फादर सेराफिम जॉन लाल एस.जे. का निधन : पटना जेसुइट समाज में शोक की लहर
पटना जेसुइट प्रोविंस के वरिष्ठ और सम्मानित जेसुइट पुरोहित फादर सेराफिम जॉन लाल एस.जे. का 4 जून 2026 को निधन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलते ही जेसुइट समाज, कलीसिया तथा उनके परिचितों के बीच गहरा शोक व्याप्त हो गया। उन्होंने अपने जीवन के लगभग पाँच दशकों को ईश्वर, कलीसिया और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। उनका जीवन समर्पण, सादगी, अनुशासन और आध्यात्मिक निष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण था।
फादर सेराफिम जॉन लाल का जन्म 29 मई 1957 को ऐतिहासिक नगरी बेतिया में हुआ था। बचपन से ही उनमें धार्मिक जीवन के प्रति विशेष आकर्षण था। इसी प्रेरणा के साथ उन्होंने 2 जुलाई 1978 को जेसुइट धर्मसंघ में प्रवेश किया। वर्षों की आध्यात्मिक और शैक्षणिक तैयारी के बाद उनका पुरोहिताभिषेक 27 दिसंबर 1992 को संपन्न हुआ। इसके पश्चात उन्होंने 22 अप्रैल 1996 को अंतिम जेसुइट मन्नत लेकर अपने जीवन को पूर्ण रूप से प्रभु और समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
अपने 48 वर्षों के जेसुइट जीवन और 34 वर्षों के पुरोहितीय सेवाकाल में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी गई, उसे उन्होंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया। वे सेंट माइकल हाई स्कूल तथा उसके निकट स्थित जेसुइट समुदाय के फादर सुपीरियर भी रहे। प्रशासनिक कुशलता, मानवीय संवेदनशीलता और आध्यात्मिक नेतृत्व के कारण वे अपने सहयोगियों और विश्वासियों के बीच अत्यंत प्रिय थे।
अपने जीवन के अंतिम वर्षों में वे दीघा स्थित एक्सटीटीआई परिसर के जेवियर भवन में रह रहे थे। यह भवन पटना जेसुइट प्रोविंस के वरिष्ठ और वृद्ध जेसुइट पुरोहितों के लिए विशेष रूप से बनाया गया है। यहां वर्तमान में 20 से 25 जेसुइट निवास करते हैं। इसी भवन में मुजफ्फरपुर धर्मप्रांत के एमेरिटस बिशप जे.बी. ठाकुर भी रहते हैं। फादर सेराफिम जॉन लाल ने अपने अंतिम दिन भी प्रार्थना, चिंतन और शांत सेवा के वातावरण में बिताए।
एक्सटीटीआई के सुपीरियर फादर राजेश जैकब ने जानकारी दी कि फादर सेराफिम जॉन लाल का अंतिम संस्कार 5 जून 2026 को शाम 4 बजे एक्सटीटीआई परिसर में संपन्न होगा। अंतिम मिस्सा के बाद उनके पार्थिव शरीर को परिसर स्थित कब्रिस्तान में पूरे धार्मिक सम्मान के साथ दफनाया जाएगा। उनके परिजन और रिश्तेदार बेतिया से अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए आ रहे हैं। वर्तमान में उनका पार्थिव शरीर कुर्जी होली फैमिली अस्पताल के शीतल गृह में रखा गया है।
फादर सेराफिम जॉन लाल का जीवन इस सत्य का प्रमाण था कि ईश्वर की सेवा में बिताया गया जीवन कभी व्यर्थ नहीं जाता। उन्होंने शिक्षा, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और समुदाय निर्माण के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। आज जब वे इस संसार से विदा हो गए हैं, तब भी उनकी स्मृतियां, उनके कार्य और उनका प्रेरणादायी जीवन लोगों के हृदयों में जीवित रहेगा।
इस अवसर पर प्रभु यीशु के ये शब्द विशेष सांत्वना प्रदान करते हैं—“मैं पुनरुत्थान और जीवन हूँ। जो मुझ पर विश्वास करता है, वह यदि मर भी जाए तो जीवित रहेगा; और जो जीवित है और मुझ पर विश्वास करता है, वह कभी नहीं मरेगा।” (यूहन्ना 11:25-26)
ईश्वर दिवंगत फादर सेराफिम जॉन लाल एस.जे. की आत्मा को शाश्वत शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार, जेसुइट समाज तथा सभी विश्वासियों को यह दुःख सहने की शक्ति दें। श्रद्धांजलि।
आलोक कुमार
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