शनिवार, 14 जून 2025

विभिन्न चरणों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में


पटना .इंडिया गठबंधन में गठबंधन स्तर पर और पार्टी स्तर पर लगातार पहलकमियां हो रही हैं. राजद,कांग्रेस के साथ साथ भाकपा माले जमीनी स्तर पर और राज्य स्तर पर पहलकदमियों में है. बिहार में पदयात्राओं का रिकॉर्ड्स भाकपा माले ने बनाया है. माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और अन्य नेताओं की अगुवाई में तकरीबन 1500 किलोमीटर की पदयात्राएं विभिन्न चरणों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में हुई है.

    दलितों, बच्चियों-महिलाओं के ऊपर हमले और अल्पसंख्यकों पर हमले की हर घटना पर माले ने प्रतिवाद किया है. राज्य में आशा,विद्यालय रसोइया,आंगनबाड़ी और सफाई कर्मियों के साथ साथ जीविका दीदियों के आंदोलन को ऐक्टू/कर्मचारी संगठनों ने नया तेवर दिया. माइक्रो फाइनेंस के कर्ज तले तबाह महिलाओं को कर्ज से मुक्ति दिलाने की बड़ी मुहिम महिला संगठन
पचूं के जरिए चलाई जा रही है. दलित गरीबों को उजाड़ने के खिलाफ जोरदार प्रतिरोध खड़ा किया है. बुलडोजर राज के खिलाफ माले का संगठन खेग्रामस के विधानसभा के समक्ष बार बार प्रदर्शन किया है और हर जिले में मोर्चा लिया है. दलित गरीबों के वास आवास का प्रश्न माले आंदोलन का मुख्य प्रश्न है. हजारों दलित वंचितों को उजाड़ने से बचाया गया है. बसेरा 2 के तहत हजारों दलित परिवारों को पर्चे दिलाए गए हैं.

          सामंती दबंगता और हर तरह की दबंगता के खिलाफ लड़कर माले ने दलित-गरीबों के बीच मजबूत आधार बनाया है. यही कारण है कि भाकपा माले का चुनावी प्रदर्शन महागठबंधन के भीतर सबसे अव्वल है. विधानसभा में सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट. हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में शाहाबाद और मगध क्षेत्र में ही महागठबंधन का सबसे उम्दा प्रदर्शन रहा है जो मोदी जी को परेशान किए हुए हैं. इसलिए वे चुनाव पूर्व सभाएं आयोजित कर रहे हैं. इस काम में उन्होंने अपने हनुमान को भी लगा दिया है. इंडिया गठबंधन का बेहतर प्रदर्शन और गठबंधन की सरकार बनाने के लिए जरूरी है कि भाकपा माले को उचित हिस्सेदारी मिले और वह भी सभी क्षेत्रों में. दरभंगा,मधुबनी और सुपौल में माले को पिछली बार कोई सीट नहीं मिली थी,यह भी एक कारण है कि इन जिलों में महागठबंधन का काफी कमजोर प्रदर्शन रहा. इस कमी को दुरुस्त किया जाना चाहिए.

कुंठाओं की राजनीति में कोई जगह नहीं होती,जमीनी यथार्थ पर खड़ा होकर ही चीजें तय होती हैं. महागठबंधन में आपसी तालमेल का पहलू ठीक है. सीट शेयरिंग का मामला भी हल हो जाएगा. वंचितों का सामाजिक संतुलन को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे. 15 हजार और उससे ज्यादा जीत हार के आधार पर और पुराने प्रदर्शन को निश्चय ही आधार बनाना होगा.


आलोक कुमार

शुक्रवार, 13 जून 2025

बिहार के युवा पलायन को हैं मजबूर, नीतीश भाजपा शासन में नौकरियों की किल्लत: राजेश राम

 


’बढ़ती बेरोजगारी और बढ़ता अपराध के खिलाफ कांग्रेस का राज्यव्यापी रोजगार केन्द्र पर तालाबंदी

’बिहार के युवा पलायन को हैं मजबूर, नीतीश भाजपा शासन में नौकरियों की किल्लत: राजेश राम

’नीतीश भाजपा ने बिहार को मजदूरी के लिए किया मजबूर, रोजगार नहीं दे सकते तो सत्ता छोड़ दो : दीपेंद्र हुड्डा

’बिहार के युवाओं को नौकरी के लिए दूसरे राज्यों में भटकना पड़ता है : उदय भानु चिब


पटना.बिहार में कांग्रेस की राज्यव्यापी नौकरी दो या सत्ता छोड़ो प्रदर्शन के तहत पटना में इनकम टैक्स गोलंबर पर स्थित रोजगार एवं नियोजन भवन पर हजारों युवाओं, छात्रों, संविदा कर्मियों, और नागरिकों ने एकजुट होकर बढ़ती बेरोजगारी और बढ़ते अपराध के खिलाफ ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन किया. बिहार की आम जनता ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार को सख्त चेतावनी दी और चेताया कि बिहार के युवाओं को नौकरी दो या सत्ता छोड़ो! यह आंदोलन बिहार के युवाओं, छात्रों और संविदा कर्मियों के भविष्य को बचाने और उनका हक दिलाने का इंकलाबी अभियान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, सांसद दीपेंद्र हुड्डा, युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में व्यापक प्रदर्शन के रूप में उभरा. विरोध प्रदर्शन में आये हजारों बेरोजगार युवाओं ने सरकार के खिलाफ जमकर आक्रोश जताते हुए रोजगार केंद्र पर ताला जड़ दिया और नारेबाजी की.

        इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने कहा, पिछले 20 साल में टायर्ड मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे बड़ी उपलब्धि है 5 करोड़ युवाओं का बेरोजगार होना. आज बिहार में ट्रबल इंजन सरकार के रहते बेरोजगारी का यह आलम है कि 45 विभागों में 5 लाख से अधिक सरकारी पद खाली पड़े हैं. BPSC, SSC, NEET और UGC-NET  जैसी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक ने बिहार के युवाओं की मेहनत को मजाक बना दिया है. ऐसा लगता है बिहार सरकार ने परीक्षा और प्रबंधन की सुपारी पेपरलीक माफियाओं को दे दी है, इसीलिए पेपरलीक होने के बाद इन पर कोई कारवाई नहीं की जाती है.अब शिक्षा माफियाओं का बोलबाला और सरकार की चुप्पी अस्वीकार्य है.

    सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि बिहार में 7 लाख से अधिक संविदा कर्मी सालों से खट रहे हैं, और सरकार की ऐसी नियोजित वाली  व्यवस्था है जिसमें न स्थायी नौकरी है और न उचित वेतन. बिहार को पलायन के दंश को झेलने को मजबूर कर दिया गया है और इसे नीतीश मोदी की सरकार में अपने पूंजीपति मित्रों के लिए मजदूरी को मजबूर बना दिया गया है.

         युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि जो छात्र आज मजबूरन बिहार से बाहर रहते हैं, उन्होंने भी प्रदर्शन में शामिल होकर बताया कि मेरी डिग्री बिहार की है लेकिन नौकरी नहीं मिलने से हम दूसरे राज्यों में नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं,  जिससे प्रतिभा और हुनर का मजाक बन रहा है.कई छात्रों ने बताया कि उच्च शिक्षा के पढाई के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से लाखों का लोन लिया, लेकिन नौकरी नहीं मिल पाने के वजह से बिहार के बाहर जाकर अपने डिग्री के हिसाब से नीचे स्तर का काम अपनी जिन्दगी गुजर-बसर करने के लिए कर रहे हैं. ये भी पलायन का मुख्य कारण है. कुछ लोग लोन चुकाने के लिए अपनी जमीन को भी बेच दे रहे हैं. कतने स्टूडेंट तो लोन न चुकाने के क्रम में आत्महत्या करने को विवश हो गए.विरोध प्रदर्शन में आये  संविदा शिक्षक, होमगार्ड और आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर हमारा काम समान है तो समान वेतन भी मिलना चाहिए.

     बिहार में विधानमंडल दल के नेता डॉ शकील अहमद खान ने कहा कि बिहार में बढ़ती बेरोजगारी के चलते आज अपराध 300ः बढ़ गया है, सिर्फ 4 महीने में बिहार में 115 हत्याएं होना बताता है कि बिहार के ट्रबल इंजन की सरकार के मुखिया नीतीश कुमार नाकारा, निकम्मे और गैर-जिम्मेदार हैं. बिहार में बढ़ते अपराध, बलात्कार, हत्या और लूटपाट ने आम जनता का जीना दुश्वार कर दिया है. बेरोजगारी और अपराध में गहरी साठ-गांठ है, जिसे ट्रबल इंजन की सरकार की नाकामियों ने और बढ़ा दिया है. 

   विरोध प्रदर्शन में आए युवाओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए ये 5 प्रमुख मांगें रखीं-  

1. 5 लाख से अधिक खाली सरकारी पदों पर तुरंत बहाली करो.  

2. पेपर लीक और शिक्षा माफियाओं को तुरंत सजा दो. 

3. 7 लाख से अधिक संविदा कर्मियों को पक्की नौकरी और समान वेतन दो. 

4. उद्योग और रोजगार के अवसर तुरंत बढ़ाओ और पलायन रोको.

5. अपराध पर लगाम लगाओ, बिहार को सुरक्षित बनाओ.

      बताते चले कि आज बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में रोजगार केंद्र पर हजारों युवाओं ने भाग लिया और सरकार को चेतावनी देते हुए कहा ‘नौकरी दो या सत्ता छोड़ो’. सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ यह जनआंदोलन बिहार के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा और नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी तथा कांग्रेस पार्टी ने संकल्प लिया है कि युवाओं के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को जोरदार तरीके से घर-घर पहुंचाएंगे और उन्हें नौकरी में भागीदारी दिला के रहेंगे.

    इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता डा0 शकील अहमद खान, सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा,युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब, विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता डा0 मदन मोहन झा, कांग्रेस के सह प्रभारी देवेन्द्र यादव,  अभय दूबे, प्रेमचन्द्र मिश्रा, अवधेश कुमार सिंह, डा0 समीर कुमार सिंह, छत्रपति यादव मोती लाल शर्मा, राजेश राठौड़, अनिल कुमार,अशोक गगन,, बंटी चौधरी , राज कुमार शर्मा, सरवत जहां फातिमा,  शिशिर कौंडिल्य, ज्ञान रंजन, युवा कांग्रेस के प्रभारी मो0 शाहिद राज कुमार पासवान, डा0 संजय यादव, सौरभ सिन्हा, राजेश सिन्हा, राज कुमार राजन,गुंजन पटेल, कुमार आशीष, चन्द्र प्रकाश सिंह, शशि रंजन, कमलदेव नारायण शुक्ला,नागेन्द्र कुमार विकल उदय शंकर पटेल, निधि पाण्डेय,  सत्येन्द्र कुमार सिह, सुधा मिश्रा, रौशन कुमार सिंह,  वसी अख्तर, संतोष श्रीवास्तव, ज्योति गुप्ता, सहाब मल्लिक, मो0 शाहनवाज, राज छविराज, डा0 मनीष सिंह, दुर्गा प्रसाद, वैद्यनाथ शर्मा,  आदित्य पासवान, शरीफ रंगरेज, मनोज मेहता,, मंटू शर्मा, मनोज शर्मा, गुरूदयाल सिंह, संजय पाण्डेय, राजेन्द्र चौधरी , सुनील कुमार सिंह, कुन्दन गुप्ता, केसर खान, विनोद अवस्थी, शम्मी कपूर, डा0 विजय कुमार विद्यार्थी, हीरा सिंह वग्गा, विशाल झा, अश्विनी कुमार, विश्वनाथ बैठा, सिद्धार्थ क्षत्रिय, रवि गोल्डन, रणधीर यादव, परवेज अहमद, राहुल पासवान,युवा, सम्राट केसरी जैना, कुमार रोहित, मुदस्सीर शम्स, मुकुल यादव, विकास कुमार झा, अमित सिकन्दर, पूनम यादव, नीरज झा, राजन्दन कुमार, यशवन्त कुमार चमन, रीचा सिंह, दौलत इमाम, दीपक पटेल,अचला सिंह सहित हजारों की संख्या में कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद थे.   


आलोक कुमार

बुधवार, 11 जून 2025

’बदलो सरकार-बदलो बिहार’ यात्रा

 


* 18 से 27 जून तक राज्य के चार इलाकों में निकलेगी ’बदलो सरकार-बदलो बिहार’ यात्रा

* बिहार में सरकार नाम की कोई चीज नहीं बची, अपराध और अराजकता के चंगुल में फंसा राज्य

* भाजपा-एनडीए के शासन में भारत हर मोर्चे पर हुआ कमजोर

* भाकपा (माले) 40 से 45 सीटों पर चुनावी तैयारी में

पटना.भाकपा (माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कतहा कि बिहार में इस समय सरकार नाम की कोई चीज नहीं बची है. राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, और जनता अपराध व अराजकता के चंगुल में फंसी हुई है.

      उन्होंने कहा कि विकास और सुशासन के नाम पर बिहार में सामंती उत्पीड़न को बढ़ावा मिला है.महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं आम हो गई हैं.राज्य की जनता अब इस दमनकारी शासन से मुक्ति चाहती है.

      माले महासचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम पूरी तरह विफल रहा. विभिन्न जिलों में जीविका समूह की महिलाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोइया, आशा वर्कर और माइक्रो फाइनेंस के कर्ज में डूबी महिलाओं ने विरोध-प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई.

          उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार ने 32 देशों में 7 डेलीगेशन भेजे, लेकिन भारत का अंतरराष्ट्रीय अलगाव दूर नहीं हो पाया.उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की ताकि पहलगाम आतंकी घटना और उसके बाद की स्थिति पर चर्चा हो सके.

            उन्होंने कहा कि मोदी–3 के एक साल में, बहुमत न होते हुए भी संविधान पर रोज हमले हो रहे हैं.भाजपा और एनडीए की सरकार ने देश को हर मोर्चे पर कमजोर किया है, विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में.उन्होंने हाल ही में एक भारतीय युवा के विदेश में प्रताड़ित किए जाने का हवाला देते हुए इसे कूटनीतिक विफलता बताया.

          उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में चलाया गया ऑपरेशन कगार पूरी तरह राज्य प्रायोजित हिंसा है.इस मुद्दे पर पांच वामपंथी दलों ने मिलकर 9 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है, जिसमें इस हिंसा पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है.

