मंगलवार, 18 नवंबर 2025

सत्ता सिर्फ जीत का नाम नहीं

 

पटना .बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव का परिवार सिर्फ एक राजनीतिक घराना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की उस लंबी लड़ाई का प्रतीक रहा है जिसने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया. परंतु हालिया चुनावी झटका इस विशाल परिवार में गहरी दरारें उभारता दिख रहा है—ऐसी दरारें, जिनके संकेत वर्षों से भीतर ही भीतर पनप रहे थे.

लालू प्रसाद और राबड़ी देवी—यह जोड़ी बिहार की राजनीति में ‘कठोर निर्णय’ और ‘मां-की ममता’ का असाधारण संगम मानी जाती है. एक ओर लालू की जन-नेतृत्व क्षमता, दूसरी ओर राबड़ी देवी की सादगी पर आधारित राजनीतिक उपस्थिति—इन दोनों ने मिलकर बिहार में एक वैकल्पिक राजनीति धारा तैयार की.परंतु नेतृत्व जब अगली पीढ़ी की ओर बढ़ा, तो परिवार की विविधता एकता पर भारी पड़ने लगीं.

पुत्रियाँ: त्याग, मौन और विद्रोह की तीन छवियाँ

मीसा भारती हमेशा पार्टी की वैचारिक धुरी के रूप में सामने आईं, लेकिन लोकसभा में दो लगातार हारों ने उनके राजनीतिक ग्राफ को धूमिल किया.रोहिणी आचार्य—वही बेटी जिन्होंने पिता को किडनी देकर देशभर में मिसाल कायम की—अब राजनीति से दूर जाने का फैसला कर चुकी हैं। यह निर्णय सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि परिवार की राजनीतिक थकान और अंदरूनी संघर्षों की ओर भी संकेत करता है.रागिनी, चंदा और हेमा—ये तीनों राजनीति से अलग, लेकिन परिवार की परिधि में स्थिर हैं; परंतु इनका मौन भी परिवार की खामोश बेचैनी का ही एक हिस्सा है.

पुत्र: महत्वाकांक्षाओं का टकराव

तेज प्रताप यादव—भावनात्मक, उग्र और अक्सर अप्रत्याशित. उनका राजनीतिक सफर किनारों से टकराता हुआ आगे बढ़ रहा है. वे परिवार की राजनीति में रंग तो भरते हैं, पर दिशा नहीं.

इसके विपरीत, तेजस्वी यादव—संगठित, संयमित और अपनी रणनीति में स्पष्ट। वे लालू के वास्तविक राजनीतिक उत्तराधिकारी बने और आज बिहार की विपक्षी राजनीति का सबसे मजबूत स्तंभ माने जाते हैं.

दोनों भाइयों के बीच टकराव और व्यक्तित्व का अंतर राजद के भीतर चल रहे अनकहे संघर्ष का आईना है. यह संघर्ष सत्ता के लिए नहीं, बल्कि विरासत की उस परिभाषा को लेकर है जो लालू प्रसाद की राजनीति ने दशकों में गढ़ी.

क्या परिवार और पार्टी साथ-साथ चल पाएंगे?

चुनावों में मिली करारी हार न केवल पार्टी की कमजोरी का परिणाम है, बल्कि परिवार के भीतर संवादहीनता की एक बड़ी कीमत भी. रोहिणी का राजनीति से दूरी बनाना, मीसा का संघर्ष, तेजप्रताप का असंतुलन, और तेजस्वी का एकाकी नेतृत्व—ये सभी संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि राजद अब एक सामूहिक परिवारवाद से आगे बढ़कर ‘एकल नेतृत्व’ की ओर जा रहा है.

समापन: राजनीति का नया मोड़

लालू परिवार की यह यात्रा उस दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां इतिहास की चमक और वर्तमान की चुनौतियों आमने-सामने खड़े हैं.तेजस्वी यादव इस परिवार की राजनीति का भविष्य हैं—लेकिन यह भविष्य तभी मजबूती से खड़ा होगा जब परिवार के भीतर की दरारें संवाद और विश्वास से भर सकें.क्योंकि बिहार की राजनीति में लालू परिवार सिर्फ एक घराना नहीं, बल्कि वह कथा है—जो बताती है कि सत्ता सिर्फ जीत का नाम नहीं, बल्कि संघर्ष, त्याग और निरंतर आत्ममंथन का परिणाम है.

