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बुधवार, 3 जून 2026

Bihar : लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया

 दियारा के विकास की आवाज बना दियारा विकास संघर्ष समिति, 14 जून को होगा विशाल महाधरना

पटना के दियारा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को लेकर लंबे समय से संघर्षरत दियारा विकास संघर्ष समिति एक बार फिर जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलन की राह पर आगे बढ़ रही है। समिति ने शुरुआत से ही जनता की समस्याओं को सुनने, समझने और उन्हें प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने का कार्य किया है। केवल शिकायत करने तक सीमित रहने के बजाय संगठन ने गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया, उनकी भागीदारी सुनिश्चित की और फिर संवाद तथा संपर्क के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास किया। जब इन प्रयासों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो समिति ने लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया।

इसी क्रम में दिनांक 14 जून 2026, रविवार को अपराह्न 1 बजे से दीघा स्थित जेपी सेतु गोलंबर के समीप दियारा विकास संघर्ष समिति के तत्वावधान में एक विशाल महाधरना आयोजित किया जाएगा। यह धरना दियारा क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है। समिति की मुख्य मांग है कि जेपी सेतु के समानांतर निर्मित एनएच-139डब्ल्यू सिक्स लेन पथ से ग्राम पंचायत नकटा दियारा को जोड़ने के लिए एक सुलभ और स्थायी अप्रोच रोड का निर्माण कराया जाए।

दियारा क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आधुनिक सिक्स लेन सड़क उनके इलाके के पास से गुजर रही है, लेकिन उससे जुड़ने के लिए उचित संपर्क मार्ग उपलब्ध नहीं है। इसके कारण हजारों ग्रामीणों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि उत्पादों के विपणन और रोजगार के अवसरों तक पहुंच भी प्रभावित होती है। ऐसे में अप्रोच रोड की मांग केवल सड़क निर्माण का विषय नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ा मुद्दा बन गया है।

महाधरना की तैयारी को लेकर हाल ही में श्री राधे कृष्ण उत्सव हॉल, दीघा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में हजारों लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने, उनके आने-जाने तथा भोजन-पानी सहित अन्य व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता नकटा दियारा के मुखिया श्री रामावधेश सिंह यादव ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी श्री त्रिभुवन प्रसाद यादव ने निभाई।

बैठक में क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बुद्धिजीवियों ने भाग लिया और अपने विचार रखे। पटना महानगर के उपमेयर प्रतिनिधि सह दीघा विधानसभा के भावी प्रत्याशी श्री पप्पू राय ने कहा कि दियारा क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को अब और अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विकास का लाभ तभी सार्थक होगा जब अंतिम व्यक्ति तक उसकी पहुंच सुनिश्चित हो। नकटा दियारा और आसपास के गांवों के लोगों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

बैठक में उपस्थित पूर्व दानापुर विधानसभा प्रत्याशी सुश्री वर्षा ने कहा कि दियारा क्षेत्र के लोग वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आंदोलन को जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला अभियान बताते हुए अधिकाधिक लोगों से महाधरना में भाग लेने की अपील की।              

पुरानी पानापुर के मुखिया श्री सुभाष यादव, कसमर पंचायत के मुखिया श्री अनिल राय, पूर्व पंचायत समिति सदस्य श्री रामशंकर सिंह, श्री जनार्दन राय तथा श्री यदु प्रसाद सिंह ने भी अपने संबोधन में कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि पूरे दियारा क्षेत्र के विकास का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि जब तक क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

बैठक में प्रोफेसर बेनीमाधव सिंह, श्यामबहादुर राय, कामता प्रसाद, ईश्वरधारी सिंह, दशरथ प्रसाद यादव, भोजपुरी फिल्म जगत के लोकप्रिय कलाकार डॉक्टर सन्नी सरगम यादव, पूर्व उप प्रमुख रामबलक राय सहित दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ताओं और समिति के सदस्यों ने भाग लिया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि दियारा क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सड़क संपर्क अत्यंत आवश्यक है।

