गुरुवार, 20 नवंबर 2025

जेडीयू, बीजेपी और सहयोगी दलों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा

 

पटना .बिहार की राजनीतिक दिशा एक बार फिर स्पष्ट होती दिखाई दे रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नए मंत्रिमंडल ने आकार ले लिया है और विभागों का ब्योरा यह संकेत देता है कि सत्ता-साझेदारी का संतुलन, अनुभव का उपयोग और राजनीतिक संदेश—तीनों को केंद्र में रखा गया है.जेडीयू, बीजेपी और सहयोगी दलों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा आने वाले दिनों की प्रशासनिक प्राथमिकताओं को भी रेखांकित करता है.

      सबसे पहले स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामान्य प्रशासन, गृह, कैबिनेट सचिवालय और निगरानी जैसे अहम विभाग अपने पास रखकर यह साफ कर दिया है कि शासन की धुरी अभी भी उन्हीं के हाथ में है. इसके साथ ही निर्वाचन और वे सभी विभाग जो किसी अन्य को आवंटित नहीं हैं, यह दिखाता है कि वे प्रशासनिक नियंत्रण को केंद्रीकृत रखना चाहते हैं.

    दो उपमुख्यमंत्रियों—सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा—को सौंपे गए विभाग स्पष्ट रूप से बीजेपी की प्राथमिकता और ताकत दोनों को इंगित करते हैं.सम्राट चौधरी को वित्त और वाणिज्य-कर जैसे निर्णायक आर्थिक विभाग सौंपे गए हैं, जो राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक प्रबंधन पर उनकी भूमिका को मजबूत बनाएंगे. वहीं विजय कुमार सिन्हा को कृषि और खान-भूतत्व दिए जाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नब्ज पर बीजेपी की पकड़ बढ़ाने की कोशिश साफ दिखती है.

     जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं में विजय कुमार चौधरी को जल संसाधन और संसदीय कार्य सौंपा गया है—दो ऐसे विभाग, जो नीति निर्माण और क्रियान्वयन के बीच पुल का काम करते हैं.बिजेंद्र प्रसाद यादव को ऊर्जा और योजना जैसे विभाग देकर पार्टी ने उन्हें विकास-ढांचे का चेहरा बनाने की कोशिश की है. श्रवण कुमार और अशोक चौधरी को ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विभाग देने से नीतीश मॉडल की मूल भूमि—ग्रामीण विकास—को मजबूती मिलती है.

    भाजपा के मंगल पांडेय को स्वास्थ्य और विधि की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपकर केंद्र और राज्य के तालमेल को सुदृढ़ करने की कोशिश झलकती है. नितिन नवीन को पथ निर्माण और नगर विकास जैसे भारी-भरकम विभाग दिए जाने से शहरी बुनियादी ढांचे पर अधिक फोकस का संकेत मिलता है.

           वहीं उद्योग, पंचायती राज जैसे विभाग रामकृपाल यादव को देकर बीजेपी ने जमीनी राजनीतिक अनुभव को प्रशासनिक जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास किया है. सुशील कुमार सुमन के पास लघु जल संसाधन और मो. जामा खान के पास अल्पसंख्यक कल्याण का विभाग—ये दोनों क्षेत्र सामाजिक संतुलन की राजनीति को रेखांकित करते हैं.

         सहयोगी दलों को भी बराबर की भूमिका देने की कोशिश साफ दिखती है. लोजपा (रामविलास) के संजय कुमार को श्रम संसाधन और विज्ञान-प्रौद्योगिकी, जबकि संजय कुमार सिंह को पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन जैसे संवेदनशील विभाग सौंपे गए हैं.

       सुरक्षा, सेवा और संवर्धन के व्यापक दायरे में भाजपा की श्रेयसी सिंह (पर्यटन व खेल), डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल (आपदा प्रबंधन) और दीपक प्रकाश (सहकारिता) जैसे नाम यह बताते हैं कि पार्टी नई पीढ़ी और अनुभवी टीम को साथ लेकर चलना चाहती है.

     कुल मिलाकर यह मंत्रिमंडल न केवल राजनीतिक समीकरणों का संतुलन प्रस्तुत करता है, बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकताओं की रोडमैप भी स्पष्ट करता है.आने वाले दिनों में वास्तविक परीक्षा इस बात की होगी कि ये विभागीय वितरण बिहार की जमीन पर कितने असरदार परिणाम दे पाते हैं.

आलोक कुमार

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