सोमवार, 1 सितंबर 2025

फिर जवाबदेही क्यों नहीं?

 

संसद का समय जनता का, खर्च भी जनता का – फिर जवाबदेही क्यों नहीं?


नई दिल्ली. लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जनता के टैक्स से चलने वाली संसद ही अक्सर ठप पड़ी रहती है. दमन और दीव से निर्दलीय सांसद उमेश पटेल का संसद परिसर में किया गया विरोध इसी बीमार व्यवस्था पर सीधा प्रहार है.उनका सवाल बड़ा सरल है—जब सदन नहीं चलता, तो खर्च जनता क्यों उठाए? सांसदों की जेब से ही इसकी वसूली क्यों न हो?यह सवाल असहज करने वाला है, क्योंकि संसद का एक-एक मिनट करोड़ों रुपये का होता है.जब सत्ता और विपक्ष बहस छोड़कर हंगामा करते हैं, तो यह सीधे-सीधे राष्ट्रीय संसाधनों की बर्बादी है. उमेश पटेल का बैनर—“माफी मांगो, सत्ता पक्ष और विपक्ष माफी मांगो”—असल में हर उस करदाता की आवाज़ है, जो संसद टीवी पर हंगामे का तमाशा देखकर खुद को ठगा महसूस करता है.

इस बार के सत्र के आंकड़े बताते हैं कि 120 घंटे तय चर्चा में से महज़ 37 घंटे ही बहस हो सकी.बाकी वक्त शोर-शराबे की भेंट चढ़ गया.नतीजा यह हुआ कि 14 में से 12 विधेयक बिना चर्चा के पारित कर दिए गए.क्या यही है लोकतंत्र की आत्मा? संसद बहस के लिए बनी है, न कि ‘मशीनरी’ की तरह बिल ठेलकर पास करने के लिए.

ऐतिहासिक उदाहरण

भारत की संसदीय परंपरा में बहस और तर्क को ही लोकतंत्र की जान माना गया है। जवाहरलाल नेहरू से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक के दौर में तीखी बहस हुईं, लेकिन संसद का गरिमा और संवाद अभी भटका नहीं.आज की स्थिति इन आदर्श उदाहरणों के उलट है—जहाँ बहस की जगह नारेबाजी और जिद ने ले ली है.

अन्य देशों की मिसाल

दुनिया के कई लोकतंत्रों में ऐसी बर्बादी पर कड़ी व्यवस्था है.उदाहरण के तौर पर, ब्रिटेन की संसद में अगर सांसद लगातार गैर-हाजिर रहते हैं या अनुशासनहीनता करते हैं, तो उनके वेतन में कटौती हो जाती है.अमेरिका में भी टैक्स-पेयर से जुड़ी जवाबदेही पर संसद का अनुशासन बेहद सख्त है. जापान और दक्षिण कोरिया में तो सांसदों पर अनुशासनहीनता की स्थिति में भारी जुर्माना लगाया जाता है. सवाल उठता है कि भारत में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं?

असली बहस

सवाल यह नहीं कि सत्ता या विपक्ष कौन दोषी है, बल्कि यह है कि जनता के पैसों का अपव्यय आखिर कब तक चलेगा. जब आम नागरिक समय पर टैक्स देता है, तो उसे यह अधिकार भी होना चाहिए कि वह अपने प्रतिनिधियों से जवाब मांगे—आपका एक-एक घंटा कहाँ खर्च हुआ?उमेश पटेल की मांग आज सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की असल आत्मा को बचाने का आह्वान है. संसद में मौजूद हर दल को यह समझना होगा कि संसद हंगामे का अखाड़ा नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों का मंदिर है। अगर यह मंदिर बार-बार अपवित्र होगा, तो जनता अब और चुप नहीं बैठेगी.