दियारा विकास संघर्ष समिति का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसमस्याओं के समाधान के लिए शांतिपूर्ण और संगठित जनआंदोलन प्रभावी माध्यम होता है। समिति ने पहले जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग रखी। विभिन्न स्तरों पर संवाद और संपर्क भी स्थापित किया गया। लेकिन जब मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई तो समिति ने जनता की आवाज को और मजबूती से उठाने के लिए महाधरना का निर्णय लिया।

विशेष बात यह है कि इस महाधरना को देश के लोकप्रिय सांसद श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव भी संबोधित करेंगे। उनके आगमन से आंदोलन को व्यापक राजनीतिक और सामाजिक समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि पप्पू यादव हमेशा जनसरोकारों के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे हैं और दियारा क्षेत्र की समस्याओं के प्रति भी गंभीर हैं।

अब पूरे दियारा क्षेत्र की निगाहें 14 जून को होने वाले इस महाधरना पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि यह आंदोलन सरकार और प्रशासन का ध्यान उनकी समस्याओं की ओर आकर्षित करेगा तथा नकटा दियारा को एनएच-139डब्ल्यू सिक्स लेन सड़क से जोड़ने की मांग को नई गति मिलेगी। यदि यह मांग पूरी होती है तो न केवल आवागमन आसान होगा बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे पूरे दियारा क्षेत्र के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

आलोक कुमार

Bihar : नकटा दियारा की उम्मीदें और नेताओं के पत्र: क्या अब बनेगा एप्रोच रोड?

 नकटा दियारा की उम्मीदें और नेताओं के पत्र: क्या अब बनेगा एप्रोच रोड?

लोकतंत्र में जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों और सरकार की ओर आशा भरी निगाहों से देखती है। जब कोई समस्या वर्षों तक बनी रहती है और उसके समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठते हैं, तब लोगों में निराशा और असंतोष स्वाभाविक रूप से बढ़ने लगता है। कुछ ऐसी ही स्थिति पटना और सारण जिले के बीच स्थित नकटा दियारा क्षेत्र के लोगों की दिखाई दे रही है। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि जिस प्रकार अदालतों में किसी मामले की सुनवाई के दौरान बार-बार "तारीख पर तारीख" मिलने से न्याय में देरी होती है, उसी प्रकार उनकी समस्या के समाधान के लिए केवल "लेटर पर लेटर" भेजे जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई परिणाम दिखाई नहीं दे रहा है।

नकटा दियारा नया टोला से पिलर संख्या-16 के बीच एप्रोच रोड अथवा रैम्प निर्माण की मांग कोई नई नहीं है। यह मांग वर्षों से स्थानीय लोगों द्वारा उठाई जाती रही है। क्षेत्र के ग्रामीणों का मानना है कि यदि दीघा-सोनपुर छह लेन पुल के साथ इस स्थान पर एप्रोच रोड और रैम्प का निर्माण हो जाए तो हजारों लोगों का जीवन आसान हो जाएगा। इससे न केवल आवागमन की सुविधा बढ़ेगी बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार से जुड़े अवसर भी विकसित होंगे।

इस मुद्दे को लेकर दियारा विकास संघर्ष समिति लगातार सक्रिय रही है। समिति ने जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के समक्ष अपनी बात रखी है। आंदोलन, ज्ञापन और पत्राचार के माध्यम से इस मांग को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। समिति का तर्क है कि जब इतना बड़ा राष्ट्रीय महत्व का पुल बन रहा है तो उसके आसपास रहने वाले लोगों को भी उसका लाभ मिलना चाहिए। यदि स्थानीय लोगों के लिए पहुंच मार्ग ही उपलब्ध नहीं होगा तो विकास की इस विशाल परियोजना का पूरा लाभ क्षेत्रवासियों तक नहीं पहुंच पाएगा।


इस मामले में पहले पटना साहिब संसदीय क्षेत्र के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इस मांग का समर्थन किया था। इससे क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब उनकी समस्या का समाधान होगा। हालांकि समय बीतता गया और निर्माण कार्य को लेकर कोई स्पष्ट प्रगति सामने नहीं आई। परिणामस्वरूप लोगों की बेचैनी बढ़ती गई।