आलोक कुमार

रविवार, 16 नवंबर 2025

रोमन कैथोलिक चर्च चुहड़ी पल्ली में सालाना यूखरिस्तिय यात्रा निकाली गई


रोमन कैथोलिक चर्च चुहड़ी पल्ली में सालाना यूखरिस्तिय  यात्रा निकाली गई

चुहड़ी .चुहड़ी की शांत धरती आज प्रभु-भक्ति के स्वर से गूंज उठी. बेतिया धर्मप्रांत के अंतर्गत स्थित आवर लेडी असम्प्शन चर्च से निकली वार्षिक यूखरिस्तिय यात्रा ने पूरे क्रिश्चियन क्वार्टर को आस्था के उजाले से आलोकित कर दिया। येसु ख्रीस्त के सम्मान में उठते स्वर— “राजा तेरा राज्य आवे”—मानो आकाश की ऊँचाइयों तक पहुँच रहे थे और हर सुनने वाले हृदय में आध्यात्मिक अनुराग जगाते जा रहे थे.

इस पवित्र यात्रा की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब बेतिया धर्मप्रांत के बिशप पीटर सेबेस्टियन गोबियस तथा विकार जनरल फादर फिनटन ने श्रद्धालुओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कदम बढ़ाए। उनके साथ अनेक पुरोहितों, सिस्टरों तथा बेतिया, दुसैया, चखनी, चनपटिया, रामनगर, सिरिसिया बगहा, सिवान, छपरा, गोपालगंज और नरकटियागंज से आए ईसाई समुदाय के सैकड़ों बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.

पल्ली पुरोहित फादर हरमन ने यात्रा में शामिल प्रत्येक श्रद्धालु के प्रति आभार व्यक्त किया और ईश्वर के प्रेम, एकता एवं त्याग के संदेश को जीवन में आत्मसात करने का आग्रह किया। उन्होंने याद दिलाया कि ईश्वर का राज्य सभी के लिए खुला है—इसलिए उसके उपकारों के प्रति कृतज्ञ रहना और मानवता को प्रेमपूर्वक अपनाना हम सभी की जिम्मेदारी है.

    यात्रा पारंपरिक मार्ग से होकर क्रिश्चियन क्वार्टर की गलियों से गुजरी. संत आग्नेस स्कूल में निर्मित बेदी तथा मां मरियम के ग्रोटो में सजाई गई बेदी पर पवित्र सैक्रामेंट के साथ विशेष प्रार्थनाएं अर्पित की गईं.छोटे-छोटे फ्लावर गर्ल्स और युवा बालिकाओं ने साक्रमेंट के सम्मान में फूल वर्षा की और संगीत मंडली ने भक्ति गीतों से वातावरण को और अधिक पवित्र बना दिया.

गिरजाघर हो या ग्रोटो, ईसाई मोहल्ला हो या गलियां—हर स्थान केले के पेड़ों, रंग-बिरंगी झंडियों और फूलों से सजा हुआ था. यूखरिस्तिय यात्रा सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समुदाय को जोड़ने वाली उस अदृश्य डोर का प्रतीक बनी, जो प्रेम, सेवा और कृतज्ञता से समाज को अधिक मानवीय और शांतिमय बनाती है. आज चुहड़ी ने आस्था की इस सामूहिक अनुभूति के माध्यम से एक बार फिर संदेश दिया—ईश्वर प्रेम है, और वह प्रेम में एक-दूसरे से जोड़ता है.


आलोक कुमार

 

शनिवार, 15 नवंबर 2025

कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण संस्था

 


पटना. कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण संस्था — कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) — अब अपने लाखों पेंशनभोगियों के लिए एक राहत भरी खबर लाने की तैयारी में है. नवंबर में प्रस्तावित सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में पेंशन बढ़ोतरी पर अंतिम फैसला होने की संभावना जताई जा रही है.वर्तमान में EPFO के लगभग 75 लाख पेंशनभोगी हैं, जिनमें अधिकांश को न्यूनतम ₹1000 मासिक पेंशन मिल रही है — एक ऐसी राशि जो मौजूदा महंगाई दर और जीवन-यापन की लागत के सामने लगभग प्रतीकात्मक ही है। सरकार और संगठन अब इस रकम को ₹2000 या ₹2500 तक बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। यह सुधार यदि स्वीकृत होता है, तो इसे 1 जनवरी 2026 या 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जा सकता है.

