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रविवार, 13 जुलाई 2025
शनिवार, 12 जुलाई 2025
सीधे-सीधे बिहारी अस्मिता पर हमला
पटना .बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम यहाँ एक ऐतिहासिक फैसले और एक जनविरोधी साजिश के पर्दाफाश के संदर्भ में आपसे संवाद करने के लिए उपस्थित हुए हैं.
भारतीय जनता पार्टी और था, बल्कि यह
सीधे-सीधे बिहारी अस्मिता पर हमला था। लेकिन हम आपको यह बताते हुए गर्व और संतोष का अनुभव कर रहे हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस साजिश पर करारा ब्रेक लगा दिया है.यह जीत सिर्फ एक कानूनी जीत नहीं है — यह पूरे बिहार की जनता की जीत है। यह उस भरोसे की जीत है जो उन्होंने देश के जननायक, नेता विपक्ष राहुल गांधी जी पर किया। राहुल जी ने बिहार बंद आंदोलन के दौरान यह वादा किया था कि वे बिहार के सरोकारों की लड़ाई अंतिम दम तक लड़ेंगे — और आज वो वादा साकार होते हुए दिख रहा है.
सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने कहा — “यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो हमारे लोकतंत्र की जड़ों तक जाता है। यह वोटरों के मताधिकार के अधिकार का मामला है.” 10 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि बिहार में चल रहे विशेष तीव्र पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान आधार कार्ड, EPIC (मतदाता पहचान पत्र) और राशन कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में मानने पर गंभीरता से विचार करें.
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बार-बार आग्रह किया कि इन दस्तावेजों को स्वीकार करना आयोग के विवेकाधिकार पर निर्भर माना जाए। लेकिन न्यायमूर्ति धूलिया ने स्पष्ट कहा — “हमारा आदेश साफ है, चुनाव आयोग को इन तीन दस्तावेजों को स्वीकार करने पर विचार करना चाहिए.”कोर्ट ने यह भी कहा कि – “जब आयोग खुद कह रहा है कि 11 दस्तावेजों की सूची अंतिम नहीं है, तो न्यायहित में आधार, EPIC और राशन कार्ड को शामिल करना ही तार्किक होगा.”
साथियों, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हमने SIR की प्रक्रिया पर रोक की कोई मांग नहीं की। यह बात कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज की है। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी — तब तक कोई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित नहीं की जाएगी.कोर्ट ने यह भी पूछा कि SIR की प्रक्रिया इतनी चुनाव-केंद्रित क्यों है? यह पुनरीक्षण न तो “संक्षिप्त” है, न “विशेष” — जैसा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 में कहा गया है.जब चुनाव आयोग ने यह तर्क दिया कि आधार सिर्फ पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं — तब न्यायमूर्ति धूलिया ने यह सवाल उठाया कि — “आज के समय में आधार सबसे बुनियादी पहचान पत्र है। जब मैं जाति प्रमाणपत्र बनवाता हूं तो आधार दिखाता हूं। फिर यह इस सूची में क्यों नहीं है? पूरी SIR प्रक्रिया का उद्देश्य तो सिर्फ व्यक्ति की पहचान है.”
न्यायमूर्ति बागची ने भी दो टूक कहा — “आप जिन 11 दस्तावेजों को मान्य मानते हैं, उनमें से कोई भी सीधे नागरिकता सिद्ध नहीं करता। तो फिर सिर्फ आधार के विरोध में इतना आक्रोश क्यों? कानून के अनुसार चलिए.”यह सारा मामला सिर्फ दस्तावेजों का नहीं है, यह बिहार के करोड़ों लोगों के अधिकारों का सवाल है। कांग्रेस पार्टी साफ तौर पर मानना है कि चुनाव आयोग सत्ता में बैठे दलों के इशारे पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है, ताकि करोड़ों वोटर — खासकर दलित, पिछड़े और गरीब — मतदाता सूची से बाहर हो जाएं. यह ‘SIR’ एक फर्जी अभ्यास है, और 24 जून का प्रशासनिक आदेश बिहार के लोकतंत्र के साथ एक कुठाराघात है.हम सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक हस्तक्षेप का स्वागत करते हैं। कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ेगी। हम बिहार के एक-एक नागरिक की पहचान, सम्मान और मताधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.
संवाददाता सम्मेलन में विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता डॉ. मदन मोहन झा, नेशनल मीडिया पैनालिस्ट प्रेम चन्द्र मिश्रा, नेशनल मीडिया कोऑर्डिनेटर अभय दुबे, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र गुप्ता, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, मोतीलाल शर्मा , मीडिया चेयरमैन राजेश राठौर, नागेन्द्र कुमार विकल मौजूद थे .