अब इस मुद्दे को एक नया राजनीतिक और सामाजिक समर्थन तब मिला है जब पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को स्मरण पत्र भेजा है। 1 जून 2026 को भेजे गए इस पत्र में उन्होंने ग्राम पंचायत नकटा दियारा नया टोला से पिलर संख्या-16 के बीच एप्रोच रोड और रैम्प निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह पत्र केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि स्थानीय जनता की वर्षों पुरानी मांग को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास माना जा रहा है।

पप्पू यादव ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि दियारा विकास संघर्ष समिति द्वारा पूर्व में भी इस विषय पर निवेदन किया गया था। उन्होंने कहा कि दीघा-सोनपुर छह लेन पुल के निर्माण के साथ यदि स्थानीय लोगों के लिए उचित संपर्क मार्ग नहीं बनाया गया तो क्षेत्र की बड़ी आबादी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने से वंचित रह जाएगी। उन्होंने इस समस्या को जनहित से जुड़ा विषय बताते हुए शीघ्र प्रशासनिक और तकनीकी कार्रवाई की मांग की है।

वास्तव में दियारा क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति ऐसी होती है कि वहां रहने वाले लोगों को वर्षभर अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बाढ़, कटाव, परिवहन की कमी और सीमित सरकारी सुविधाएं यहां के जीवन को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। ऐसे में यदि कोई बड़ा पुल या सड़क परियोजना उनके निकट बन रही हो तो स्वाभाविक रूप से लोगों को उससे काफी उम्मीदें होती हैं। नकटा दियारा के लोगों की भी यही अपेक्षा है कि विकास की इस परियोजना से उन्हें सीधे लाभ मिले।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एप्रोच रोड और रैम्प नहीं होने के कारण उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में समय लगता है, विद्यार्थियों को शिक्षा संस्थानों तक पहुंचने में परेशानी होती है और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। आपातकालीन परिस्थितियों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। इसलिए ग्रामीण इसे केवल सड़क निर्माण का विषय नहीं बल्कि जीवन और विकास से जुड़ा मुद्दा मानते हैं।                                                                          

हालांकि यह भी सच है कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग या पुल परियोजना में तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाएं होती हैं। कई बार भूमि, डिजाइन, लागत और स्वीकृति जैसी वजहों से परियोजनाओं में देरी हो जाती है। लेकिन जब किसी मांग को लेकर लगातार जनप्रतिनिधि पत्र लिख रहे हों और जनता लंबे समय से आवाज उठा रही हो, तब सरकार से अपेक्षा बढ़ जाती है कि वह स्थिति स्पष्ट करे और आवश्यक निर्णय ले।

आज नकटा दियारा के लोग केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई देखना चाहते हैं। रविशंकर प्रसाद के पत्र के बाद अब पप्पू यादव का स्मरण पत्र इस मांग को और मजबूती प्रदान करता है। यह दर्शाता है कि राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर विभिन्न जनप्रतिनिधि इस विषय को महत्वपूर्ण मान रहे हैं। अब निगाहें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय पर टिकी हैं कि वह इस मांग पर क्या निर्णय लेता है।

यदि एप्रोच रोड और रैम्प का निर्माण होता है तो यह केवल एक निर्माण कार्य नहीं होगा, बल्कि दियारा क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए विकास का नया द्वार खुलेगा। इसलिए क्षेत्रवासियों की अपेक्षा है कि "लेटर पर लेटर" की प्रक्रिया अब समाप्त हो और उसकी जगह "एक्शन पर एक्शन" दिखाई दे, ताकि वर्षों से लंबित यह मांग वास्तविकता का रूप ले सके।

आलोक कुमार

मंगलवार, 26 मई 2026

Bihar : कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में मलबे का ढेर लग गया

