मंगलवार, 27 मई 2025

एक धार्मिक समारोह में वर्गीस चक्कलकल आर्चबिशप

 एक धार्मिक समारोह में वर्गीस चक्कलकल को आर्चबिशप के रूप में पदस्थापित किया गया


कालीकट. वेटिकन के द्वारा 12 अप्रैल को वर्गीस चक्कलकल को कालीकट के नए उन्नत आर्चडायोसिस के पहले मेट्रोपोलिटन आर्चबिशप के रूप में स्थापित किया गया.वेटिकन के प्रतिनिधि आर्चबिशप लियोपोल्डो गिरेली के नेतृत्व में आयोजित समारोह में आर्चबिशप वर्गीस चक्कलकल को पदस्थापित की गई.

    रविवार, 25 मई 2025 को सेंट जोसेफ स्कूल ग्राउंड में धार्मिक समारोह आयोजित किया गया, जिसमें केरल और उसके बाहर से हज़ारों श्रद्धालु शामिल हुए.एक भव्य और प्रार्थनापूर्ण समारोह में, आर्चबिशप वर्गीस चक्कलकल को कालीकट के नए उन्नत आर्चडायोसिस के पहले मेट्रोपोलिटन आर्चबिशप के रूप में स्थापित किया गया. इस कार्यक्रम में बिशप, पादरी और सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में एक पवित्र सामूहिक प्रार्थना और आधिकारिक आदेश का वाचन शामिल था.

    उपस्थित वरिष्ठ पादरियों में केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) के अध्यक्ष कार्डिनल मार बेसिलियोस क्लीमिस, आर्चबिशप मार एंड्रयूज थजाथ, आर्चबिशप थॉमस जे नेट्टो, मार जोसेफ पाम्पलेनी और बिशप एलेक्स वडकुमथला शामिल थे.

    पीडब्ल्यूडी मंत्री पीए मोहम्मद रियास, केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ, पूर्व मंत्री एमके मुनीर और कोझिकोड की मेयर बीना फिलिप सहित राजनीतिक नेताओं ने भी इसमें भाग लिया और अपनी शुभकामनाएं दीं.

     आर्चबिशप चक्कलकल को 1981 में पुजारी के रूप में नियुक्त किया गया था, वे 1998 में कन्नूर के पहले बिशप थे और 2012 से कालीकट के बिशप के रूप में कार्यरत हैं.उन्होंने केसीबीसी और भारतीय कैथोलिक बिशप सम्मेलन दोनों में नेतृत्व की भूमिका निभाई है.

   नया आर्चडायोसिस कोझिकोड, कन्नूर और सुल्तानपेट के क्षेत्रों को कवर करेगा.डायोसिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस पदोन्नति से मालाबार क्षेत्र में चर्च की धार्मिक और सामाजिक पहुंच मजबूत होगी, जो इसके इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण होगा.

आलोक कुमार

सोमवार, 26 मई 2025

आमदनी अठन्नी और खर्च रूपया होने से बचत करने की कोई संभावना नहीं

आमदनी अठन्नी और खर्च रूपया होने से बचत करने की कोई संभावना नहीं 

                                  आमदनी से ज़्यादा खर्च होने से आर्थिक परेशानी हो रही है

                               कर्ज लेकर जीवन व्यापन करने को मजबूर हैं  ईपीएस 95 पेंशनर


पटना. "आमदनी अठन्नी और खर्च रूपया" एक हिंदी मुहावरा है.यह मुहावरा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन पर सटिक बैठता है.उसने 19 नवंबर 1995 को कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (ईपीएस 95) को लागू किया.ईपीएस 95 के तहत बहुत ही कम पेंशन देकर सामाजिक सुरक्षा करना शुरू किया.इस सामाजिक सुरक्षा योजना को 9 वर्षों के बाद मोदी सरकार ने 2014 में न्यूनतम पेंशन एक हजार रूपए कर दी.जो 2014 से 2025 मई माह तक न्यूनतम पेंशन एक हजार रूपए ब्रह्म लकीर साबित हो रही है.