            भाकपा(माले) 18 से 27 जून 2025 तक पूरे बिहार में ‘बदलो सरकार - बदलो बिहार’ यात्रा निकालेगी.यह यात्रा राज्य के चार मुख्य इलाकों में होगी - शाहाबाद क्षेत्र, मगध क्षेत्र, सारण-चंपारण क्षेत्र और मुजफ्फरपुर से दरभंगा तक का क्षेत्र.

          मगध क्षेत्र में 11 जून को गया के बाराचट्टी, 12 जून को वारसलीगंज, 13 जून को राजगीर और 14 जून को बिहारशरीफ में जनसंवाद का आयोजन किया जाएगा.

       माले महासचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी 40 से 45 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में महागठबंधन के एजेंडे और सीटों के तालमेल को लेकर भी बातचीत होगी.

         संवाददाता सम्मेलन में उनके अलावा पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा, विधायक गोपाल रविदास व संदीप सौरभ, एमएलसी शशि यादव, वरिष्ठ पार्टी नेता केडी यादव और उमेश सिंह भी उपस्थित थे.


आलोक कुमार

पल्ली पुरोहित और प्रिंसिपल की जमकर पिटाई

 


* पल्ली पुरोहित और प्रिंसिपल की जमकर पिटाई 


 * नकाबपोश डकैतों को शीघ्र गिरफ्तारी करने की मांग को लेकर सड़क जाम किया


समसेरा .दक्षिण झारखंड स्थित सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड में समसेरा स्थित संत तेरेसा चर्च में देर रात करीब 1:30 बजे नकाबपोश डकैतों ने बड़ी लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया है. चार से पांच की संख्या में आए नकाबपोश डकैतों ने सबसे पहले चर्च परिसर में बने पुरोहितों के आवास में घुसकर हथियारों के बल पर लूटने की कोशिश की.

    इस कदम का विरोध करने पर नकाबपोश डकैतों ने तीन पुरोहितों, फादर इग्नासियुस टोप्पो, फादर अगुस्टीन डुंगडुंग और फादर रोशन सोरेंग को लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा और उन्हें एक कमरे में बांधकर बंद कर दिया. घायल पुरोहितों को पहले बोलबा अस्पताल और फिर सिमडेगा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां तीनों की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है.

      पुरोहितों के अनुसार, नकाबपोश डकैतों ने चर्च परिसर में बने आवास में घुस आए और पिस्तौल तथा धारदार हथियार दिखाकर तिजोरी की चाबी मांगने लगे.चाबी देने में आनाकानी करने पर उन्होंने पुरोहितों की पिटाई की और सभी को बांधकर एक कमरे में बंद कर दिया.इसके बाद, तिजोरी को तोड़कर लगभग आठ लाख रुपये लूट लिए.

  इस बात की जानकारी मिलते ही कोलेबिरा विधायक विक्सल कोनगाड़ी अपने प्रतिनिधि शमी आलम, रावेल लकड़ा व अन्य कार्यकर्ताओं के साथ सिमडेगा जिले के बोलबा पहुंचे. वे समसेरा पल्ली गये और पल्ली में डकैती व धर्मगुरुओं पर हुए जानलेवा हमले के बारे में जानकारी ली. वहीं, बोलबा सीएचसी में भर्ती घायल धर्मगुरुओं और विद्यालय के प्रिंसिपल से मुलाकात कर हालचाल जाना. डॉक्टरों को बेहतर इलाज का निर्देश भी दिया.

    घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए विधायक ने कहा कि क्षेत्र में इस तरह की यह तीसरी घटना है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिले के एसपी से बात हुई है. एसपी ने एसआईटी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है. विधायक ने कहा कि धर्मगुरुओं और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना बर्दास्त नहीं किया जाएगा. मौके पर प्रिंस कुमार, विपिन पंकज मिंज, संजय कुजूर, सुनील टोप्पो, रोशन बरला आदि मौजूद थे.


आलोक कुमार)


मंगलवार, 10 जून 2025

कुशासन काल के ग्यारह साल में देश हुआ बदहाल : राजेश राम


 कुशासन काल के ग्यारह साल में देश हुआ बदहाल : राजेश राम

पटना . पूत के पाँव पालने में दिख जाते हैं, मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता में कदम रखते ही इस बात का आभास करा दिया था कि यह सरकार किसान, दलित, मजदूर, महिला और गरीब विरोधी है. ये बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने कही.

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि “अच्छे दिन आने वाले हैं, हम मोदी जी को लाने वाले हैं”.. यह गाना शायद नीरव मोदी, ललित मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या जैसे बैंकों के लुटेरों और मोदी जी के दोस्तों अडानी-अंबानी ने लिखा था, क्योंकि यह सिर्फ इन्हीं लोगों के लिए ही चरितार्थ हुआ. बाकी सभी देशवासी आज एक स्वर में फिल्म “आखिरी दांव” का गाना गा रहे हैं-

“बेदर्दी, धोखेबाज, झूठा... झूठा!

झूठे से प्यार किया, वादों पर ऐतबार किया.

हम ही नादान थे जो इतना इंतजार किया.

झूठे से प्यार किया, वादों पर ऐतबार किया.”