आलोक कुमार
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शुक्रवार, 11 जुलाई 2025
तीन दिवसीय धर्म विधि संगोष्ठी
तीन दिवसीय धर्म विधि संगोष्ठी
पटना.बिहार रीजनल बिशप कॉन्फ्रेंस (Bihar Regional Bishops Conference) के अधीन बक्सर, पटना, मुजफ्फरपुर,बेतिया,पूर्णिया और भागलपुर धर्मप्रांत है.बिहार के इन सभी धर्मप्रांतों में आस्था को गहरा करने के लिए तीन दिवसीय धर्मविधि संगोष्ठी का आयोजित की गई.इसका समापन आज हो गया.
बिहार क्षेत्रीय बिशप परिषद (बीआरबीसी) के धर्म विधि आयोग ने 9 से 11 जुलाई, 2025 तक पटना स्थित बिहार चर्च क्षेत्र के क्षेत्रीय पादरी केंद्र, नवज्योति निकेतन में धर्म विधी पर तीन दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया.इस सम्मेलन में बिहार के सभी छह धर्मप्रांतों के 68 पल्ली पुरोहित और धर्म बहनें एकत्रित हुईं ताकि धर्मविधि प्रथाओं के प्रति उनकी समझ और प्रतिबद्धता को गहरा किया जा सके.
भारतीय कैथोलिक बिशप सम्मेलन के धर्म विधि आयोग के राष्ट्रीय सचिव, फादर रुडोल्फ राज पिंटो ओएफएम, इस संगोष्ठी के मुख्य संसाधन व्यक्ति थे.बीआरबीसी धर्म विधि आयोग के क्षेत्रीय सचिव, फादर विजय भास्कर ने इस कार्यक्रम का समन्वयन किया.
कार्यक्रम के तीन दिनों के दौरान, फादर रुडोल्फ ने चर्च की धार्मिक पद्धति से संबंधित विविध विषयों पर कई सत्र प्रस्तुत किए.इनमें "धर्म विधि और संस्कारों की नींव", "यूकेरिस्ट का धार्मिक अनुष्ठान - मिस्सा की संरचना", "मंत्रालयों का विभाजन", "धर्म विधि अनुष्ठान में कर्तव्य और मंत्रालय", "धर्म विधि की व्यवस्था और अलंकरण", "धर्म विधि संगीत", और "लोकप्रिय धर्मपरायणता" शामिल थे. उनकी अंतर्दृष्टि पूर्ण प्रस्तुतियों ने कई प्रतिभागियों को अनेक प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित किया, जो एक गरिमापूर्ण धर्म विधि के प्रति उनकी गहरी रुचि और प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.
सेमिनार के प्रत्येक दिन बिहार क्षेत्र के एक बिशप की अध्यक्षता में आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यूकेरिस्ट अनुष्ठान का आयोजन किया गया.9 जुलाई को बक्सर धर्मप्रांत के बिशप जेम्स शेखर ने मिस्सा अनुष्ठान किया.10 जुलाई को पटना धर्मप्रांत के आर्चबिशप सेबेस्टियन कल्लुपुरा ने समारोह का नेतृत्व किया.कार्यक्रम के अंतिम दिन, मुजफ्फरपुर के बिशप कैजेटन ओस्टा, जो बीआरबीसी के अध्यक्ष भी हैं, ने मिस्सा अनुष्ठान की अध्यक्षता की.उनकी उपस्थिति और सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन के गहन आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया.
समूह चर्चा के दौरान, धर्मप्रांत के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने धर्मप्रांतों में इसी तरह के सेमिनार आयोजित करने की अपनी योजनाएं साझा की, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरे क्षेत्र में धर्म विधि नवीनीकरण की गति बनी रहे.
संगोष्ठी का समापन उत्साहपूर्ण ढंग से हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने फादर विजय भास्कर, फादर अनिल बेनेट क्रूज़ (क्षेत्रीय सचिव, आस्था निर्माण) और नवज्योति निकेतन के कर्मचारियों के प्रति कार्यक्रम के आयोजन में उनके पूर्ण सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया.
आलोक कुमार
बुधवार, 9 जुलाई 2025
छह महीने से मजदूरी भुगतान नहीं
छह महीने से मजदूरी भुगतान नहीं
मुजफ्फरपुर. 9 जुलाई की हड़ताल में भाग लेने मुजफ्फरपुर खुदीराम बोस स्मारक से समाहरणालय की ओर मनरेगा वॉच कार्यकर्ता निकले और चल पड़े हमारी एकता जिंदाबाद का नारा लगाते.कार्यकर्ता बिहार बंद का समर्थन भी किए और आज से मुजफ्फरपुर समाहरणालय में मनरेगा वॉच के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना भी शुरू कर दिये.