"आमदनी अठन्नी और खर्चा रूपया" — यह मुहावरा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और इसकी पेंशन योजना पर बिल्कुल सटीक बैठता है।

EPFO ने 19 नवंबर 1995 को कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) को लागू किया, जिसका उद्देश्य था निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देना. लेकिन इस योजना की सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि इसके तहत मिलने वाली पेंशन की राशि इतनी कम थी कि वह व्यक्ति की बुनियादी जरूरतों को भी पूरा करने में सक्षम नहीं थी.

    एक ओर कर्मचारियों के जीवन भर की गाढ़ी कमाई से फंड में पैसा जमा होता रहा, वहीं दूसरी ओर उन्हें वृद्धावस्था में केवल कुछ सौ रूपए की पेंशन देकर “सामाजिक सुरक्षा” का नाम दे दिया गया.यही कारण है कि EPS-95 की स्थिति पर यह मुहावरा बिल्कुल सटीक बैठता है — आमदनी बहुत सीमित, और ज़रूरतें कहीं अधिक.

     साल 2014 में जब केंद्र में मोदी सरकार आई, तो इस योजना की विसंगतियों को समझते हुए उन्होंने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया — न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹1,000 प्रति माह कर दिया। यह फैसला उस समय राहत की एक किरण जरूर बना, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ.

      दुर्भाग्यवश, यह "न्यूनतम ₹1,000 पेंशन" वर्ष 2014 से लेकर मई 2025 तक ज्यों का त्यों बनी रही.महंगाई, जीवन यापन की बढ़ती लागत, दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च में भारी बढ़ोतरी के बावजूद, पेंशन की यह राशि "ब्रह्म लकीर" बन गई — जिसे कोई तोड़ नहीं पाया।

    इससे यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक सुरक्षा की यह योजना आज भी केवल औपचारिकता तक सीमित है.कर्मचारी पेंशन योजना के लाखों पेंशनर्स आज भी संघर्ष कर रहे हैं, और यह सवाल ज़रूरी हो गया है —

क्या यह पेंशन वास्तव में सम्मानजनक जीवन के योग्य है? या फिर यह व्यवस्था खुद "आमदनी अठन्नी और खर्चा रूपया" की मिसाल बन चुकी है?


आलोक कुमार

रविवार, 25 मई 2025

फादर रेमी साह और फादर केरोबिन साह की बहन मार्ग्रेट माइकल का निधन

फादर रेमी साह और फादर केरोबिन साह की बहन मार्ग्रेट माइकल का निधन बेतिया में गम पसरा बेतिया. दिवंगत मार्ग्रेट माइकल का पार्थिव शरीर को संत तरेसा हाई स्कूल के निकट आवास से नैटिविटी ऑफ द ब्लेस्ड वर्जिन मेरी चर्च में लाया गया.समारोही मिस्सा बलिदान पूर्वाह्ण 10.00बजे हुआ.वह Marian, Felix, Monica, Violet & Ladu की माँ थीं.वे सभी बेतिया के रहने वाले हैं.रविवार 25-5-25 को निधन हुआ था.वे 92 वर्ष की थीं । वे अपनी ज़िंदादिली और परोपकारी व्यक्तित्व के लिए जानी जाती थीं.
आलोक कुमार

शुक्रवार, 23 मई 2025

पवित्र बाइबल की रहस्यमयी कहानी का रसास्वादन करने का मौका बेतिया में

 

May be an image of 5 people, beard and text that says "बाइबल की रहस्यमयी कहानी का रसास्वादन करने का मौका बेतिया में करिश्माई प्रार्थना सभा के निदेशक फादर थॉमस मेनाप्पट्टू ओएफएम कैप है. .उनके अन्य टीम है."