आलोक कुमार

रविवार, 31 अगस्त 2025

युवाओं को मिला नई दिशा का प्रशिक्षण

 


प्रमुख योजनाओं पर कार्यशाला 

युवाओं को मिला नई दिशा का प्रशिक्षण

कटिहार का सामाजिक परिदृश्य शनिवार को कुछ अलग था.जगबंधु अधिकारी सामुदायिक भवन में “मेरा युवा भारत (माय भारत)” द्वारा आयोजित कार्यशाला ने न केवल युवाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश भी दिया.

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ.निदेशक डीआरडीए सुदामा प्रसाद सिंह, जिला युवा अधिकारी जनक राज मीना, महानिदेशक प्रतिनिधि बबन कुमार झा सहित अन्य अधिकारियों ने मिलकर यह संदेश दिया कि योजनाओं की रोशनी तभी जन-जन तक पहुंचेगी जब उसका प्रसार सही हाथों तक होगा.

प्रथम सत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल-जीवन-हरियाली जैसी योजनाओं की पात्रता और प्रक्रिया समझाई गई.यह पहल इस मायने में अहम रही कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आज भी कई पात्र लोग योजना से वंचित हैं, क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है. शिक्षा और वित्तीय सहायता से जुड़ी मुख्यमंत्री स्वयं सहायता योजना तथा स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की विस्तृत जानकारी युवाओं के लिए आशा की किरण रही.

कार्यक्रम का दूसरा हिस्सा रोजगार और कौशल विकास पर केंद्रित रहा. एनसीएस पोर्टल और रोजगार मेलों की जानकारी के साथ युवाओं को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया.कौशल विकास मिशन की चर्चा ने यह स्पष्ट किया कि बिना हुनर के रोजगार की संभावनाएं सीमित होती हैं.

स्वास्थ्य और खेल पर भी विस्तृत विमर्श हुआ. आयुष्मान भारत योजना से लेकर फिट इंडिया मूवमेंट और खेल विभाग की योजनाओं तक, संदेश साफ था—स्वस्थ और सक्रिय युवा ही सशक्त भारत का आधार हैं.कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा कलाकार पेंशन योजना और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की जानकारी ने सांस्कृतिक प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया.

अंततः 50 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए.यह केवल औपचारिकता नहीं बल्कि इस बात का प्रतीक था कि अब ये युवा योजना के प्रचार-प्रसार में torch bearer की भूमिका निभाएंगे.

निस्संदेह, इस प्रकार की कार्यशालाएं युवाओं को सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि उन्हें समाज के विकास की धारा से जोड़ती हैं.यह आयोजन कटिहार में युवाओं के लिए नई ऊर्जा और दिशा का वाहक बना है.अब आवश्यकता है कि ऐसे प्रयास सतत् हों और इन प्रशिक्षित युवाओं का इस्तेमाल समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने में हो.


आलोक कुमार

शनिवार, 30 अगस्त 2025

जलवायु परिवर्तन, शमन एवं अनुकूलन विषय पर क्षेत्रीय सम्मेलन

 जलवायु परिवर्तन, शमन एवं अनुकूलन विषय पर क्षेत्रीय सम्मेलन में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन पर बैठक

 


पटना.बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में आज एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें हाल ही में आयोजित “जलवायु परिवर्तन, शमन एवं अनुकूलन विषयक क्षेत्रीय सम्मेलन” में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई.

बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, जल संसाधन विभाग, शहरी विकास एवं आवास विभाग, कृषि विभाग, उद्योग विभाग, ऊर्जा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, सूचना प्रावैधिकी विभाग, जल-जीवन-हरियाली मिशन, बिहार मौसम सेवा केंद्र, एवं बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित विभिन्न विभागों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं.


आलोक कुमार

शुक्रवार, 29 अगस्त 2025

भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय का गेट तोड़कर अंदर घुस गए थे. भाजपा कार्यकर्ताओं पर गाड़ियों में तोड़फोड़ का भी आरोप है. झड़प में कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को चोट आने की भी जानकारी है.

