ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना मैं तुम्हारे आंसुओं की बूंदें गिरते हुए देखता हूँ.मैं तुम्हें मेरा नाम पुकारते हुए सुनता हूँ.मैं जानता हूँ कि तुम मुझे नहीं देख सकते,लेकिन मैं तुम्हें वैसे ही थामे रहता हूँ.
आलोक कुमार
आलोक कुमार हूं। ग्रामीण प्रबंधन एवं कल्याण प्रशासन में डिप्लोमाधारी हूं। कई दशकों से पत्रकारिता में जुड़ा हूं। मैं समाज के किनारे रह गये लोगों के बारे में लिखता और पढ़ता हूं। इसमें आप लोग मेरी मदद कर सकते हैं। https://adsense.google.com/adsense/u/0/pub-4394035046473735/myads/sites/preview?url=chingariprimenews.blogspot.com chingariprimenews.com
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