पवित्र बाइबल की रहस्यमयी कहानी का रसास्वादन करने का मौका बेतिया में

"मैं, प्रभु, सब शरीरधारियों का ईश्वर हूँ.क्या मेरे लिए कुछ असम्भव है?
करिश्माई प्रार्थना सभा दो दिन 24 और 25 मई को
24 मई - शाम 4 से 7 बजे तक
25 मई - सुबह 9 बजे से 4 बजे तक
स्थान है नैटिविटी ऑफ द ब्लेस्ड वर्जिन मेरी चर्च बेतिया, बिहार
नेतृत्व
फादर थॉमस मेनाप्पट्टू ओएफएम कैप और टीम
निदेशक
शांति भवन रिट्रीट सेंटर बटाला, पंजाब
श्री चांद एवं श्रीमती माया (अजमेर)
बीआर. सुशील कॉल्विन (दिल्ली)
बीआर. लेवी (बतला)

गुरुवार, 22 मई 2025

27 वर्षों की सेवा के उपरांत सेवानिवृत

 

बेतिया .पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में है संत जेवियर्स हायर सेकेंड्री स्कूल.इस स्कूल को जेसुइट चलाते हैं.इस स्कूल की स्थापना 1998 में हुई थी.स्थापना काल से स्कूल में शिक्षण कार्य करने वाली स्कूल की संस्थापिका रेणुका साह की भावभीनी विदाई सेवानिवृत होने पर दी गई.

         संत जेवियर्स हायर सेकेंड्री स्कूल बेतिया की शिक्षिका रेणुका साह, विद्यालय के स्थापना वर्ष 1998 से सेवारत हैं आज दिनांक 22 मई 2025 को 27 वर्षों की सेवा के उपरांत सेवानिवृत हुईं. विद्यालय में छात्रों एवं सह शिक्षकों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी.प्रधानाचार्य फादर एडिसन जे आर्मस्ट्रांग ने उनकी कर्मठता के प्रति पूरे विद्यालय परिवार की ओर से कृतज्ञता प्रकट की.

        उनके 27 वर्षों की सेवा के लिए बेतिया जेसुइट परिवार के फादर रेक्टर थॉमस चिल्लीकुलम के हाथों से सराहना का प्रतीक एवं प्रशस्ति पत्र शिक्षिका रेणुका साह को भेंट स्वरूप प्रदान किया.                    संत जेवियर्स हायर सेकेंड्री स्कूल की अन्य शिक्षिकाें ने श्रीमती साह के बारे में कहा कि रेणुका दीदी जीव विज्ञान की बहुत ही अच्छी शिक्षिका थीं.आगे अन्य शिक्षकों का कहना है कि वह इस विद्यालय की एक अनमोल रत्न थीं उनकी कमी हमेशा इस विद्यालय को खलेगी.

            मौके पर श्रीमती साह ने भी अपने बिताए हुए 27 वर्षों को याद की और कहा कि इस स्कूल को जब भी मेरी जरूरत हो मैं इसके लिए हमेशा तैयार रहूंगी. मौके पर श्रीमती साह के हाथों विद्यालय पत्रिका जेवियर वर्ल्ड का विमोचन भी किया.इस अवसर पर विद्यालय के सचिव एवं रेक्टर फादर थॉमस चिल्लीकुलम, प्रधानाचार्य फादर एडिसन जे आर्मस्ट्रांग, उप प्रधानाचार्य श्री रेमंड रेमी, फादर इसीडोर, फादर पेरिया,  समस्त शिक्षकगण, आदि मौजूद रहें.


आलोक कुमार

बुधवार, 21 मई 2025

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज पुण्य तिथि

 


पटना. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज पुण्य तिथि है. इस दिन यानी 21 मई को हर साल आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाता है. साल 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी सभा के दौरान लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के एक आत्मघाती हमलावर द्वारा उनकी हत्या कर दी गई थी. आत्मघाती हमलावर ने एक बेल्ट बम चलाया था, जिसमें राजीव गांधी समेत कई लोग मारे गए थे.

       इस अवसर पर बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस द्वारा 21 मई,2025 को मध्याह्न 12.00 बजे प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम, पटना में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया है.मौके पर कांग्रेस के बिहार प्रभारी श्री कृष्णा अल्लावारू जी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री राजेश राम जी एवं कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता डा0 शकील अहमद खान जी के अलावे कांग्रेस के वरिष्ठ नेतागण एवं युवा कांग्रेस के पदाधिकारीगण भी उपस्थित रहेंगे.

