यदि कोई बड़ा पुल या सड़क परियोजना उनके निकट बन रही हो तो स्वाभाविक रूप से लोगों को उससे काफी उम्मीदें होती हैं। नकटा दियारा के लोगों की भी यही अपेक्षा है कि विकास की इस परियोजना से उन्हें सीधे लाभ मिले।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एप्रोच रोड और रैम्प नहीं होने के कारण उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में समय लगता है, विद्यार्थियों को शिक्षा संस्थानों तक पहुंचने में परेशानी होती है और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। इसलिए ग्रामीण इसे केवल सड़क निर्माण का विषय नहीं बल्कि जीवन और विकास से जुड़ा मुद्दा मानते हैं।
हालांकि यह भी सच है कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग या पुल परियोजना में तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाएं होती हैं। कई बार भूमि, डिजाइन, लागत और स्वीकृति जैसी वजहों से परियोजनाओं में देरी हो जाती है। लेकिन जब किसी मांग को लेकर लगातार जनप्रतिनिधि पत्र लिख रहे हों और जनता लंबे समय से आवाज उठा रही हो, तब सरकार से अपेक्षा बढ़ जाती है कि वह स्थिति स्पष्ट करे और आवश्यक निर्णय ले।
आज नकटा दियारा के लोग केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई देखना चाहते हैं। रविशंकर प्रसाद के पत्र के बाद अब पप्पू यादव का स्मरण पत्र इस मांग को और मजबूती प्रदान करता है। यह दर्शाता है कि राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर विभिन्न जनप्रतिनिधि इस विषय को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। अब निगाहें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय पर टिकी हैं कि वह इस मांग पर क्या निर्णय लेता है।
यदि एप्रोच रोड और रैम्प का निर्माण होता है तो यह केवल एक निर्माण कार्य नहीं होगा, बल्कि दियारा क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए विकास का नया द्वार खुलेगा। इसलिए क्षेत्रवासियों की अपेक्षा है कि "लेटर पर लेटर" की प्रक्रिया अब समाप्त हो और उसकी जगह "एक्शन पर एक्शन" दिखाई दे, ताकि वर्षों से लंबित यह मांग वास्तविकता का रूप ले सके।
आलोक कुमार
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