शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

ईसाई मिशनरी संस्थाओं में स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन निष्कासन

 

ईसाई मिशनरी संस्थाओं में स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन निष्कासन कर दिया जाता है. मिशनरी प्रबंधन की सॉफ्ट टर्मिनेशन रणनीति उजागर,दर्जनों कर्मचारियों को इस रणनीति के तहत नौकरी से बाहर कर देने की खबर......

पटना.राजधानी पटना में है मेडिकल मिशन सिस्टर्स द्वारा संचालित कुर्जी होली फैमिली अस्पताल.यहां कार्यरत कर्मी हलकान और परेशान हैं.यहां के कर्मी जानते हैं कि कभी भी यहां की प्रबंधन की मनमर्जी के शिकार होकर स्वैच्छिक इस्तीफे की आड़ में जबरन नौकरी से निष्कासन कर दिया जाएगा.यहां के अगस्टीन,वर्गीस,अशोक,सत्यनारायण आदि कर्मियों पर निष्कासन की कैची चल गई है.ये सबके सब ईसाई मिशनरी संस्था की प्रबंधक की ‘सॉफ्ट टर्मिनेशन रणनीति‘ के शिकार हो चुके हैं.

        जानकार लोगों का कहना है कि कुर्जी होली फैमिली अस्पताल की प्रबंधक ने तारा टोप्पों को जबरन नौकरी से निकालने के बाद काफी बवाल हुआ था,तब से कर्मचारियों को  प्रत्यक्ष रूप से नहीं निकाला जाता हैं.उनको मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर उनसे इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया जाता है.यहां तक घरेलू जांच कमिटी गठित कर जबरन मानसिक प्रताड़ना देना शुरू कर दिया जाता है.उनसे कहा जाता है कि अगर इस्तीफा नहीं देते हैं तो आपको वेतन व अन्य सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा. इस्तीफा देने से इनकार करने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती है. उनके लिए विदाई सम्मान या फेयरवेल कार्यक्रम नहीं होता है, भले ही उनकी सेवा अवधि लंबी क्यों न हो.


1. मलहम लगाना -शुरुआत में कर्मचारी को समझाया जाता है कि “आपके लिए यह बेहतर होगा”

2. दबाव में कहा जाता है – “इस्तीफा नहीं देंगे तो कानूनी कार्रवाई होगी”

3.धमकी - "3 माह का वेतन और अन्य लाभ नहीं मिलेंगे”

4. मजबूरी में इस्तीफा- "कर्मचारी को दिखाया जाता है कि बाहर का रास्ता ही विकल्प है"

5. कोई फेयरवेल नहीं -"वर्षों की सेवा के बावजूद कोई सार्वजनिक विदाई नहीं होती"

यह प्रबंधन की चालाकी है. स्वेच्छा से इस्तीफा दिया.यह दिखाने से संस्था कानूनी झंझट से बचती है.कर्मचारी न्याय की लड़ाई नहीं लड़ पाते क्योंकि दस्तावेजों में ‘इस्तीफा’ होता है यह नैतिक सवाल है कि क्या यह स्वैच्छिक इस्तीफा है या ढका-छिपा निष्कासन?सेवा करने वाले कर्मचारियों को इस तरह बाहर करना क्या क्रूरता नहीं? प्रासंगिक उदाहरण है कि यही नीति उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के साथ हाल में उपयोग में लाई गई..जैसे दूध में गिरी मक्खी को निकाल फेंकना..यह नीति केवल अस्पताल या मिशनरी संस्था नहीं, कई अन्य एनजीओ और संस्थानों में भी प्रचलित है.