   

 पटना. इन दिनों बिहार में वोटर अधिकार यात्रा जारी है. गत दिनों राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित रूप से अपशब्द कहे जाने के मामले ने शुक्रवार को पटना में हिंसक मोड़ ले लिया.बीजेपी कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे और राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी शुरू की. जवाब में कांग्रेस कार्यकर्ता भी आक्रामक हो गए और देखते ही देखते दोनों दलों के बीच झड़प शुरू हो गई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपशब्द कहे जाने के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटना में कांग्रेस कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ता भिड़ गए. कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच लाठी युद्ध हो गया. दोनों पक्षों की तरफ से जमकर डंडे चले जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है

राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ से संबंधित एक मंच से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दिवंगत मां के लिए अभद्र भाषा के इस्तेमाल के विरोध में भाजपा द्वारा पटना में मार्च निकाला गया था. भाजपा कार्यकर्ताओं ने दरभंगा में नारे लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय सदाकत आश्रम तक मार्च निकाला. इसी दौरान भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई.

  कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने पटना में पार्टी की बिहार इकाई के कार्यालय पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए शुक्रवार को कहा कि सत्य और अहिंसा के आगे, असत्य और हिंसा टिक ही नहीं सकते तथा कांग्रेस सत्य एवं संविधान की रक्षा करती रहेगी.


आलोक कुमार


गुरुवार, 28 अगस्त 2025

शैक्षणिक कैंपस का भगवाकरण कर रही है केंद्र सरकार: शाश्वत शेखर

*लोकतांत्रिक विरोध में हिंसा का कोई स्थान नहीं: एनएसयूआई

*एनएसयूआई के लोकतांत्रिक विरोध पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने किया तानाशाही पूर्ण व्यवहार*

*छात्रों की समस्या को सुनने की जगह गुंडों से मारपीट करवाते हैं केंद्रीय शिक्षा मंत्री: शाश्वत शेखर

*शैक्षणिक कैंपस का भगवाकरण कर रही है केंद्र सरकार: शाश्वत शेखर


पटना. बिहार के दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एनएसयूआई के छात्र नेताओं ने छात्र हितों की खिलाफत करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को काला झंडा दिखाया था जिसके बाद भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े गुंडों ने उनके ऊपर कायरता हमला कर दिया था. इसमें प्रदर्शनकारी एनएसयूआई के छात्र नेताओं की केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से छात्र हित में कदम उठाने की मांग थी जिसे किनार करते हुए लोकतांत्रिक विरोध को गुंडों के बल पर दबाने का काम किया गया। ये बातें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को काला झंडा दिखाने वाले एनएसयूआई के राष्ट्रीय संयोजक शाश्वत शेखर ने कही.

एनएसयूआई नेता शाश्वत शेखर ने कहा कि कर्मचारी चयन आयोग में व्याप्त कुव्यवस्था को खत्म किया जाए और स्वच्छ परीक्षा का आयोजन किया जाएं।.पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाए, छात्रावासों, लैब को दुरुस्त और प्लेसमेंट सेल को प्रभावी बनाने की मांग हमने की है। वहीं बिहार के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बिहार के युवाओं को शोध और शैक्षणिक गैर शैक्षणिक नौकरी में मौका दिया जाएं. साथ ही विश्वविद्यालय कैंपस पर आरएसएस के लोगों के द्वारा व्याप्त एकाधिकार को समाप्त किया जाए और नियुक्तियों में आरएसएस के छात्र संगठनों के लोगों की एकतरफा बहाली को अविलंब रोका जाएं.
उन्होंने मांग की है कि बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में आरएसएस से जुड़े कुलपतियों और शिक्षकों की बहाली धड़ल्ले से जारी है. इस पर अविलंब रोक लगाया जाए.
इन्हीं मुद्दों के खिलाफ एनएसयूआई लगातार संघर्ष करती आ रही है और जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्टूडेंट कॉन्क्लेव के नाम पर पटना आए थे तो उन तक अपनी बात पहुंचाने हम पहुंचे थे लेकिन वहां भाजपा संगठन से जुड़े लोगों ने लोकतांत्रिक विरोध प्रक्रिया को तानाशाही तरीके से मारपीट कर दबाने का काम किया. यह संघर्ष अनवरत जारी रहेगा.एनएसयूआई पूरे बिहार में अपने शीर्ष नेतृत्व के साथ मिलकर बेहतर शैक्षणिक माहौल और छात्रों को नौकरियों में अवसर प्रदान करने को संघर्ष करती रहेगी.
           पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष पद के पूर्व प्रत्याशी प्रकाश तिवारी ने कहा कि एनएसयूआई छात्र हितों के वाजिब मांगों को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पास पहुंचाने के लिए लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराया लेकिन छात्रों के भलाई के विरोधी लोगों ने दमनात्मक तरीके से इस मामले को कुचलने का प्रयास किया इसमें हमें गंभीर चोट भी आई लेकिन एनएसयूआई ऐसे तानाशाही संगठनों के खिलाफ संघर्ष करती रहेगी. विश्वविद्यालय में व्याप्त कुव्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ हम लगातार लड़ते रहेंगे.