अनिश्चितकालीन धरना देने वाले धरनार्थियों का कहना है कि मुजफ्फरपुर जिले में वर्षा के बहाना बनाकर मनरेगा का काम बंद कर दिया गया है.वहीं मनरेगा कर्मियों को गत छह महीने से मजदूरी भुगतान नहीं किया गया है.मनरेगा वॉच के बैनर तले आज से बकाया मजदूरी सहित सात मांगों को लेकर यह बेमियादी धरना शुरू कर दिया गया है. देखते है इस बार जिला प्रशासन यह धरना कितना दिन चलेगा.
मालूम हो कि मनरेगा के श्रमिकों की एक दिन की मजदूरी 245 रुपये है. मनरेगा के तहत साल में अधिकतम सौ दिनों का काम एक श्रमिक को दिया जाता है.मनरेगा वॉच कार्यकर्ताओं की मांग है कि मनरेगा श्रमिकों को 600 रुपए दैनिक हो और साल में 200 दिन काम मिले.
उनका यह भी मांग है कि मनरेगा श्रमिकों से काम लिया जाए.इस जिले में जेसीबी से काम निकलवा रहे हैं.मनरेगा मद की राशि सब फालतू में जेसीबी वाले हड़प ले जा रहे है.वहीं मनरेगा श्रमिकों को छह माह से मजदूरी भुगतान नहीं किया जा रहा है.
आलोक कुमार
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मंगलवार, 8 जुलाई 2025
शिल्पी नेहा तिर्की का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने के संबंध में
राँची,जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की को धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने को लेकर घेरने का प्रयास किया जा रहा है.संगठन के सामाजिक कार्यकर्ता मेधा उरांव, संदीप उरांव, सोमा उरांव, जगन्नाथ भगत, विशु उरांव, राजू उरांव, सनी उरांव टोप्पो एवं अन्य रांची डीसी से शिल्पी का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं. संगठन के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने श्रीमान् उपायुक्त महोदय, राँची, झारखण्ड को पत्र लिखा है.पत्र का विषय है कि अनुसूचित जनजाति से धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनी श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने के संबंध में.
1. उपरोक्त विषय के संबंध में कहना है कि भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय का वाद संख्या 13086/2024 सी० सेल्या रानी बनाम विशेष सचिव सह जिला कलेक्टर एवं अन्य के बाद संख्या में स्पष्ट निर्णय दिया है कि ईसाई धर्म किसी भी जाति वर्गीकरण को मान्यता नहीं देता है.सभी ईसाईयों को समान माना जाता है और एक ईसाई और दूसरे प्रकार के ईसाई के बीच कोई अंतर नहीं है. ईसाई धर्म न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में प्रचलित है और ईसाई धर्म कही भी जाति विभाजन को मान्य है ईसाई धर्म के सिद्धांत ईसाई धर्म के मानने वाले व्यक्तियों को जाति किसी भी वर्गीकरण के आधार पर विभाजित या भेदभाव किये जाने के खिलाफ है.सामान्य नियम यह है कि धर्मान्तरण जाति से निष्कासन के रूप में कार्य करता है दूसरे शब्दों में धर्म परिवर्तन करने वालों की कोई जाति नहीं रह जाति है जाति व्यवस्था केवल हिन्दुओं में या सम्भवतः सिख धर्म जैसे हिन्दू धर्म से जुड़े कुछ धर्मों में प्रचलित है साथ ही माननीय न्यायालय ने यहाँ तक कहा है कि जब कोई व्यक्ति राष्ट्रपति आदेश के तहत प्रदान किये गए आरक्षण और अन्य लाभों को प्राप्त कर संविधान के उक्त लाभकारी प्रावधानों का अनुचित लाभ उठाना है हालांकि वह इसका हकदार नहीं है तो वह न केवल समाज के साथ धोखाधड़ी करता है बल्कि संविधान के साथ धोखाधड़ी करता है.श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की एक धर्मान्तरित ईसाई है.
2. संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश 1950 अनुच्छेद 341, खण्ड (1) क्रमांक 2 में इस आदेश के उपबंधों के अध्यधीन यह है कि वे जातियों, मूलवंश या जनजातियां या जातियों को जनजातियों के भाग या उनमें के यूथ जो कि इस आदेश की अनुसूची भाग संबद्ध जहाँ है वहाँ तक की उनके उन सदस्यों का संबंध है जो उन परिक्षेत्रों है जो उस अनुसूची के उन भागों में उनके संबंध में विनिर्दिष्ट है अनुसूचित समझे जाएंगे एवं क्रमांक 3 अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी कोई व्यक्ति जो हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म से भिन्न धर्म मानता है अनुसूचित जाति का सदस्य न समझा जाएगा अर्थात अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य न समझा जाएगा.
3. माननीय केंद्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया है कि जनजाति लोगों को विभिन्न केन्द्रीय अधिनियमों में हिन्दू के रूप में परिभाषित किया है अर्थात आदिवासी हिन्दू ही है.
