रविवार, 19 फ़रवरी 2023

20 फरवरी को 03:00 बजे अंतिम संस्कार

 

20 फरवरी को 03:00 बजे अंतिम संस्कार
जी हां नहीं रहे डेनिस लॉरेंस पीटर.आज पूर्वाह्न 11:48 में अंतिम सांस ली.समाजसेवी मेरी एडलिन (नीतू) समेत आठ बच्चों का पिता डेनिस लॉरेंस पीटर का जन्म 04 मार्च,1931 को जन्म हुआ था. 92 वां जन्मदिन का जश्न मनाने के पूर्व 19 फरवरी,2023 को प्रभु के प्यारे हो गए.
वे स्थानीय लोयोला मिशन स्कूल में मैथ व साइंस के टीचर थे.उनके 8 बच्चे हैं.जिसमें चार लड़के अमर,कुवंर,उत्तम और प्रताप हैं.चार लड़कियाें में नीतू, रजनी,पूनम और रानी हैं.चुहड़ी क्रिश्चियन क्वार्टर के सबसे उम्रदराज व्यक्ति थे.उनका निजी स्कूल भी है. सेंट लॉरेंस के संस्थापक भी थे.
त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत के चुनाव के चुनाव प्रचार के समय आलोक कुमार,राजन क्लेमेंट साह,गोडेन अंथौनी ठाकुर, मो.नसीम आदि लोग मिलकर डेनिस लॉरेंस पीटर साहब से आशीर्वाद लिये थे.
खबर है कि कोलकाता से नीतू के मौसेरा भाई, पटना से फुफेरी बहन आ रही हैं. बेतिया, चखनी और चनपटिया के रिश्तेदार आ गए हैं.


ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर करने का आरोपी बनाया जा रहा है


 नई दिल्ली.देश के विभिन्न हिस्सों में गिरजाघरों पर कथित हमले, हिंसा और गिरफ्तारी के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर एकत्र होकर ईसाई समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया.

       उत्तर प्रदेश से आये स्टीवन ने कहा कि हमें लोगों को जबरन ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर करने का आरोपी बनाया जा रहा है.गिरजाघरों पर हमले किये जा रहे हैं, हमारे लोगों की पिटाई करके उन्हें गिरफ्तार किया गया.समुदाय के लोग लगातार डर के माहौल में जी रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि देशभर में समुदाय के सदस्यों के खिलाफ वर्ष 2021 में उत्पीड़न के 525 मामले सामने आए जो बढ़कर 2022 में 600 हो गये.उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में ये मामले वर्ष 2020 में 70 थे जो बढ़कर वर्ष 2022 में 183 हो गये.उत्तर प्रदेश के फतेहपुर निवासी शिवपाल ने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस लोगों को जबरन धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में गिरफ्तार कर रही है.

     स्टीवन ने आरोप लगाया कि समुदाय के सदस्यों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में एक 11 वर्षीय और एक व्यक्ति का नाम है जिसकी 2010 में मौत हो गई थी.वहीं दिल्ली के पंजाबी बाग आई पूनम ने कहा कि छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में चर्चों पर हमला किया जा रहा है और हमारे समुदाय के सदस्यों को परेशान किया जा रहा है. उनके खिलाफ झूठे आरोपों के आधार पर मामले दर्ज किए जा रहे हैं.हम यहां अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता व्यक्त करने आए हैं.


धर्मपरायण महिला सुजाना माइकल साह का निधन हो गया

                                                    धर्मपरायण महिला सुजाना माइकल साह

दस बच्चों की मां थी सुजाना
जाने-पहचाने गुरूजी जेम्स माइकल की मां थीं
जन्म - 25 मार्च,1938- मृत्यु -19 फरवरी,2023
पार्थिव शरीर के साथ 03:30 बजे से मिस्सा.इसके बाद अंतिम धर्मविधि बेतिया कब्रिस्तान में



बेतिया में शोक व्याप्त है.बेतिया पल्ली परिषद के पार्षद जेम्स माइकल की मां सुजाना माइकल साह का निधन हो गया. के. आर. हाई स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक जेम्स माइकल चर्च में गए थे.चर्च में प्रभु से मां की जिंदगी लंबी करने का गुहार लगा रहे थे.चर्च में दुआ करके गुरूजी घर आए तो देखा प्रभु की इच्छानुसार मां अंतिम सांस ले रही थी.वह आज सुबह 7:30 बजे प्रभु की प्यारी हो गयी.
धर्मपरायण महिला सुजाना माइकल साह के पति का नाम स्वर्गीय माइकल काजिटन साह था.वे सीमा शुल्क अधीक्षक थे.उनका निधन 1989 में हो गया.माइकल काजिटन साह और सुजाना माइकल साह के 10 बच्चे हैं.दस बच्चे में पांच बेटा और पांच बेटियां हैं.पांच बेटे में बड़ा बेटा फ्रैंकी माइकल बैंक प्रबंधक थे.जो अब रिटायर हो गए हैं.उसके बाद जेम्स माइकल हैं,जो के आर हाई स्कूल में शिक्षक हैं. वाल्टर माइकल बेतिया में शिक्षक हैं. एडवर्ड माइकल रेलवे में ड्राइवर पद पर कार्यशील हैं और सबसे छोटा पुत्र पंकज माइकल हैं जो गृह मंत्रालय में कार्यरत हैं.
उनकी पांच बेटियों का नाम हैं.ग्रेसी माइकल, मीना माइकल, नोरिन माइकल और डेज़ी माइकल. सभी बेटे व बिटियां कल ही पहुंच गए थे.उन लोगों के घर पहुंचने के साथ ही मां सुजाना माइकल कोमा में चली गई.उसके बाद प्रभु की प्यारी हो गयी.25 मार्च को 85 वां जन्मदिन मनाने के पूर्व 19 फरवरी को स्वर्ग चली गयी.लंबे समय तक फेफड़ों में रुकावट (Chronic obstructivd pulmonary disease) से पीड़ित थीं.
के. आर. हाई स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक पुत्र जेम्स माइकल ने कहा कि 1 माह पूर्व 16 जनवरी को मां को कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल पटना में भर्ती कराए थे.वहां से उनका बेहतर इलाज के लिए सहयोग हॉस्पिटल पटना में भर्ती कराया गया. सहयोग हॉस्पिटल के डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार कुछ मशीन का इंतजाम घर में कर लेने के आश्वासन के बाद डॉक्टर ने मां में को छुट्टी कर दिए.
उन्होंने कहा कि हमलोग 30 जनवरी को मां को एंबुलेंस से बेतिया आ गए और यहीं पर उनका इलाज और सेवा होने लगा. जिससे वह बेहतर महसूस कर रही थी.इस बीच अचानक 2 दिन से पूर्व उनकी तबीयत खराब होने लगी.
उन्होंने कहा कि जैसे ही सभी बाल बच्चे बेतिया पहुंचे,वैसे ही मां बच्चों को देखकर निहाल होकर कोमा में चली गई.आज सुबह 7:30 बजे अंतिम सांस ली.जब मैं चर्च में था आते ही मां अंतिम सांस ले रही थी. देखकर सभी बहुत रो रहे थे.माता जी की आवाज गूंजने लगा प्रार्थना कीजिएगा.जेम्स बचा ले हमरा....




शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

टाइम्स एसेंट स्किल डेवलपमेंट लीडरशिप अवार्ड से पटना वीमेंस कॉलेज सम्मानित

 


पटना वीमेंस कॉलेज बिहार समेत झारखंड, बंगाल व समस्त पूर्वी भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक सम्मानित स्थान

टाइम्स एसेंट स्किल डेवलपमेंट लीडरशिप अवार्ड से पटना वीमेंस कॉलेज सम्मानित
वर्ल्ड एचआरडी कांग्रेस द्वारा टाइम्स एसेंट मोस्ट आइकोनिक एजुकेशनल लीडर अवार्ड NICCS डीन डॉ. आलोक जॉन को
पटना वीमेंस कॉलेज (स्वायत्त) को टाइम्स एसेंट स्किल डेवलपमेंट लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया है। 15 फरवरी को मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल में आयोजित अपने 31वें संस्करण मीट में वर्ल्ड एचआरडी कांग्रेस द्वारा यह पुरस्कार प्रदान किया गया। पटना वीमेंस कॉलेज की ओर से महाविद्यालय के NICCS डीन डॉ. आलोक जॉन ने पुरस्कार ग्रहण किया। पटना वीमेंस कॉलेज को मिले पुरस्कार के अलावा डॉ. आलोक जॉन को वर्ल्ड एचआरडी कांग्रेस द्वारा टाइम्स एसेंट मोस्ट आइकोनिक एजुकेशनल लीडर अवार्ड भी प्रदान किया गया है। इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शुक्रवार को डॉ. आलोक जॉन ने कहा कि कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सिस्टर एम. रश्मी ए.सी. के नेतृत्व में पूरी टीम द्वारा किए गए परिश्रम के प्रतिफल के रूप में यह अवार्ड प्राप्त हुआ है। इसके लिए उन्होंने प्राचार्या समेत पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पटना वीमेंस कॉलेज ने सामान्य शिक्षा के साथ-साथ छात्राओं के कौशल विकास व रोजगारपरक शिक्षण पर बल दिया है, जिस कारण कॉलेज को इतनी प्रशंसा व सम्मान मिल रहा है। डॉ. आलोक जॉन ने कहा कि पटना वीमेंस कॉलेज बिहार समेत झारखंड, बंगाल व समस्त पूर्वी भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक सम्मानित स्थान रखता है।

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2023

उनका साथ नहीं छोडूंगा:जीतन राम मांझी

 जहानाबाद.बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी हैं. आज जहानाबाद पहुंचे थे.  यहां कोल्ड स्टोर का उद्घाटन करने के लिए पहुंचे थे. जहां उन्होंने एक बड़ा बयान दिया है और इस बार ये बयान उन्होंने अपने बेटे को लेकर दिया है. उन्होंने कहा दिया है कि उनके बेटे में मुख्यमंत्री बनने की काबलियत है. अगर उसे मुख्यमंत्री बनाया गया तो विकास की गति तेज हो जाएगी. 

          उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुझ पर विश्वास कर मुझे सीएम की कुर्सी सौंपी थी. अपने 9 महीने के कार्यकाल में मैंने पूरी ईमानदारी से काम किया था. मेरे शासनकाल में किसी को भी किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं मिल सकती है. वहीं, उन्होंने कहा कि मैं नीतीश कुमार के साथ हूं, मुझे अगर नीतीश कुमार किसी भी तरह का धक्का देंगे तब भी मैं उनका साथ नहीं छोडूंगा. मैं हमेशा उनके साथ ही रहूंगा.  

   इस बीच जीतनराम मांझी अपनी गरीब संपर्क यात्रा के दौरान अक्सर सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को निशाना बनाते रहे हैं. साथ ही जीतनराम मांझी ने गुटबाजी से प्रभावित महागठबंधन की लंबी उम्र पर भी प्रश्न उठाए हैं. गुरुवार को यात्रा के दौरान मांझी ने नीतीश के नेतृत्व वाली गवर्नमेंट की कार्यशैली पर प्रश्न उठाए.

