शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

हिलकर -डूलकर चलती हैं राजमंति कुमारी को इलाज की जरूरत

पटना। बिन्द टोली में हिलती-डूलती चलती हैं राजमंति कुमारी। अभी वह तेरह साल की हैं। जब चार साल की थीं तो शरीर से धात गिरने लगा। इसके बाद माहवारी होने लगा। अभी भी माहवारी की दौर से गुजरती हैं। इसके कारण काफी कमजोर हो गयी हैं। वह हिलती-डूलती चलती है। राजमंति कुमारी की दीदी आशा देवी कहती हैं कि स्नायु में खराबी जाने के कारण शरीर हिलता है। दीघा अल्पना सिनेमा हॉल के सामने डाक्टर विनय कुमार सिंह से दिखाया गया। दवा-दारू चला और अब राशि नहीं रहने के कारण इलाज नहीं करा पा रहे हैं।

गरीबी के दलदल में राजमंति कुमारी के परिवार हैं। दीघा बिन्द टोली के झुग्गी -झोपड़ी में रहते हैं अदिया महतो और परमशीला देवी। इनके पांच संतान हैं, चार लड़की और एक लड़का। सबसे छोटी लड़की राजमंति कुमारी हैं। इस बीच अदिया महतो की मौत हो गयी। विधवा परमशीला देवी को पेंशन मिलती है। राजमंति कुमारी को भी पेंशन मिलने की संभावना है। कुछ रकम संग्रह करने के बाद चिकित्सक से दिखाने का प्रस्ताव है। शास्त्री नगर में स्थित जयप्रकाश हड्डी रोग हॉस्पिटल में स्नायु रोग विशेषज्ञ से दिखाया जाएगा।
आलोक कुमार


शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

आज ‘येसु समाज’ के गठन करने वालों में शामिल ‘संत इग्नासियुस’ का पर्व

पटना।ईसाई समुदाय 365 दिन त्योहार/पर्व मनाते हैं।किसी किसी संतका पर्व पड़ता है।जगजाहिर त्योहार गुड फ्राइडे और क्रिसमस है।रविवार के दिन ईस्टरपर्व पड़ता है। इसके कारण पर्व प्रचारित नहीं है।यह भी सच्चाई है कि ईसाई समुदाय के पर्व को मीडिया के द्वारा तवज्जों नहीं दिया जाता है। वहीं इस समुदाय के पत्रकार भी कम ही हैं। जो पत्रकार हैं भी कमोवेश पर्व के बारे में लिख देते हैं।

हां, पर्व/त्योहारों का खासा असर दक्षिण भारत के केरल और दक्षिण बिहार के झारखंड में देखा जाता है। बड़े पैमाने पर त्योहारों का असर देखा जाता है।विभिन्न गिरजाघरों के नाम पर भी जश्न मनाते हैं। केरल में संत जौर्जका पर्व धूमधाम से मनाते हैं। केरल से बाहर जाकर कार्य करने वाले लोग भी पर्व मनाने के नाम पर छुट्टी लेकर घर आते हैं। यहाँ पर आकर सामूहिक त्योहार मनाते हैं। जगजाहिर है कि यहाँ ईसाई समुदाय की जनसंख्या अधिक है।जो आँखों से देखी जा सकती है। मीडियाकर्मी मिशनरियों से सर्म्पक में रहते हैं। छोटी-बड़ी हरकतों को अखबारों में जगह देते हैं। टी.आर.पी.का भी मसला बनता है।

आज येसु समाजके गठन करने वालों में शामिल संत इग्नासियुसका पर्व है। यह सिमटकर येसु समाजकी चारदीवारी तक रह गयी। इसे सामूहिक बनाने का प्रयास नहीं किया जाता है। इस समाज के क्रियाकलापों को भी जगजाहिर नहीं किया जाता है। दैनिक पूजा करके रस्म अदायगी कर दी जाती है।

आलोक कुमार

शनिवार, 22 नवंबर 2014

स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह ने कहा कि एक और मौका देंगे

पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की नर्सेंस हड़ताल पर

पी.एम.सी.एच. में तीसरे दिन और ए.एन.एम.सी.एच.में दूसरे दिन
भी जारी

पटना/गया। स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह ने कहा कि पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पी.एम.सी.एच.और अनुग्रह नारायण मगध मेडिलक कॉलेजए.एन.एम.सी.एच.’,गया में संविदा पर बहाल नियुक्ति को स्थायीकरण की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। ढाई से तीन सौ की संख्या में नर्सेंस हड़ताल पर हैं। इसका असर अस्पताल पर नहीं पड़ रहा है। अभी घर जा रहा हूं। 24 नवम्बर को पटना लौटेंगे। स्वास्थ्य मंत्री को घर प्यारा है। हमेशा घर की ओर जाते अथवा रहते हैं।

मुख्यालय पटना में आवास देने के बाद भी सासाराम स्थित घर में ही रहना पसंद करते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि संविदा पर नर्सेंस आठ साल से काम कर रही हूं। उम्र 40-45 पार कर चुकी हैं। इसके आलोक में चिन्तित हूं। 12 सितम्बर को हड़ताल पर बैठी थीं। राज्य में जीएनएम 6758 को संविदा पर बहाल हैं। इन लोगों की परीक्षा ली गयी। राज्य कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा सवाल तय किया गया। जो नर्सेंस सेवारत हैं। इनके कार्यकाल के ही आठ साल को ही लेकर परीक्षा ली गयी। इसमें कुछ नर्सेंस फेल हो गयी हैं। ऐसे लोगों को परीक्षा में शामिल होने का मौका देंगे।किसी तरह से नर्सेंस पास हो जाए।

पी.एम.सी.एच.में संविदा पर 1000 नर्सेंस कार्यरत हैं। इसमें 347 स्थायी हैं। संविदा में 653 नर्सेंस हैं। सूबे के 6758 नर्सेंस परीक्षा दी थीं। इसमें से पी.एम.सी.एच. की 65 नर्सेंस फेल कर गयी। ए.एन.एम.सी.एच.में 170 है। जहां 35 फेल हैं। बिहार ग्रेड नर्सेंस एसोसिएशन के बैनर तले 20 नवम्बर से हड़ताल शुरू कर दी गयी। इसके अगले दिन 21 नवम्बर से गया में भी हड़ताल शुरू कर दी गयी। पटना और गया में हड़ताल जारी है। इस संदर्भ में बिहार ग्रेड नर्सेंस एसोसिएशन एवं बिहार अनुबंध परिचारिका संद्य की महामंत्री विथीका विश्वास का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह और प्रधान सचिव दीपक कुमार ने 12 सितम्बर से जारी हड़ताल के समय कहा कि इंटरव्यू लिया जाएगा। कागजात को देकर नौकरी स्थायी कर दी जाएगी। वादा तोड़कर परीक्षा ली गयी। इसमें नर्सेंस को फेल करार दिया जा रहा है। इसके खिलाफ हड़ताल पर हैं। स्थायी नर्सेंस का भी हड़ताल को समर्थन प्राप्त है। हमलोगों के समर्थन में हड़लाली स्थ्ल पर आकर बैठती हैं और नारा बुलंद करती हैं।

इसी तरह संविदा में बहाल ए.एन.एम.नर्सेंस की भी है। कई बार नौकरी स्थायीकरण करने की मांग को लेकर आंदोलन कर चुकी हैं। इनको भी प्रधान सचिव दीपक कुमार के द्वारा आश्वासन दिया गया है कि जीएनएम नर्सेंस की नौकरी स्थायीकरण करने के बाद ए.एन.एम. को भी विधिवत प्रक्रिया अपनाकर नौकरी स्थायी कर दी जाएगी।


आलोक कुमार

गुरुवार, 10 जुलाई 2014

विख्यात गांधीवादी नेता को देश-विदेश-प्रदेश में सत्य अहिंसा का पाठ पढ़ाने के लिए शांति पुरस्कार नहीं मिल सकता?