अतः श्रीमान् से अनुरोध है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा महामहिम राष्ट्रपति के आदेश एवं भारत सरकार के विधि एवं न्याय विभाग के आदेश के आलोक में ईसाई धर्म में धर्मान्तरित श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की (पति श्री सन्नी विल्फ्रेड जेम्स लकड़ा) पिता बंधु तिर्की ग्राम-दही सोत (वनहोरा) ऊपर टोली थाना पंडरा अंचल कार्यालय रातू राँची के द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र सं०-JHCST/2022/187696 दिनांक-02.05.2022 को अविलंब निरस्त करने की कृपा की जाए.
संलग्न
1. माननीय सुप्रीम कोर्ट वाद सं०-13086/2024 की छायाप्रति
2. संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश 1950 की छायाप्रति
3. माननीय केंद्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल लोकसभा में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर की छायाप्रति
4. अंचल कार्यालय रातू राँची द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र
सं०- JHCST/2022/187696 दिनांक-02.05.2022 की छायाप्रति मिनी विशीच की
(मेघा उराँव) सामाजिक कार्यकर्ता ग्राम सरना आदर्श कॉलोनी पतराटोली, पो०-बालालौंग
आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन के लोगों के द्वारा जो अनुसूचित जनजाति से धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनी शिल्पी नेहा तिर्की कृषि मंत्री झारखंड) का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग पत्र उपायुक्त रांची को सौंपा. उपायुक्त रांची से मिलने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठन के मेघा उरांव, संदीप उरांव, सोमा उरांव, जगन्नाथ भगत, विशु उरांव, राजू उरांव, सनी उरांव टोप्पो एवं अन्य.
आलोक कुमार
सोमवार, 7 जुलाई 2025
चुनाव आयोग के ताजा विज्ञापन से मतदाता पुनरीक्षण को लेकर साफ दिखी षड्यंत्र
*प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने किया सवाल, क्या चुनाव आयोग का विज्ञापन बड़े षड्यंत्र की है आहट?
*वोटर पुनरीक्षण में मांगे जा रहे कागजात, मतदाताओं के साथ धोखा है, अन्याय है और षड्यंत्र है: राजेश राम
*चुनाव आयोग के ताजा विज्ञापन से मतदाता पुनरीक्षण को लेकर साफ दिखी षड्यंत्र: राजेश राम
पटना . बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने चुनाव आयोग के आज के विज्ञापन को लेकर जिसमें कागजातों और तस्वीरों को लेकर सूचना छपी है कि उनकी आवश्यकता मतदाता पुनरीक्षण में नहीं है, को लेकर चुनाव आयोग के द्वारा बड़े षड्यंत्र का आरोप लगाया है.
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित फॉर्मों पर जारी एक पोस्टर में चुनाव आयोग ने अब कहा है कि निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) दस्तावेजों के बिना भी सत्यापन पर निर्णय ले सकता है.पोस्टर में कहा गया है कि “यदि आवश्यक दस्तावेज़ और फोटो उपलब्ध नहीं हैं, तो बस नामांकन फॉर्म भरें और उसे बूथ स्तर अधिकारी (BLO) को दें.” इसमें आगे अहम बात यह जोड़ी गई है कि “यदि आप आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं, तो चुनाव रजिस्ट्रेशन अधिकारी स्थानीय जांच या अन्य दस्तावेज़ों के आधार पर निर्णय ले सकता है.” इसका अर्थ यह है कि ERO उन लोगों से मिलने मौके पर जाएंगे जिन्होंने दस्तावेज़ जमा नहीं किए हैं. वे यह सुनिश्चित करेंगे कि फॉर्म भरने वाला व्यक्ति 18 वर्ष का है या नहीं, उस क्षेत्र में निवास की अवधि की जानकारी लेंगे, आसपास के लोगों से बात करेंगे और उपलब्ध साक्ष्य व दस्तावेज़ों के आधार पर निर्णय लेंगे.यह विज्ञापन न सिर्फ़ चुनाव आयोग की अकर्मण्यता की पोल खोलता है अपितु बिहार विधान सभा में सत्ता धारी दल की अनैतिक मदद की आशंका भी पैदा करता है.
हमारे इस संदर्भ में कुछ प्रासंगिक सवाल :-
1. सवाल यह उठता है कि फिर इस पूरी प्रक्रिया की प्रासंगिकता क्या रह गई है ?
2. क्या यह एक नियोजित षड्यंत्र है कुछ राजनीतिक दलों को लाभ पहुंचाकर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने का ?