जहानाबाद में पत्रकारों से वार्ता में बेटे को बिहार का सीएम बनाने के प्रश्न पर जीतन राम मांझी ने बोला कि संतोष पढ़ा-लिखा है और उसे सीएम बना देना चाहिए. उन्होंने बोला कि ऐसा नहीं है कि वह सिर्फ भुइया जाति से आते हैं, वह एक प्रोफेसर भी हैं. पूर्व सीएम ने बोला कि गरीबों में दलितों की जनसंख्या 90 प्रतिशत है, इसलिए हम संतोष को सीएम बनते देखना चाहते हैं.

बिना किसी का नाम लिए उन्होंने बोला कि मेरा बेटा सीएम बनने के योग्य है. कई लोग बिहार का सीएम बनने की प्रयास कर रहे हैं और मेरा बेटा उन्हें पढ़ना सिखा सकता है. बोला जा रहा है कि उनका इशारा डिप्टी मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की ओर था. उधर, बिहार गवर्नमेंट में मंत्री और जीतनराम मांझी के बेटे संतोष ने बिहार का मुख्यमंत्री बनने की ख़्वाहिश को मन में रखने से इनकार कर दिया.

 4

नेहा का 'यूपी में का बा' काफी फेमस हुआ

 

कानपुर।बिहार के कैमूर जिले की रहने वाली नेहा सिंह राठौर का जन्म 1997 में हुआ था।यूपी चुनाव के दौरान नेहा का 'यूपी में का बा' काफी फेमस हुआ था।विधानसभा चुनाव में यूपी में का बा गाकर चर्चा में आई नेहा सिंह राठौर की शादी यूपी में हुई है। शादी के बाद एक बार नेहा सिंह चर्चा में आ गई हैं। लखनऊ से 21 जून को यूपी के अंबेडकर नगर के हिमांशू सिंह की पत्नी बनकर यूपी की बहू बन गईं हैं।

"यूपी में का बा" फेम भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने एक बार फिर अपने गीत से सरकार को घेरा है। कानपुर देहात में अतिक्रमण हटाने के दौरान मां-बेटी की मौत को लेकर यूपी सरकार से लेकर बाबा के बुलडोजर, रामराज और कानपुर देहात की डीएम की कार्यशैली को सवाल उठाए हैं। कलेक्टर को रंगबाज और ठुमकेबाज कहा है। आइए हम आपको नेहा सिंह राठौर के गीत से अक्षरश: रूबरू कराते हैं…।

बाबा के दरबार बा ढहत घर बार बा माई बेटी का आग मा झोंकत यूपी सरकार बा…। का बा, यूपी में का बा, बाबा के डीएम तो बड़ी रंगबाज बा, कानपुर देहात में ले आइल राम राज बा, बुलडोजर से रौंदत दीक्षित के घरवा आज बा, यही बुलडोजरवा पे बाबा के नाज बा, यूपी में का बा, यूपी में का बा…। कलक्टर ठुमकेबाज बा, सटकल ओकर मिजाज बा, अधिकारी भइले बेलगाम मनमानी के रिवाज बा…। यूपी में का बा, यूपी में का बा…। गरीबन के मडही फुंकवा दा, गुरबन के इलाज बा, लोकतंत्र के नाम पर भइया भइल कोढ़ में खाज बा…। यूपी में का बा, यूपी में का बा…। आग लगी तो हिंदु जरिहैं, जरिहैं मुसलमान बा, ये बाबा यह जाना खाली अब्दुल के मकान बा… यूपी में का बा, यूपी में का बा…।

लोक गीत गायिका नेहा सिंह राठौर ने अपने महज 1 मिनट 9 सेकेंड के गीत में सरकार को जमकर कोसा और उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। यह कोई पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी लगातार वह सरकार के खिलाफ अपने गीत के माध्यम से सरकार की कार्यशैली को कटघर में खड़ा करती आई हैं।

नेहा दरअसल यूपी विधान सभा चुनाव 2022 के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में आई थी। जब उन्होंने यूपी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया था और अपना एक भोजपूरी गाने की वीडियो रिलीज किया था। इसमें योगी आदित्यनाथ पर भी व्यंग स्टाइल में उन्होंने तीखा हमला किया था। उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था से लेकर यहां की रोजगार व्यवस्था पर उन्होंने सवाल उठाया था।

आलोक कुमार

बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर हो गए

 पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के द्वारा शपथ लेते ही बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर हो गए

पटना।बिहार के 41वें राज्यपाल के रूप में राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने शपथ ले ली है। उन्हें हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने शुक्रवार को दोपहर बाद करीब साढ़े 12 बजे शपथ दिलाई।

इसके पहले बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर के पटना पहुँचने पर जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया। स्टेट हैंगर में बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। गार्ड ऑफ ऑनर के पहले बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर की अगवानी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की तथा फूलों का गुलदस्ता भेंटकर उनका अभिनंदन किया। 

      हवाई अड्डे पर उनके स्वागत में बिहार विधान परिषद् के सभापति देवेशचन्द्र ठाकुर, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, वित्त, वाणिज्य कर एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर, खान एवं भूतत्व मंत्री रामानंद यादव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री ललित कुमार यादव, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री सुनील कुमार, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अनिता देवी, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री जितेन्द्र कुमार राय, विधि मंत्री शमीम अहमद, सूचना प्रावैधिकी मंत्री मो0 इसराईल मंसूरी, श्रम संसाधन मंत्री सुरेन्द्र राम, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा, बिहार विधान परिषद् में नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे।

