मंगलवार, 26 मार्च 2013

फाड़-फाड़कर मनरेगा वक्ताओं ने गला में व्याप्त धांधली को उजाकर किया

फाड़-फाड़कर मनरेगा वक्ताओं ने गला में व्याप्त धांधली को उजाकर किया

पटना। पश्चिमी चम्पारण, सारन, सीवान, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, समस्तीपुर, दरभंगा, अररिया, कटिहार, किशनगंज,बांका, गया, जहानाबाद, गया, भोजपुर, नालंदा जिलों से आये प्रतिनिधियों ने जोर-जोर नारा लगा रहे थे। हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो,पूरा काम पूरा दाम, हमारा पैसा हमारा हिसाब की मांग कर रहे थे। इसी तरह जिसको मौका मिला तो उन फाड़-फाड़कर मनरेगा वक्ताओं ने गला में व्याप्त धांधली को उजाकर करते रहे। 

 खैर, पैक्स के द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि मनरेगा को बिहार में बेहतर ढंग से क्रियान्वयन हो सके। अभी हाल यह है कि जिनके हाथ में मनरेगा है। ऐसे लोग बंदर के हाथ में नारियल की कहावत चरितार्थ कर रहे हैं। मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए सोशल ऑडिट करने का प्रावधान है। इसमें एन.जी.. वाले 5 से 6 दिन लगाते हैं। वहीं नौकरशाह 1 दिन के अंदर सोशल ऑडिट करके परिणाम दे देते हैं। एन.जी.. वाले कार्य संपन्न हो जाने वाले पंचायत के दस्तावेज मांगते हैं तो उनको उपलब्ध नहीं कराया जाता है। कार्यक्रम पदाधिकारी,रोजगार सेवक,मुखिया और दलाल ऑडिट करवाने से कतराते हैं। जनप्रतिनिधि धमकी देते हैं।

  यह सब स्थानीय .एन.सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान,पटना में पैक्स के द्वारा मनरेगा अभियान के तहत सामाजिक अंकेक्षण के अनुभवों को साझा करने हेतु राज्यस्तरीय सम्मेलन में आये प्रतिनिधियों ने व्यक्त किये। वहीं पैक्स के स्टेट मैंनेजर राजपाल ने कहा बिहार में मनरेगा अभियान के तहत अधिकांश रूप सामाजिक रूप से वहिष्कृत समुदायों में 30 हजार से अधिक कार्य मांग उत्पन्न हुए। नगर समाज संस्थाओं से सामाजिक अंकेक्षण पर 40 मास्टर प्रशिक्षण तैयार किये हैं। क्षेत्र में 203 प्रशिक्षित सहजकर्ता सामाजिक अंकेक्षण को क्रियान्वित कर रहे हैं। 100 ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण किया जा रहा है। 100 संसाधन मानचित्र जिनमें मनरेगा के अन्तर्गत निर्मित परिसम्पत्तियों की उत्पादकता एवं उनसे वहिष्कृत समुदायों की हिस्सेदारी का मूल्यांकन किया जा रहा है। अभियान से निकले मुद्दों पर राज्यस्तरीय बहु-हितकारी संवाद और भविष्य में संयुक्त कार्ययोजना की तैयारी। वृहद स्तर पर नागर समाज और अन्य हितभागियों के साथ अनुभव बांटने के लिए राष्ट्रीय स्तरीय एक बहु-हितकारी संवाद।