3. अगर अंतिम निर्णय ईआरओ के विवेक पर छोड़ा गया है तो क्या बहुत बड़ी संख्या में भाजपा और जेडीयू की सरकार दबाव बनाकर वोटर लिस्ट में मनमानी नहीं करेगी?
4. क्या हाल ही में बिहार में स्पेशल समरी रिवीजन वोटर लिस्ट का नहीं किया गया है । जिसमें 6 जनवरी 2025 में अंतिम प्रकाशन मतदाता सूची का किया गया है जिसके तहत:-
1.घर-घर जाकर सर्वेक्षण
2.भौतिक स्थल पर जाकर सत्यापन
3 . दावों और आपत्तियों की सूची का प्रदर्शन और साझा करना
4 . प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची को राजनीतिक दलों के साथ साझा करना.
जब यह पूरी प्रक्रिया जनवरी में ही की जा चुकी है तो फिर वही प्रक्रिया चुनावों के ठीक पहले फिर करना संदेह पैदा करने वाली है .चुनाव आयोग को तुरंत इस निर्णय को वापस लेना चाहिए, क्योंकि जो खबर इस प्रक्रिया को लेकर बिहार के विधानसभा क्षेत्रों से आ रही है कि लोग ख़ुद किसी भी प्रकार का फॉर्म भरने में समर्थ नहीं है वो चिंता बढ़ाने वाली है .
संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के अलावे विधान परिषद में दल के नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा, नेशनल मीडिया पैनलिस्ट पूर्व विधान पार्षद प्रेम चंद मिश्र, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, सोशल मीडिया विभाग के चेयरमैन सौरभ सिंहा, असित नाथ तिवारी, मंजीत आनंद साहू, प्रो विजय कुमार सहित अन्य नेतागण मौजूद रहें.
आलोक कुमार
रविवार, 6 जुलाई 2025
आधुनिक भारत के निर्माण में जगजीवन राम का भी बड़ा योगदान
पटना. अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की 39 वीं पुण्यतिथि आज सदाकत आश्रम में मनायी गयी.इस अवसर पर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम ने जगजीवन राम के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में जगजीवन राम का भी बड़ा योगदान था. पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में जगजीवन बाबू सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री थे.
उन्होंने कहा कि बाबू जगजीवन राम देश के रक्षा मंत्री थे उस समय पाकिस्तान के 91 हजार सैनिकों ने भारत के सैनिक कमान्डर के समक्ष आत्म समर्पण किया था यह देश नहीं बल्कि विश्व के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना थी.राजेश राम ने कहा कि स्व0 जगजीवन राम एक गरीब परिवार में जन्म लेकर बड़े संघर्ष का सामना किया तथा तत्कालीन व्यवस्था में अछूतोद्धार के लिये सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन लाने की लड़ाई लड़ी. आज कृतज्ञ राष्ट्र बाबू जगजीवन राम के योगदान को स्मरण कर उनके चरणों में शत-शत करता है. इसके पूर्व स्व0 जगजीवन राम के चित्र पर माल्यार्पण किया गया.
इस अवसर पर कांग्रेस विधान परिषद दल के नेता डा0 मदन मोहन झा, पूर्व मंत्री संजीव प्रसाद टोनी, कृपानाथ पाठक, प्रेमचन्द्र मिश्रा,, नरेन्द्र कुमार, मोती लाल शर्मा, राजेश राठौड़, ब्रजेश प्रसाद मुनन, कपिलदेव प्रसाद यादव, अजय कुमार चौधरी ,असितनाथ तिवारी, सौरभ सिन्हा, मुन्ना शाही, डा0 अजय कुमार सिंह, चन्द्र प्रकाश सिंह, राजेश कुमार सिन्हा, शकीलुर रहमान मंजीत आनन्द साहू, अरविन्द लाल रजक, मनोज मेहता, राजकिशोर सिंह, संजय कुमार पाण्डेय, मिथिलेश शर्मा मधुकर, प्रो0 विजय कुमार, वैद्यनाथ शर्मा, सत्येन्द्र कुमार सिंह, सुनील कुमार सिंह,, ललन यादव, मृणाल अनामय, वसी अख्तर, संतोष कुमार श्रीवास्तव, विश्वनाथ बैठा, सुजीत कसेरा, रोहित कुमार पासवान, मनीष कुमार, अश्विनी कुमार, कशिश यादव, शशि पंडित, साधना रजक, मोनी देवी, सिद्धार्थ क्षत्रिय, नदीम अंसारी, सम्स तवरेज,सहित बड़ी संख्या में उपस्थित कांग्रेसजनों ने भी बाबू जगजीवन राम के चित्र पर माल्यार्पण किया.
