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Bihar : फादर सेराफिम जॉन लाल के परिवार पर दुखों का पहाड़

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  बेतिया धर्मप्रांत के बेतिया पल्ली क्षेत्र में इन दिनों शोक और संवेदना का वातावरण व्याप्त बेतिया धर्मप्रांत के बेतिया पल्ली क्षेत्र में इन दिनों शोक और संवेदना का वातावरण व्याप्त है। चर्च रोड स्थित सेंट मैरी स्कूल के निकट, डॉ. ओसवाल्ड आनंद के घर के सामने स्थित फादर सेराफिम जॉन लाल के पैतृक निवास पर लगातार लोगों का आना-जाना लगा हुआ है। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, मित्र और परिचित इस कठिन समय में परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। घर के वातावरण में गहरी उदासी और भावुकता स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है। फादर सेराफिम जॉन लाल लंबे समय से धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े रहे हैं। उनके परिवार की पहचान न केवल बेतिया बल्कि व्यापक ईसाई समाज में भी सम्मान के साथ की जाती रही है। ऐसे प्रतिष्ठित परिवार पर जब दुखों का पहाड़ टूटता है तो स्वाभाविक रूप से पूरा समाज उसके साथ खड़ा दिखाई देता है। परिवार के सदस्य आयुष गौरव रोड्रिगेज ने भावुक स्वर में अपने संबंधों को याद करते हुए बताया कि फादर सेराफिम जॉन लाल उनके मामा हैं। उन्होंने परिवार की वंशावली का उल्लेख करते हुए बताया कि फादर के ...

Bihar : पटना जेसुइट प्रोविंस के वरिष्ठ और सम्मानित जेसुइट पुरोहित फादर सेराफिम जॉन लाल का निधन

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  फादर सेराफिम जॉन लाल एस.जे. का निधन : पटना जेसुइट समाज में शोक की लहर पटना जेसुइट प्रोविंस के वरिष्ठ और सम्मानित जेसुइट पुरोहित फादर सेराफिम जॉन लाल एस.जे. का 4 जून 2026 को निधन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलते ही जेसुइट समाज, कलीसिया तथा उनके परिचितों के बीच गहरा शोक व्याप्त हो गया। उन्होंने अपने जीवन के लगभग पाँच दशकों को ईश्वर, कलीसिया और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। उनका जीवन समर्पण, सादगी, अनुशासन और आध्यात्मिक निष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण था। फादर सेराफिम जॉन लाल का जन्म 29 मई 1957 को ऐतिहासिक नगरी बेतिया में हुआ था। बचपन से ही उनमें धार्मिक जीवन के प्रति विशेष आकर्षण था। इसी प्रेरणा के साथ उन्होंने 2 जुलाई 1978 को जेसुइट धर्मसंघ में प्रवेश किया। वर्षों की आध्यात्मिक और शैक्षणिक तैयारी के बाद उनका पुरोहिताभिषेक 27 दिसंबर 1992 को संपन्न हुआ। इसके पश्चात उन्होंने 22 अप्रैल 1996 को अंतिम जेसुइट मन्नत लेकर अपने जीवन को पूर्ण रूप से प्रभु और समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। अपने 48 वर्षों के जेसुइट जीवन और 34 वर्षों के पुरोहितीय सेवाकाल में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण दायित्...

World : ईसाई धर्म में संस्कारों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है

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ये केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्वास, आध्यात्मिक विकास और ईश्वर के साथ संबंध को सुदृढ़ करने के माध्यम माने जाते हैं ईसाई धर्म में संस्कारों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ये केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्वास, आध्यात्मिक विकास और ईश्वर के साथ संबंध को सुदृढ़ करने के माध्यम माने जाते हैं। इनमें बपतिस्मा (Baptism) और परमप्रसाद (Holy Communion या Eucharist) विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। किसी भी ईसाई बच्चे के धार्मिक जीवन की शुरुआत बपतिस्मा से होती है, जबकि परमप्रसाद उसे मसीह के साथ गहरे आध्यात्मिक संबंध में प्रवेश कराने वाला संस्कार माना जाता है। यही कारण है कि विभिन्न ईसाई परंपराओं में बच्चों को परमप्रसाद देने की आयु, प्रक्रिया और नियमों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं विकसित हुई हैं। बपतिस्मा संस्कार को ईसाई जीवन का प्रवेश द्वार कहा जाता है। इस संस्कार के माध्यम से व्यक्ति को पापों से शुद्ध माना जाता है और उसे कलीसिया का सदस्य स्वीकार किया जाता है। अधिकांश ईसाई संप्रदायों में बपतिस्मा के बाद ही व्यक्ति अन्य संस्कारों को ग्रहण करने का अधिकारी बनता है। हालांकि, परमप्रसाद प्राप्त ...