मांगें

1. ऐसे संस्थानों में लेबर लॉ और मानवाधिकार आयोग की जांच हो

2. निकाले गए कर्मचारियों को न्याय व हर्जाना मिले

3. पारदर्शी टर्मिनेशन पॉलिसी अनिवार्य हो

4. धर्म आधारित संस्थाओं की जवाबदेही तय हो


आलोक कुमार


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गुरुवार, 24 जुलाई 2025

उनकी स्थिति आज भी संवैधानिक हकों से कोसों दूर

 

बिहार में फिर गूंजा भूमि अधिकार का सवाल: तीन डिसमिल को लेकर जन सुराज का प्रदर्शन तेज

17 साल बाद भी लागू नहीं हुई बंदोपाध्याय आयोग की सिफारिशें, चुनावी मौसम में गरमाया मुद्दा

पटना. बिहार में आवासीय भूमिहीनों को जमीन देने का वादा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है. वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भूमि सुधार के लिए डी. बंदोपाध्याय आयोग का गठन किया था, जिसने 2008 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी. रिपोर्ट में स्पष्ट सिफारिश की गई थी कि भूमिहीनों को आवास के लिए जमीन दी जानी चाहिए.

प्रारंभ में सरकार ने दस डिसमिल जमीन देने की बात कही, जिसे बाद में पांच डिसमिल और अंततः तीन डिसमिल तक सीमित कर दिया गया.मगर 17 साल बाद भी इन सिफारिशों को जमीन पर उतारने की कोई ठोस पहल नहीं की गई है.

अब ‘जन सुराज’ ने उठाया मोर्चा

राज्य में चुनावी माहौल के बीच ‘जन सुराज’ संगठन ने इस मुद्दे को फिर से जोरदार ढंग से उठाया है.संगठन के कार्यकर्ता प्रदेश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं और तीन डिसमिल भूमि आवंटन को चुनावी एजेंडे में शामिल करने की मांग कर रहे हैं.

जन सुराज के संस्थापक सदस्य गोडेन अंतुनी ठाकुर ने साफ शब्दों में कहा है, “हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक बिहार के हर भूमिहीन परिवार को तीन डिसमिल जमीन नहीं दिलवा देते.”

राजनीतिक खामोशी पर सवाल

विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि नीतीश कुमार सरकार ने भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. यह रिपोर्ट राज्य के भूमिहीन, दलित, वंचित और आदिवासी समुदायों के लिए एक उम्मीद की किरण मानी जा रही थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह निष्क्रिय पड़ी है.

भूमिहीनों की दशा जस की तस

बिहार में लाखों परिवार आज भी बिना वैध आवासीय भूमि के झुग्गियों, सरकारी जमीनों या जल-जंगल की जमीन पर रह रहे हैं. न बिजली, न पानी, न स्थायी अधिकार—उनकी स्थिति आज भी संवैधानिक हकों से कोसों दूर है.


भूमि अधिकार फिर बना चुनावी मुद्दा

चुनाव नजदीक आते देख तीन डिसमिल जमीन का सवाल फिर गूंज रहा है.जन संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक गरीबों को जीने लायक जमीन नहीं दी जाएगी, तब तक विकास की बात अधूरी रहेगी.

आलोक कुमार 

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बुधवार, 23 जुलाई 2025

विधान सभा घेराव के लिए प्रस्थान करेगा

 

पटना. भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (बिहार) द्वारा बेरोजगार, पेपर लीक, पलायन और छात्रावासों सहित शिक्षण संस्थानों की जर्जर स्थिति के खिलाफ व निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर कल दिनांक 24 जुलाई, 2025 को मध्याह्न 12-00 बजे प्रदेश काग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम से राजापुर पुल, बोरिंग रोड होते हुए विधान सभा घेराव के लिए प्रस्थान करेगा. उक्त कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (बिहार) के प्रभारी श्री सत्यम कुशवाहा जी अलावे कई गणमान्य नेतागण के साथ-साथ हजारों की संख्या में एन.एस.यू.आई के छात्रगण भी उपस्थित रहेंगे।  

आलोक कुमार 

सोमवार, 21 जुलाई 2025

आवासीय भूमिहीनों को जमीन दिलाने एकता परिषद का गांधीवादी आंदोलन ग्वालियर से दिल्ली तक

 आवासीय भूमिहीनों को जमीन दिलाने एकता परिषद का गांधीवादी आंदोलन ग्वालियर से दिल्ली तक

जन सत्याग्रह, पी. वी. राजगोपाल के नेतृत्व में देशभर से हजारों लोगों की पदयात्रा होती थी

पटना. आवासीय भूमिहीनों को न्यूनतम तीन डिसमिल भूमि दिलाने की मांग को लेकर जन संगठन एकता परिषद ने बीते दो दशकों में कई बड़े आंदोलनों का नेतृत्व किया है.इस आंदोलन की अगुवाई देश के वरिष्ठ गांधीवादी नेता पी. वी. राजगोपाल ने की, जिसका उद्देश्य था – शांतिपूर्ण सत्याग्रह के माध्यम से गरीबों और हाशिए पर खड़े समुदायों के भूमि अधिकार सुनिश्चित करना.

