आवासीय भूमिहीन महिलाओं का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दरम्यान प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता कंचन बाला ने महिलाओं के भूमि अधिकार के संदर्भ में मुद्धा उठाते हुए कहा कि आज की दौड़ में महिला को सशक्त होना और आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है.खासकर ग्रामीण परिवेश में रहने वाले भूमिहीन दलित महिलाएं जो खेतिहर मजदूर हैं उनको अपने घर की जमीन की बहुत जरूरी है क्योंकि जमीन ना सिर्फजीने का साधन है बल्कि जमीन इंसान के अस्तित्व और पहचान का प्रतीक भी है. यह सर्वविदित है कि हमारी पहचान हमारी जमीन से ही होती है और महिलाओं पर अत्याचार रोकने में जमीन की हकदारी बहुत जरूरी है .
सामाजिक कार्यकर्ता कंचन बाला ने कहा कि जमीन हमें इज्जत देती है जमीन हमें बराबरी का दर्जा देती है और जमीन हमारे अस्तित्व को समझ में बनती है. इसलिए सरकार को चाहिए की सही ढंग से बिहार का भूमिहीन परिवारों का सर्वेक्षण करा कर वैसे परिवार जिनके पास आवास की भूमि नहीं है उन्हें जमीन आवंटित करें .और इसके साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास और शौचालय भी उपलब्ध कारण हाल ही में सरकार द्वारा कराए गए. सर्वे में पता चला है की बिहार में एक करोड़ परिवार के पास पक्का घर नहीं और 38 लाख परिवार आवासीय भूमिहीन है.
प्रमुख समाजसेवी प्रदीप प्रियदर्शी ने कहा की हमारा संगठन पिछले कई वर्षों से महिलाओं के भूमि अधिकार को लेकर लगातार अभियान चला रहा है कुछ हद तक सफलता भी मिली है लेकिन सरकार की ओर से नियमित रूप से अभियान बसेरा को नहीं चलाई जाने के कारण आज भी लाखों परिवार भूमिहीन हैं यदि हम सब मिलकर अभियान चलाएंगे तो जरूर सफलता मिलेगी
सम्मेलन में पटना के प्रख्यात महिला नेत्री मंजू डूंगडूंग ,शिवकुमार ठाकुर, रिंकी कुमारी, नरेश मांझी सहित कई बुद्धिजीवी और संगठन के लोग मौजूद थे.
आलोक कुमार


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
welcome your comment on https://chingariprimenews.blogspot.com/