   प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने बताया कि मोदी सरकार के ग्यारह सालों में देश को किस तरह बदहाल किया गया, उन्होंने बताते हुए कहा कि 

*  सत्ता में आते ही किसानों की जमीन हड़पने के लिए एक के बाद एक तीन अध्यादेश लाए गए.

*  फिर सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर किसानों की समर्थन मूल्य की माँग को ठुकराते हुए स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले को लागू करने से इंकार कर दिया गया.

*  नोटबंदी जैसा काला कानून लागू कर देश की एमएसएमई और अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया गया.

*  गब्बर सिंह टैक्स (जीएसटी) लागू कर अर्थव्यवस्था को और चैपट कर दिया गया.

* एक के बाद एक बैंक के लुटेरे विदेश भागते रहे, और सरकार मूकदर्शक बनी रही.

*  कोविड के दौरान बिना योजना के लॉकडाउन लागू कर मजदूरों को दरबदर की ठोकरें खाने पर मजबूर किया गया.

*  कृषि के तीन क्रूर काले कानून लाए गए, जिनका देशभर में तीव्र विरोध हुआ.

*  लखीमपुर खीरी में किसानों को जीप से रौंदकर बेरहमी से मार डाला गया.

*  दिल्ली में धरना दे रही पहलवान बेटियों को घसीट-घसीट कर पीटा गया.

*  पठानकोट, उड़ी, पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकी हमलों से देश को झुलसाया गया.

*  मणिपुर में हिंसा का तांडव आज तक जारी है और केंद्र सरकार मूकदर्शक बनी हुई है.

*  चीन के भारत में अतिक्रमण को लेकर सरकार ने क्लीन चिट दे दी.

    बिहार को चुनावी वादों में विकास के पथ पर अग्रसर करने की बात कहने वाले प्रधानमंत्री ने भर भरकर यहां से सांसद जिताएं लेकिन एक उद्योग तक नहीं स्थापित कर सकें. बीते 11 साल महँगाई और बेरोजगारी की भेंट चढ़ गए, और हमारे मोदी साहेब बड़बोले भाषण और झूठ की भरमार गढ़ते रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार को लगातार छलने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कर्मों से देश के सबसे निकम्मे और कामचोर प्रधानमंत्री बन चुके हैं.



आलोक कुमार

सोमवार, 9 जून 2025

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता किस प्रकार से मुसलमानों के उत्पाद का बहिष्कार करवाया


नवादा .राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पुत्र मणिलाल गांधी हैं. मणिलाल गांधी के एक पुत्र अरुण मणिलाल गांधी था. अरुण मणिलाल गांधी के एक ही बेटा था, जिसका नाम तुषार अरुण  गांधी.महात्मा गांधी के परपोते, मणिलाल गांधी के पोते और अरुण मणिलाल गांधी के पुत्र तुषार अरुण गांधी हैं. उनका पटना और नवादा में कार्यक्रम था.दोनों कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता श्री तुषार गांधी थे.

               संपूर्ण क्रान्ति दिवस और पर्यावरण संरक्षण दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि गांधी जी के परपोते तुषार गाँधी के समस्त छात्र और छात्राओं ने गांधी जी के प्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजा राम और वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीड़ पराई जाने रे‘ से सत्र की शुरुआत  हुई और छात्र-युवा संघर्ष वाहिनी का संकल्प गीत नया जमाना नयी जवानी देंगे अपनी कुर्बानी कहने वाले दीवानो की बनी आज संघर्ष वाहिनी को सुशील ने गाया.

               इसी सत्र में कारू जी ने भी युग की जड़ता के खिलाफ एक इंकलाब ,गीत  गाए. सत्र का संचालन उदय भागलपुर और ज्ञानेन्द्र महाराष्ट्र ने किया. मंथन संपूर्ण क्रान्ति और संघर्ष वाहिनी के पचास साल पर  पारित मसौदा को पढ़कर सुनाया. तुषार गांधी ने देश की राजनीतिक सामाजिक और सांस्कृतिक हालात को चिंताजनक बताते हुआ  कहा कि सत्ता के द्वारा जो नफरत फैलाया जा रहा है वह अंग्रेजी हुकूमत से भी भयावह है.

       तुषार गांधी ने हाल ही में महाराष्ट्र के एक गांव में गए थे, उसका बयान करते हुए बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता किस प्रकार से मुसलमानों के उत्पाद का बहिष्कार करवाया है ,जिसके कारण उनके लिए जीवन और मरण का संकट आ गया है.गंगा जमुनी संस्कृति बर्बाद कर नफरत का बीज बोया गया.साजिश पूर्वक सत्ता के द्वारा नस्लभेद कर आपस मे तनाव का माहौल बनाया जा रहा है. इसका सड़क पर उसी प्रकार निकलकर विरोध करना पड़ेगा जिस प्रकार 1974 में बिहार से आंदोलन शुरू हुआ और केंद्र की सत्ता हिल गयी थी. जिस गांधी के समय जेल से कैदी भर गये और जेल के वाह्रर घेरा बनाकर कैंपो में रखना पड़ा था और जेल घेरा टुट गया था उसी ढंग की स्थिती  पैदा करना होगा और घर से निकलकर सड़कों पर आना होगा.  