2007 से लगातार उठती रही आवाज

2007 में जनादेश यात्रा के नाम से पहला बड़ा अभियान शुरू हुआ, जिसमें देशभर के हजारों भूमिहीनों ने भाग लिया.इस अभियान के तहत सरकार से आवास और आजीविका के लिए भूमि देने की नीति तैयार करने की मांग की गई.

2012 में ‘जन सत्याग्रह’ बनी निर्णायक घड़ी

इस आंदोलन की सबसे अहम कड़ी 2012 में देखने को मिली, जब ग्वालियर से दिल्ली तक लगभग 50,000 लोगों ने पैदल मार्च किया। इसे जन सत्याग्रह का नाम दिया गया. शांतिपूर्ण पदयात्रा के इस आयोजन ने देश का ध्यान आकर्षित किया.अंततः केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से बातचीत की और कुछ बिंदुओं पर सहमति जताई, जिसमें भूमि सुधार नीति, भूमिहीनों की पहचान और भूमि आवंटन की प्रक्रिया तेज करने के वादे शामिल थे.

2018 में ‘जनांदोलन’ के रूप में फिर उठी मांग

2018 में जनांदोलन के नाम से एक और चरण शुरू किया गया.इसमें फिर से भूमि अधिकार, वन अधिकार और आजीविका सुरक्षा को लेकर मांगें उठाई गई.यह आंदोलन भी पूरी तरह अहिंसात्मक रहा और गांधीवादी मूल्यों पर आधारित था.

गांधी के रास्ते पर राजगोपाल

पी. वी. राजगोपाल, जो कभी चंबल के डकैतों के पुनर्वास में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं, ने जीवन भर अहिंसा और जन संगठन की ताकत को मजबूत किया.उनका मानना है कि भारत में भूमि के बिना न तो आत्मसम्मान संभव है और न ही स्थायी विकास.

मांग आज भी प्रासंगिक

एकता परिषद की प्रमुख मांग रही है कि हर भूमिहीन परिवार को कम-से-कम तीन डिसमिल भूमि आवास के लिए दी जाए.आज भी देश के कई हिस्सों में लाखों परिवार ऐसे हैं, जो बिना किसी वैध जमीन के बसे हैं.यह आंदोलन न केवल जमीन की मांग है, बल्कि गरिमा और अधिकार की भी मांग है.

आलोक कुमार

रविवार, 20 जुलाई 2025

भारतीय जनता पार्टी के नेता राजन क्लेमेंट साह नेआरोप को एक सिरे से नकारा

 

पटना. यह आरोप ईसाई समुदाय के द्वारा लगाया जाता है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ईसाइयों पर हमले बढ़े है. बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्ष राजन क्लेमेंट साह ने खुद ईसाई होकर आरोप को खारिज कर रहे हैं हम अल्पसंख्यक को निशाना बनाया जा रहा है.

     भाजपा के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं, तथा विगत कई वर्षों से अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाई समुदाय के हितों की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं.इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश में ईसाई समुदाय पर हमलों की संख्या में वृद्धि हुई है.यह गंभीर आरोप देश के  तथाकथित ईसाई संगठनों और धार्मिक नेताओं के द्वारा लगाया जाता हैं. 

      मीडिया में बने रहने और मिशनरी कर्ताधर्ताओं के सामने चमकने के लिए समय समय पर अखिल भारतीय ईसाई परिषद, यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम और अन्य संगठनों के द्वारा कहा जाता रहा है कि पिछले दस वर्षों में चर्चों पर हमलों, प्रार्थना सभाओं में तोड़फोड़, और पादरियों की गिरफ्तारी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. संगठनों का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन है.जबकि ईसाई नेता राजन का कहना है कि प्रधानमंत्री जी दिल्ली के गिरजाघर में जाते हैं और आर्चबिशप से मिलकर वार्तालाप करते हैं.

