संदेश

Political news लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

India : जब एंकर भी नेताओं की भाषा बोलने लगे

चित्र
  अंजना ओम कश्यप की भाषाई चूक और टीवी पत्रकारिता का बदलता स्वर भारतीय राजनीति में भाषाई चूक, अतिशयोक्ति और तंज लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। चुनावी मंचों पर नेता कई बार जल्दबाजी, भावनात्मक आवेश या राजनीतिक आक्रामकता में ऐसे शब्द बोल जाते हैं जो बाद में सोशल मीडिया पर मजाक और बहस का कारण बनते हैं। लेकिन अब ऐसा लगता है कि यह प्रवृत्ति केवल नेताओं तक सीमित नहीं रह गई है। टीवी चैनलों के एंकर और पत्रकार भी उसी शैली को अपनाते दिखाई दे रहे हैं। इसी संदर्भ में वरिष्ठ टीवी एंकर Anjana Om Kashyap का एक चर्चित भाषाई प्रसंग अक्सर चर्चा में आता है, जब उन्होंने लाइव बहस के दौरान मानक मुहावरे की जगह उसका अशुद्ध रूप बोल दिया। एक टीवी डिबेट के दौरान विपक्षी नेता पर टिप्पणी करते हुए अंजना ओम कश्यप ने “कौड़ी न जानना” की जगह “जानना न कौढ़ी” कह दिया। यह सुनते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। लोगों ने इस कथन के वीडियो क्लिप साझा किए और भाषा प्रेमियों ने इसे हिंदी मुहावरों की अशुद्ध प्रस्तुति का उदाहरण बताया। कुछ लोगों ने इसे सामान्य मानवीय भूल कहा, जबकि कुछ ने इसे टीवी पत्रकारिता की ग...

Bihar : सशक्त स्थायी समिति के चुनाव ने एक नया राजनीतिक अध्याय

चित्र
बेतिया नगर निगम की राजनीति में हाल ही में हुए सशक्त स्थायी समिति के चुनाव ने एक नया राजनीतिक अध्याय खोल दिया है। यह चुनाव केवल सात सदस्यों के चयन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने नगर निगम के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों और सत्ता संतुलन की वास्तविक तस्वीर भी सामने रख दी। चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि नगर निगम के अधिकांश पार्षद अब मेयर गरिमा देवी सिकारिया के नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं। परिणामस्वरूप, समिति की सातों सीटों पर विपक्षी खेमे के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर ली और मेयर समर्थक एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका। इसे नगर निगम के इतिहास में मेयर की सबसे बड़ी राजनीतिक पराजयों में से एक माना जा रहा है। सशक्त स्थायी समिति नगर निगम की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली संस्था होती है। नगर निगम के बजट, विकास योजनाओं, निर्माण कार्यों, निविदाओं की स्वीकृति और विभिन्न प्रशासनिक प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लेने में इस समिति की प्रमुख भूमिका होती है। ऐसे में समिति में बहुमत होना किसी भी मेयर के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन इस चुनाव में जो परिणाम सा...

India : सीसीबीआई के अधिकारियों ने केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन को किया सम्मानित

चित्र
  सीसीबीआई के अधिकारियों ने केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन को किया सम्मानित नई दिल्ली। भारत के कैथोलिक बिशप सम्मेलन (CCBI) के अधिकारियों ने केरल के नव-शपथ ग्रहण किए हुए मुख्यमंत्री V. D. Satheesan का अभिनंदन किया। यह मुलाकात 26 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित केरल हाउस में हुई, जहां दोनों पक्षों के बीच राज्य के विकास, सामाजिक सद्भाव और गरीबों के कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर सीसीबीआई के उप महासचिव रेव. डॉ. स्टीफन अलाथारा तथा प्रवासी आयोग (Commission for Migrants) के कार्यकारी सचिव फादर एडवोकेट जैसन वडास्सेरी ने मुख्यमंत्री से भेंट की। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन उस समय राष्ट्रीय राजधानी में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ विभिन्न विकासात्मक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आए हुए थे। बैठक के दौरान रेव. डॉ. स्टीफन अलाथारा ने मुख्यमंत्री को मिजोरम की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का प्रतीक एक पारंपरिक मिजो शॉल भेंट किया। यह सम्मान न केवल सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक था, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों के बीच भाईचारे और एकता का संदेश भी देता है।  ...

World : आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस

चित्र
                          31 मई को पूरे विश्व में World No Tobacco Day मनाया जाता है 31 मई वर्ष का एक महत्वपूर्ण दिन है। यह दिन केवल कैलेंडर का एक सामान्य दिन नहीं, बल्कि अनेक ऐतिहासिक घटनाओं, सामाजिक जागरूकता अभियानों और प्रेरणादायक प्रसंगों से जुड़ा हुआ है। मई महीने का अंतिम दिन होने के कारण यह लोगों को बीते महीने का मूल्यांकन करने और आने वाले जून माह की नई योजनाओं के लिए तैयार होने का अवसर भी देता है।             विश्व तंबाकू निषेध दिवस 31 मई को पूरे विश्व में World No Tobacco Day मनाया जाता है। इसकी शुरुआत World Health Organization (WHO) ने वर्ष 1987 में की थी। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य तंबाकू सेवन से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करना और तंबाकू के उपयोग को कम करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू सेवन से हर वर्ष लाखों लोगों की मृत्यु होती है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के साथ-साथ उसके आसपास रहने वाले लोग भी इसके दुष्प्रभावों का सामना करते हैं। इस दिन विभिन्न दे...

Bihar : नकटा दियारा की जनता की मांग को अनसुना न करें केंद्र सरकार

चित्र
  नकटा दियारा की जनता की मांग को अनसुना न करें केंद्र सरकार पटना संसदीय क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री Ravi Shankar Prasad ने एक बार फिर गंगा नदी पर निर्माणाधीन छह लेन सड़क पुल परियोजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि जे.पी. सेतु के समानांतर बन रहे राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 139W के पुल पर पिलर संख्या 16 से 26 के बीच नकटा दियारा क्षेत्र के लिए एक अप्रोच अथवा रैंप रोड का निर्माण कराया जाए। यह मांग केवल एक सड़क निर्माण की मांग नहीं है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन को आसान बनाने का प्रश्न है। सांसद रविशंकर प्रसाद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि दीघा-सोनपुर के बीच निर्माणाधीन छह लेन पुल का एक हिस्सा ग्राम नकटा दियारा एवं छितरचक क्षेत्र से होकर गुजरता है। यहां के ग्रामीण लंबे समय से चाहते हैं कि पुल से सीधे दियारा क्षेत्र को जोड़ने के लिए एक रैंप रोड बनाई जाए, जिससे वे मुख्य सड़क नेटवर्क से सीधे जुड़ सकें। दियारा क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या...

World : इतिहास, महत्व और आत्ममंथन का अवसर

चित्र
  मई माह का अंतिम दिन 30 मई वर्ष के उन विशेष दिनों में से एक है मई माह का अंतिम दिन 30 मई वर्ष के उन विशेष दिनों में से एक है, जो हमें बीते हुए महीने का मूल्यांकन करने और आने वाले समय के लिए नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। वर्ष का पाँचवाँ महीना मई अपने साथ गर्मी, संघर्ष, परिश्रम और अनेक ऐतिहासिक घटनाओं की स्मृतियाँ लेकर आता है। जब हम 30 मई पर पहुँचते हैं, तब यह केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं रह जाती, बल्कि जीवन के अनेक पहलुओं पर विचार करने का अवसर भी प्रदान करती है। 30 मई का दिन इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए जाना जाता है। विभिन्न देशों में इस दिन राजनीतिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय घटनाएँ घटी हैं। भारत के संदर्भ में भी मई का महीना अनेक ऐतिहासिक आंदोलनों, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान तथा राष्ट्रीय विकास की उपलब्धियों की याद दिलाता है। यह दिन हमें उन महान व्यक्तित्वों को स्मरण करने का अवसर देता है जिन्होंने अपने कार्यों से समाज और राष्ट्र को नई दिशा प्रदान की। मई का महीना विद्यार्थियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। अधिकांश विद्...

India : न्यूनतम पेंशन से जुड़े मामलों में पुराने दस्तावेजों की मांग

चित्र
वर्ष 1961 का भारत कई मायनों में परिवर्तन और उम्मीदों का दौर था वर्ष 1961 का भारत कई मायनों में परिवर्तन और उम्मीदों का दौर था। देश के प्रधानमंत्री पंडित Jawaharlal Nehru थे और देश विकास, उद्योग, लोकतंत्र तथा सामाजिक न्याय की नई राह पर आगे बढ़ रहा था। उसी समय हिंदी सिनेमा भी समाज की भावनाओं को बड़े प्रभावशाली तरीके से व्यक्त कर रहा था। इसी दौर में आई थी प्रसिद्ध फिल्म Gunga Jumna, जिसका गीत “ढूंढो ढूंढो रे साजना” आज भी लोगों की जुबान पर है। यह गीत प्रेम और तलाश की भावनाओं को दर्शाता था, लेकिन आज के समय में यही पंक्ति एक अलग दर्द और विडंबना का प्रतीक बन गई है। आज देश के लाखों बुजुर्ग ईपीएफओ की न्यूनतम पेंशन व्यवस्था से जुड़े संघर्ष में मानो यही गीत गुनगुना रहे हैं — “ढूंढो ढूंढो रे साजना।” फर्क सिर्फ इतना है कि अब वे अपने जीवनसाथी या प्रेम को नहीं, बल्कि 2014 से पहले के पुराने कागजात, वेतन रिकॉर्ड, नियुक्ति पत्र, पीएफ खाते की जानकारियां और सेवा प्रमाणपत्र ढूंढने को मजबूर हैं। कई पेंशनधारियों का कहना है कि ईपीएफओ द्वारा उच्च पेंशन या न्यूनतम पेंशन से जुड़े मामलों में पुराने दस्तावेजों की ...