                 प्रश्न प्रति प्रश्न में बनारस के साथी सर्व सेवा संघ की जमीन सरकार द्वारा हड़पने और 11अक्टुबर से दिल्ली मार्च का जिक्र करते हुए सभी को यात्रा  भाग लेने के लिए आमंत्रित किया.  

 पंकज जी  चुनाव में साम्प्रदायिक शक्ति को हराने और नफरत के खिलाफ प्रेम और शांति का संदेश देने के लिए बिहार में यात्रा की शुरुआत चंपारण से करने का आमंत्रण दिया. कारू ने भी बोधगया आने और अपना पूरा जीवन राष्ट्र से नफरत हटाने के लिए  समर्पित करने का संकल्प लिया.

                  इसके अलावे कई महत्वपूर्ण साथियों ने सवाल और महत्वपूर्ण सुझाव दिया..अंतिम दिन  चुनाव में हस्तक्षेप करने के लिए एक कमिटी बनाई गयी जिसके संयोजक प्रोफेसर योगेन्द्र भागलपुर को बनाया गया जिसका कैंप कार्यालय गांधी निधी पटना होगा.

     एक संचालन समिति भी बनाई गयी जिसका संयोजक ज्ञानेन्द्र महाराष्ट्र को बनाया गया.अगला वाहिनी मित्र मिलन  समारोह इलाहाबाद में होगा,जिसके आयोजन समिति  के संयोजन का जिम्मा सौंपा गया. वाहिनी मित्र  संवाद  समिति का संयोजक कारू बोधगया को चुना गया.इसके अलावे महत्वपूर्ण सुझाव आए हैं जिस पर संवाद स्थापित करने और निर्णय लेने के लिए  ऑनलाइन बैठक करने की सहमति बनी है.


आलोक कुमार

रविवार, 8 जून 2025

पोप चुनाव का तीस दिन पूरा

 


वेटिकन सिटी . आज 8 जून है. 8 मई को पोप लियो पोप चुना गया था.पोप चुनाव का तीस दिन पूरा हो गया. गुरुवार 8 मई को कार्डिनल रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट को 1.4 बिलियन रोमन कैथोलिक का पोप चुना गया था. उन्होंने अपने लिए पोप लियो 14 नाम चुना है. ये पहली बार है कि यूएसए के किसी नागरिक को पोप बनाया गया है.पोप लियो 14 से पहले रोमन कैथोलिक चर्च के लीडर पोप फ्रांसिस थे जिनका पिछले महीने 88 साल की उम्र में लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया.

     रोमन कैथोलिक चर्च के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण आया जब अमेरिकी कार्डिनल रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट को 8 मई 2025 को चर्च का 267 वां पोप चुना गया. उन्होंने पोप लियो चौदहवें नाम धारण किया और इस प्रकार वे संयुक्त राज्य अमेरिका से चुने जाने वाले पहले पोप बन गए. उन्होंने पोप फ्रांसिस का स्थान लिया, जिनका निधन 21 अप्रैल 2025 को हुआ था.इस घोषणा के साथ ही जब सेंट पीटर्स स्क्वायर में सफेद धुआं उठा और नई पोप की पहली झलक वेटिकन की बालकनी से मिली, तो हजारों की भीड़ उल्लास और आशा से झूम उठी.

    एक नए पोप का चुनाव विश्व स्तर पर धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण घटना होता है.इस बार दुनिया ने देखा जब कार्डिनल रॉबर्ट प्रीवोस्ट, जो पोप फ्रांसिस के करीबी और उदारवादी माने जाते हैं, को ऐसे समय में चर्च का नेतृत्व करने के लिए चुना गया जब भीतर मतभेद और वैश्विक अनिश्चितता दोनों ही सामने हैं. 8 मई 2025 को उनका चुनाव पोप फ्रांसिस के 21 अप्रैल 2025 को निधन के बाद हुआ, जिससे विश्वभर के 1.4 अरब कैथोलिकों के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत हुई.

नाम-पोप लियो चौदहवें (पूर्व में कार्डिनल रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट,)

चुने जाने की तिथि 8 मई 2025

देश संयुक्त राज्य अमेरिका

पोप क्रमांक 267वें पोप

उत्तराधिकारी पोप फ्रांसिस (निधन 21 अप्रैल 2025)

पृष्ठभूमि और जीवन यात्रा

अमेरिका में जन्मे प्रीवोस्ट, अपने शांत और सौम्य स्वभाव के लिए जाने जाते हैं.