मूलत गोवा के रहने वाले हैं बिहार का राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर 

बिहार के महामहिम राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर पणजी , गोवा , पुर्तगाली भारत,सिटिज़नशिप भारत का है।उनका जन्म 23 अप्रैल 1954 (आयु 68) को हुआ है।उनका जीवनसाथी अनघा अर्लेकर है।दोनों के 2 बच्चे है।अर्लेकर बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। वह 1989 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। वह 1980 के दशक से गोवा भाजपा के सक्रिय सदस्य रहे हैं। उन्होंने विभिन्न पदों पर कार्य किया है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: महासचिव, भारतीय जनता पार्टी, गोवा प्रदेश। अध्यक्ष, गोवा औद्योगिक विकास निगम। अध्यक्ष, गोवा राज्य अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग वित्तीय विकास निगम। महासचिव, भारतीय जनता पार्टी, गोवा। दक्षिण गोवा अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी।

बिहार के 41 वां राज्यपाल होंगे

 हिमाचल प्रदेश के 21 वां राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर को बिहार का राज्यपाल बनाया है।बिहार के 41 वां राज्यपाल होंगे.बिहार के वर्तमान राज्यपाल फागू चौहान को मेघालय का राज्पाल बनाया गया है।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राजेंद्र विश्वनाथ को बिहार का नया राज्यपाल बनाने की स्वीकृति दे दी गई है। वहीं मौजूदा राज्यपाल फागू चौहान को मेघालय का राज्यपाल बनाया गया है। बिहार के साथ देश के कई अन्य राज्यों के भी राज्यपाल बदले गए हैं। राष्ट्रपति की ओर से नए राज्यपालों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी गई है। 

गोवा विधान सभा को कागज रहित बनाने का श्रेय 

जब मनोहर पर्रिकर को 2014 में केंद्रीय रक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था, तो अर्लेकर को अगले मुख्यमंत्री के लिए माना गया था, लेकिन पार्टी ने इसके बजाय लक्ष्मीकांत पारसेकर को अगले मुख्यमंत्री के रूप में चुना।उन्हें गोवा विधान सभा को कागज रहित बनाने का श्रेय दिया जाता है, ऐसा करने वाली वह पहली राज्य विधानसभा है।2015 में कैबिनेट में फेरबदल के दौरान उन्हें पर्यावरण और वन मंत्री नियुक्त किया गया था।6 जुलाई 2021 को उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जब बंडारू दत्तात्रेय को हरियाणा का राज्यपाल बनाया गया। राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 13 जुलाई, 2021 को हिमाचल के नए राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। राजेंद्र अर्लेकर गोवा की राजनीति का अहम चेहरा हैं।भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक सफर शुरू करने वाले अर्लेकर गोवा के विधायक और फिर मंत्री भी रहे हैं।अर्लेकर ने पार्टी को धन्यवाद दिया और कहा कि बीजेपी एक ऐसी पार्टी है जहां प्रत्येक सदस्य के काम को मान्यता दी जाती है। 

 फागु चौहान अब मेघालय के राज्यपाल 

फागु चौहान अब मेघालय के राज्यपाल होंगे।फागू चौहान का कार्यकाल काफी लंबा रहा है।उन्होंने 2019 में राज्य के राज्यपाल के रुप में शपथ लिया था।इस बीच राज्य की राजनीति में बड़ी उठा पटक देखने को मिली।नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़कर महागठबंधन से हाथ मिलाया। इसके साथ ही, विधानसभा चुनाव भी हुए। बता दें कि फागू चौहान बिहार के 40वें राज्यपाल थे।उनका जन्म आजमगढ़ के शेखपुरा में एक जनवरी, 1948 को हुआ था।उनके पिता का नाम खरपत्तु चौहान था। पिछड़ी जाति से आनेवाले फागू चौहान वर्ष 1985 में पहली बार दलित किसान मजदूर पार्टी से घोसी विधानसभा से विधायक बने और यहीं से शुरू हुई उनकी राजनीतिक यात्रा।वो घोसी से लगातार छह बार विधायक रहे। उन्हें उत्तर प्रदेश में पिछड़ी जाती का बड़ा चेहरा माना जाता है।

आलोक कुमार

किसी परिवार के खुशहाली के लिए महिलाओं का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है:डॉ गौतम कुमार

 डॉक्टरों पर कठोर कार्रवाई की जरूरत 

चिकित्सा नैतिकता को भूल, गलत तरीके से गर्भाशय निकाल रहे, राज्य के प्राइवेट अस्पतालों पर कार्रवाई की जरूरत : डॉ गौतम कुमार

पटना .बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी,पिछड़ा एवं अति पिछड़ा, मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ गौतम कुमार ने बताया कि राज्य के हर कोने में छोटे बड़े प्राइवेट अस्पताल खुले हैं. पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण सहित राज्य के तमाम सीमाई इलाकों में 20-25 वर्ष की अवस्था में ही महिलाओं को उल्टा सीधा समझाकर ,ऑपरेशन कर उनका गर्भाशय प्राइवेट अस्पतालों द्वारा निकाल दिया जाता है.