Kolkata: दिलीप एंथनी रोजारियो के निधन से उत्पन्न शून्य को भरना आसान नहीं

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  दिलीप एंथनी रोजारियो : एक समर्पित संगीतकार और चर्च सेवक को श्रद्धांजलि कोलकाता महाधर्मप्रांत (आर्चडायोसिस ऑफ कलकत्ता) के लिए 2 जून 2026 का दिन अत्यंत दुखद रहा। चर्च, संगीत और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले दिलीप एंथनी रोजारियो के निधन का समाचार मिलते ही शोक की लहर दौड़ गई। वे केवल एक प्रतिभाशाली संगीतकार ही नहीं थे, बल्कि एक समर्पित ले-विश्वासी (Lay Faithful) और चर्च के सक्रिय कार्यकर्ता भी थे। उनके निधन से चर्च समुदाय ने एक ऐसे व्यक्ति को खो दिया है जिसने अपना जीवन सेवा, संगीत और सुसमाचार के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया था। दिलीप एंथनी रोजारियो का जन्म 17 जून 1962 को हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत के प्रति विशेष लगाव था। उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर चर्च संगीत के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बनाई। उनके नेतृत्व और योगदान से अनेक धार्मिक कार्यक्रमों तथा प्रार्थना सभाओं को नई ऊँचाइयाँ मिलीं। वे कोलकाता क्रिश्चियन कॉयर से भी जुड़े रहे और अपनी मधुर प्रस्तुति तथा संगीत निर्देशन के लिए व्यापक रूप से सम्मानित किए जाते थे। चर्च के प्रति उनकी न...

Bihar : बेतिया: उत्तर भारत में कैथोलिक मिशन का ऐतिहासिक केंद्र

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  बेतिया: उत्तर भारत में कैथोलिक मिशन का ऐतिहासिक केंद्र बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में स्थित बेतिया केवल एक ऐतिहासिक नगर ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत में कैथोलिक मिशनरी गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा है। बेतिया का धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक इतिहास लगभग तीन शताब्दियों पुराना है। यहां स्थापित कैथोलिक मिशन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस गौरवशाली इतिहास के केंद्र में एक महान मिशनरी पादरी फादर जोसेफ मेरी बिरिनी का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। फादर जोसेफ मेरी बिरिनी (1709-1761) उत्तर भारत के पहले कैपुचिन मिशन, बेतिया मिशन, के संस्थापक थे। वे इटली से भारत आए और अपने ज्ञान, सेवा तथा समर्पण के कारण शीघ्र ही स्थानीय लोगों के बीच लोकप्रिय हो गए। वर्ष 1740 में उन्होंने बेतिया राज की महारानी की एक लंबी और गंभीर बीमारी को चमत्कारिक रूप से ठीक किया। इस घटना ने मिशन के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाया और बेतिया राज परिवार के साथ कैथोलिक मिशन के संबंध और मजबूत हुए। फादर बिरिनी केवल धर्मप्रचारक ही नहीं, बल्कि एक विद्वान भाषाविद भी थे। उन्...

Bihar : मई माह के अंतिम दिन माता मरियम की आराधना से गूंज उठा बेतिया महागिरजाघर परिसर

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  मई माह के अंतिम दिन माता मरियम की आराधना से गूंज उठा बेतिया महागिरजाघर परिसर बेतिया धर्मप्रांत में मई माह का अंतिम दिन श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास का एक अद्भुत संगम लेकर आया।  Nativity of the Blessed Virgin Mary Cathedral  महागिरजाघर परिसर स्थित विश्व की मां मरियम के ग्रोटो (प्रतिमा स्थल) पर आयोजित विशेष प्रार्थना एवं यात्रा समारोह ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति से भर दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि विश्वास, सामुदायिक एकता और प्रकृति के साथ ईश्वरीय सामंजस्य का भी सुंदर उदाहरण बन गया। मई माह को कैथोलिक परंपरा में विशेष रूप से माता मरियम को समर्पित माना जाता है। पूरे महीने श्रद्धालु रोज़री (माला बिनती), प्रार्थना और विशेष आराधना के माध्यम से माता मरियम के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। इस माह के अंतिम दिन आयोजित समारोह का महत्व और भी अधिक था, क्योंकि यह पूरे महीने की भक्ति का समापन समारोह था। महागिरजाघर परिसर में स्थित माता मरियम के ग्रोटो को इस अवसर पर अत्यंत आकर्षक ढंग से सजाया गया था। ग्रोटो के चारों ओर रंग-बिरंगी रोशनियों,...