आलोक कुमार

मंगलवार, 20 मई 2025

जिससे फैन दिग्वेश राठी को जानने और पहचानने लगे हैं

अपने 'नोटबुक' में दिग्वेश राठी एंट्री का इशारा करते हैं

तब आउट होने वाले प्लेयर को विदाई देते हैं

जिससे फैन दिग्वेश राठी को जानने और पहचानने लगे हैं


लखनऊ.लखनऊ सुपर जायंट्स के स्पिनर दिग्वेश राठी चर्चा में हैं.अब तक उन्होंने टूर्नामेंट के 12 मैचों में खेलते हुए 8.18 के शानदार इकॉनमी रेट के साथ 14 विकेट झटके हैं.उसके बाद झटके विकेट को अपने 'नोटबुक' में एंट्री का इशारा करते हुए विदाई देते हैं.जिससे फैन दिग्वेश राठी को जानने और पहचानने लगे हैं.

   लखनऊ सुपर जायंट्स के दिग्वेश राठी खिलाड़ी हैं. जो पहली बार आईपीएल खेल रहे हैं.इससे पहले शायद ही कोई क्रिकेट फैन उनको जानता था लेकिन इस एक मौके को राठी ने ऐसे भुनाया कि अब उन्हें हर खिलाड़ी, हर फैन और सभी 10 आईपीएल टीमें याद रखेंगी.

    दिग्वेश राठी को आईपीएल 2025 के लिए पिछले साल दिसंबर में आयोजित हुई खिलाड़ियों की बड़ी नीलामी के दौरान लखनऊ सुपर जायंट्स टीम ने उनके बेस प्राइस 30 लाख रुपये में खरीदा था.वह इस टूर्नामेंट के सबसे सस्ते खिलाड़ियों में से एक हैं.

   लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम अब आईपीएल 2025 प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी है लेकिन राठी ने बाहर होने से पहले भी हैदराबाद के खिलाफ मैच में दो अहम विकेट लेकर सबका दिल जीत लिया.अब तक उन्होंने टूर्नामेंट के 12 मैचों में खेलते हुए 8.18 के शानदार इकॉनमी रेट के साथ 14 विकेट झटके हैं.उनका बेस्ट प्रदर्शन 30 रन देकर 2 विकेट रहा है. अभी लखनऊ के 2 मैच और बाकी हैं और राठी इन बाकी मैचों में अपने विकेटों की संख्या और बढ़ाने का प्रयास करेंगे.

आलोक कुमार 

सोमवार, 19 मई 2025

दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर

पटना .आज प्रगति भवन पटना में आवासीय भूमिहीन महिलाओं का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. इस अवसर पर दर्जनों ग्रामीण महिलाओं ने हिस्सा लिया.

       आवासीय भूमिहीन महिलाओं का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दरम्यान प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता कंचन बाला ने महिलाओं के भूमि अधिकार के संदर्भ में मुद्धा उठाते हुए कहा कि आज की दौड़ में महिला को सशक्त होना और आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है.खासकर ग्रामीण परिवेश में रहने वाले भूमिहीन दलित महिलाएं जो खेतिहर मजदूर हैं उनको अपने घर की जमीन की बहुत जरूरी है क्योंकि जमीन ना सिर्फजीने का साधन है बल्कि जमीन इंसान के अस्तित्व और पहचान का प्रतीक भी है. यह सर्वविदित है कि हमारी पहचान हमारी जमीन से ही होती है और महिलाओं पर अत्याचार रोकने में जमीन की हकदारी बहुत जरूरी  है .

            सामाजिक कार्यकर्ता कंचन बाला ने  कहा कि जमीन हमें इज्जत देती है जमीन हमें बराबरी का दर्जा देती है और जमीन हमारे अस्तित्व को समझ में बनती है. इसलिए सरकार को चाहिए की सही ढंग से बिहार का भूमिहीन परिवारों का सर्वेक्षण करा कर वैसे परिवार जिनके पास आवास की भूमि नहीं है उन्हें जमीन आवंटित करें .और इसके साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास और शौचालय भी उपलब्ध कारण हाल ही में सरकार द्वारा कराए गए. सर्वे में पता चला है की बिहार में एक करोड़ परिवार के पास पक्का घर नहीं और 38 लाख परिवार आवासीय भूमिहीन है.