वित्तीय ढांचा और सरकार की भूमिका

EPFO की पेंशन योजना का ढांचा इस तरह बनाया गया है कि कर्मचारी और नियोक्ता — दोनों अपनी ओर से 12-12 प्रतिशत योगदान करते हैं। इसमें से 8.33 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है, जिससे पेंशन फंड बनता है. सरकार इस फंड के संचालन में सहयोगी भूमिका निभाती है और समय-समय पर अनुदान (subsidy) के माध्यम से इसका वित्तीय बोझ हल्का करती है.

बढ़ोतरी क्यों ज़रूरी है

₹1000 की न्यूनतम पेंशन, आज के दौर में किसी भी बुजुर्ग की आवश्यक जरूरतें पूरी करने में सक्षम नहीं है.चिकित्सा, किराया, दवा और महंगाई के बीच यह रकम महज़ औपचारिक सहायता बनकर रह गई है.इसीलिए पेंशन बढ़ोतरी न केवल आर्थिक राहत है बल्कि सम्मानजनक जीवन का अधिकार भी है.

चुनौतियाँ

बढ़ी हुई पेंशन का सीधा असर EPFO के फंड पर पड़ेगा. वित्तीय गणनाओं के अनुसार, अगर न्यूनतम पेंशन को ₹2000 किया जाता है, तो वार्षिक बोझ हजारों करोड़ रुपये तक जा सकता है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस अतिरिक्त खर्च का संतुलन कैसे बनाएगी — क्या वह अतिरिक्त अनुदान देगी, या योगदान के अनुपात में कुछ बदलाव होंगे.

निष्कर्ष

यदि यह प्रस्ताव पास होता है, तो यह उन करोड़ों श्रमिकों के लिए नई उम्मीद होगी जिन्होंने अपने जीवन के सुनहरे वर्ष मेहनत में खपा दिए। EPFO और सरकार को चाहिए कि इस बार का निर्णय महंगाई से मेल खाता हुआ, दीर्घकालिक और न्यायसंगत हो — ताकि पेंशन शब्द का अर्थ सिर्फ औपचारिक सहायता नहीं, बल्कि सुरक्षित वृद्धावस्था का भरोसा बन सके.


आलोक कुमार

शुक्रवार, 14 नवंबर 2025

देश के पहले प्रधानमंत्री स्व. पंडित जवाहरलाल नेहरू की 136 वीं जयंती

 बिहार कांग्रेस ने मनाया पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की 136 वीं जयंती

 


पटना.आधुनिक भारत के निर्माता और देश के पहले प्रधानमंत्री स्व. पंडित जवाहरलाल नेहरू की 136  वीं जयंती प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में उनके आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मनाई गई.

     जयंती कार्यक्रम में माल्यार्पण के पश्चात प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रो रामजतन सिन्हा  ने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माणकर्ता देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने देश को प्रगति पथ पर अग्रसर होने की आधारभूत संरचना के अर्जन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। पंडित नेहरू ने देश की एकता, अखंडता और सम्प्रभुता को मजबूती और स्थिरता प्रदान की.उन्होंने देश में समता और संवैधानिक प्रतिबद्धता का सृजन किया.

     जयंती कार्यक्रम में ब्रजेश प्रसाद मुनन,राजेश राठौड़,  संजीव सिंह,नागेन्द्र कुमार विकल, डा0 संजय यादव, अफरोज खान, कुमार आशीष,आशुतोष शर्मा, संतोष कुमार श्रीवास्तव, वैद्यनाथ शर्मा, रौशन कुमार सिंह,चन्द्रभूषण राजपूत, अरविन्द लाल रजक,निधि पाण्डेय, राजीव मेहता, प्रदुम्न कुमार, उदय शंकर पटेल, मृणाल अनामय,मनोज शर्मा, वसी अख्तर, विमलेश तिवारी, अभिषेक कुमार, रामाशंकर पाण्डे सहित अन्य कांग्रेसजन मौजूद थे.

