बिहार विधानसभा में महिला-पुरुष संबंध को लेकर जो अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, उससे पूरा देश शर्मसार है
पटना.बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार है.आजकल 2005 से 2025 तक के शासन अवधि के बारे में अधिक जिक्र करने के दरम्यान कहते हैं कि इस अवधि में बहुत काम हुआ है.एक-एक काम हुआ है.1990 से 2005 तक कुछ काम नहीं हुआ है.इसी को लेकर मुख्यमंत्री बड़बोले हो जाते है.महिला विरोधी अमर्यादित व्यवहार करने पर उतारू हो जाते हैं.महिला नेताओं का कहना है कि इस पर राष्ट्रीय महिला आयोग को संज्ञान लेना चाहिए.उसी तरह माननीय उच्च और उच्चतम न्यायालय को भी संज्ञान लेना चाहिए.एनडीए को अपने मुख्यमंत्री को देना जेंडर सेंसिटाइजेशन का कोर्स कराना चाहिए.सृष्टिकर्ता की आत्ममुग्धता उनकी बीमारी हो गई है,इसका अपेक्षित इलाज होना चाहिए.महिला नेताओं का कहना का कहना है कि मुख्यमंत्री को भूलने की बीमारी होे गई है.इसका इलाज हो क्योंकि वे भूल गए हैं कि शेल्टर होम जैसा जघन्य कांड उन्हीं के राज में हुआ है. नालंदा में महिला युवती की नृशंसा हत्या की तस्वीर से पूरा देश मर्माहत है.हाल के दिनों में महिला बलात्कार और हत्या की बाढ़ आ गई है.राजधानी पटना असुरक्षित हो चला है.आपके कार्यालय के बगल में दोपहर में महिलाओं का चैन छीन लिया जाता है. डाकबंगला चौराहा पर बड़ी बड़ी लुट की घटनाएं घटित हो रही हैं. लगता है कि वीमेंस कॉलेज,मगध महिला कॉलेज,अरविंद महिला कॉलेज,जेडी वीमेंस कॉलेज सब उन्हीं के राज में बना है.राज्य का एक भी महिला कॉलेज इनके राज में नहीं बना है.10लाख से ज्यादा महिलाएं विभिन्न केंद्र और राज्य सरकारों में कार्यरत हैं उन्हें देश के कानून के मुताबिक न्यूनतम मजदूरी आधारित मासिक मानदेय नहीं दिया जाता है.
नीतीश जी! आपका जाना तय है.जाते जाते बिहारी भाषा में कहें तो छिया लेदर मत कराइए. जिस भाजपा से सर्टिफिकेट लेने के लिए आप व्याकुल हैं,वह आपको मिलने वाला नहीं है.वह आपको बीच मझधार में धकेल देंगे!
आलोक कुमार

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