World :"पीड़ित मानवता के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया "

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  विश्व शांति के लिए रोजरी माला विनती : सन्त पापा लियो 14वें की विशेष पहल कैथोलिक कलीसिया में मई का महीना माता मरियम को समर्पित माना जाता है। इस पूरे महीने में विश्व भर के श्रद्धालु माता मरियम के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करते हुए रोजरी माला का पाठ करते हैं। इस वर्ष मई माह के समापन पर सन्त पापा लियो 14वें ने विश्व शांति के लिए एक विशेष पहल की है। उन्होंने युद्धों, हिंसा और संघर्षों से पीड़ित मानवता के लिए प्रार्थना करने का आह्वान किया है तथा स्वयं 30 मई को वाटिकन गार्डन्स में पवित्र रोजरी माला विनती की अध्यक्षता करने का निर्णय लिया है। सन्त पापा लियो 14वें अपने परमाध्यक्षीय कार्यकाल के आरम्भ से ही विश्व में शांति स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने विभिन्न अवसरों पर युद्धरत देशों और संघर्षों से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए प्रार्थना की अपील की है। उनका मानना है कि प्रार्थना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव हृदय को बदलने और शांति का मार्ग प्रशस्त करने का एक प्रभावशाली साधन है। इसी सोच के साथ वे मई माह के अंतिम दिनों में विश्व के सभी लोगों को एकजुट होकर शांति के लि...

India : एक संपूर्ण पुरोहित का दायित्व निभाकर प्रभु के घर जाने वाले पुरोहित बन गए

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  डॉ. फादर पीटर लूर्डेस: एक महान दूरदर्शी, शिक्षाविद् और मनोवैज्ञानिक का जीवन सफर एक प्रख्यात सेल्सियन पुरोहित, मनोवैज्ञानिक, असाधारण शिक्षाविद् और सेल्सियन कॉलेज सोनादा (Salesian College Sonada) के पूर्व प्राचार्य डॉ. फादर पीटर लूर्डेस का 28 मई 2026 को कोलकाता के पार्क क्लिनिक अस्पताल में निधन हो गया। वह 101 वर्ष के थे। उनके निधन से न केवल सेल्सियन समुदाय में बल्कि शिक्षा, मनोविज्ञान और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में भी एक युग का अंत हो गया है। उनका संपूर्ण जीवन ज्ञान की खोज, आध्यात्मिक साधना और मानवता की निःस्वार्थ सेवा को समर्पित रहा। अंतिम विदाई और मानवता के लिए आखिरी उपहार फादर लूर्डेस के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए कोलकाता के नीतिका चैपल (Nitika Chapel) में एक विदाई प्रार्थना सभा (Requiem Mass) का आयोजन किया गया। यह वही स्थान था जहाँ फादर लूर्डेस ने वर्ष 1989 से अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। इस प्रार्थना सभा की अध्यक्षता सेल्सियन प्रोविंशियल फादर सुनील केरकेट्टा ने की। इस भावुक क्षण में बड़ी संख्या में सेल्सियन बंधु, पादरी, धार्मिक नेता, उनके पूर्व छात्र और उनके...

World : मई माह और माता मरियम के आनंदमय भेद

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  मई माह और माता मरियम के आनंदमय भेद ईसाई माता कलीसिया अर्थात कैथोलिक चर्च में मई का महीना अत्यंत पवित्र और विशेष माना जाता है, क्योंकि यह महीना पूर्ण रूप से धन्य कुँवारी माता मरियम को समर्पित होता है। संसार भर के कैथोलिक विश्वासी इस महीने को “मरियम माह” के रूप में मनाते हैं। इस दौरान गिरजाघरों, परिवारों और प्रार्थना समूहों में माता मरियम के सम्मान में विशेष प्रार्थनाएँ, भजन, जुलूस और रोज़री माला की विनतियाँ की जाती हैं। मई माह विश्वासियों को यह याद दिलाता है कि जैसे माता मरियम ने अपने जीवन को पूर्ण रूप से परमेश्वर की इच्छा के अनुसार समर्पित किया, वैसे ही प्रत्येक विश्वासी को भी विश्वास, प्रेम, आज्ञाकारिता और शांति के मार्ग पर चलना चाहिए। माता मरियम को शांति की रानी कहा जाता है। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण परमेश्वर के प्रति विश्वास और समर्पण से भरा हुआ था। यही कारण है कि कलीसिया मई महीने में विशेष रूप से रोज़री माला के माध्यम से माता मरियम के जीवन की घटनाओं पर मनन करने के लिए प्रेरित करती है। रोज़री केवल शब्दों की प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह येसु और मरियम के जीवन के रहस्यों पर ध्यान...