 पटना में अतिक्रमण पर चला बुलडोजर, कार शोरूम और सर्विस सेंटर ध्वस्त


पटना में गंगा तट के समीप अवैध निर्माणों के खिलाफ नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। कुर्जी क्षेत्र में चलाए गए इस अभियान में एक नामी कार कंपनी के शोरूम और दो सर्विस सेंटरों को ध्वस्त कर दिया गया। सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में मलबे का ढेर लग गया। नगर निगम ने दावा किया कि करीब एक बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को लेकर पूरे शहर में चर्चा तेज हो गई है।

पटना नगर निगम द्वारा चलाया गया यह अभियान राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों और भवन निर्माण उपविधियों के उल्लंघन के खिलाफ था। निगम अधिकारियों के अनुसार गंगा तट के पास जिन इमारतों का निर्माण किया गया था, वे नियमों के विरुद्ध थीं। पर्यावरणीय मानकों और नदी तट संरक्षण संबंधी कानूनों का पालन नहीं किया गया था। इसी कारण नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।

नगर आयुक्त यशपाल मीणा की निगरानी में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अभियान सुबह करीब छह बजे शुरू हुआ और कई घंटों तक चला। कार्रवाई के दौरान निगम के सभी अपर नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त, पाटलिपुत्र, बांकीपुर और पटना सिटी अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी मौके पर मौजूद रहे। किसी प्रकार की अव्यवस्था या विरोध की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से लगभग 100 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी।

ध्वस्तीकरण अभियान में भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। छह जेसीबी, एक पोकलेन मशीन, एक हाइड्रा और एक वाइब्रेटर मशीन की मदद से अवैध निर्माणों को गिराया गया। विशाल भवनों के टूटने के बाद वहां ईंट, सीमेंट, लोहे की सरिया और अन्य निर्माण सामग्री का बड़ा ढेर लग गया। पूरे इलाके में धूल और मलबे का दृश्य दिखाई देता रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मशीनों की सहायता से भूमि को पूरी तरह खाली कराया गया।

इस अभियान की खास बात यह रही कि पूरी कार्रवाई की निगरानी ड्रोन कैमरे से की गई। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, नियमों के विरुद्ध निर्माण और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में भी ऐसे अवैध निर्माणों के खिलाफ नियमित और सख्त अभियान जारी रहेगा।

दरअसल, गंगा तट क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी पहले से चल रही थी। अप्रैल महीने में नगर निगम ने दीघा से बांस घाट तक सीमांकन अभियान चलाया था। नगर निगम मुख्यालय और संबंधित अंचल कार्यालयों की संयुक्त टीम ने गंगा किनारे स्थित भवनों और जमीनों का निरीक्षण किया था। उन निर्माणों को चिन्हित किया गया था जिन पर 2023 में विजिलेंस केस के तहत कार्रवाई के आदेश दिए गए थे।

नगर निगम के अनुसार जिन संपत्तियों पर अवैध निर्माण की शिकायतें थीं, उन्हें पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था। नोटिस के बाद संबंधित भवनों के अवैध हिस्सों का सीमांकन किया गया। कई स्थानों पर पूरी इमारत को अवैध घोषित किया गया, जबकि कुछ जगहों पर केवल कुछ मंजिलों या आंशिक हिस्सों को नियम विरुद्ध पाया गया। कुल 19 संपत्तियों पर विजिलेंस केस चलाया गया था और उनमें कार्रवाई के आदेश पारित किए गए थे। सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया गया है।

गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में निर्माण को लेकर भवन उपविधियों में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। नियमों के अनुसार गंगा नदी की बाहरी सीमा, जिसे सिंचाई विभाग निर्धारित करता है, से 200 मीटर की परिधि के भीतर किसी भी नए भवन के निर्माण या पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि विरासत भवनों की मरम्मत और जीर्णोद्धार को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।

इसी प्रकार अन्य नदियों के मामले में नदी की बाहरी सीमा से 100 मीटर की दूरी तक निर्माण पर रोक है। राज्य सरकार आवश्यकता के अनुसार दूरी तय कर सकती है और संबंधित नदियों की सूची अधिसूचित कर सकती है। नदी की वास्तविक सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित माना गया है। इन नियमों का उद्देश्य नदी तटों को सुरक्षित रखना, पर्यावरण संतुलन बनाए रखना और बाढ़ जैसी आपदाओं के जोखिम को कम करना है।