      जैसा कि सभी जानते हैं कि ग्रामीण इलाकों में कम उम्र में ही शादी हो जाती है. 20-25 वर्ष की अवस्था में ही उनके कई बाल बच्चे हो जाते हैं. इस दौरान इन इलाकों की महिलाएं सामान्य मासिक गड़बड़ी, ल्यूकोरिया की समस्या को लेकर डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वे लोग रुपया के लालच में उल्टा सीधा समझा कर सीधा महिलाओं का ऑपरेशन कर गर्भाशय ही निकाल देते हैं. जबकि सभी डॉक्टर इस बात को जानते हैं कि गर्भाशय और अंडाशय का शरीर में कितना महत्व है. गर्भाशय और अंडाशय से निकलने वाले हार्मोन शरीर को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. और जिन महिलाओं का कम उम्र में गर्भाशय निकल जाता है ,उन्हे किन किन समस्याओं से जूझना पड़ता है.किसी परिवार के खुशहाली के लिए महिलाओं का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है.

सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की जरूरत है. और चिकित्सा नैतिकता को भूल चुके ऐसे डॉक्टर, मेडिकल संस्थान ,और डॉक्टरों पर कठोर कार्रवाई की जरूरत है.



गुरुवार, 16 फ़रवरी 2023

2023 का निवानो पीस पुरस्कार एकता परिषद जनसंगठन के संस्थापक रह चुके श्री राजगोपाल पी.व्ही. को

 प्रस्तुति समारोह टोक्यो, जापान में गुरुवार, 11 मई, 2023 को होगा। एक पुरस्कार प्रमाण पत्र के अलावा, श्री राजगोपाल पी. वी. को एक पदक और बीस मिलियन येन प्राप्त होंगे.....

भोपाल। बौद्ध संगठन रिशो कोसी काई के पहले अध्यक्ष थे निक्यो निवानो। उनको सम्मान देने लिए निवानों पीस फाउंडेशन में रखा गया है।फाउंडेशन की संपत्ति करीब 4.4 अरब येन है।फाउंडेशन ने अपने प्रथम अध्यक्ष निक्यो निवानो के नाम पर निवानो शांति पुरस्कार शुरू किया है।अबतक 39 लोगों को निवानो शांति पुरस्कार दिया जा चुका है। 2023 का निवानो पीस पुरस्कार एकता परिषद जनसंगठन के संस्थापक रह चुके श्री राजगोपाल पी.व्ही. को दिया जा रहा है।

        बताया गया कि निवानों पीस फाउंडेशन के द्वारा किसी विशेष धर्म या क्षेत्र पर अनुचित जोर देने से बचने के लिए पीस फाउंडेशन हर साल दुनिया भर में मान्यता प्राप्त बौद्धिक और धार्मिक कद के लोगों से नामांकन मांगता है। नामांकन प्रक्रिया में, 125 देशों और कई धर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाले करीब 600 लोगों और संगठनों से उम्मीदवारों का प्रस्ताव करने के लिए कहा जाता है। निवानो शांति पुरस्कार समिति द्वारा जांच की गई, जिसे मई 2003 में निवानो शांति पुरस्कार की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर स्थापित किया गया था।

दुनिया के विभिन्न हिस्सों से नौ धार्मिक नेताओं में से, जिनमें से सभी शांति और अंतर-धार्मिक सहयोग के लिए आंदोलनों में शामिल हैं।

अबतक निवानो पीस पुरस्कार पाने वाले हैं-

1. आर्चबिशप हेल्डर पी. कैमरा (1983)

2. डॉ. होमर ए. जैक (1984)

3. श्री झाओ पुचु (1985)

4. डॉ. फिलिप ए. पॉटर (1986)

5. विश्व मुस्लिम कांग्रेस (1987)

6. रेव एताई यामादा (1989)

7. मिस्टर नॉर्मन कजिन्स (1990)

8. डॉ हिल्डेगार्ड गॉस-मेयर (1991)

9. डॉ. ए.टी. अरियारत्ने (1992)

10. नेवे शालोम/वहात अल-सलाम (1993)

11. पाउलो एवरिस्टो कार्डिनल आर्न्स (1994)

12. डॉ. एम. अराम (1995)

13. सुश्री मारी के हसेगावा (1996)

14. कोरीमीला समुदाय (1997)

15. वेनमहा घोसानंद (1998)

16. द कम्युनिटी ऑफ़ सेंटश्एगिडियो (1999)

17. डॉ. कांग वोन योंग (2000)

18. रेव.अबुना एलियास चकोर (2001)

19. रेव.सैमुअल रुइज़ गार्सिया (2002)

20. डॉ. प्रिस्किला एलवर्थी (2003)

21. अकोली धार्मिक नेताओं की शांति पहल (2004)

22. डॉ. हंस कुंग (2005)

23. मानव अधिकारों के लिए रब्बी (2006)

24. धर्म गुरु चेंग येन (2007)

25. हिज रॉयल हाईनेस प्रिंस अल हसन बिन तलाल (2008)

26. रेव कैनन गिदोन बगुमा ब्यामुगिशा (2009)

27. सुश्री इला रमेश भट्ट (2010)

28. श्री सुलक शिवराक्ष (2011)

29. सुश्री रोज़ालिना तुयुक वेलास्केज़ (2012)

30. आर.टी. रेव. डॉ. गुन्नार स्टालसेट (2013)

31. सुश्री देना मरियम (2014)

32. पादरी एस्तेर अबिमिकु इबांगा (2015)

33. शांति निर्माण और सुलह केंद्र (2016)

34. बिशप डॉ मुनीब ए युनान (2017)

35. अदयान फाउंडेशन (2018)

36. डॉ. जॉन पॉल लेडेराच (2019)

37. आदरणीय पोमन्युन (2020)

38. आदरणीय शिह चाओ-ह्वेई (2021)

39. फादर माइकल लैपस्ली, एसएसएम (2022) और

40. में श्री राजगोपाल पी.व्ही. हैं,जिनको 11 मई 2023 को जापान के टोक्यो शहर में एक समारोह में दिया जायेगा।

