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शनिवार, 30 मई 2026

Bihar : नकटा दियारा की जनता की मांग को अनसुना न करें केंद्र सरकार

 नकटा दियारा की जनता की मांग को अनसुना न करें केंद्र सरकार

पटना संसदीय क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री Ravi Shankar Prasad ने एक बार फिर गंगा नदी पर निर्माणाधीन छह लेन सड़क पुल परियोजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि जे.पी. सेतु के समानांतर बन रहे राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 139W के पुल पर पिलर संख्या 16 से 26 के बीच नकटा दियारा क्षेत्र के लिए एक अप्रोच अथवा रैंप रोड का निर्माण कराया जाए।

यह मांग केवल एक सड़क निर्माण की मांग नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन को आसान बनाने का प्रश्न है। सांसद रविशंकर प्रसाद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि दीघा-सोनपुर के बीच निर्माणाधीन छह लेन पुल का एक हिस्सा ग्राम नकटा दियारा एवं छितरचक क्षेत्र से होकर गुजरता है। यहां के ग्रामीण लंबे समय से चाहते हैं कि पुल से सीधे दियारा क्षेत्र को जोड़ने के लिए एक रैंप रोड बनाई जाए, जिससे वे मुख्य सड़क नेटवर्क से सीधे जुड़ सकें।

दियारा क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या उसका भौगोलिक स्वरूप है। गंगा और अन्य नदियों से घिरे इन इलाकों में वर्षा ऋतु और बाढ़ के दौरान आवागमन लगभग ठप हो जाता है। कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय, अनुमंडल मुख्यालय तथा प्रखंड मुख्यालय से कट जाता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में कठिनाई होती है, विद्यार्थियों
की पढ़ाई प्रभावित होती है तथा प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच बाधित हो जाती है। ऐसे में यदि निर्माणाधीन पुल से सीधे एक अप्रोच रोड उतार दी जाए तो यह क्षेत्र पूरे वर्ष राजधानी पटना और अन्य महत्वपूर्ण केंद्रों से जुड़ा रहेगा।

सांसद रविशंकर प्रसाद ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि इस मांग को पहले भी केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया था। उन्होंने अपने पूर्व पत्र का संदर्भ देते हुए बताया कि तत्कालीन बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री Nitin Nabin ने भी 14 मई 2025 को इस मांग का समर्थन किया था। इतना ही नहीं, इस विषय पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच हुई बैठक में भी चर्चा हुई थी। बाद में नकटा दियारा को किसी अन्य प्रस्तावित मार्ग से जोड़ने का विकल्प सामने आया, किंतु स्थानीय जनता इसे व्यावहारिक समाधान नहीं मानती।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शेरपुर के निकट प्रस्तावित वैकल्पिक संपर्क मार्ग नकटा दियारा के निवासियों के लिए सुविधाजनक नहीं होगा। नकटा दियारा से उस प्रस्तावित संपर्क मार्ग तक आने-जाने में लगभग 50 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। ग्रामीणों के अनुसार यह न केवल समय और धन की बर्बादी होगी, बल्कि बाढ़ के समय स्थिति और भी विकट हो जाएगी। गंगा नदी के फैलाव के कारण लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

नकटा दियारा कोई साधारण गांव नहीं है। यह एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक क्षेत्र है, जिसके संपर्क में लगभग दस पंचायतें आती हैं। अनुमानतः दो से तीन लाख लोगों की आबादी इस प्रस्तावित रैंप रोड से सीधे लाभान्वित होगी। यदि यहां अप्रोच रोड का निर्माण होता है तो कृषि, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। दियारा क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी तथा युवाओं को रोजगार और शिक्षा के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

इस मांग को केवल सांसद रविशंकर प्रसाद ने ही नहीं उठाया है। पूर्णिया (बिहार) के वर्तमान सांसद राजेश रंजन (पप्पू यादव) हैं।सांसद Pappu Yadav ने भी जनभावनाओं का सम्मान करते हुए अप्रोच रोड निर्माण का समर्थन किया है। वहीं बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री Ram Kripal Yadav भी इस मांग के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं। जब विभिन्न राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की राय एक समान हो तथा जनता की मांग भी स्पष्ट हो, तब सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

विकास का वास्तविक अर्थ केवल बड़े-बड़े पुल और राजमार्ग बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उन परियोजनाओं का लाभ स्थानीय जनता तक पहुंचे। यदि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाला पुल दियारा क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ नहीं दे पाता, तो विकास का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। एक रैंप रोड का निर्माण अपेक्षाकृत कम लागत में लाखों लोगों के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी देश में आधुनिक सड़क अवसंरचना के निर्माण के लिए जाने जाते हैं। उनके नेतृत्व में अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हुई हैं। ऐसे में नकटा दियारा की इस जनहितकारी मांग पर सकारात्मक निर्णय लेना न केवल स्थानीय जनता के हित में होगा, बल्कि यह सरकार की जनसंवेदनशीलता का भी परिचायक बनेगा।

आज आवश्यकता इस बात की है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित विभाग मिलकर नकटा दियारा क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों का पुनर्मूल्यांकन करें। यदि तकनीकी दृष्टि से संभव हो, तो पिलर संख्या 16 से 26 के बीच एक उपयुक्त अप्रोच अथवा रैंप रोड का निर्माण कराया जाए। इससे लाखों लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी और दियारा क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से स्थायी रूप से जुड़ सकेगा। जनता की अपेक्षा भी यही है कि उनकी आवाज को सुना जाए और विकास का लाभ उनके दरवाजे तक पहुंचाया जाए।

आलोक कुमार


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