आलोक कुमार

गुरुवार, 13 नवंबर 2025

लोकतंत्र की जीत, अनुशासन की परीक्षा

 


लोकतंत्र की जीत, अनुशासन की परीक्षा — पटना प्रशासन की सख़्त निगरानी में मतगणना दिवस

पटना.बिहार विधान सभा चुनाव 2025 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है. 14 नवम्बर को ए.एन. कॉलेज, पटना में होने वाली मतगणना केवल नतीजों का दिन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की परिपक्वता की परीक्षा भी है. जिस तरह से पटना जिला प्रशासन ने मतगणना की तैयारियों को लेकर सतर्कता बरती है, वह यह संदेश देता है कि लोकतंत्र का उत्सव तभी सार्थक है जब उसमें अनुशासन की भावना जुड़ी हो.

    जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से की गई ब्रीफिंग में स्पष्ट कर दिया गया कि कानून-व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा.निषेधाज्ञा लागू रहेगी, विजय जुलूसों पर रोक रहेगी और मतगणना स्थल के आसपास किसी भी प्रकार का राजनीतिक प्रदर्शन, नारेबाजी या भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं होगी. यह कठोरता केवल नियंत्रण नहीं, बल्कि नागरिक उत्तरदायित्व की याद दिलाती है — कि लोकतंत्र में उत्सव भी अनुशासन से ही खिलता है.

प्रशासन का यह निर्णय न केवल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को सुरक्षित करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि किसी भी प्रकार की अफवाह या उत्तेजना से जन-शांति प्रभावित न हो. सीसीटीवी निगरानी, नियंत्रित यातायात व्यवस्था और नियंत्रण कक्ष की 24 घंटे सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि पटना जिला प्रशासन इस बार कोई ढिलाई नहीं बताना चाहता.

सवाल यह नहीं कि कौन जीतेगा या कौन हारेगा; असली सवाल यह है कि क्या हम परिणाम आने तक संयम बनाए रखें. लोकतंत्र की असली पहचान केवल मतदान नहीं, बल्कि मतगणना के समय की शांति और मर्यादा से भी होती है.

ऐसे में यह प्रशासनिक पहल सराहनीय है — क्योंकि लोकतंत्र की रक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि नागरिक सजगता से भी होती है। परिणाम का इंतजार घर बैठे कीजिए, और मतगणना स्थल को अनुशासन और मर्यादा का प्रतीक बनने दीजिए.यही एक परिपक्व लोकतंत्र की पहचान है.

आलोक कुमार

बुधवार, 12 नवंबर 2025

भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की 137वीं जयंती

 पटना.भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की 137वीं जयंती आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में मनाई गई.इस अवसर पर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा ने कहा कि स्वतंत्रता आन्दोलन में मौलाना अबुल कलाम आजाद ने पंडित नेहरू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया. मौलाना अबुल कलाम आजाद स्वतंत्रता के बाद 12 वर्षों तक देश के शिक्षा मंत्री रहे। मौलाना अबुल कलाम आजाद ने देश में नई शिक्षा नीति की आधारशिला रखी. वे देश में साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रबल समर्थक थे. आज कृतज्ञ राष्ट्र मौलाना अबुल कलाम आजाद के योगदान को स्मरण कर उनकी स्मृति को बार-बार नमन करती है.इसके पूर्व पार्टी के नेताओं के द्वारा मौलाना अबुल कलाम आजाद के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया.

    इस अवसर पर कोषाध्यक्ष जितेन्द्र गुप्ता, जमाल अहमद भल्लू, ,अम्बुज किशोर झा, अरविन्द लाल रजक, चन्द्रभूषण राजपूत, संजय कुमार पाण्डेय, वैद्यनाथ शर्मा, रौशन कुमार सिंह, सुधीर शर्मा, फिरोज हसन, सत्येन्द्र प्रसाद, किशोर कुमार, मो0 शाहनवाज, अभिषेक कुमार, राकेश कुमार, पं0 अनोखे लाल तिवारी ने भी मौलाना अबुल कलाम आजाद के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किये.


आलोक कुमार

मंगलवार, 11 नवंबर 2025

बिहार विधान सभा आम निर्वाचन, 2025 के दृष्टिगत ए एन कॉलेज, पटना में


 मतगणना की तैयारियों की समीक्षा

पटना.जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिलाधिकारी, पटना द्वारा बिहार विधान सभा आम निर्वाचन, 2025 के दृष्टिगत ए एन कॉलेज, पटना में पोल्ड ईवीएम वज्रगृह-सह-मतगणना केन्द्र का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया एवं मतगणना की तैयारियों की समीक्षा की गई.