प्रदेश कांग्रेस के मीडिया पैनलिस्ट पंकज यादव ने कहा कि गांधी संग्रहालय के सामने गांधीवादी तरीके से एनएसयूआई के छात्र नेताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत छात्र हितों में अपना विरोध दर्ज कराया लेकिन गोडसेवादी मानसिकता के लोगों ने अपनी तानाशाही रवैये से दमनात्मक व्यवहार कर हिंसक रूप से छात्र नेताओं के साथ व्यवहार किया जिसकी हम कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हैं.

आलोक कुमार

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बुधवार, 27 अगस्त 2025

असहायों के बीच राहत की किरण बने मुखिया राज कुमार भारती

 असहायों के बीच राहत की किरण बने मुखिया राज कुमार भारती


समेली.कटिहार के समेली प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत राज मलहरिया में मुखिया राज कुमार भारती ने सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए करीब 400 असहाय वृद्धजनों, विकलांगजनों और घुटने-कमर-कान की बीमारी से पीड़ित परिवारों के बीच बहुमूल्य कीट का वितरण किया.

       यह वितरण पंचायत के वार्ड संख्या 1 से 9 तथा 11, 12 और 13 में किया गया. इस अवसर पर व्हीलचेयर, घुटने व कमर का बेल्ट, कान की मशीन, स्टिक-छड़ी आदि उपकरण बड़े पैमाने पर वितरित किए गए.

       मुखिया भारती ने बताया कि वितरण से पहले पंचायत का सघन सर्वेक्षण कराया गया था, जिसमें पाया गया कि अधिकांश वृद्धजन और दिव्यांगों चलने-फिरने में असमर्थ हैं या गंभीर रोगों से जूझ रहे हैं.इसी आधार पर वयोश्री योजना (आसरा), भारत सरकार की मदद से यह पहल की गई.

        कार्यक्रम के दौरान मुखिया ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनका लक्ष्य है कि पंचायत के 1000 पीड़ित परिवारों तक इस तरह की सहायता पहुँचे.

        इस वितरण कार्यक्रम में सरपंच प्रभाष कुमार मंडल, उप मुखिया चंदन कुमार, वार्ड सदस्य लुशी कुमारी, प्रीति कुमारी, वार्ड प्रतिनिधि चंदन रविदास, बबलू कुमार, पंच लुचाय मंडल, सोमिजा खातून समेत कई जनप्रतिनिधि सक्रिय रहे.

     ग्रामीणों और लाभार्थियों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता का नजारा इस बात का प्रमाण था कि यह पहल उनके जीवन में राहत और उम्मीद की किरण लेकर आई है.

आलोक कुमार


मंगलवार, 26 अगस्त 2025

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को हुआ है

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को हुआ है

उसकी 115 वीं जन्म जयंती है


कोलकाता . सर्वप्रथम मदर टेरेसा अपने पल्ली में एक जेसुइट पादरी द्वारा संचालित सोडालिटी नामक एक युवा समूह में शामिल हुईं और इसी में उनकी भागीदारी ने उन्हें एक मिशनरी नन के रूप में सेवा करने के लिए प्रेरित किया.