आलोक कुमार
शनिवार, 5 जुलाई 2025
ईपीएस 95 के तहत न्यूनतम 1000 पेंशन में 7500 बढ़ोतरी करने की मांग
मजबूरी में 3 अगस्त को EPS-95 एजिटेशन कमिटी की बैठक दिल्ली में होगी.उसके बाद 4 और 5 अगस्त को जंतर मंतर पर धरना और प्रदर्शन किया जाएगा, बापू के अस्त्र सत्याग्रह में भाग लेने लाखों की संख्या में बुजुर्ग दिल्ली आ रह रहे हैं......
नई दिल्ली. EPS-95 एजिटेशन कमिटी के अध्यक्ष अशोक रावत ने कहा है कि केंद्र सरकार के द्वारा लगातार आश्वासन मिल रहा है कि ईपीएस 95 के तहत न्यूनतम 1000 पेंशन में 7500 बढ़ोतरी कर दिया जाएगा.उन्होंने कहा कि एक दशक से केवल आश्वासन ही मिल रहा है.
आगे कहा कि संसद का मॉनसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त, 2025 तक बुलाया गया है.इस दौरान माननीय सांसद लोकसभा और राज्यसभा में सरकारी की वादाखिलाफी के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे.वहीं EPS-95 एजिटेशन कमिटी की पैनी नजर मानसून सत्र पर रहेगा.यदि 31 जुलाई तक 7500 न्यूनतम पेंशन,महंगाई भत्ता,पति और पत्नी की स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती है.तो मजबूरी में 3 अगस्त को EPS-95 एजिटेशन कमिटी की बैठक दिल्ली में होगी.उसके बाद 4 और 5 अगस्त को जंतर मंतर पर धरना और प्रदर्शन किया जाएगा, बापू के अस्त्र सत्याग्रह में भाग लेने लाखों की संख्या में बुजुर्ग दिल्ली आ रह रहे हैं.उनकी व्यवस्था एजिटेशन कमिटी की ओर से की जाएगी.समिति के अध्यक्ष अशोक रावत ने कहा कि बुलढाना में साढ़े छह सालों से सत्याग्रह किया जा रहा है.तब भी केंद्र सरकार पर असर नहीं पड़ रहा है.
पिछले 11 वर्षों से EPS-95 के तहत पेंशनर्स न्यूनतम पेंशन को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. वर्तमान में न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह है, जो आज के समय में जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं है. इस संदर्भ में, EPS-95 एजिटेशन कमिटी ने वित्त मंत्री से मुलाकात की और न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह करने की मांग की है.इसके अतिरिक्त, उन्होंने महंगाई भत्ते (DA) का समावेश करने और रिटायर्ड कर्मचारियों तथा उनके जीवन साथियों के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं की भी मांग की है.वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत 78 लाख से अधिक पेंशनर्स लाभ प्राप्त कर रहे हैं.
आलोक कुमार
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गुरुवार, 3 जुलाई 2025
स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी की 121वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई
प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने मनाई स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी की 121वीं जयंती
पटना . बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने आज अपने मुख्यालय सदाकत आश्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व मंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी अब्दुल कय्यूम अंसारी की 121वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई.
इस अवसर पर, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम ने अब्दुल कय्यूम अंसारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे उच्च कोटि के स्वतंत्रता सेनानी थे। राजेश राम ने उन्हें गरीबों का सच्चा मसीहा बताते हुए कहा कि मंत्री के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में रहते हुए गरीबों के बेहतर इलाज के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की, जिसने असंख्य लोगों को लाभ मिला. इसके साथ ही, उन्होंने राज्य के बुनकरों के उत्थान और विकास के लिए भी कई क्रांतिकारी कार्यक्रम चलाए, जिससे इस वर्ग के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिला. प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल को याद करते हुए राजेश राम ने कहा कि उस दौरान कार्यकर्ताओं का सम्मान सर्वोपरि था और उनके मार्गदर्शन में पार्टी ने नई ऊंचाइयों को छुआ.कार्यक्रम की शुरुआत अंसारी साहब के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपनी पुष्पांजलि अर्पित की.
स्व. अंसारी साहब को पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, पूर्व विधायक नरेंद्र कुमार, मोती लाल शर्मा, जमाल अहमद भल्लू, स्नेहाशीष वर्धन पांडेय ,सौरभ कुमार सिन्हा, उमैर खान, शिशिर कौंडिल्य,नागेन्द्र कुमार विकल, अश्विनी कुमार, बैजनाथ शर्मा, सकिलुर रहमान , असफर अहमद, अरविन्द लाल रजक शाशि कान्त तिवारी, राजेन्द्र चौधरी,राजकिशोर सिंह मो.शाहनवाज उमर सैफुल्लाह खान, वसी अहमद, , यशवंत कुमार चमन, वसीम अहमद, , कन्हैया कुमार, रंजीत यादव, विश्वनाथ बैठा, , मिहिर झा, नदीम अंसारी, रवि गोल्डन, विमलेश तिवारी,. रवि कुमार, मो. तम्मना, अबुल कलाम जौहरी, रजनीश कुमार सिंह, संजय कुमार पासवान, पवन कुमार यादव, इश्तियाक आजम, नीरज कुमार, भूषण सिंह, उदय चन्द्र झा, अमजद अली आदि प्रमुख हैं.