पदाधिकारियों को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए निर्देशों का अक्षरशः

अनुपालन सुनिश्चित करने तथा मतगणना के दिन सुगम यातायात-प्रबंधन, अचूक विधि-व्यवस्था संधारण एवं उत्कृष्ट भीड़-प्रबंधन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.विदित हो कि सभी 14 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 6 नवंबर को मतदान समाप्ति के पश्चात 5,677 मतदान केन्द्रों के पोल्ड ईवीएम एवं वीवीपैट का संग्रहण ए एन कॉलेज, पटना में किया गया है.दिनांक 14 नवम्बर, 2025 को यहाँ मतगणना होना है.

वज्रगृह की सुरक्षा के लिए 24*7 थ्री-टियर:

केंद्रीय अर्धसैनिक (सीएपीएफ), बिहार विशेष सशस्त्र बल (बीएसएपी) तथा जिला सशस्त्र पुलिस (डीएपी): व्यवस्था की गई है. सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है. 03 अपर पुलिस अधीक्षकों-पुलिस उपाधीक्षकों तथा 13 पुलिस पदाधिकारियों की 24*7 तैनाती है। नियंत्रण कक्ष क्रियाशील है. सीसीटीवी कैमरा नियंत्रण कक्ष में 03 पुलिस पदाधिकारी एवं 12 मजिस्ट्रेट  मुस्तैद हैं. प्रत्येक प्रवेश द्वार पर डीएफएमडी/एचएचएमडी स्थापित किया गया है. परिसर में किसी के भी अनधिकृत प्रवेश की अनुमति नहीं है. विधिवत अनुमति एवं प्रक्रिया अनुसार जिनका भी प्रवेश हो रहा है.उनका नाम एवं विवरण पंजी में दर्ज किया जाना अनिवार्य है. इसका अक्षरशः अनुपालन किया जा रहा है. तीन पारियों में 15 दंड अधिकारियों तथा पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है.

    प्रतिदिन निर्वाची पदाधिकारियों द्वारा दो बार एवं जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह- जिला पदाधिकारी, पटना द्वारा एक बार स्ट्रांग रूम का भ्रमण किया जा रहा है.अभ्यर्थियों/प्रतिनिधियों को भी एसओपी के अनुसार स्ट्रांग रूम का भ्रमण कराया जाता है.अभ्यर्थियों/प्रतिनिधियों द्वारा आयोग के निर्देशों के अनुरूप स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा व्यवस्था का सतत अवलोकन किया जा रहा है. जिलाधिकारी ने इन सभी से व्यवस्था के बारे में जानकारी ली. सभी सुरक्षा व्यवस्था एवं पारदर्शिता से संतुष्ट हैं. भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश तथा प्रोटोकॉल के अनुरूप वज्रगृह की सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है.


आलोक कुमार


सोमवार, 10 नवंबर 2025

विधानसभा चुनाव के लिए मतदान दलों को ई०वी० एम०/वीवी-पैट वितरण कार्य सम्पन्न


विधानसभा चुनाव  के लिए  मतदान दलों को ई०वी० एम०/वीवी-पैट वितरण कार्य सम्पन्न

बेतिया, (आलोक कुमार).मतदान दलों को ई०वी० एम० वितरण (Dispersal) का कार्य मतदान की तिथि से एक दिन पूर्व किया जाता है.ई०वी० एम० वितरण के लिए  स्ट्रांग रूम खोले जाने एवं वितरण कार्य के दौरान उपस्थित रहने  के लिए अभ्यर्थियों/निर्वाचन अभिकर्ताओं को पूर्व से लिखित रूप से सूचित किया जाता है.साथ ही इस दौरान मतदान दलों को रेण्डमाईजेशन के माध्यम से टैग किये गये मतदान केन्द्रों के लिए ई०वी० एम० एवं वी० वी० पेट उपलब्ध कराया जाता है.मतदान दलों द्वारा ई०वी०एम० प्राप्ति के समय जाँच पड़ताल कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि उपलब्ध कराये गये BU, CU, VVPAT उनके मतदान केन्द्र से संबंधित है.साथ ही सुरक्षित रखी गयी मशीनें आवश्यकतानुसार Replacement के लिए (यदि मतदान केन्द्र पर मशीनें खराब हो जाती है) सेक्टर पदाधिकारियों को उपलब्ध करा दिया जाता है. आयोग द्वारा प्रतिनियुक्त प्रेक्षक भी इस प्रक्रिया की निगरानी करते है. इससे संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश आयोग के Manual on Electronic Voting Machine में वर्णित है। जो आयोग के वेबसाईट https://www.eci.gov.in/evm-vvpat पर उपलब्ध है.

