रविवार, 19 फ़रवरी 2023

धर्मपरायण महिला सुजाना माइकल साह का निधन हो गया

                                                    धर्मपरायण महिला सुजाना माइकल साह

दस बच्चों की मां थी सुजाना
जाने-पहचाने गुरूजी जेम्स माइकल की मां थीं
जन्म - 25 मार्च,1938- मृत्यु -19 फरवरी,2023
पार्थिव शरीर के साथ 03:30 बजे से मिस्सा.इसके बाद अंतिम धर्मविधि बेतिया कब्रिस्तान में



बेतिया में शोक व्याप्त है.बेतिया पल्ली परिषद के पार्षद जेम्स माइकल की मां सुजाना माइकल साह का निधन हो गया. के. आर. हाई स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक जेम्स माइकल चर्च में गए थे.चर्च में प्रभु से मां की जिंदगी लंबी करने का गुहार लगा रहे थे.चर्च में दुआ करके गुरूजी घर आए तो देखा प्रभु की इच्छानुसार मां अंतिम सांस ले रही थी.वह आज सुबह 7:30 बजे प्रभु की प्यारी हो गयी.
धर्मपरायण महिला सुजाना माइकल साह के पति का नाम स्वर्गीय माइकल काजिटन साह था.वे सीमा शुल्क अधीक्षक थे.उनका निधन 1989 में हो गया.माइकल काजिटन साह और सुजाना माइकल साह के 10 बच्चे हैं.दस बच्चे में पांच बेटा और पांच बेटियां हैं.पांच बेटे में बड़ा बेटा फ्रैंकी माइकल बैंक प्रबंधक थे.जो अब रिटायर हो गए हैं.उसके बाद जेम्स माइकल हैं,जो के आर हाई स्कूल में शिक्षक हैं. वाल्टर माइकल बेतिया में शिक्षक हैं. एडवर्ड माइकल रेलवे में ड्राइवर पद पर कार्यशील हैं और सबसे छोटा पुत्र पंकज माइकल हैं जो गृह मंत्रालय में कार्यरत हैं.
उनकी पांच बेटियों का नाम हैं.ग्रेसी माइकल, मीना माइकल, नोरिन माइकल और डेज़ी माइकल. सभी बेटे व बिटियां कल ही पहुंच गए थे.उन लोगों के घर पहुंचने के साथ ही मां सुजाना माइकल कोमा में चली गई.उसके बाद प्रभु की प्यारी हो गयी.25 मार्च को 85 वां जन्मदिन मनाने के पूर्व 19 फरवरी को स्वर्ग चली गयी.लंबे समय तक फेफड़ों में रुकावट (Chronic obstructivd pulmonary disease) से पीड़ित थीं.
के. आर. हाई स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक पुत्र जेम्स माइकल ने कहा कि 1 माह पूर्व 16 जनवरी को मां को कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल पटना में भर्ती कराए थे.वहां से उनका बेहतर इलाज के लिए सहयोग हॉस्पिटल पटना में भर्ती कराया गया. सहयोग हॉस्पिटल के डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार कुछ मशीन का इंतजाम घर में कर लेने के आश्वासन के बाद डॉक्टर ने मां में को छुट्टी कर दिए.
उन्होंने कहा कि हमलोग 30 जनवरी को मां को एंबुलेंस से बेतिया आ गए और यहीं पर उनका इलाज और सेवा होने लगा. जिससे वह बेहतर महसूस कर रही थी.इस बीच अचानक 2 दिन से पूर्व उनकी तबीयत खराब होने लगी.
उन्होंने कहा कि जैसे ही सभी बाल बच्चे बेतिया पहुंचे,वैसे ही मां बच्चों को देखकर निहाल होकर कोमा में चली गई.आज सुबह 7:30 बजे अंतिम सांस ली.जब मैं चर्च में था आते ही मां अंतिम सांस ले रही थी. देखकर सभी बहुत रो रहे थे.माता जी की आवाज गूंजने लगा प्रार्थना कीजिएगा.जेम्स बचा ले हमरा....




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