विश्व शांति के लिए रोजरी माला विनती : सन्त पापा लियो 14वें की विशेष पहल
कैथोलिक कलीसिया में मई का महीना माता मरियम को समर्पित माना जाता है। इस पूरे महीने में विश्व भर के श्रद्धालु माता मरियम के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करते हुए रोजरी माला का पाठ करते हैं। इस वर्ष मई माह के समापन पर सन्त पापा लियो 14वें ने विश्व शांति के लिए एक विशेष पहल की है। उन्होंने युद्धों, हिंसा और संघर्षों से पीड़ित मानवता के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया है तथा स्वयं 30 मई को वाटिकन गार्डन्स में पवित्र रोजरी माला विनती की अध्यक्षता करने का निर्णय लिया है।
सन्त पापा लियो 14वें अपने परमाध्यक्षीय कार्यकाल के आरम्भ से ही विश्व में शांति स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने विभिन्न अवसरों पर युद्धरत देशों और संघर्षों से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए प्रार्थना की अपील की है। उनका मानना है कि प्रार्थना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव हृदय को बदलने और शांति का मार्ग प्रशस्त करने का एक प्रभावशाली साधन है। इसी सोच के साथ वे मई माह के अंतिम दिनों में विश्व के सभी लोगों को एकजुट होकर शांति के लिए प्रार्थना करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
30 मई की शाम रोम समयानुसार 7 बजे, वाटिकन गार्डन्स में स्थित लूर्द की रानी माता मरियम को समर्पित गुफा के सामने यह विशेष रोजरी माला विनती आयोजित की जाएगी। इस प्रार्थना में सन्त पापा स्वयं नेतृत्व करेंगे और विश्व भर के श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से इसमें सहभागी बनने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन केवल वाटिकन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के अनेक प्रमुख तीर्थस्थल भी इसमें सहभागी होंगे।
विशेष बात यह है कि इस रोजरी विनती के प्रत्येक भेद को युद्ध और हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए समर्पित किया जाएगा। सामान्यतः रोजरी माला के भेद प्रभु यीशु और माता मरियम के जीवन की विभिन्न घटनाओं पर आधारित होते हैं, किन्तु इस अवसर पर प्रत्येक भेद के साथ युद्ध पीड़ित परिवारों, विस्थापित लोगों, घायल नागरिकों, चिकित्सकों, राहत कर्मियों और स्वयंसेवकों के लिए विशेष प्रार्थनाएं की जाएंगी। इस प्रकार यह परंपरागत रोजरी पाठ के साथ-साथ समकालीन मानवीय पीड़ा को भी अपने भीतर समाहित करेगा।
कलीसिया में ऐसी परंपरा पहले भी देखी गई है। विशेषकर लेंट काल के दौरान कई चर्चों में पारंपरिक प्रार्थनाओं के साथ वर्तमान समाज के दुख-दर्द और चुनौतियों को जोड़कर विशेष पाठ किए जाते हैं। जिस प्रकार क्रूस मार्ग की चौदह मंजिलों के चिंतन में मानव जीवन की कठिनाइयों को शामिल किया जाता है, उसी प्रकार इस रोजरी विनती में भी विश्व की पीड़ाओं को ईश्वर और माता मरियम के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इस आयोजन में विश्व के अनेक प्रसिद्ध मरियम तीर्थस्थलों और धार्मिक केंद्रों को भी आमंत्रित किया गया है। जिन प्रमुख तीर्थस्थलों ने अपनी सहभागिता की पुष्टि की है, उनमें यूक्रेन का मरियम तीर्थस्थल, फिलीपींस में शांति की रानी माता मरियम का अंतरराष्ट्रीय तीर्थ, पुर्तगाल का प्रसिद्ध फातिमा तीर्थस्थल, बोस्निया और हर्जेगोविना का मेज्जुगोर्ये तीर्थ, फ्रांस का लूर्द तीर्थस्थल, लेबनान का संत चारबेल अन्नाया तीर्थ और इटली का लॉरेटो स्थित परमधर्मपीठीय हाउस ऑफ लॉरेटो शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर श्रद्धालु उसी समय प्रार्थना में सहभागी होंगे और इस प्रकार विश्वभर के लाखों लोग एक आध्यात्मिक सूत्र में बंध जाएंगे।
आज जब दुनिया के अनेक हिस्सों में युद्ध, आतंकवाद, राजनीतिक संघर्ष और सामाजिक अस्थिरता बनी हुई है, तब यह पहल और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। युद्ध केवल सैनिकों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि असंख्य परिवारों को बिखेर देता है। बच्चे अनाथ हो जाते हैं, माता-पिता अपने प्रियजनों को खो देते हैं और लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हो जाते हैं। अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी दिन-रात घायलों की सेवा करते हैं, जबकि राहतकर्मी और स्वयंसेवक कठिन परिस्थितियों में मानवता की सेवा में लगे रहते हैं। सन्त पापा लियो 14वें ने विशेष रूप से इन सभी लोगों को अपनी प्रार्थनाओं में शामिल करने का निर्णय लिया है।रोजरी माला विनती में सुख के पाँच भेदों का पाठ किया जाएगा। प्रत्येक भेद के माध्यम से विश्व के विभिन्न संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए ईश्वर से शांति, न्याय और मेल-मिलाप की याचना की जाएगी। साथ ही माता मरियम, जिन्हें “शांति की रानी” कहा जाता है, के संरक्षण और मध्यस्थता की प्रार्थना की जाएगी। विश्वासियों का मानना है कि माता मरियम की मध्यस्थता मानवता को ईश्वर के और निकट लाती है तथा कठिन समय में आशा प्रदान करती है।
रोम में उपस्थित तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। वे सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में स्थापित विशाल स्क्रीन के माध्यम से इस प्रार्थना में सहभागी बन सकेंगे। इससे हजारों लोग एक साथ इस आध्यात्मिक आयोजन का हिस्सा बनेंगे और विश्व शांति के लिए अपनी प्रार्थनाएं अर्पित करेंगे।
यह कार्यक्रम सुसमाचार प्रचार संबंधी परमधर्मपीठीय परिषद के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल एक धार्मिक समारोह आयोजित करना नहीं, बल्कि विश्व भर के लोगों को शांति, करुणा और भाईचारे के संदेश से जोड़ना है। आज की विभाजित दुनिया में यह पहल हमें याद दिलाती है कि प्रार्थना और एकता के माध्यम से मानवता बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकती है।
सन्त पापा लियो 14वें की यह पहल इस बात का प्रतीक है कि शांति केवल राजनीतिक समझौतों से नहीं, बल्कि मानव हृदयों के परिवर्तन से भी आती है। जब लाखों लोग एक साथ शांति के लिए प्रार्थना करते हैं, तब आशा की एक नई किरण जन्म लेती है। यही संदेश इस विशेष रोजरी माला विनती का भी है—विश्व में शांति स्थापित हो, युद्ध समाप्त हों और समस्त मानवता प्रेम, न्याय तथा भाईचारे के मार्ग पर आगे बढ़े।
आलोक कुमार
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
welcome your comment on https://chingariprimenews.blogspot.com/