        बिहार विधानसभा आम निर्वाचन, 2025 के दौरान पश्चिम चम्पारण जिला में कल दिनांक 11.11. 2025 को होने वाले मतदान  के लिए  आज दिनांक 10.11.2025 को सभी मतदान दलों एवं सेक्टर पदाधिकारियों को अभ्यर्थियों/निर्वाचन अभिकर्ताओं एवं प्रेक्षक की उपस्थिति में निर्वाची पदाधिकारी द्वारा स्ट्रांग रूम खोलते हुए ई०वी० एम० एवं वी०वी०पैट का वितरण का कार्य किया गया. यह कार्य जिले के संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के डिस्पैच सेंटर से किया गया है, जिसका विवरण निम्नवत है-

विधानसभा क्षेत्र सं० एवं नाम डिस्पैच सेंटर का पता

01- वाल्मीकिनगर- बाबा भूतनाथ महाविद्यालय, मंगलपुर, बगहा-2

02- रामनगर (ST)- राजकीय कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय, हरिनगर

03- नरकटियागंज- कृषि बाजार समिति, नरकटियागंज

04- बगहा- बाबा भूतनाथ महाविद्यालय, मंगलपुर, बगहा-2

05- लौरिया- एम.जे.के. कॉलेज, बेतिया

06- नौतन- एम.जे.के. कॉलेज, बेतिया

07- चनपटिया- एम.जे. के. कॉलेज, बेतिया

08- बेतिया- एम.जे.के. कॉलेज, बेतिया

09-सिकटा- कृषि बाजार समिति, नरकटियागंज

मतदान दलों/सेक्टर पदाधिकारियों द्वारा जिन वाहनों के माध्यम से ई०वी० एम० एवं वी०वी०पैट का परिवहन किया जा रहा है, उनके वाहनों में लगाए गए GPS उपकरण अथवा Ele Traces मोबाइल ऐप के माध्यम से उनके मूवमेंट ट्रैकिंग की व्यवस्था की गयी है.मतदान के उपरांत उक्त ई०वी० एम० में से मतदान में उपयोग किये गये मशीनों को जिले के Polled EVM Strong Room में भंडारित किया जाएगा. साथ ही जो मशीनें खराब पायी जाएगी उन्हें Polled EVM Strong Room से अलग स्थित चिन्हित वेयर हाउस में भंडारित किया जाएगा.

रविवार, 9 नवंबर 2025

धन्य माता एलिस्वा वाकायिल: भारतीय नारी शक्ति और समर्पण का अमर प्रतीक

 

धन्य माता एलिस्वा वाकायिल: भारतीय नारी शक्ति और समर्पण का अमर प्रतीक

कोच्चि.कोच्चि के वल्लारपदम महागिरजाघर में आयोजित ऐतिहासिक समारोह में जब  पोप लियो XIV के विशेष प्रतिनिधि और मलेशिया के पेनांग के बिशप कार्डिनल सेबेस्टियन फ्रांसिस ने आधिकारिक तौर पर मदर एलिस्वा को धन्य घोषित किया. कार्डिनल ने पोप द्वारा जारी घोषणा पत्र लैटिन भाषा में पढ़ा. वेरापोली आर्चडायसिस के मेट्रोपॉलिटन जोसेफ कलाथिपरम्बिल ने अपने प्रार्थना-प्रार्थना में कहा, "मदर एलिस्वा का पवित्र, साहसी और अटूट विश्वास और प्रेम का जीवन अनेक लोगों के लिए प्रेरणादायक रहेगा.