   वह 17 साल की उम्र में लोरेटो की सिस्टर्स में शामिल हो गईं और उन्हें कलकत्ता भेज दिया गया जहाँ उन्हें एक हाई स्कूल में पढ़ाया.उन्हें टीबी हो गया और उन्हें दार्जिलिंग में आराम करने के लिए भेज दिया गया. दार्जिलिंग जाने वाली ट्रेन में ही उन्हें बुलावा आया - जिसे उन्होंने ईश्वर का "आदेश" कहा कि कॉन्वेंट छोड़कर गरीबों के बीच काम करना और रहना है.

     उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि उन्हें ननों का एक संघ स्थापित करना है, या यह भी नहीं पता था कि उन्हें कहाँ सेवा करनी है. ट्रेन में बिताए उस पल को याद करते हुए उन्होंने एक बार कहा था, "मुझे पता था कि मेरा स्थान कहाँ है, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि वहाँ कैसे पहुँचना है."

आलोक कुमार


सोमवार, 25 अगस्त 2025

बीमा क्लेम विवाद पर अदालत सख्त, नेशनल इंश्योरेंस की संपत्तियों की कुर्की का आदेश

 बीमा क्लेम विवाद पर अदालत सख्त, नेशनल इंश्योरेंस की संपत्तियों की कुर्की का आदेश


नई दिल्ली. सात वर्षों से लंबित बीमा दावे के मामले में अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए संपत्ति कुर्की का वारंट जारी करने का निर्देश दिया है. यह मामला 018 से पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली में लंबित था.

     वादी सुचिता डेविड, निवासी ए-ब्लॉक हट्स, धोबी घाट, किरबी प्लेस, नई दिल्ली, ने वाहन संख्या DL-ILS-5501 के लिए बीमा पॉलिसी संख्या 35101031176340031147 के तहत नेशनल इंश्योरेंस से बीमा कराया था। पॉलिसी 03 अप्रैल 2017 से 02 अप्रैल 2018 तक वैध थी. 23 जून 2017 की सुबह अकबर रोड, जिमखाना क्लब गोलचक्कर के पास उक्त वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया,वादी के अनुसार, वाहन का बीमा घोषित मूल्य ₹2,05,000/- था और दुर्घटना के बाद इसे मरम्मत से परे माना गया.

    बीमा कंपनी से क्लेम न मिलने पर वादी ने 26 अप्रैल 2018 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद सुचिता डेविड ने 06 जुलाई 2018 को सिविल वाद (CS SCJ No. 875/2018) दायर किया. 08 दिसंबर 2023 को सीनियर सिविल जज, पटियाला हाउस कोर्ट ने कंपनी को ₹2,05,447/- राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया. लेकिन आदेश के बावजूद नेशनल इंश्योरेंस ने भुगतान नहीं किया.वर्तमान में वादी ₹2,20,477/- राशि के साथ 24% वार्षिक ब्याज की मांग कर रही है.

अदालत ने पाया कि आदेश पालन में जिला मजिस्ट्रेट भी विफल रहे हैं। अब निर्देश दिए गए हैं कि चल संपत्तियों की कुर्की का नया वारंट जारी किया जाए.1 जुलाई 2025 को बेलीफ नियुक्ति के लिए उपस्थित होने का निर्देश.19 अगस्त 2025 को अगली कार्यवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश.यह मामला भारतीय बीमा क्षेत्र में दावों के निपटान में देरी और आदेश अनुपालन की गंभीर समस्या को उजागर करता है.धारा 151 CPC (न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों) के तहत अदालत ने कुर्की की कार्रवाई का निर्देश दिया है.