India : वर्ष 2024 में गोवा सरकार ने TCP अधिनियम में संशोधन कर इस धारा को जोड़ा

चित्र
गोवा नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम यानी Goa Town and Country Planning (TCP) Act की धारा 39A गोवा इस समय सिर्फ एक पर्यटन स्थल या समुद्री तटों के लिए ही चर्चा में नहीं है, बल्कि वहाँ का पर्यावरण, भूमि और विकास नीति एक बड़े जनआंदोलन का कारण बन चुकी है। विवाद का केंद्र है गोवा नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम यानी Goa Town and Country Planning (TCP) Act की धारा 39A। यह धारा इतनी विवादित हो चुकी है कि सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण प्रेमी, किसान, स्थानीय निवासी और चर्च से जुड़े लोग तक इसके विरोध में सड़क पर उतर आए हैं। आंदोलन के दौरान नेतृत्व कर रहे फादर बोलमैक्स का निधन भी हो गया, लेकिन इसके बावजूद आंदोलन थमा नहीं है। लोगों की मांग आज भी स्पष्ट है—धारा 39A को पूरी तरह समाप्त किया जाए। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि धारा 39A आखिर है क्या। वर्ष 2024 में गोवा सरकार ने TCP अधिनियम में संशोधन कर इस धारा को जोड़ा। इस संशोधन के तहत “मुख्य नगर नियोजक” (Chief Town Planner) को अत्यधिक अधिकार दे दिए गए। अब वे किसी भी जमीन के टुकड़े का “लैंड यूज़” यानी उपयोग बदल सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई जमीन कृषि क्षे...

India : एक कुशल लेखक, कवि, समाज सुधारक और विचारक भी थे “वीर सावरकर”

चित्र
  28 मई : इतिहास, विज्ञान, राजनीति और संस्कृति का विशेष दिन 28 मई ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार वर्ष का 148वाँ दिन (लीप वर्ष में 149वाँ दिन) होता है। वर्ष समाप्त होने में अभी 217 दिन शेष रहते हैं। इतिहास के पन्नों में यह दिन अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं, महान व्यक्तित्वों के जन्म, वैज्ञानिक उपलब्धियों और सामाजिक परिवर्तनों के कारण विशेष महत्व रखता है। भारत ही नहीं बल्कि विश्व इतिहास में भी 28 मई कई ऐसे प्रसंगों का साक्षी रहा है, जिन्होंने मानव सभ्यता की दिशा को प्रभावित किया। भारत के संदर्भ में 28 मई का महत्व भारत के लिए 28 मई का दिन विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दिन आधुनिक भारत के महान राष्ट्रवादी नेता और हिंदुत्व विचारधारा के प्रमुख चिंतक Vinayak Damodar Savarkar का जन्म हुआ था। उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था। उन्हें “वीर सावरकर” के नाम से जाना जाता है। सावरकर केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं थे, बल्कि एक कुशल लेखक, कवि, समाज सुधारक और विचारक भी थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। काला पानी की सज...

India : वर्ष 2014 में भारत में नई राजनीतिक दिशा की शुरुआत

चित्र
  26 मई : इतिहास, लोकतंत्र और नई उम्मीदों का विशेष दिन 26 मई का दिन भारत के इतिहास, राजनीति, विज्ञान, समाज और राष्ट्रीय चेतना के कई महत्वपूर्ण अध्यायों से जुड़ा हुआ है। यह दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि देश के बदलते दौर, लोकतांत्रिक परंपराओं और नई सोच का प्रतीक भी माना जाता है। हर वर्ष 26 मई हमें यह याद दिलाता है कि समय के साथ समाज और राष्ट्र लगातार आगे बढ़ते रहते हैं। यह दिन अनेक प्रेरणादायक घटनाओं और महत्वपूर्ण अवसरों का साक्षी रहा है। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 26 मई का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन वर्ष 2014 में भारत में नई राजनीतिक दिशा की शुरुआत हुई थी। देश में आम चुनावों के बाद नई सरकार का गठन हुआ और विकास, डिजिटल भारत, आत्मनिर्भरता, स्वच्छता तथा आधुनिक भारत जैसे कई बड़े अभियानों की चर्चा तेज हुई। इसके बाद 26 मई को राजनीतिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण दिन माना जाने लगा। लोकतंत्र में जनता की शक्ति सबसे बड़ी होती है और यह दिन उसी जनमत की ताकत को दर्शाता है। 26 मई का संबंध राष्ट्रीय विकास की कई योजनाओं और उपलब्धियों से भी जोड़ा जाता है। पिछले वर्षों में द...