              पेनांग के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल सेबेस्टियन फ्रांसिस ने ईशसेविका मदर एलिस्वा वाकायिल को “धन्य” घोषित किया, तो यह केवल कैथोलिक समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के समग्र सामाजिक-शैक्षिक इतिहास के लिए भी एक गौरवपूर्ण क्षण बन गया। 1831 में जन्मी और 1913 में देह त्यागने वाली मदर एलिस्वा का जीवन सेवा, त्याग और महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल है।

               मदर एलिस्वा वाकायिल ने न केवल भारत में पहला आदिवासी धर्मबहनों का धर्मसमाज टीओसीडी (Teresian Carmelite Sisters of the Third Order Discalced) की स्थापना की, बल्कि केरल में लड़कियों के लिए पहला कॉन्वेंट स्कूल भी खोला — एक ऐसा कदम जिसने 19वीं सदी के केरल में शिक्षा की दिशा बदल दी। जब समाज में महिलाओं की शिक्षा को संकीर्ण दृष्टि से देखा जाता था, तब उन्होंने उस बंधन को तोड़ते हुए ज्ञान और आत्मनिर्भरता का दीप जलाया।

           उनकी पहल से शुरू हुआ यह आंदोलन आज भी “तेरेसियन कार्मेलाइट्स धर्मसमाज” के माध्यम से हजारों युवतियों के जीवन को दिशा दे रहा है। उनके दान और भक्तिमय जीवन की परिणति अब “धन्य” के रूप में हुई है — यह उस तप, समर्पण और करुणा का सम्मान है जो उन्होंने समाज के वंचितों के लिए दिखाया।

      इस ऐतिहासिक अवसर पर मुंबई आर्चडायसिस के एमेरिटस कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस ने धन्य माता एलिस्वा की प्रतिमा का अनावरण किया और उनके अवशेषों को वेदी पर स्थापित किया गया। इस समारोह में भारतीय कैथोलिक बिशप सम्मेलन (CBCI) के अध्यक्ष मार एंड्रयूज थजाथ, केआरएलसीबीसी के अध्यक्ष आर्चडायसिस वर्गीज चक्कलकल और आर्चडायसिस जोसेफ कलाथिपरम्बिल सहित अनेक वरिष्ठ धर्मगुरुओं की उपस्थिति ने इस क्षण को ऐतिहासिक बना दिया।

      एलिस्वा के जीवन का हर अध्याय प्रेरणा देता है। 20 वर्ष की आयु में पति की असामयिक मृत्यु के बाद उन्होंने सांसारिक जीवन से विरक्त होकर प्रार्थना और सेवा को अपना जीवन-मार्ग बनाया। उन्होंने न केवल शिक्षा, बल्कि करुणा और समानता के मूल्य को समाज में स्थापित किया।

ईसाई परंपरा में संत घोषित किए जाने की प्रक्रिया चार चरणों से गुजरती है – ईश्वर की सेविका, आदरणीय, धन्य और अंततः संत। 2008 में उन्हें “ईश्वर की सेविका” घोषित किया गया, 2023 में “आदरणीय” और अब 2025 में “धन्य” का सम्मान प्राप्त हुआ है। अब यदि उनकी मध्यस्थता से एक और सत्यापित चमत्कार सिद्ध होता है, तो वह केरल की पांचवीं संत घोषित की जाएगी — एक ऐसी मील का पत्थर जो भारतीय नारी शक्ति की आध्यात्मिक ऊंचाई को विश्व के पटल पर और दृढ़ करेगा।

केरल में अब तक चार संत घोषित हो चुके हैं — सिस्टर अल्फोंसा, फादर कुरियाकोस चावरा, सिस्टर यूफ्रेसिया और मरियम थ्रेसिया। इस सूची में एलिस्वा वाकायिल का नाम जोड़ना, राज्य की धार्मिक विरासत और भारत की आध्यात्मिक चेतना दोनों के लिए सम्मान की बात है।

धन्य माता एलिस्वा वाकायिल का जीवन हमें याद दिलाता है कि सच्चा धर्म केवल प्रार्थना में नहीं, बल्कि सेवा, शिक्षा और समानता के प्रसार में निहित है। उनकी विरासत आज भी यह सिखाती है — “जहाँ प्रेम और सेवा है, वहीं ईश्वर का वास है।”