उन्होंने पेरू में मिशनरी कार्य किया और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर पोप फ्रांसिस की सोच के करीब रहे।

पोप बनने से पहले वह रोमन कूरिया (वेटिकन की प्रशासनिक इकाई) के सदस्य और बिशप रह चुके थे।

पोप चुनाव (कॉन्क्लेव)

स्थानः सिस्टिन चैपल, वेटिकन सिटी

आरंभ 7 मई 2025

भागीदारी 133 कार्डिनल मतदाता, 70 देशों से थे. अब तक का सबसे अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव

परिणामः दो दिनों में चयन, पूर्व पोप्स जैसे फ्रांसिस (2013 5 मत) और बेनेडिक्ट सोलहवें (2005 4 मत) की तरह

सफेद धुआँ और घंटियों की ध्वनि ने नए पोप की घोषणा का संकेत दिया.

ऐतिहासिक प्रथम अमेरिका से पहला पोप.


आलोक कुमार

शनिवार, 7 जून 2025

‘डॉल्फिन मैन ऑफ इंडिया‘

 


पटना.विश्व पर्यावरण दिवस पर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण  ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 05 जून 2025 को “इनसे मिलिए” कार्यक्रम का अत्यंत प्रभावशाली आयोजन किया.यह विशेष आयोजन पटना स्थित सरदार पटेल भवन के सभागार में अपराह्न 3ः30 बजे से प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राधिकरण के माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत ने की. इस अवसर पर प्राधिकरण के माननीय सदस्यगण श्री पी.एन. राय, श्री कौशल किशोर मिश्र, श्री नरेंद्र कुमार सिंह एवं श्री प्रकाश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही.

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में देश के प्रख्यात जीवविज्ञानी एवं ‘डॉल्फिन मैन ऑफ इंडिया‘ के नाम से सुविख्यात पद्मश्री प्रो. (डॉ.) रवीन्द्र कुमार सिन्हा ने सहभागिता की। डॉ. सिन्हा, नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी और श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, जम्मू के पूर्व कुलपति भी रह चुके हैं.

     अपने प्रेरणास्पद संबोधन में डॉ. सिन्हा ने पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ आपदा प्रबंधन के परिप्रेक्ष्य में नदियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बीच गहरा और सीधा संबंध है, जिसे समझना और नीतियों में शामिल करना आवश्यक है. उन्होंने बताया कि गंगा का पारिस्थितिकी तंत्र जैविक एवं अजैविक घटकों से बना एक अत्यंत संवेदनशील संतुलन है, जिसमें बायोजियोकेमिकल साइकिल और ऊर्जा प्रवाह की महत्वपूर्ण भूमिका है.

डॉ. सिन्हा ने अपने 40 वर्षों के गंगा-अनुसंधान, विशेषकर गंगा डॉल्फिन संरक्षण, नदी पारिस्थितिकी तंत्र और जन-जागरूकता अभियान से जुड़े अनुभवों को साझा किया. 

            .उन्होंने बताया कि किस प्रकार संसाधनों की कमी के बावजूद, पटना विश्वविद्यालय में प्रारंभ किए गए शोध कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली.

डॉ. सिन्हा ने विकास के अंधाधुंध मॉडल पर भी गहरी चिंता जताई, विशेषकर नदियों पर अतिक्रमण, बालू खनन, और पर्यावरणीय सलाह के बिना किए जा रहे निर्माण कार्यों के दुष्प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान को विकास योजनाओं में उचित स्थान दिया जाता, तो न केवल पारिस्थितिकीय संकट टलते बल्कि जनकल्याणकारी विकास भी संभव होता.

              उन्होंने ‘गंगा एक्शन प्लान’ और अन्य परियोजनाओं के उदाहरण देते हुए यह स्पष्ट किया कि नीति निर्माण में केवल पुस्तकीय ज्ञान पर निर्भर रहना नुकसानदायक होता है. स्थानीय साक्ष्य, भूगोल और जन-भागीदारी को केंद्र में रखकर ही स्थायी समाधान निकाले जा सकते हैं.

कार्यक्रम में प्राधिकरण के सचिव श्री मो. वारिस खान, सभी अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे. स्वागत भाषण मो. मोइएजुद्दीन द्वारा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजित द्वारा प्रस्तुत किया गया.



आलोक कुमार

शुक्रवार, 6 जून 2025

जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई बनकर रहते हैं भाई-भाई

 जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई बनकर रहते हैं भाई-भाई 




पटना.बिहार में 2025 में बिहार विधानसभा का चुनाव है. महागठबंधन और एनडीए के बीच मुकाबला है.बिहार में डबल इंजन की सरकार है.बिहार में नीतीश कुमार और केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार है.बिहार में नीतीश कुमार ने आयोग और बोर्ड में मनपसंद लोगों को मनोनीत करना शुरू कर दिया है.वहीं केंद्र सरकार पैकेज देने की घोषणा करने लगे हैं. मगर इससे जनता खुश होने के बदले नाराज होने लगे हैं.यहां पर हिंदू,मुस्लिम,सिख,ईसाई आपस में हैं भाई-भाई और  ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ नहीं चल रहा है.