आलोक कुमार
बुधवार, 2 जुलाई 2025
विश्व की शिक्षा की राजधानी बिहार को भाजपा -जेडीयू ने बदहाल कर दिया: दिग्विजय सिंह
विश्व की शिक्षा की राजधानी बिहार को भाजपा -जेडीयू ने बदहाल कर दिया: दिग्विजय सिंह
युवाओं के भविष्य की लगाई बोली, पेपर माफिया की सत्ता से हमजोली!: दिग्विजय सिंह
भर्ती और प्रवेश परीक्षा का मोल लगाया, हर पेपर लीक कराया!: दिग्विजय सिंह
पटना. बिहार की शिक्षा का परचम पूरे विश्व में लहराया था. नालंदा विश्वविद्यालय हो या विक्रमशिला विश्वविद्यालय तिब्बत, चीन, जापान, कोरिया, सुमित्रा, मंगोलिया आदि देशों से विद्यार्थी यहाँ शिक्षा लेने आते थे. चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuan Zang) और इत्सिंग (Yixing) ने इसके वैभव की बहुत प्रशंसा करते नहीं थकते थे. आज उसी बिहार को भाजपा और जेडीयू की सरकार ने युवाओं के भविष्य बेचने का केंद्र बना दिया है.भर्ती प्रवेश परीक्षा के घोटाले, जर्जर स्कूल भवन और युवाओं का पलायन ये बिहार की शिक्षा का भाग्य बन गया है -
आज मोदी सरकार ख़ुद कह रही है की बिहार को बर्बाद भाजपा जेडीयू ने किया है ये बातें बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कही .
राज्यसभा सांसद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने क्रमवार आंकड़े पेश करके विस्तार से निम्नांकित बातों को प्रमुखता से संवाददाता सम्मेलन में रखी .उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार की स्कूली शिक्षा की रिपोर्ट UDISE+ 2023–24 का बिहार के लिए चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों की बदहाली और ड्रॉपआउट रेट देश में सबसे ज़्यादा, न स्कूलों में बिजली न शिक्षक , न कंप्यूटर न लाइब्रेरी मौजूद है-
यह प्रदर्शन पूरे देश में सबसे खराब है- बिजली की सुविधा से वंचित स्कूल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 78,120 में से 16,529 स्कूलों में अब भी बिजली नहीं है.कंप्यूटर रहित स्कूल और कुल 78,120 शासकीय स्कूलों में से मात्र 5,057 स्कूलों में कंप्यूटर हैं, अर्थात् मात्र 6.5% स्कूलों में यह सुविधा मौजूद है .
बिहार में 2,637 स्कूल ऐसे हैं जहाँ सिर्फ एक शिक्षक है और इन स्कूलों में 2.91 लाख छात्र नामांकित हैं. वहीँ राज्य में 117 स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी छात्र नहीं पढ़ता है, फिर भी इन स्कूलों में 544 शिक्षक तैनात हैं. स्कूलों से ड्रॉप-आउट रेट भी सबसे अधिक बिहार का ही है जिसमें प्राइमरी (1–5): 8.9%, अपर प्राइमरी (6–8): 25.9%, सेकेंडरी (9–10): 25.63% ड्रॉप-आउट रेट है.
बिहार में कुल स्कूल और सरकारी हिस्सेदारी राज्य में कुल स्कूल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 94,686, कुल स्कूल में सरकारी स्कूल 78,120 हैं, यानी लगभग 82% स्कूल सरकारी हैं. 2025-26 के बजट में बिहार सरकार ने 60,954 करोड़ रुपए शिक्षा पर खर्च करने का दावा किया, मगर सच्चाई यह है कि यह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है.भाजपा जेडीयू सरकार ने उच्च शिक्षा में भी बिहार के भविष्य को बर्बाद कर दिया. AISHE 2021–22 (All India Survey on Higher Education) की हालिया रिपोर्ट ने बिहार में उच्च शिक्षा की दुर्दशा को फिर से उजागर कर दिया है.