   प्रमुख समाजसेवी प्रदीप प्रियदर्शी ने कहा की हमारा संगठन पिछले कई वर्षों से महिलाओं के भूमि अधिकार को लेकर लगातार अभियान चला रहा है कुछ हद तक सफलता भी मिली है लेकिन सरकार की ओर से नियमित रूप से अभियान बसेरा को नहीं चलाई जाने के कारण आज भी लाखों परिवार भूमिहीन हैं यदि हम सब मिलकर अभियान चलाएंगे तो जरूर सफलता मिलेगी

      सम्मेलन में पटना के प्रख्यात महिला नेत्री मंजू डूंगडूंग ,शिवकुमार ठाकुर, रिंकी कुमारी, नरेश मांझी सहित कई बुद्धिजीवी और संगठन के लोग मौजूद थे.


आलोक कुमार

शनिवार, 17 मई 2025

पहला आईपीएल खिताब जीता था राजस्थान रॉयल्स

 


पटना.वर्ष 2008 में पहला आईपीएल खिताब जीता था राजस्थान रॉयल्स ने लेकिन उसके बाद से यह टीम इस खिताब के लिेए तरस रही है. वहीं, सनराइजर्स हैदराबाद की टीम भी वर्ष 2016 में सिर्फ एक बाद आईपीएल की ट्रॉफी उठा पाई है. हालांकि इस टीम ने आईपीएल में काफी बाद में प्रवेश किया. पहले हैदराबाद की टीम का नाम डेक्कन चार्जस हैदराबाद था, जिसने वर्ष 2009 में यह ट्रॉफी जीती थी.  बाद में इसका प्रबंधन बदल गया. इसके अलावा कोलकाता की टीम भी वर्ष 2012 और वर्ष 2014 में यह खिताब जीत चुकी है. इसके बाद नंबर आता है चेन्नई सुपरकिंग्स का. चेन्नई का प्रदर्शन इस मामले में काफी अच्छा रहा है. चेन्नई की टीम वर्ष 2010, 2011 और वर्ष 2018 में यानी की तीन बार आईपीएल विजेता बनी है. इस लिस्ट में सबसे ऊपर नाम आता है मुंबई का. मुंबई इंडियन्स की टीम ने वर्ष 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 में आईपीएल की ट्रॉफी अपने नाम की है. कुल पांच बार खिताब मुंबई के नाम रहा है,.


आलोाक कुमार


शुक्रवार, 16 मई 2025

लैला कबीर को भावभीनी श्रद्धांजलि

लैला कबीर को भावभीनी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली.किसान संघर्ष समिति द्वारा यह सूचित किया जाता है कि श्रीमती लैला कबीर अब हमारे बीच नहीं रहीं. कैंसर से वे लंबे समय से पीड़ित थीं. उनकी अंत्येष्टि आज, 16 मई 2025 को सुबह 11ः30 बजे ग्रीन पार्क क्रिमेटोरियम, नई दिल्ली में संपन्न होगी.

   लैला कबीर जी एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता थीं और रेड क्रॉस से लंबे समय तक जुड़ी रहीं. उन्होंने अपने अंतिम समय तक सामाजिक कार्यों में सक्रियता के साथ योगदान दिया.मेरी उनसे पहली मुलाकात तब हुई थी, जब मैं दिल्ली पी एच डी के लिए आया और वे 26-तुगलक क्रिसेंट में रहती थीं। जॉर्ज फर्नांडिस जी की पत्नी के रूप में उनसे समय-समय पर मुलाकात होती रही.

    जब जॉर्ज साहब गंभीर रूप से बीमार हुए, तब लैला जी ने कई वर्षों तक उनकी अथक सेवा की.जॉर्ज फर्नांडिस जी का निधन लैला कबीर जी के  पंचशील पार्क स्थित निवास पर ही हुआ था, और जॉर्ज फर्नांडिस का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए पंचशील पार्क में रखा गया था.उल्लेखनीय है कि जॉर्ज फर्नांडिस और लैला कबीर की शादी 22 जुलाई 1971 को हुई थी.तब में रेड क्रॉस में असिस्टेंट डायरेक्टर थीं.उनके पिता  हुमायूं कबीर देश के पहले शिक्षा मंत्री थे. 25 जून 75 को इमरजेंसी लगाए जाने वाले दिन आप और जॉर्ज फर्नांडिस उड़ीसा में थे.वहां से भेष बदल कर जॉर्ज निकल गए.लैला बेटे के साथ अमेरिका चली गई.22 महीने बाद जब आपातकाल समाप्त हुआ तब लौटीं.