कंपनी का आदेश पालन न करना अवमानना के दायरे में आ सकता है.यह केस उपभोक्ता संरक्षण कानूनों और बीमा अधिनियम, 1938 के तहत दावों के समय पर निपटान के महत्व को रेखांकित करता है.अगर नेशनल इंश्योरेंस आदेश का पालन नहीं करता, तो संपत्तियों की नीलामी और वादी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अगली कार्यवाही और कठोर दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं.

आलोक कुमार

दुकान लगाने से सड़क अतिक्रमण हो जाता



पटना.पटना नगर निगम,दीघा थाना और दीघा हाट में दुकान सजाने वालों के साथ छतीस का रिश्ता बन गया है.कई दशक से पटना- बांस घाट- दानापुर मुख्य मार्ग के दीघा के आसपास मुख्य मार्ग के दोनों तरफ बेरोजगार गरीब लोग दीघा हाट में दुकान सजाने का काम करते हैं. यहां सब्जी,फल और घरेलू सामान बेचते हैं.इन लोगों के द्वारा दुकान लगाने से सड़क अतिक्रमण हो जाता है.जिसके कारण जाम की स्थिति बन जाती है.
         बता दें कि पटना-  बांस घाट-  दानापुर मुख्य मार्ग के संपर्क में संत माइकल हाई स्कूल, हार्टमन हाई स्कूल,साईं शिवम पब्लिक स्कूल ,डॉन बोस्को एकेडमी, संत दोमनिक सावियों स्कूल के अलावे अन्य स्कूलों में 'साहब' लोगों के साहबजादे लोग पढ़ते हैं.जो स्कूल से घर और घर से स्कूल आते समय जाम में फंसकर बिलबिलाने लगते हैं.सभी स्कूलों का समय स्कूल लगने और छोड़ने का लगभग समान ही है.इन स्कूलों के पास लंबे और चौड़ी गाड़ी है.जो जाम को महाजाम बनाने में सहायक है.
     वहीं अधिकारियों की सरकारी गाड़ी और अधिकारियों के रौबदार चालक मनमर्जी से गाड़ी को पार्किंग कर रहे हैं.इन लोगों पर दीघा थाने की पुलिस व यातायात पुलिस का पुलिसिया कानून नहीं चलता है.इनका केवल दीघा हाट पर सब्जी,फल और घरेलू सामान बेचने पर पड़ता हैं.यहां सड़क अतिक्रमण कर दुकान सजाने वालों को सबक सिखाया जाती है.
           अब बताया जाता है कि दीघा थाना पुलिस और पटना नगर निगम के कर्मियों के बीच सांठगांठ हो गया है.सादे लिबास में आकर कुछ लोग दीघा हाट पर सब्जी बेचने वालों से कहा कि सरकार अन्यत्र दुकान बनाकर देगी. नाम,मोबाइल नंबर और पता लिखा लीजिए.ये लोग इस कहावत को जानकर भी अनजान बनकर लोभ में फंस गए."शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा" यह एक प्रसिद्ध कहावत है जिसका अर्थ है कि "धोखा देने वाला, फंसाने वाला आएगा, जाल फैलाएगा". यह लोगों को आगाह करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है कि वे किसी के बहकावे में न आएं या किसी के जाल में न फंसें. यह अक्सर राजनीति या सामाजिक मुद्दों में इस्तेमाल होता है, जहां किसी को फंसाने या धोखा देने की कोशिश की जाती है.इसमें पचास से अधिक लोग फंस गए.अब उनको कोर्ट से जमानत लेने के लिए कहा जा रहा है.यहां तो दुकान चलाने का मसला है.जो दशकों से मांग की जाती है.
      इस बीच पटना नगर निगम ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया है.इस बेतुका या अव्यावहारिक आदेश में कहा गया कि सुबह आठ बजे के बाद दीघा हाट की सभी दुकानों को बंद कर देना है.ऐसा नहीं करने पर मोटी रकम वसूली और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.जो  बिना सोचे-समझे जारी कर दिया जाता है, जिससे बड़ा नुकसान होता है और अक्सर उसे बाद में वापस लेना पड़ता है. 
       पटना- बांस घाट- दानापुर मुख्य मार्ग के दीघा के आसपास मुख्य मार्ग के दोनों तरफ बेरोजगार गरीब लोग दीघा हाट में दुकान सजाने की मांग है कि सरकार हम लोगों को उपयुक्त जगह पर दुकान बनाकर दें.जिस दुकानदार पर केस किया गया है.वह केस वापस लिया जाए.