हालांकि भवन उपविधियों में यह भी व्यवस्था है कि योजना प्राधिकरण या सरकारी एजेंसियां सरकार की मंजूरी से नदी तटों, घाटों के विकास और सुंदरीकरण से जुड़े कार्य कर सकती हैं। लेकिन निजी व्यवसायिक निर्माणों को इसके लिए सख्त नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

पटना नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद शहर में अवैध निर्माणों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर लोग इसे पर्यावरण संरक्षण और सरकारी जमीन बचाने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अचानक हुए ध्वस्तीकरण को लेकर प्रभावित पक्षों में नाराजगी भी देखी जा रही है। लेकिन प्रशासन का कहना है कि नोटिस, सीमांकन और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही कार्रवाई की गई है।

कुर्जी क्षेत्र में बुलडोजर चलने के बाद यह साफ संकेत मिल गया है कि गंगा तट और सरकारी जमीनों पर अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ अब प्रशासन सख्त रुख अपनाने जा रहा है। आने वाले समय में दीघा से बांस घाट तक अन्य चिन्हित अवैध संरचनाओं पर भी कार्रवाई तेज होने की संभावना है।

आलोक कुमार

Bihar : यह विवाद और बड़ा सामाजिक आंदोलन बन सकता है

                             पटना के दीघा से राजापुल तक फैला जमीन विवाद 


पटना के दीघा से राजापुल तक फैला जमीन विवाद अब केवल भू-अधिकार का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह हजारों परिवारों के अस्तित्व, सम्मान और भविष्य से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। रजिस्टर-2 यानी जमाबंदी पंजी के कथित रूप से गायब होने और उसके बाद स्थानीय जमीनों को अचानक “खासमहाल” घोषित करने की कार्रवाई ने इलाके के लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। वर्षों से अपने घरों, दुकानों और पुश्तैनी जमीनों पर बसे लोग अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई बार स्थानीय लोग सड़कों पर उतर चुके हैं और सरकार से न्याय की मांग कर चुके हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता नागेंद्र सिंह ने इस मुद्दे को केवल जमीन विवाद नहीं, बल्कि “एक व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास को अवरुद्ध करने वाली सरकारी कार्रवाई” बताया है। उनका कहना है कि जब किसी व्यक्ति से उसकी जमीन, घर और मालिकाना अधिकार छीनने की कोशिश होती है, तो उसका आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान दोनों प्रभावित होते हैं। भूमि केवल संपत्ति नहीं होती, बल्कि परिवार की मेहनत, इतिहास और भविष्य की सुरक्षा का आधार भी होती है।

इस पूरे विवाद की जड़ में रजिस्टर-2 यानी जमाबंदी पंजी का गायब होना बताया जा रहा है। बिहार में इन दिनों भूमि सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। इसी दौरान दीघा-राजापुल इलाके से लगातार शिकायतें सामने आईं कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड के पन्ने गायब हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन जमीनों के दस्तावेज रिकॉर्ड से हटाए गए, उन्हें बाद में सरकारी जमीन यानी “खासमहाल” घोषित कर दिया गया। इससे दशकों से बसे हजारों परिवारों पर बेदखली का खतरा मंडराने लगा है।

स्थानीय रैयतों का कहना है कि उनके पास पुराने कर रसीद, बिजली बिल, मकान कर और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि वे लंबे समय से वहां रह रहे हैं। लेकिन जब सरकारी रिकॉर्ड में जमाबंदी ही गायब दिखा दी जाए, तो आम आदमी के लिए अपने अधिकार को साबित करना बेहद कठिन हो जाता है। लोगों का आरोप है कि यह सब किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसमें भू-माफिया और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत शामिल है।

दीघा क्षेत्र का महत्व भी इस विवाद को और गंभीर बनाता है। पटना का यह इलाका तेजी से विकसित हुआ है और यहां जमीन की कीमतें लगातार बढ़ी हैं। ऐसे में भूमि पर कब्जे और मालिकाना अधिकार को लेकर विवाद बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन यदि सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की बात सही साबित होती है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि जनता के भरोसे पर बड़ा हमला माना जाएगा।