    इस बीच में जॉर्ज फर्नांडिस राजनीति में व्यस्त रहे. जब उनकी बीमारी बढ़ गई तब फिर से लैला जी ने उन्हें आजीवन सम्हाला.जॉर्ज फर्नांडिस और लैला कबीर जी का एक पुत्र शीन फर्नांडिस( शांतनु ) है ,जो अमेरिका में रहता है.वह अंत्येष्टि के लिए दिल्ली पहुंच चुका है. पिछली बार जॉर्ज साहेब के देहांत के समय मुलाकात हुई थी आज फिर होगी. हम लैला कबीर जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं.


आलोक कुमार


बुधवार, 14 मई 2025

रोमन कैथोलिक चर्च का इतिहास 103 साल पुराना

 

रोमन कैथोलिक चर्च का इतिहास 103 साल पुराना
लचरागढ़ चर्च की स्थापना 1922 में की गयी थी
सिमडेगा. सिमडेगा में कोलेबिरा प्रखंड के लचरागढ़ स्थित रोमन कैथोलिक चर्च का इतिहास 103 साल पुराना है. लचरागढ़ चर्च की स्थापना 1922 में की गयी थी. इसके बाद से लगातार लचरागढ़ में चर्च स्थापित कर विश्वासी विनती आराधना कर रहे हैं. लचरागढ़ चर्च के पहले पल्ली पुरोहित फादर होरनी थे. उनके कार्यकाल में चर्च का निर्माण शुरू किया गया था. बताया जाता है कि लचरागढ़ पल्ली की जमीन नारोडेगा लुगून पुरखों की देन है. लुगून पुरखों द्वारा ही लचरागढ़ पल्ली चर्च के लिए जमीन दी गयी थी. लचरागढ़ पल्ली में अब तक 24 पुरोहितों ने योगदान दिया है. कई साल बीतने के बाद लचरागढ़ को 90 के दशक में भिखारिएट बनाया गया. शुरुआती दिनों में कुटुगिया, बांकी, जीतू टोली, बरवाडीह, जलडेगा भी इस पल्ली के अंग थे. बाद में इन सभी स्थानों को बारी-बारी से पल्ली का दर्जा दिया गया. पहले पल्ली पुरोहित फादर होरनी लचरागढ़ में एक मार्च 1923 को आये थे. लचरागढ़ आते उन्होंने मिट्टी की दीवार से चर्च का निर्माण कराया. उस समय खीस्तीयों की संख्या 3945 थी. 1200 लोग धर्म सीखने आते थे. उनके कार्यकाल के दो वर्षों में 25 गांवों में गिरजाघर की शुरुआत हुई. वर्तमान में चर्च में 8233 परिवार विनती आराधना करते हैं. पल्ली पुरोहित डीन फादर एरिक जोसेफ कुल्लू , फादर अलोइयस तिर्की, फादर बेंजामिन केरकेट्टा, फादर पीटर बरला, फादर अलबिनुस केरकेट्टा, फादर क्लेमेंटे लकड़ा ने बताया कि लचरागढ़ रोमन कैथोलिक चर्च का इतिहास काफी पुराना है. वर्तमान में कैथोलिक सेवा समिति के अध्यक्ष अलबिनुस लुगून, उपाध्यक्ष जोसेफ सोरेंग, सचिव एडविन केरकेट्टा, उप सचिव प्रवीण लुगुन, कोषाध्यक्ष शिलानंद बागे की देख-रेख में चर्च का संचालन हो रहा है. आलोक कुमार

भारतीय महिला क्रिकेट टीम पिछले कुछ वर्षों में निरंतर प्रगति

नजरें 2026 में होने वाले ICC Women's T20 World Cup पर टिकी हैं भारतीय महिला क्रिकेट टीम पिछले कुछ वर्षों में निरंतर प्रगति के नए आयाम छू...