वहीं भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए कहा है कि उनकी सरकार सबका साथ, सबका विकास की नीति पर चल रही है और किसी भी धर्म के खिलाफ भेदभाव नहीं किया जाता है.भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “देश में कानून का राज है. यदि कोई घटना घटती है, तो उस पर स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करता है.यह कहना गलत है कि सरकार किसी एक धर्म के विरुद्ध है.”

आलोक कुमार

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

स्मार्ट मीटरों ने आम जनता की कमर तोड़ दी

 पटना. भाकपा(माले) के राज्य सचिव कॉ. कुणाल ने कहा है कि चुनाव आते ही भाजपा-जदयू गठबंधन ने एक बार फिर जुमलों की झड़ी लगा दी है, लेकिन इस बार बिहार की जागरूक जनता इन झूठे वादों के जाल में फंसने वाली नहीं है.उन्होंने कहा कि बिजली दरों के मामले में बिहार देश का सबसे महंगा राज्य बना हुआ है. ऊपर से


स्मार्ट मीटरों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है.पूरे राज्य में लोग फर्जी बिजली बिल, अनाप-शनाप चार्ज और जबरन वसूली से त्रस्त रहे हैं. स्मार्ट मीटरों के अनुभव से इतने लोग दुखी हैं कि उन्होंने इसे सही ही नाम दिया है — "खून चुसवा मीटर".आज भी हजारों लोग बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन न सुनवाई है, न राहत.

         कॉ. कुणाल ने तंज कसते हुए कहा कि अब जब भाजपा-जदयू गठबंधन को अपनी हार सामने नजर आ रही है, तो इन्होंने फिर से एक नया जुमला फेंका है — हर परिवार को 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का.साथ ही दावा किया जा रहा है कि 2025 से 2030 के बीच एक करोड़ रोजगार दिए जाएंगे। सवाल है कि जब हर साल दो करोड़ रोजगार का वादा करके सत्ता में आए थे, तो पिछले 10 साल में 20 करोड़ रोजगार कहां गए?

      उन्होंने कहा कि 5 साल में 4.8 साल जनता को लूटो और चुनाव के दो महीने पहले बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर दो — यही भाजपा-जदयू का फार्मूला बन गया है.लेकिन बिहार की जनता अब इतनी भोली नहीं है। वह समझ चुकी है कि यह केवल सत्ता में बने रहने की साजिश है, न कि जनता की भलाई के लिए कोई गंभीर योजना।

कुणाल ने यह भी याद दिलाया कि भाकपा(माले) के विधायकों ने बार-बार विधानसभा से लेकर सड़कों तक आवाज उठाई है —स्मार्ट मीटरों को हटाने,सभी जरूरतमंद परिवारों को कम से कम 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने, और बिजली को निजी कंपनियों के चंगुल से मुक्त करने की.

            उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन अपने हर वादे और संकल्प पर गंभीरता से कायम है. केवल घोषणा नहीं, बल्कि ज़मीन पर बदलाव लाना ही हमारा लक्ष्य है. प्रेस वक्तव्य के अंत में उन्होंने पटना के पारस अस्पताल में दिनदहाड़े की गई हत्या की कड़ी निंदा की और कहा कि बिहार की राजधानी अब अपराध की राजधानी में तब्दील हो चुकी है.अपराधी बेलगाम हैं और शासन-प्रशासन मूक दर्शक बना बैठा है.

     उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि बिहार की जनता इस निकम्मी और लुटेरी सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाए। जनता ने बदलाव का मन बना लिया है और माले समेत INDIA गठबंधन इस बदलाव की लड़ाई में मजबूती से साथ है.


आलोक कुमार

गुरुवार, 17 जुलाई 2025

वर्तमान चुनाव आयोग तानाशाह मोदी सरकार के सिस्टम का एक तानाशाह हैं


 वर्तमान चुनाव आयोग तानाशाह मोदी सरकार के सिस्टम का एक तानाशाह हैं


सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को क्या करेगा ?