      इस बीच निवानो शांति पुरस्कार समिति की ओर से कहा गया कि 40वीं निवानो शांति की घोषणा करते हुए सम्मानित महसूस हो रहा है। सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए भारत के श्री राजगोपाल पी. वी. को न्याय और शांति का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। अपने देश के सबसे गरीब और सबसे हाशिए पर पड़े लोगों के पक्ष में उनके कार्यों को अंजाम दिया गया। शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीकों के माध्यम से, और समान मानवीय गरिमा की मान्यता के लिए उनका संघर्ष और जाति या लिंग की परवाह किए बिना, हर पुरुष और महिला के समान अधिकार, महान प्रशंसा को प्रेरित करते हैं। उनका विशेष उच्चतम सम्मान हासिल करने वाली उपलब्धियों में समर्पण पर बातचीत करना और इसे सुविधाजनक बनाना शामिल है। गिरोहों का पुनर्वास, गरीबों की सेवा में युवाओं की शिक्षा, और अच्छी तरह से जानते हैं कि गरीबों की प्राथमिक जरूरतें जल, जमीन और जंगल हैं, पर्यावरण की देखभाल के लिए उनकी प्रतिबद्धता। श्री।

न्याय के लिए राजगोपाल के कार्य को संस्थानों के साथ संवाद के माध्यम से भी आगे बढ़ाया जाता है।भूमि हड़पने की घटना का प्रतिकार करना और उचित भूमि सुधार के माध्यम से प्राप्त करनाभूमि का पुनर्वितरण और भूमि के स्वामित्व का असाइनमेंट। आध्यात्मिकता के साधन और अर्थ श्री राजगोपाल की सभी गतिविधियों में गहराई से निहित हैं। होने के नाते सोच और कार्य में गांधीवादी, वे दृढ़ता से सामाजिक क्रिया की यात्रा में विश्वास करते हैं जो एक ष्आंतरिकष् से शुरू होती है।परिवर्तन ”और बाहरी दुनिया तक फैलता है। यह आध्यात्मिकता श्री राजगोपाल के बहुत से मेल खाती है।

      उल्लेखनीय संगठनात्मक कौशल, जैसा कि छोटे समूहों में की गई कार्रवाई से संक्रमण से पता चलता है और एकता परिषद जैसे बड़े आंदोलनों के निर्माण के लिए स्वयं सहायता संगठन, जिसमें एक सक्रिय है। 250,000 भूमिहीन गरीबों की सदस्यता और राष्ट्रीय और में हजारों प्रतिभागियों को संगठित करने में सक्षम है।हमारे समय की महत्वपूर्ण समस्याओं पर ध्यान देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मार्च।

      श्री राजगोपाल की जीवनी और बायोडाटा इतना समृद्ध है कि इसकी केवल रूपरेखा ही देखी जा सकती है।  एक गांधीवादी परिवार के बच्चे, उनका जन्म 6 जून 1948 को केरल राज्य, दक्षिण भारत में हुआ था। वह केवल अपना पहला उपयोग करता हैसार्वजनिक रूप से नाम जाति की घटना से जुड़े होने से बचने के लिए, जो उनकी दृष्टि का एक स्पष्ट संकेत है मानव समानता। उन्होंने सबसे पहले केरल के एक प्रतिष्ठित संगठन से पारंपरिक कला और संगीत में डिप्लोमा प्राप्त किया।और बाद में शिक्षा की नई तालीम प्रणाली, गांधीवादी पद्धति में कृषि इंजीनियरिंग में डिप्लोमा ‘जीवन के लिए शिक्षा।‘ जैसा कि श्री राजगोपाल ने स्वयं कहा था, “क्या खोजने की कोशिश के संदर्भ में यह एक लंबी यात्रा थी। मैं वास्तव में करना चाहता था।वह क्या करना चाहते थे यह 1970 के दशक की शुरुआत में स्पष्ट हो गया जब वे चंबल चले गए ।

मध्य प्रदेश के जिले। वहां उन्होंने स्थानिक हिंसा, अन्याय और गलत का परिणाम पाया जनसंख्या से पीड़ित थे जिसके परिणामस्वरूप गिरोहों (डकैतों) का विकास हुआ था। साथ में श्री राजगोपाल अन्य वरिष्ठ गांधीवादी नेता, एक शांतिदूत बन गए, आत्मसमर्पण और यहां तक कि पुनर्वास भी प्राप्त किया। इस साहसी पहल ने एक और महान महत्व का मार्ग प्रशस्त किया जो इस दौरान विकसित हुआ।

1980 के दशक सामाजिक परिवर्तन के लिए अहिंसक कार्रवाई की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय और राष्ट्रीय युवा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संगठन।

इस 20 साल की अवधि में न्याय और शांति के लिए श्री राजगोपाल की प्रतिबद्धता की परिणति हुई।

एकता परिषद (यूनिटी फोरम) की स्थापना हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए भूमि और आजीविका अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए अहिंसक सक्रियता के मिशन के साथ एक छत्र जन-संगठन के रूप में की गई। एकता को धन्यवाद  ।  परिषद, श्री राजगोपाल की सामाजिक सक्रियता ने एक बड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दृश्यता प्राप्त की है ।

हजारों लोगों की भागीदारी के साथ सफल भूमि अधिकार मार्च। कुल मिलाकर आंदोलन के साथ अन्य समूहों के सहयोग से, लगभग 500,000 परिवारों के लिए भूमि अधिकार सुरक्षित किए, ‘वन अधिकार अधिनियम‘पर बातचीत की।2006-2007 में, 2007 और 2012 में अत्यधिक भाग लेने वाले मार्च आयोजित किए, और एक नई भूमि सुधार नीति पर सहमति हुई ।

केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राज्य सरकारों द्वारा। आखिरी और दिल्ली से जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय तक दस देशों के माध्यम से अधिक दूरदर्शी मार्च (स्विट्जरलैंड), पूरे एक साल (अक्टूबर 2019 से अक्टूबर 2020) चलने की योजना है, पूरा नहीं किया जा सका क्योंकि कोविद-19 महामारी का। एकता परिषद के कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों, जिनकी संख्या 2,000 से अधिक थी, ने प्रतिक्रिया व्यक्त की  ।  कई भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू देखभाल और स्वास्थ्य हस्तक्षेप प्रदान करके कोविद -19 की चुनौती महामारी से लड़ो।गांधीवादी आध्यात्मिकता और दर्शन में श्री राजगोपाल की जड़ों ने उनके भीतर सेवा करना स्वाभाविक बना दिया। संस्थान जो महात्मा के सिद्धांतों को लागू करके उनकी स्मृति को बनाए रखते हैं। 1972 में वे इसके सचिव थे।

महात्मा गांधी सेवा आश्रम, 2005 में उन्हें गांधी पीस फाउंडेशन का उपाध्यक्ष चुना गया, और आज भी वे अहिंसा के लिए अंतर्राष्ट्रीय गांधीवादी पहल के प्रबंध न्यासी बने हुए हैं। शांति (आईजीआईएनपी)। श्री राजगोपाल की अहिंसक सामाजिक क्रिया ने भी उन्हें संवाद का आदमी बना दिया है।

निवानों पीस फाउंडेशन के द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक शांतिपूर्ण और अहिंसक  तरीकों के माध्यम से श्री राजगोपाल पी.व्ही. ने देश के सबसे गरीब और हाशिए पर पड़े लोगों के लिए बिना किसी जाति व लैगिंक भेदभाव के समान मानवीय गरिमा और प्रत्येक महिला व पुरूष के समान अधिकारों की मान्यता के लिए कार्य किया है। यह पुरस्कार जल, जंगल और जमीन पर गरीबों के प्राथमिक अधिकार, पर्यावरणीय सुरक्षा, आत्मसमर्पित बागियों के पुनर्वास, युवाओं में शांति व अहिंसा की शिक्षा के लिए दिया गया है। श्री राजगोपाल पी.व्ही को यह पुरस्कार 11 मई 2023 को जापान के टोक्यो शहर में एक समारोह में दिया जायेगा। इसमें एक पुरस्कार प्रमाणपत्र के अलावा श्री राजगोपाल पी.व्ही को एक पदक और बीस मिलियन येन प्राप्त होंगे। भारतीय रूपए में 1,23,28,024.67 मूल्य है।

निवानों शांति पुरस्कार श्री राजगोपाल पी.व्ही को दिये जाने की घोषणा होने पर एकता परिषद के अध्यक्ष श्री रनसिंह परमार, राष्ट्रीय संयोजक रमेश शर्मा, अनीस कुमार, श्रद्वा कश्यप , उपाध्यक्ष प्रदीप प्रियदर्शी , वरिष्ठ कार्यकर्ता संतोष सिंह, निर्भय सिंह, प्रांतीय संयोजक डोंगर शर्मा, सर्वाेदय के मनीष राजपूत, एकता महिला मंच की कस्तूरी पटेल, निर्मला कुजूर उत्तरप्रदेश के राकेश दीक्षित, द्विजेन्द्र विश्वात्मा छत्तीसगढ के प्रशांत भाई, अरूण कुमार, उड़ीसा के भरत भूषण मणिपुर के रिशि, तमिलनाडू के बीजू, विनोद टीके, केरल के पवित्रन इत्यादि ने श्री राजगोपाल जी को शुभकामनाएं दी।

एकता परिषद के वरिष्ठ सदस्य वियज गोरैया ने सम्माननीय राजा जी को  जापान की प्रतिष्ठित संस्था निवानो पीस फाउंडेशन के द्वारा निवानो शांति पुरस्कार से नवाजे जाने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करेंगे !!   कुढ़नी सहित एकता परिषद्, मुजफ्फरपुर के साथियों की ओर से  सादर जय जगत !  


आलोक कुमार



बुधवार, 15 फ़रवरी 2023

कार्यशाला का उद्घाटन जिला पदाधिकारी गया डॉक्टर त्यागराजन एसएम द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया

गया. जिले के होटल आर्यावर्त, गया में आई॰सी॰डी॰एस॰, स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला का आयोजन किया गया, उक्त कार्यशाला का उद्घाटन जिला पदाधिकारी गया डॉक्टर त्यागराजन एसएम द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया. कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य एवं आई सी॰डी॰एस॰ में बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए सभी सेवाओं का बेहतर लाभ, लाभुकों तक पहुंचाना था. कार्यशाला में जिला पदाधिकारी द्वारा प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए बताया गया कि अपने स्तर से सभी सेवाओं का लाभ, लाभार्थियों को देना सुनिश्चित करें.विशेष रूप से टी॰एच॰आर॰, जननी बाल सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना इत्यादि का लाभ ससमय और सही प्रकार से सभी योग्य लाभार्थी को देना सुनिश्चित करें . 