आलोक कुमार


शनिवार, 8 नवंबर 2025

भारतीय क्रिकेट का भविष्य अब नए और दृढ़ खिलाड़ियों के हाथों में

 ध्रुव जुरेल — भारतीय क्रिकेट का नया भरोसा

पटना.भारत ‘ए’ और दक्षिण अफ्रीका ‘ए’ के बीच जारी अनौपचारिक टेस्ट ने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को मिश्रित भावनाओं का अनुभव कराया. जहां एक ओर ध्रुव जुरेल के बल्ले से लगातार दो शतक निकलने ने उम्मीदों को नई उड़ान दी, वहीं अभिमन्यु ईश्वरन का दोनों पारियों में शून्य पर आउट होना निराशाजनक रहा. मगर इस मुकाबले ने एक बात साफ कर दी — भारतीय क्रिकेट का भविष्य अब नए और दृढ़ खिलाड़ियों के हाथों में है, और उस सूची में सबसे ऊपर नाम है ध्रुव जुरेल का.   ध्रुव जुरेल का यह प्रदर्शन किसी संयोग का परिणाम नहीं है.यह एक युवा क्रिकेटर के धैर्य, अनुशासन और निरंतर परिश्रम का प्रमाण है.उन्होंने पहली पारी में नाबाद 132 रन और दूसरी पारी में नाबाद 127 रन बनाकर न सिर्फ मैच को भारत ‘ए’ के पक्ष में मोड़ा, बल्कि यह भी साबित किया कि वह लंबे प्रारूप के लिए बने हैं. नमन ओझा के बाद वह भारत ‘ए’ के लिए दोनों पारियों में शतक जमाने वाले सिर्फ दूसरे खिलाड़ी बने हैं — यह उपलब्धि अपने आप में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है.

    साल 2001 में आगरा में जन्मे इस युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ने अंडर-19 वर्ल्ड कप 2020 में उप-कप्तान के रूप में अपनी नेतृत्व क्षमता दिखाई थी. घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने जल्द ही खुद को एक भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया.2022 में रणजी ट्रॉफी डेब्यू और नागालैंड के खिलाफ 249 रनों की पारी उनके प्रतिभा के शुरुआती संकेत थे.आज, उनके नाम 30 प्रथम श्रेणी मैचों में 51 से अधिक के औसत से लगभग 1,900 रन दर्ज हैं — एक शानदार उपलब्धि.

     इंडियन प्रीमियर लीग में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए भी उन्होंने सीमित ओवरों के खेल में अपनी उपयोगिता सिद्ध की. 2023 में आईपीएल डेब्यू के साथ ही 172.73 के स्ट्राइक रेट ने उन्हें चर्चा में ला दिया. इसके बाद 2024 में टेस्ट डेब्यू करते हुए इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट और रांची में शानदार पारियां खेलीं. रांची टेस्ट में 90 और 39 रनों की पारी ने भारत को जीत दिलाई और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का सम्मान भी मिला.जुरेल की बल्लेबाजी में सबसे उल्लेखनीय पहलू है उनकी परिस्थिति को समझने की परिपक्वता। वह न तो जल्दबाजी करते हैं और न ही रक्षात्मक रवैया अपनाते हैं — बल्कि ज़रूरत के अनुसार खेल की गति तय करते हैं.

     यह गुण उन्हें आने वाले समय में भारतीय टेस्ट टीम का स्थायी हिस्सा बना सकता है.आज जब भारतीय क्रिकेट टीम में बदलाव की नई लहर चल रही है, ध्रुव जुरेल जैसे खिलाड़ी ही उस स्थिरता और संतुलन के प्रतीक बन सकते हैं, जिसकी टेस्ट टीम को आवश्यकता है. उनकी ताज़ा उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि यह संकेत है कि भारत के पास ऋषभ पंत के बाद भी विकेटकीपिंग विभाग में भविष्य सुरक्षित है.ध्रुव जुरेल की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता — निरंतरता ही असली पूंजी है.आगरा से शुरू हुई यह यात्रा अब भारतीय क्रिकेट के भविष्य की रेखाओं को आकार दे रही है। और शायद यही वह क्षण है जब हम निश्चिंत होकर कह सकते हैं — भारतीय टेस्ट क्रिकेट को उसका अगला ध्रुव मिल गया है.


आलोक कुमार


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