पटना. "चुनाव आयोग जनता को वोटबंदी कर रहा और हमारे पास दो अदालतें हैं जनता का अदालत व सुप्रीम कोर्ट"यह बात भाकपा-माले महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने इंडिया गठबंधन के चुनाव आयोग से मिलने के बाद कहा. क्योंकि चुनाव आयोग इंडिया गठबंधन के नेताओं को कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया उल्टे एक तानाशाह की तरह पेश आया.

   इंडिया गठबंधन दोनों अदालत में गया और 9 जुलाई को पूरा बिहार बंद रहा था 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक सलाह दी कि मतदाता गहन निरीक्षण में वोटर कार्ड, आधार कार्ड व राशन कार्ड को शामिल किया जाय तथा सुप्रीम कोर्ट जज ने कहा ग्यारह डाकोमेंट से मेरे पास भी नहीं है जिससे मैं भी साबित कर सकता.

  मगर चुनाव आयोग ने न जनता की सुनी और न ही सुप्रीम कोर्ट की बात नहीं मानी बल्कि अपने वही पहले वाला ही जनता का वोट बंदी का निर्णय जारी रखा बल्कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम को और भी विकृत कर दिया जिसका भंडाफोड़ पत्रकार अजीत अंजुम ने किया और इस सच्चाई को सामने लाकर चुनाव आयोग को मोदी सरकार के पक्षधर बता दिया, इसके लिए मैं अजीत अंजुम को सलाम करता हूं.

  अभी फार्म का जांच भी नहीं हुआ कि सत्ता का दलाल गोदी मीडिया ने सूत्रों के हवाले से खबर देने भी लगा है कि बिहार के 35 लाख मतदाताओं का नाम कटेगा क्योंकि वे विदेशी हैं, घुसपैठिए हैं. यानी पिछले 2024 चुनाव के एक वर्ष एक माह दस दिनों में सिर्फ बिहार में पैंतीस लाख विदेशी घुसपैठिए दाखिल हुए और उन्होंने आधार कार्ड, वोटर कार्ड,जॉब कार्ड तथा राशन कार्ड भी बनवा लिया जबकि 20 सालों से भाजपा नीतीश की सरकार है. और इसके जिम्मेदार कौन है?

सवाल है कि क्या भाजपा नीतीश सरकार निकम्मी है, फर्जी है या फिर चुनाव आयोग व गहन परीक्षण फर्जी है?

  अब सवाल है कि इंडिया गठबंधन क्या करेगा?व सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को क्या करेगा ? संविधान व लोकतंत्र बचेगा या उसके खात्मा की शुरुआत होगी?

  क्या इंडिया गठबंधन लोकतंत्र की रक्षा के लिए चुनाव आयोग को पूरा देश में हर राज्य हर जिले में घेराबंदी कर अनवरत चक्का जाम कर देगा?

  क्या सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग को, केंद्र सरकार को गंभीर चेतावनी देते हुए मतदाता गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को निरस्त करेगा?

आलोक कुमार

सोमवार, 14 जुलाई 2025

बिहार प्राइड परेड 2025 में कई प्रदेशों के ट्रांसजेंडर भाग लेंगे......

 


बिहार की राजधानी पटना में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग प्राइड परेड करेंगे. सामाजिक सुरक्षा के उपाय के रूप में मासिक पेंशन की मांग करेंगे. ‘दोस्तानासफर’ नाम के एक गैर सरकारी संगठन की ओर से ये परेड आयोजित किया जाएगा. जिसमें कई प्रदेशों के ट्रांसजेंडर  भाग लेंगे......

पटना. बिहार प्राइड परेड 2025 पूर्व की भांति दिनांक 14 जुलाई को समय शाम 4:00 बजे से साहित्य सम्मेलन से शुरुआत होकर के प्रेमचंद रंगशाला तक जाएगी और प्रेमचंद रंगशाला में किन्नर महोत्सव में सभी व्यक्ति शामिल होंगे.इस कार्यक्रम में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता हरीश अय्यर एवं कलकी सुब्रमण्यम भी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में सभी महिला पुरुष ट्रांसजेंडर जुलूस की शक्ल में अपनी बातों को समाज के सामने ले जाते हुए नजर आएंगे.