इस मुद्दे को लेकर कई बार स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। लोगों का कहना है कि यदि उनके पूर्वजों के समय से बसे होने के बावजूद उन्हें अतिक्रमणकारी कहा जाएगा, तो यह अन्याय होगा। उनका सवाल है कि जब वर्षों तक सरकार उनसे टैक्स और विभिन्न शुल्क लेती रही, तब उनकी जमीन वैध थी, लेकिन अचानक अब उसे सरकारी जमीन कैसे बताया जा सकता है?

हालांकि, बिहार सरकार ने हाल के दिनों में खासमहाल जमीनों को लेकर राहतकारी नीति बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि जो लोग 50 से 100 वर्षों से खासमहाल जमीन पर बसे हुए हैं, उन्हें बेदखल करने के बजाय निर्धारित शुल्क लेकर पट्टा या मालिकाना हक दिया जाए। यदि यह नीति पारदर्शी तरीके से लागू होती है, तो हजारों परिवारों को राहत मिल सकती है। लेकिन लोगों का कहना है कि केवल नीति की घोषणा काफी नहीं है, बल्कि जमीन रिकॉर्ड में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है।

इस पूरे मामले में न्यायपालिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण बन जाती है। पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल रजिस्टर-2 में नाम दर्ज होना ही मालिकाना हक का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि जमीन का वास्तविक मालिक कौन है, इसका निर्णय दीवानी अदालत करेगी। इसका मतलब यह है कि यदि किसी व्यक्ति के पास अन्य वैध दस्तावेज और प्रमाण हैं, तो वह अदालत में अपने अधिकार की लड़ाई लड़ सकता है।

दीवानी न्यायालय यानी सिविल कोर्ट ऐसे ही नागरिक विवादों का निपटारा करता है। यहां संपत्ति, धन, अनुबंध, विवाह, पारिवारिक अधिकार और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई होती है। इन अदालतों का उद्देश्य किसी को सजा देना नहीं, बल्कि पीड़ित पक्ष के अधिकारों की रक्षा करना और न्याय सुनिश्चित करना होता है। दीघा-राजापुल विवाद में भी अंततः अदालतों की भूमिका अहम रहने वाली है।

लेकिन सवाल केवल कानूनी नहीं, मानवीय भी है। जिन परिवारों ने अपनी पूरी जिंदगी किसी जमीन पर बिताई हो, जिनके बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और सामाजिक पहचान उसी घर से जुड़ी हो, उनके सामने अचानक बेघर होने का डर खड़ा हो जाए तो यह स्थिति बेहद पीड़ादायक होती है। विकास और शहरीकरण जरूरी है, लेकिन उसके नाम पर गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराए, गायब हुए रजिस्टर-2 के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी तय करे और निर्दोष लोगों को परेशान होने से बचाए। साथ ही, जिन परिवारों के पास वैध प्रमाण हैं, उन्हें कानूनी सुरक्षा दी जाए। प्रशासन और जनता के बीच भरोसा तभी कायम रहेगा जब न्याय निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होता दिखाई देगा।

दीघा से राजापुल तक उठ रही आवाजें केवल जमीन बचाने की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि यह नागरिक अधिकार, सम्मान और न्याय की लड़ाई बन चुकी हैं। अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद और बड़ा सामाजिक आंदोलन बन सकता है।

आलोक कुमार 

सोमवार, 25 मई 2026

Bihar: एससीएन प्रोविंशियल हाउस के नवनिर्मित बी ब्लॉक का आशीर्वाद समारोह

 एससीएन प्रोविंशियल हाउस के नवनिर्मित बी ब्लॉक का आशीर्वाद समारोह 

एससीएन प्रोविंशियल हाउस के नवनिर्मित बी ब्लॉक का आशीर्वाद समारोह अत्यंत श्रद्धा, आनंद और कृतज्ञता के वातावरण में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक एवं यादगार अवसर पर अनेक फादर, सिस्टर्स, अतिथि, मित्र तथा शुभचिंतक उपस्थित होकर इस खुशी के पल के सहभागी बने। पूरे परिसर में उत्सव का माहौल था और सभी के चेहरों पर नई उपलब्धि की प्रसन्नता झलक रही थी।