GER (Gross Enrolment Ratio) यानी कुल GER: 17.1% अर्थात, राज्य की 18–23 वर्ष की अनुमानित जनसंख्या 1.36 करोड़ है, लेकिन इनमें से केवल 23.33 लाख छात्र अंडर ग्रेजुएट में पढ़ रहे है .अर्थात 1.13 करोड़ युवा उच्च शिक्षा से वंचित है. देश में सबसे कम प्रति लाख जनसंख्या पर उच्च शैक्षणिक संस्थान बिहार में हैं जिसमें कुल 37 विश्वविद्यालय, 1092 महाविद्यालय, 315 स्टैंड-अलोन संस्थान के साथ कुल उच्च शिक्षण संस्थान 1,387 हैं लेकिन आबादी की तुलना में ये संख्या बेहद कम है.प्रति 1 लाख आबादी पर सिर्फ़ 7 कॉलेज हैं — जबकि राष्ट्रीय औसत 30 कॉलेज प्रति लाख है. यह पूरे भारत में सबसे कम है.
पेपर लीक पर बोलते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि युवाओं के भविष्य की लगाई बोली, पेपर माफिया की सत्ता से हमजोली! बिहार में भाजपा-जेडीयू की सत्ता की सरपरस्ती में सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में घोटालों का गोरख धंधा चल रहा है। पिछले सात वर्षों में प्रदेश में 10 से अधिक परीक्षा पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं। नीचे हम पिछले वर्षों में सामने आए प्रमुख घोटालों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर रहे हैं:
2017: सिपाही भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया था, जिसके कारण परीक्षा को रद्द करना पड़ा.इस मामले में 21 एफआईआर दर्ज की गयी. मगर जांच अभी भी जारी है.
2019 और 2021: इन वर्षों में बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर लीक हुए-
2021-22: बिहार उत्पाद विभाग की परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया.ईओयू द्वारा जांच जारी है .2022: बहुचर्चित बीपीएससी 67वीं प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया.इस मामले में 21 एफआईआर दर्ज की गयी मगर जाँच अभी जारी है.
2023: फरवरी 2023 में सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया, जिसके चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी. ईओयू द्वारा BPSC के केंद्राधीक्षक को गिरफ्तार किया गया.
2023: अमीन भर्ती परीक्षा का प्रश्न पत्र सोशल मीडिया के जरिए वायरल हो गया था.इस मामले में पटना समेत कई जिलों में एफआईआर दर्ज की गयी.
2023: देशभर में बहुचर्चित NEET परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया. पटना से पेपर आउट होने की पुष्टि .यह मामला पूरे देश में सुर्खियों में रहा.
2024: बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई.
2024: राज्य स्वास्थ्य समिति की सीएचओ भर्ती परीक्षा में भी प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले ही व्हाट्सऐप के जरिए लीक हो गया.
भर्ती और प्रवेश परीक्षा का मोल लगाया, हर पेपर लीक कराया.बिहार में शिक्षा की गौरवशाली और वैभवशाली विरासत को कलंकित करने वाले “पेपर माफिया” का नेटवर्क लगातार सक्रिय होता जा रहा है.एक चौंकाने वाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के लिए पेपर लीक करने और उसमें मदद दिलाने के बदले में प्रति छात्र भारी-भरकम रकम वसूली जाती है.इन माफियाओं का कारोबार हजारों करोड़ का है .
नीचे दी गई सूची में विभिन्न परीक्षाओं के लिए पेपर माफिया द्वारा ली जाने वाली दरों का विवरण प्रस्तुत है:
NEET PG ₹70-80 लाख,NEET UG, ₹30-40 लाख, बैंकिंग परीक्षा (Bank PO) ₹15-20 लाख, एसएससी (SSC) ₹15-20 लाख, साक्षात्कार सहायक ₹25-30 लाख, पुलिस SI ₹25 लाख, पुलिस सिपाही ₹10-15 लाख ,पटवारी ₹10-15 लाख, टेट/रीट ₹10 लाख, अन्य ₹10 लाख.
चुनाव आयोग के द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सत्यापन पर बोलते हुए राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि बिहार में हो रहे वोटर लिस्ट पुनरीक्षण कार्य भाजपा के निर्देशन पर चुनाव आयोग की मनमानी है जिसमें केवल 28 दिनों में 11 दस्तावेजों के साथ मतदाता सत्यापन का जो दावा चुनाव आयोग कर रही है वो सीधे तौर पर गरीब, आदिवासी, युवा, बाढ़ प्रभावित जनता और पलायन का दंश झेल रहे मतदाताओं को आगामी बिहार विधान सभा चुनावों में मतदान से रोकने की कवायद है.
संवाददाता सम्मेलन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व विधान परिषद् में कांग्रेस के नेता डॉ मदन मोहन झा, राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दूबे, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष अशोक राम, प्रेमचंद मिश्र, पूर्व मंत्री अवधेश कुमार सिंह, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, पूर्व विधायक प्रमोद सिंह, ब्रजेश प्रसाद मुनन, डॉ स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, सौरभ सिन्हा, असित नाथ तिवारी, ज्ञान रंजन, रीता सिंह सहित अन्य नेतागण मौजूद रहें.
आलोक कुमार
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