आलोक कुमार
           

शनिवार, 23 अगस्त 2025

तरीका चर्च में बार-बार विमर्श का विषय बनता रहा है

 


पटना. परमप्रसाद (पवित्र कम्युनियन) केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह वह क्षण है जब ईसाई अनुयायी स्वयं प्रभु यीशु मसीह को ग्रहण करते हैं.यह संस्कार अनुयायियों को न केवल पवित्रता प्रदान करता है बल्कि उन्हें आध्यात्मिक शक्ति से परिपूर्ण करता है और परमेश्वर के निकट लाता है.इसी कारण, इसका महत्व और इसका तरीका चर्च में बार-बार विमर्श का विषय बनता रहा है.

       रोमन कैथोलिक परंपरा में पुरोहित “ख्रीस्त का शरीर और रक्त” कहकर लोकधर्मियों की जीभ पर कम्युनियन रखते थे.यह पद्धति पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे प्रभु के प्रति गहरी श्रद्धा का प्रतीक माना गया.परंतु कोरोना महामारी के दौरान सुरक्षा कारणों से प्रीस्ट ने कम्युनियन लोकधर्मियों के हाथ में देना आरंभ किया.अब जब महामारी का दौर थम चुका है, बेतिया धर्मप्रांत के बिशप पीटर सेबेस्टियन गोबियस ने पुराने तरीके को फिर से अपनाने का आदेश जारी किया है.उनके अनुसार पुरोहितों को लोकधर्मियों की जीभ पर ही परमप्रसाद रखना चाहिए.

      प्रसिद्ध प्रीस्ट और लेखक फादर जॉर्ज मैरी क्लैरेट ने भी अपने वीडियो संदेश में इसी बात पर बल दिया कि प्रभुभोज को ग्रहण करने का तरीका केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और अनुशासन का प्रश्न है.उन्होंने अनुयायियों से कहा कि यदि वे प्रभु भोज से अधिकतम आशीष प्राप्त करना चाहते हैं, तो उन्हें उचित तैयारी और सही तरीके से इसे ग्रहण करना चाहिए. उन्होंने बाइबिल के उस अंश की याद दिलाई जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि कोई प्रभु का शरीर और रक्त बिना पहचाने ग्रहण करता है, तो वह अपनी ही दण्डाज्ञा खाता और पीता है.

       यह सवाल आज भी प्रासंगिक है – कितनी बार हम लापरवाही में प्रभु को अपवित्र कर बैठते हैं? कितनी बार हमारे हाथों से परमप्रसाद गिरा और हम अनजाने में उसे पैरों तले रौंद देते हैं? यह केवल शारीरिक असावधानी नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अपराध भी है.

          इसी संदर्भ में यह बहस जरूरी हो जाती है कि “पवित्र कम्युनियन” को ग्रहण करने का सही तरीका क्या है.परंपरा कहती है कि इसे जीभ पर ग्रहण किया जाए, ताकि प्रभु के शरीर और रक्त की पवित्रता अक्षुण्ण बनी रहे. आधुनिक परिस्थितियां हाथ में ग्रहण करने को सहज मानती हैं, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या सहजता के लिए पवित्रता से समझौता किया जा सकता है?

         अंततः, यह केवल किसी आदेश या नियम का पालन करने का विषय नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास की गहराई का प्रश्न है. परमप्रसाद तभी फलदायी होगा जब हम पूरे मन, आत्मा और विश्वास के साथ प्रभु को ग्रहण करें. यह संस्कार हमें यीशु के समान बनने और उनके जीवन-संदेश को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है.इसलिए आवश्यक है कि चर्च, पुरोहित और अनुयायी – तीनों इस संस्कार की पवित्रता और गरिमा की रक्षा करें.