महिलाओं में एनीमिया को दूर करने एवं बच्चों में पाई जाने वाली विकलांगता जिसका ससमय इलाज से सुधार संभव है, उस पर फोकस कर कार्य करने के लिए   निर्देशित किया गया. साथ ही गर्भवती महिलाओं के लिए विभिन्न कैम्प लगाकर जागरूकता उत्पन्न  करने के लिए निर्देशित किया गया ताकि जानकारी के अभाव में विभिन्न कारणों से होने वाली जन्मजात विकृतियों से नवजात शिशुओं को बचाया जा सके.              
    जिला पदाधिकारी ने श्रवण श्रुति तथा वंडर एप के तहत आई॰सी॰डी॰एस॰ तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा किये गये कार्यों पर संतोष व्यक्त किया गया एवं उसमें  और तेजी लाने का निर्देश दिया.उन्होंने कहा कि अब तक के 33 हजार बच्चों को श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट के तहत स्क्रीनिंग किया गया है.उन्होंने कहा कि मई महीने तक जिले में 01 लाख बच्चों को स्क्रीनिंग करने का लक्ष्य निर्धारित रखा गया है. जिला पदाधिकारी द्वारा श्रवण श्रुति की तरह से ही अन्य दिव्यांगता तथा जटिल बीमारियों के लिए विशेष कार्य करने पर बल देते हुए यह आह्वान किया गया कि स्वास्थ्य एवं आई॰सी॰डी॰एस  मिलकर बहुत सारे कार्यों को और बेहतर तरीके से कर सकता है एवं गया जिले को एक उदाहरण स्वरूप स्थापित कर  सकते हैं . उन्होंने कहा कि आईसीडीएस तथा स्वास्थ्य विभाग आपस में पूरी तरह से समन्वय करते हुए जिले के सभी प्रखंडों में व्यापक पैमाने पर 5 साल से कम उम्र वाले बच्चों को स्क्रीनिंग कराने में पूरी प्रभावी रूप से कार्य करें.उन्होंने यह भी कहा कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार बताया गया है कि हर 1000 बच्चों में से 5 से 8 बच्चे में लो हियरिंग पाई जाती है. श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट में गया जिला को मॉडल बनाते हुए राज्य के 10 जिलों को शामिल किया गया है जहां उनके बच्चों को भी यह उपचार दिया जा रहा है.
         इसी प्रकार उन्होंने वंडर प्रोजेक्ट के तहत किए जा रहे कार्यों के बारे में कहा कि गर्भवती महिलाओं को टी एच आर वितरण नियमित तौर पर किया जाए. बच्चा जन्म होने से पहले सभी प्रकार की जांच कराने के लिए एक एसओपी बनाया जाए तथा हर आंगनवाड़ी सेंटर पर जांच की व्यवस्था रखी जाए. उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि बाल विकास परियोजना पदाधिकारी तथा संबंधित सुपरवाइजर भी यह नियमित तौर पर जांच करते रहे कि उनके क्षेत्र में टी एच आर वितरण नियमित तौर पर हो रहा है या नहीं.उन्होंने कहा कि प्रायः यह देखा गया है कि गर्भवती महिलाओं में लगभग 40 से 50 % वैसी महिलाएं पाई जाती हैं जो एनीमिया से ग्रसित रहती हैं. इन्हीं सभी छोटी-छोटी बीमारियों को देखते हुए वंडर ऐप कार्यक्रम शुरू की गई है ताकि उनकी सभी प्रकार की जांच समय अवधि में हो और उन्हें डिलीवरी के दौरान कोई समस्या ना हो सके.वंडर प्रोजेक्ट से यह सुनिश्चित कराया जाएगा कि जच्चा और बच्चा दोनों को स्वस्थ रखा जाए.
           जिला पदाधिकारी ने तमाम पदाधिकारियों को कहा कि श्रवण श्रुति प्रोजेक्ट तथा वंडर प्रोजेक्ट में पूरी मेहनत लगन तथा ईमानदारी से कार्य करें ताकि भविष्य में आपको गर्व होगा कि आपके इस मेहनत से कितने बच्चे को सफलतापूर्वक जीवन दिया है. कार्यशाला को यूनिसेफ के राज्य स्तर से आये हुए प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया यूनिसेफ से आए राघवेन्द्र कुमार एवं डॉ शिवानी धर ने बताया कि कम्युनिटी में पोषक तत्व की कमी होने के बच्चों में पूर्ण रूप से विकास नहीं हो पाता है अतः बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए जरूरी है  कि उनके खान-पान एवं पोषण देखभाल का विशेष ध्यान रखा जाए.
       इस अवसर पर सिविल सर्जन, गया द्वारा बताया कि महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण देखभाल के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा  कई  योजनाएं चलाई जा रही है.डॉ एम ई हक द्वारा एम॰सी॰पी कार्ड (मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड) के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई.कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए जिला प्रोग्राम पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि वर्तमान में आई॰सी॰डी॰एस॰ के तहत 80 प्रतिशत बच्चों का ग्रोथ मॉनिटरिंग पोषण ट्रैकर के माध्यम से कर लिया गया है. साथ ही अन्य गतिविधियों का आयोजन कर लगातार कुपोषण को दूर करने के लिए विभागीय दिशा निर्देश का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है. कार्यशाला का संचालन यूनिसेफ की सुश्री ईशा द्वारा किया गया. इस कार्यशाला   में विभिन्न प्रखंडों के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, जिला समन्वयक, प्रखंड समन्वयक ,ब्लॉक हेल्थ मेनेजर एवं डेभलपमेन्ट पार्टनर शामिल हुए .


आलोक कुमार

भारतीय महिला क्रिकेट टीम पिछले कुछ वर्षों में निरंतर प्रगति

नजरें 2026 में होने वाले ICC Women's T20 World Cup पर टिकी हैं भारतीय महिला क्रिकेट टीम पिछले कुछ वर्षों में निरंतर प्रगति के नए आयाम छू...