पटना। क्या केन्द्र सरकार भी विख्यात गांधीवादी नेता पी.व्ही.राजगोपाल को शांति पुरस्कार से विभूषित करने जा रही है। अगर ‘हां’ तो केन्द्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिए। आप लोगों ने सही व्यक्ति का चयन किया है। जो सदैव देश-विदेश-प्रदेश में भ्रमण करके सत्य अहिंसा का पाठ पढ़ाया है। अभी जश्न आजादी का समय भी आने वाला है।

खैर, अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी ने वर्ष 2013 के लिए अनुव्रत अहिंसा अंतरर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार के लिए एकता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष और विख्यात गांधीवादी विचारक एवं अहिंसात्मक संघर्षकर्ता पी.व्ही.राजगोपाल जी को सम्मानित करने के लिए चयन किया है।
ब्ताते चले कि अहिंसा के क्षेत्र में अपनी लेखनी, भाषणों एवं अहिंसक गतिविधियों द्वारा सामाजिक सौष्ठम एवं अहिंसक समाज के निर्माण में विशिष्ट योगदान देने वाले किसी एक व्यक्ति को  अनुविभा प्रतिवर्ष यह पुरस्कार प्रदान करती है। पुरस्कार में एक लाख की राशि , प्रशस्ति पत्र तथा स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाता है। वर्ष 2009 तक इस पुरस्कार को केवल तीन व्यक्तियों को ही नवाजा गया है। वर्ष 2010 से यह पुरस्कार प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है। वर्ष 2013 का  अणुव्रत अहिंसा अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार एकता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष पी.व्ही.राजगोपाल को प्रदान किया जा रहा है।

आखिर क्यों चयन किया गया पी.व्ही. राजगोपाल कोः एकता परिषद के संस्थापक अध्यक्ष पी.व्ही.राजगोपाल जी हैं। कुछेक लोगों में एक है जिनकी प्रेरणा से चम्बल घाटी के 500 डाकूओं ने शस्त्रों सहित समर्पण किया। सन् 1999-2000 से वे विभिन्न राज्यों में लम्बे कूच आयोजित करते रहे हैं। सन् 2007 में 25 हजार और सन् 2012 में उनके नेतृत्व में भूमि एवं आजीविका संसाधनों पर नियंत्रण की मांग को लेकर एक लाख लोगों ने दिल्ली की ओर कूच किया। देश-प्रदेश के सुदूर गांवों के लोगों के बीच में पहचान कायम करने में सफल हो चुके हैं। ये किसी की पहचान करवाने के मोहताज नहीं है। जल,जंगल,जमीन की जंग लड़ने वाले के रूप में प्रचलित हैं। भूमिहीन एवं गरीबों के मसीहा के रूप में भी राजगोपाल जी पहचाने जाते हैं। आज कई देशों में भी राजगोपाल जी उर्फ राजा जी के प्रशंसक फैले हुए हैं।

13 जुलाई को पुरस्कार वितरण समारोहः वर्ष 2013 का  अणुव्रत अहिंसा अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार का वितरण 13 जुलाई 2014 को 3 बजे से अध्यात्म साधना केन्द्र, नयी दिल्ली में होगा। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि गांधी शांति प्रतिष्ठान की अध्यक्ष राधा भट्ट हैं। इसमें भाग लेने के लिए ग्वालियर से एकता परिषद के कार्यकारी  अध्यक्ष रनसिंह परमार, एकता परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक प्रदीप प्रियदर्शी, बिहार से प्रस्थान कर चुके हैं। एकता परिषद के राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य अनीस के, , निर्भय सिंह आदि उपस्थित रहेंगे।

आलोक कुमार



वर्षों से इस मुद्दे को लेकर लगातार आंदोलन किया

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) की पूर्व संध्या पर देशभर के करोड़ों श्रमिकों, पेंशनभोगियों और विशेष रूप से ईपीएस-95 (Employees’ Pension Sche...