पटना.भारतीय क्रिकेट में जसप्रीत बुमराह का नाम अब सिर्फ रफ्तार और सटीकता का पर्याय नहीं रहा, बल्कि निरंतरता और कसावट भरे प्रदर्शन का मानदंड भी बन चुका है. गुवाहाटी टेस्ट में बुमराह ने अपने टेस्ट करियर की 10,000वीं गेंद फेंक कर एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जो किसी भी तेज गेंदबाज के लिए धैर्य, फिटनेस और उच्च स्तर की निरंतरता का प्रमाण होता है.
दिलचस्प बात यह है कि बुमराह की पहली टेस्ट गेंद एबी डिविलियर्स को थी और 10,000वीं गेंद एडन मार्क्रम को—दोनों ही दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज बल्लेबाज। यह संयोग भी उनके करियर के उस दायरे को रेखांकित करता है, जिसमें उन्होंने अपना सबसे बेहतरीन क्रिकेट उन्हीं टीमों के खिलाफ खेला, जो तकनीकी रूप से विश्व क्रिकेट की सबसे मजबूत इकाइयों में रहती हैं.
भारत की ओर से तेज गेंदबाजी में यह मुकाम हासिल करने वाले बुमराह छठे भारतीय तेज गेंदबाज हैं, जबकि कुल मिलाकर वे 17वें भारतीय गेंदबाज और दुनिया के 130वें गेंदबाज बने हैं जिन्होंने टेस्ट में 10,000 से अधिक गेंदें फेंकी हैं. तेज गेंदबाजों की वैश्विक सूची में वे 75 वें नंबर पर हैं—एक उपलब्धि जो उनके अपेक्षाकृत छोटे टेस्ट करियर को देखते हुए और भी बड़ी दिखती है.
कपिल देव से लेकर बुमराह तक—एक सफर की निरंतरता
भारत के टेस्ट इतिहास में सबसे अधिक गेंदें फेंकने का रिकॉर्ड कपिल देव के नाम है—27,740 गेंदें, जो 227 पारियों में फेंकी गईं। इशांत शर्मा (19,160) और जहीर खान (18,785) जैसे बड़े नाम इस सूची के शीर्ष पर हैं. इनके बाद जवागल श्रीनाथ (15,104) और मोहम्मद सिराज (11,515) आते हैं.
इन दिग्गजों की पांत में अब बुमराह का नाम भी मजबूती से जुड़ चुका है—10,013 गेंदों के साथ। यह संख्या सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उस भरोसे का प्रतीक है, जिसके दम पर टीम इंडिया ने अक्सर कठिन परिस्थितियों में उन्हें आक्रमण का नेतृत्व सौंपा.
विश्व रिकॉर्ड और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक गेंदें फेंकने का विश्व रिकॉर्ड मुथैया मुरलीधरन के नाम है—44,039 गेंदें.उनके बाद अनिल कुंबले (40,850) और शेन वॉर्न (40,705) का नाम आता है.तेज गेंदबाजों में यह रिकॉर्ड इंग्लैंड के जेम्स एंडरसन के पास है, जिन्होंने 40,037 गेंदें फेंकी हैं—यह आंकड़ा अपने आप में तेज गेंदबाजी की कठिनाइयों पर प्रकाश डालता है.
बुमराह की उपलब्धि का असल महत्व
आंकड़ों से परे इस उपलब्धि का असली अर्थ यह है कि बुमराह अपनी अनोखी एक्शन, सीम-अप नियंत्रित स्विंग और लगातार विकेट लेने की क्षमता के बावजूद अपनी फिटनेस और वर्कलोड को संभालने में कितने परिपक्व हो चुके हैं.
उनका खेल अब सिर्फ ‘स्पेल’ नहीं, बल्कि ‘स्टेटमेंट’ बन गया है—कि आधुनिक क्रिकेट में भी क्लासिकल टेस्ट गेंदबाज अपनी जगह मजबूती से बनाए रख सकता है.
जसप्रीत बुमराह का यह मील का पत्थर भारतीय क्रिकेट के लिए एक और प्रमाण है कि तेज गेंदबाजी की परंपरा, जो कपिल देव ने शुरू की थी और जहीर-इशांत ने आगे बढ़ाई, वह अब बुमराह और सिराज की पीढ़ी के हाथों सुनहरे दौर में प्रवेश कर रही है.
आलोक कुमार)
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