   आज पटना में विभिन्न तरीके की सामाजिक मुश्किलों से  समयौनिक एवं ट्रांसजेंडर समुदाय अंतर सामुदायिक हमले, बाह्य व्यक्तियों के द्वारा ब्लैकमेलिंग, सामाजिक स्वीकार्यता, पारिवारिक स्वीकार्यता जैसी स्थितियों से जूझ रहे होते हैं उसमें किस तरीके से कानून का पालन के द्वारा मुश्किलों से बाहर निकाला जा सकता है. इस बार की थीम सामाजिक प्रताड़ना झेल रहे समयौनिक एवं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की मुश्किलों को दुनिया के सामने ले जाना आज की परिस्थितियों से आवश्यक है. यह कार्यक्रम लगभग 13 वर्षों से पटना जिले में आयोजित हो रही है .इस कार्यक्रम में लगभग हजारों हजार व्यक्ति शामिल होते हैं. यह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए बहुत ही अच्छा मौका सामाजिक स्वीकार्यता के लिए प्रदान करती है.इस कार्यक्रम में मणिपुर,नेपाल, तमिलनाडु पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब एवं अन्य राज्यों के साथी शामिल हो रहे हैं। इस कार्यक्रम में ट्रांसजेंडर एवं समयौनिक व्यक्तियों के अलावा आम समाज के व्यक्ति भी शामिल होंगे.

     इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम में कावडिअट्टम, नेपाली लोक संस्कृति, बिहार की लोक संस्कृति, डिवोशनल, मणिपुर लोक संस्कृति के विभिन्न कार्यक्रम की प्रस्तुतियां प्रेमचंद रंगशाला के अंदर में होगी एवं बबीता किन्नर गायिका का संगीत में कार्यक्रम भी प्रस्तुत होगी.


आलोक कुमार

रविवार, 13 जुलाई 2025

पटना में व्यवसायी महासंघ, बिहार का स्थापना सम्मेलन संपन्न, व्यवसायी सुरक्षा आयोग के गठन की मांग तेज

 


उन्माद, उत्पात और अराजकता के माहौल में किसी का व्यवसाय सुरक्षित नहीं रह सकता : दीपंकर भट्टाचार्य

पटना में व्यवसायी महासंघ, बिहार का स्थापना सम्मेलन संपन्न, व्यवसायी सुरक्षा आयोग के गठन की मांग तेज

पटना .पटना के रविन्द्र भवन में आज व्यवसायी महासंघ, बिहार का स्थापना सम्मेलन आयोजित किया गया. सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश एक गहरे आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है.मौजूदा आर्थिक नीतियों के कारण गरीबों की स्थिति लगातार बदतर हो रही है, जबकि बड़े पूंजीपतियों की संपत्ति में जबरदस्त बढ़ोतरी हो रही है.

                  उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट लूट और श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के खिलाफ किसान-मजदूरों के साथ मिलकर छोटे व्यवसायियों को एकजुट होना होगा। किसान, मजदूर और छोटे व्यापारियों की त्रिकोणीय एकता ही इस संघर्ष को मजबूती दे सकती है.

           दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि आज छोटी दुकानें बंद हो रही हैं, सरकारी नौकरियां खत्म हो रही हैं और किसान-मजदूरों की हालत बदतर होती जा रही है. बिहार में भी छोटे दुकानदारों, किसानों और मजदूरों के लिए कोई ठोस काम नहीं किया जा रहा। केवल ओवरब्रिज, मेट्रो और एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं की बातें हो रही हैं, जबकि छोटे बाजार, छोटे उद्योग और स्थानीय व्यापार को कोई समर्थन नहीं मिल रहा.उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यवसाय के लिए शांति, सौहार्द और भाईचारे का माहौल जरूरी है। लेकिन आज समाज में अपराध, उन्माद और अराजकता का बोलबाला है, जो व्यापार के लिए अत्यंत घातक है.

       उन्होंने यह भी कहा कि आज देश के संविधान पर सीधा हमला हो रहा है। संविधान और कानून का राज ही अन्याय को रोक सकता है। देश को आज़ादी सम्मान के लिए मिली थी, लेकिन अब सरकार अमेरिका की दबंगई के आगे झुक रही है.

          नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। बिहार में कर्ज वसूली के नाम पर महिलाओं का शोषण हो रहा है और आत्महत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं.दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार में बदलाव की जरूरत है और इसके लिए मौजूदा सरकार को बदलना होगा। उन्होंने डबल इंजन सरकार को डबल बुलडोजर करार देते हुए कहा कि यह सरकार विकास की राह में रुकावट बन रही है.

              सम्मेलन को संबोधित करते हुए काराकाट से भाकपा-माले सांसद का. राजाराम सिंह ने कहा कि अपराध की घटनाओं का प्रतिकार करते हुए शांति और भाईचारे का माहौल कायम करना होगा, तभी व्यापार सुरक्षित रहेगा और आगे बढ़ेगा.उन्होंने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह सरकार चंद बड़े व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर रही है और राजशाही की वापसी का प्रयास कर रही है। बिहार की जनता इसे कतई स्वीकार नहीं करेगी.

         विदित हो कि छोटे और मझोले व्यवसायियों की सुरक्षा, सम्मान और अस्तित्व के सवालों पर संगठित हस्तक्षेप की दिशा में में यह स्थापना सम्मेलन आज संपन्न हुआ. आरा से माले के सांसद सुदामा प्रसाद ने इसकी पहलकदमी ली। उन्होंने कहा कि व्यवसायियों के लिए सुरक्षा आयोग बने, यह हमारी पहली मांग है.पटना में जिस प्रकार से व्यवसायी गोपाल खेमका की हत्या हुई, उससे पूरा व्यापार जगत स्तब्ध है.

            कार्यक्रम के अध्यक्ष मंडल में का. सुदामा प्रसाद के अलावा लेमनचूस फैक्ट्री, पटना के पूर्व संचालक शंभूनाथ मेहता, फर्नीचर व्यवसायी सुरेन्द्र सिंह, भोजपुर के ईंट भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष उमाशंकर यादव, सीमेंट कारोबारी पूनम देवी, फुटपाथ दुकानदारों के नेता शहजादे आलम, सिकटा से माले विधायक वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता, शिव गंगा बस ट्रांसपोर्ट के ईश्वर दयाल सिंह, फारबिसगंज के किराना व्यवसायी रंजन भगत, हिंदुस्तान टायर के मालिक गंगा साह, राइस मिल एसोसिएशन के सच्चिदानंद राय आदि शामिल थे.

            मंच पर माले के राज्य सचिव कुणाल, एमएलसी शशि यादव, विधायक रामबलि सिंह यादव, पटना से अजय प्रसाद गुप्ता, गया से अजय कुमार, नालंदा से किशोर साव, जहानाबाद से विशाल गुप्ता, नवादा से सावित्री गुप्ता, रणविजय गुप्ता सहित पूरे बिहार से हजारों की तादाद में व्यवसायी आज पटना पहुंचे थे.


आलोक कुमार

https://youtu.be/907dOmSui_c?si=Vb0AICbqUPtc2uVo

 https://youtu.be/907dOmSui_c?si=Vb0AICbqUPtc2uVo

शनिवार, 12 जुलाई 2025

सीधे-सीधे बिहारी अस्मिता पर हमला

 जनता दल यूनाइटेड की सरकार, चुनाव आयोग के साथ मिलकर, बिहार के दलितों, पिछड़ों, शोषितों और गरीबों के वोट के अधिकार को छीनने का षड्यंत्र रच रही थी. यह न सिर्फ लोकतंत्र पर आघात भाजपा,जदयू ,चुनाव आयोग के षड्यंत्र की हार......

पटना .बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश राम ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि हम यहाँ एक ऐतिहासिक फैसले और एक जनविरोधी साजिश के पर्दाफाश के संदर्भ में आपसे संवाद करने के लिए उपस्थित हुए हैं.