आलोक कुमार


शुक्रवार, 22 अगस्त 2025

दिव्यांगजन आपदा सुरक्षा कार्यक्रम का राज्यव्यापी शुभारंभ

 

दिव्यांगजन आपदा सुरक्षा कार्यक्रम का राज्यव्यापी शुभारंभ

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में ऐतिहासिक पहल, 38 जिलों में एक साथ कार्यक्रम आयोजित

दानापुर. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (बी.एस.डी.एम.ए.) ने समाज कल्याण विभाग की संस्था “सक्षम” के सहयोग से आज प्रदेशभर में “दिव्यांगजन आपदा सुरक्षा कार्यक्रम” का भव्य शुभारंभ किया. यह महत्वाकांक्षी पहल माननीय मुख्यमंत्री सह प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नीतीश कुमार के प्रगतिशील नेतृत्व में संचालित की जा रही है.

        राज्यस्तरीय उद्घाटन समारोह पटना जिले के दानापुर स्थित सदर बुनियाद केंद्र में आयोजित हुआ.प्राधिकरण के माननीय उपाध्यक्ष डाॅ. उदय कांत, माननीय सदस्य श्री कौशल किशोर मिश्र, श्री नरेंद्र कुमार सिंह एवं श्री प्रकाश कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. समारोह में बड़ी संख्या में दिव्यांगजन और उनके परिजन उपस्थित रहे.

               इस अवसर पर माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत ने कहा - “यह कार्यक्रम केवल आपदा प्रबंधन नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा है.इसका लाभ समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है, जो आज सबसे ज्यादा संवेदनशील है.” माननीय सदस्य श्री नरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि “संभवतः पूरे देश में बिहार पहला राज्य है जिसने दिव्यांगजनों के लिए आपदा सुरक्षा कार्यक्रम को इतनी व्यापकता से लागू किया है.”

            समारोह में प्राधिकरण के ओ.एस.डी. मो. मोइन उद्दीन, एस.डी.आर.एफ. कमांडेंट श्री राजेश कुमार, "सक्षम" के वरिष्ठ प्रशासनिक पदाधिकारी श्री हरिशंकर राम, डिप्टी सी.ई.ओ. श्री सुनील कुमार, राज्य कार्यक्रम प्रबंधक श्री शाहनवाज अहमद और श्री सुशील श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे। नोडल पदाधिकारी श्री संदीप कमल तथा प्राधिकरण की अवैतनिक सलाहकार सुश्री सुमन कुमारी के साथ प्राधिकरण की पूरी टीम भी मौके पर मौजूद थी.

          प्रदेश के सभी 38 जिलों में यह कार्यक्रम आज एक साथ आयोजित किया गया.वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के बुनियाद केंद्र उद्घाटन समारोह से जुड़े रहे.जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में सहायक जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी ने भी भाग लिया.

            इस अभियान के तहत अब तक 1000 से अधिक मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा चुके हैं तथा दर्जनों स्कूलों में मॉक ड्रिल आयोजित कर दिव्यांगजनों को आपदा के समय सुरक्षित रहने के तरीके सिखाए गए हैं.आने वाले दिनों में यह कार्यक्रम “सुरक्षित शुक्रवार” के नाम से राज्य के सभी 101 अनुमंडलों के बुनियाद केंद्रों से नियमित रूप से चलाया जाएगा. इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आपदा के समय आत्मनिर्भर एवं सुरक्षित बनाना है.बी.एस.डी.एम.ए. और एस.डी.आर.एफ. की विशेषज्ञ टीमों के साथ प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर दिव्यांगजनों को उनके अधिकार, सुरक्षा उपाय और आपातकालीन प्रतिक्रिया के गुर सिखा रहे हैं.


आलोक कुमार