कार्यक्रम की शुरुआत सिस्टर सोनाली सोरेन के स्वागत संबोधन एवं परिचय से हुई। उन्होंने बी ब्लॉक निर्माण परियोजना के इतिहास और उसकी यात्रा को संक्षेप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार इस भवन के निर्माण का सपना धीरे-धीरे ईश्वर की कृपा, दूरदर्शी योजना और अनेक उदार लोगों के सहयोग से साकार हुआ। उन्होंने निर्माण कार्य के प्रारंभिक चरण से लेकर इसके पूर्ण होने तक की यात्रा को याद करते हुए उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस कार्य में योगदान दिया।

आशीर्वाद समारोह का नेतृत्व चाकराम पल्ली के पल्ली पुरोहित फादर बारथालोमियो लकड़ा ने किया। उन्होंने नए भवन तथा उसमें निवास करने और आने वाले सभी लोगों के लिए ईश्वर से विशेष आशीष की प्रार्थना की। प्रार्थना और पवित्र जल के छिड़काव के साथ भवन को प्रभु को समर्पित किया गया। यह अवसर और भी विशेष बन गया जब सिस्टर रोज मेरी लकड़ा एवं सिस्टर मेरी जोसेफ ने फीता काटकर नए बी ब्लॉक का औपचारिक उद्घाटन किया। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत किया।

धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के दौरान प्रोविंशियल सिस्टर लतिका कोट्टुप्पल्लिल ने उन सभी लोगों के प्रति विशेष आभार प्रकट किया, जिन्होंने इस परियोजना की योजना और पूर्णता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि यह भवन केवल ईंट और पत्थरों से बना ढांचा नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास, विश्वास और सेवा भावना का प्रतीक है। उन्होंने विशेष रूप से सिस्टर फ्लाविया रोड्रिक्स की सराहना की, जिन्होंने निर्माण कार्य के दौरान निरंतर निगरानी, समर्पण और सक्रिय भागीदारी निभाई। उनकी मेहनत और जिम्मेदारी ने इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस अवसर पर भवन के वास्तुकार श्री रमन के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की गई। उनके रचनात्मक डिजाइन और पेशेवर विशेषज्ञता ने भवन को सुंदर एवं उपयोगी स्वरूप प्रदान किया। साथ ही ठेकेदार श्री रंजीत की भी प्रशंसा की गई, जिन्होंने पूरे निर्माण कार्य के दौरान ईमानदारी, सहयोग और अथक परिश्रम के साथ सभी कार्यों का समन्वय किया।

भोजन कक्ष में उपस्थित सभी अतिथियों के बीच निर्माण कार्य से जुड़े बिल्डरों की टीम को सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। कार्यक्रम में उन मजदूरों और श्रमिकों को भी विशेष रूप से याद किया गया, जिनके कठिन परिश्रम और त्याग के बिना इस भवन का निर्माण संभव नहीं हो सकता था। उनके योगदान को सम्मानपूर्वक स्मरण करते हुए सभी ने उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

पूरा समारोह भाईचारे, एकता और सहयोग की भावना से ओत-प्रोत था। यह केवल एक भवन के उद्घाटन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि विश्वास, समर्पण और सामूहिक प्रयास की सफलता का उत्सव था। उपस्थित सभी लोगों ने इस अवसर को ईश्वर की विशेष कृपा का प्रतीक माना।

अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थित सिस्टर्स के साथ सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। प्रेम, आत्मीयता और खुशी से भरे इस मिलन ने पूरे समारोह को और भी यादगार बना दिया। नए बी ब्लॉक का यह उद्घाटन आने वाले समय में सेवा, प्रार्थना और सामुदायिक जीवन के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में सदैव स्मरण किया जाएगा।

आलोक कुमार