    भारतीय जनता पार्टी और था, बल्कि यह
सीधे-सीधे बिहारी अस्मिता पर हमला था। लेकिन हम आपको यह बताते हुए गर्व और संतोष का अनुभव कर रहे हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस साजिश पर करारा ब्रेक लगा दिया है.यह जीत सिर्फ एक कानूनी जीत नहीं है — यह पूरे बिहार की जनता की जीत है। यह उस भरोसे की जीत है जो उन्होंने देश के जननायक, नेता विपक्ष राहुल गांधी जी पर किया। राहुल जी ने बिहार बंद आंदोलन के दौरान यह वादा किया था कि वे बिहार के सरोकारों की लड़ाई अंतिम दम तक लड़ेंगे — और आज वो वादा साकार होते हुए दिख रहा है.

    सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने कहा — “यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो हमारे लोकतंत्र की जड़ों तक जाता है। यह वोटरों के मताधिकार के अधिकार का मामला है.” 10 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि बिहार में चल रहे विशेष तीव्र पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान आधार कार्ड, EPIC (मतदाता पहचान पत्र) और राशन कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में मानने पर गंभीरता से विचार करें.

    चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने बार-बार आग्रह किया कि इन दस्तावेजों को स्वीकार करना आयोग के विवेकाधिकार पर निर्भर माना जाए। लेकिन न्यायमूर्ति धूलिया ने स्पष्ट कहा — “हमारा आदेश साफ है, चुनाव आयोग को इन तीन दस्तावेजों को स्वीकार करने पर विचार करना चाहिए.”कोर्ट ने यह भी कहा कि – “जब आयोग खुद कह रहा है कि 11 दस्तावेजों की सूची अंतिम नहीं है, तो न्यायहित में आधार, EPIC और राशन कार्ड को शामिल करना ही तार्किक होगा.”

    साथियों, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हमने SIR की प्रक्रिया पर रोक की कोई मांग नहीं की। यह बात कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज की है। अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी — तब तक कोई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित नहीं की जाएगी.कोर्ट ने यह भी पूछा कि SIR की प्रक्रिया इतनी चुनाव-केंद्रित क्यों है? यह पुनरीक्षण न तो “संक्षिप्त” है, न “विशेष” — जैसा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 में कहा गया है.जब चुनाव आयोग ने यह तर्क दिया कि आधार सिर्फ पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं — तब न्यायमूर्ति धूलिया ने यह सवाल उठाया कि — “आज के समय में आधार सबसे बुनियादी पहचान पत्र है। जब मैं जाति प्रमाणपत्र बनवाता हूं तो आधार दिखाता हूं। फिर यह इस सूची में क्यों नहीं है? पूरी SIR प्रक्रिया का उद्देश्य तो सिर्फ व्यक्ति की पहचान है.”

      न्यायमूर्ति बागची ने भी दो टूक कहा — “आप जिन 11 दस्तावेजों को मान्य मानते हैं, उनमें से कोई भी सीधे नागरिकता सिद्ध नहीं करता। तो फिर सिर्फ आधार के विरोध में इतना आक्रोश क्यों? कानून के अनुसार चलिए.”यह सारा मामला सिर्फ दस्तावेजों का नहीं है, यह बिहार के करोड़ों लोगों के अधिकारों का सवाल है। कांग्रेस पार्टी साफ तौर पर मानना है कि चुनाव आयोग सत्ता में बैठे दलों के इशारे पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है, ताकि करोड़ों वोटर — खासकर दलित, पिछड़े और गरीब — मतदाता सूची से बाहर हो जाएं. यह ‘SIR’ एक फर्जी अभ्यास है, और 24 जून का प्रशासनिक आदेश बिहार के लोकतंत्र के साथ एक कुठाराघात है.हम सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक हस्तक्षेप का स्वागत करते हैं। कांग्रेस पार्टी इस लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ेगी। हम बिहार के एक-एक नागरिक की पहचान, सम्मान और मताधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं.

      संवाददाता सम्मेलन में विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता डॉ. मदन मोहन झा, नेशनल मीडिया पैनालिस्ट प्रेम चन्द्र मिश्रा, नेशनल मीडिया  कोऑर्डिनेटर अभय दुबे, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र गुप्ता, पूर्व मंत्री कृपानाथ पाठक, मोतीलाल शर्मा ,  मीडिया चेयरमैन राजेश राठौर, नागेन्द्र कुमार विकल मौजूद थे .

आलोक कुमार

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