   इस बीच सेंटर फोर ऑल्टरनेटिव दलित मीडिया (कदम) के द्वारा महिला मजदूरों के हक और अधिकार के ऊपर पोस्टर बनाया है। इस पोस्टर में मांग की गयी है कि मनरेगा में महिला मजदूरों के लिए मातृत्व अवकाश। मनरेगा के तहत महिलाओं को मातृत्व अवकाश के दौरान पूरी मजदूरी। महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा काम देने वाली ग्राम पंचायतों को सम्मानित किया जाए। महिला जॉब-कार्डधारक को काम देने से इंकार करने पर दंड का प्रावधान को शामिल किया गया है। इस पोस्टर में अपील की गयी है कि सभी जॉब-कार्डधारक महिलाएं काम के लिए आवेदन करें। काम के आवेदन की प्राप्ति रसीद आपका अधिकार है। इसे हक से मांगे। कार्य स्थल पर बेहतर सुविधाओं के लिए आवाज उठायें। छोटे बच्चों के लिए पालनाघर का इंतजाम महिलाओं का हक है। महिलाओं को मेट के रूप में काम करने का अवसर दिया जाए। मनरेगा कानून के तहत महिलाओं को पुरूषों के बराबर मजदूरी निश्चित हो। अन्त में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और भेदभाव समाप्त करने के लिए संगठित हो और आवाज उठायें।

 इस पोस्टर का लोकार्पण बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव मिथिलेश कुमार सिंह ने किया।
    

रविवार, 17 मार्च 2013

अपेंडिक्साइटीज का ऑपरेशन करवाने में सफल


                                                     अपेंडिक्साइटीज का ऑपरेशन करवाने में सफल

यह सही है कि आज भी सुदूर गांव में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में ग्रामीणों को खास जानकारी नहीं है। इसके कारण लोग बेहतर ढंग से स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं। पेट में रोग रहता है और उनके बक्सा में स्मार्ट कार्ड पड़ा रह जाता है। वहीं आरएचबीवाई के तहत निर्गत स्मार्ट कार्ड का गलत व्यवहार करने का कलंकित टीका बिहार के माथे पर लग गया है कि अपना बिहार में सिर्फ बच्चादानी का ही ऑपरेशन किया जाता है। इस तरह के कलंक को खुद ग्रामीण महिलाएं ही धोने में लग गयी है। स्मार्ट कार्ड से महादलित मुसहर समुदाय की महिलाएं अपेंडिक्साइटीज का ऑपरेशन करवाने में सफल हो रही हैं। इस तरह के कारनामे हो जाने से आरएसबीवाई का भविष्य उज्जवल होने लगा है।
  जहानाबाद जिले के जहानाबाद प्रखंड में मांदेबीघा ग्राम पंचायत में अमियांबीघा मुसहरी टोला में नागा मांझी रहते हैं। इनकी पत्नी क्रांति देवी को अपेंडिक्साइटिज हो गया था। अशिक्षित होने के बाद भी लकड़ी के बॉक्स में रखे स्मार्ट कार्ड को निकालकर जहानाबाद के डाक्टर एस.जीत के पास जाकर अपेंडिक्साइटिज का ऑपरेशन करवाने में सफल हो गयी। खासकर अपना बिहार में स्मार्ट कार्ड के द्वारा सिर्फ-सिर्फ बच्चादानी का ही ऑपरेशन किया जाता है। इस पर लगाम लगाने पर आम लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया। इससे स्वास्थ्य विभाग को राहत मिलेगी। एक बार फिर सरकारीकर्मियों एवं बीमाकर्मियों के क्रियाकलाप के ऊपर सवाल उठ गया। नागा मांझी को अप्रैल 2010 में स्मार्ट कार्ड निर्गत किया गया। 0000260110807046 8 है। उसमें उम्र 50 साल दर्शाया गया। अगर यह उम्र सही है तो नागा मांझी 38 साल में पिताश्री बने थे। इसके बाद नवीकरण करने के बाद 2012 में नागा मांझी को 1.1.1985 उम्र दिखाया दिया गया। इस तरह सिर्फ 27 साल के हो गये। अगर उम्र सच मान लिया जाए तो 15 साल में नागा पिताश्री बन गये थे। 1033011371200018.1 वाले स्मार्ट कार्ड में पांच लोगों का नाम है। नागा मांझी, क्रांति देवी, चंदन कुमार (11 साल), कंचन कुमारी (9 साल) और रेणु कुमारी (3 साल ) है।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम पिछले कुछ वर्षों में निरंतर प्रगति

नजरें 2026 में होने वाले ICC Women's T20 World Cup पर टिकी हैं भारतीय महिला क्रिकेट टीम पिछले कुछ वर्षों में निरंतर प्रगति के नए आयाम छू...