शनिवार, 8 नवंबर 2025

भारतीय क्रिकेट का भविष्य अब नए और दृढ़ खिलाड़ियों के हाथों में

 ध्रुव जुरेल — भारतीय क्रिकेट का नया भरोसा

पटना.भारत ‘ए’ और दक्षिण अफ्रीका ‘ए’ के बीच जारी अनौपचारिक टेस्ट ने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को मिश्रित भावनाओं का अनुभव कराया. जहां एक ओर ध्रुव जुरेल के बल्ले से लगातार दो शतक निकलने ने उम्मीदों को नई उड़ान दी, वहीं अभिमन्यु ईश्वरन का दोनों पारियों में शून्य पर आउट होना निराशाजनक रहा. मगर इस मुकाबले ने एक बात साफ कर दी — भारतीय क्रिकेट का भविष्य अब नए और दृढ़ खिलाड़ियों के हाथों में है, और उस सूची में सबसे ऊपर नाम है ध्रुव जुरेल का.   ध्रुव जुरेल का यह प्रदर्शन किसी संयोग का परिणाम नहीं है.यह एक युवा क्रिकेटर के धैर्य, अनुशासन और निरंतर परिश्रम का प्रमाण है.उन्होंने पहली पारी में नाबाद 132 रन और दूसरी पारी में नाबाद 127 रन बनाकर न सिर्फ मैच को भारत ‘ए’ के पक्ष में मोड़ा, बल्कि यह भी साबित किया कि वह लंबे प्रारूप के लिए बने हैं. नमन ओझा के बाद वह भारत ‘ए’ के लिए दोनों पारियों में शतक जमाने वाले सिर्फ दूसरे खिलाड़ी बने हैं — यह उपलब्धि अपने आप में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है.

    साल 2001 में आगरा में जन्मे इस युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ने अंडर-19 वर्ल्ड कप 2020 में उप-कप्तान के रूप में अपनी नेतृत्व क्षमता दिखाई थी. घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने जल्द ही खुद को एक भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया.2022 में रणजी ट्रॉफी डेब्यू और नागालैंड के खिलाफ 249 रनों की पारी उनके प्रतिभा के शुरुआती संकेत थे.आज, उनके नाम 30 प्रथम श्रेणी मैचों में 51 से अधिक के औसत से लगभग 1,900 रन दर्ज हैं — एक शानदार उपलब्धि.

     इंडियन प्रीमियर लीग में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए भी उन्होंने सीमित ओवरों के खेल में अपनी उपयोगिता सिद्ध की. 2023 में आईपीएल डेब्यू के साथ ही 172.73 के स्ट्राइक रेट ने उन्हें चर्चा में ला दिया. इसके बाद 2024 में टेस्ट डेब्यू करते हुए इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट और रांची में शानदार पारियां खेलीं. रांची टेस्ट में 90 और 39 रनों की पारी ने भारत को जीत दिलाई और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का सम्मान भी मिला.जुरेल की बल्लेबाजी में सबसे उल्लेखनीय पहलू है उनकी परिस्थिति को समझने की परिपक्वता। वह न तो जल्दबाजी करते हैं और न ही रक्षात्मक रवैया अपनाते हैं — बल्कि ज़रूरत के अनुसार खेल की गति तय करते हैं.

     यह गुण उन्हें आने वाले समय में भारतीय टेस्ट टीम का स्थायी हिस्सा बना सकता है.आज जब भारतीय क्रिकेट टीम में बदलाव की नई लहर चल रही है, ध्रुव जुरेल जैसे खिलाड़ी ही उस स्थिरता और संतुलन के प्रतीक बन सकते हैं, जिसकी टेस्ट टीम को आवश्यकता है. उनकी ताज़ा उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि यह संकेत है कि भारत के पास ऋषभ पंत के बाद भी विकेटकीपिंग विभाग में भविष्य सुरक्षित है.ध्रुव जुरेल की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता — निरंतरता ही असली पूंजी है.आगरा से शुरू हुई यह यात्रा अब भारतीय क्रिकेट के भविष्य की रेखाओं को आकार दे रही है। और शायद यही वह क्षण है जब हम निश्चिंत होकर कह सकते हैं — भारतीय टेस्ट क्रिकेट को उसका अगला ध्रुव मिल गया है.


आलोक कुमार


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