    अभी नीतीश सरकार ने बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग का पुनर्गठन किया गया है.विभागीय अधिसूचना के मुताबिक गुलाम रसूल बलियावी (पटना) को आयोग का अध्यक्ष,

लखबिंदर सिंह उपाध्यक्ष ,मौलाना उमर नूरानी उपाध्यक्ष, मुकेश कुमार जैन सदस्य, श्रीमती अफरोजा खातून सदस्य, अशरफ अली अंसारी सदस्य, मो० शमशाद आलम उर्फ मो० शमशाद सांई सदस्य, श्री तुफैल अहमद खान (कादरी) सदस्य, श्री शिशिर कुमार दास,सदस्य, श्री राजेश कुमार जैन सदस्य और श्री अजफर शमशी सदस्य मनोनीत किये गये है.इस बार भी किसी ईसाई समुदाय को आयोग में मनोनीत नहीं किया  गया है.इसको लेकर ईसाई समुदाय में खासा नाराजगी है.

    जानकार लोगों का कहना है कि अंतिम बार ईसाई प्रतिनिधि के रूप में वर्ष 2015 में एम्ब्रोस पैट्रिक को उपाध्यक्ष बनाया गया.उक्त अधिसूचनानुसार संख्या 1069, दिनांक 05.08.2015 द्वारा आयोग का अगले कार्यकाल के लिए गठन किया गया.मोहम्मद सलाम अध्यक्ष बनाये गये तथा एम्ब्रोस पैट्रिक एवं डॉक्टर कप्तान दिलीप कुमार सिन्हा उपाध्यक्ष मनोनीत हुए.सदस्य के रूप में कुलवंत सिंह सलूजा, मोहम्मद अब्दुल्लाह,अहमद अली तमन्ने मनोनित किए गये. सरकार के निर्देश पर मोहम्मद सलाम अध्यक्ष तथा एम्ब्रोस पैट्रिक एंव डॉक्टर कैप्टन दिलीप कुमार सिन्हा उपाध्यक्ष तथा तीनों सदस्यों ने दिनांक 17-05-2017 को त्यागपत्र दे दिया.इसके बाद से आयोग के पुनर्गठन में ईसाई समुदाय के किसी शख्स को आयोग में प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं दिया गया.

      बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अल्पसंख्यक विभाग के उपाध्यक्ष सिसिल साल, भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के उपाध्यक्ष राजन क्लेमेंट साह,जनसुराज के संस्थापक सदस्य गोडेन अंतोनी ठाकुर,अल्पसंख्यक विभाग की सचिव इंग्रिड डिसूजा आदि श्रेष्ठ ईसाई नेता हैं,जो देशहित और पार्टीहित में शानदार सेवा कर रहे हैं. मालूम हो कि बिहार सरकार के द्वारा पंजीकृत क्रिश्चियन वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव ए.ए.ओस्ता को 1993-94 में पहली बार राज्य अल्पसंख्यक आयोग में सदस्य के रूप में मनोनीत किए गए थे.इसके बाद आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में पहली बार फादर बेनी एक्का को मनोनीत किया गया.वे 21-08-1998 से 20-08-2001 तक उपाध्यक्ष पद पर रहे.इसी तरह फादर पीटर अरोकियास्वामी 05-08- 2006 से 04-08-2009 तक रहे.पद्मश्री सुधा वर्गीस 07-08-2012 से 06-06-2015 तक रहे.एम्ब्रोस पैट्रिक 07-08-2015 से 17-06-2016 तक रहे.केवल आठ माह ही उपाध्यक्ष पद पर रहे.उसके बाद सरकार ने ईसाई समुदाय को हाशिए पर धकेल दिया है.


आलोक कुमार

बुधवार, 4 जून 2025

पर्यावरण की दृष्टि से प्लास्टिक मुक्त गांव बनाने का काम

 मानव जीवन विकास समिति कटनी में है. जो एक एनजीओ है.इस समिति का कार्यक्षेत्र मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड, बघेलखण्ड और महाकौशल क्षेत्र है.यहां के कई गांवों के हजारो किसानों के साथ मिलकर खेती की लागत कम हो.जिस पर वैज्ञानिक सोच के साथ काम किया जाता है.वह चुनौतीपूर्ण क्षेत्र प्राकृतिक खेती,  जैविक खेती, वृक्षारोपण, पानी बचाओ जैसे पर्यावरणीय संरक्षण के क्षेत्र है.इस पर काफी हद तक सफल होने का दावा मानव जीवन विकास समिति के सचिव निर्भय सिंह ने अपने काम व अनुभव के आधार पर यह लेख साझा किये हैं.

           पर्यावरण और मानव का संबंध अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमारा अस्तित्व पर्यावरण पर निर्भर करता है. हमें अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए. पृथ्वी पर जीवन की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए हमें सामूहिक प्रयासों के माध्यम से एक स्वस्थ और टिकाऊ पर्यावरण का निर्माण करना होगा. यह केवल हमारे लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है.

          पर्यावरण पृथ्वी पर जीवन का आधार है. यह हमारे चारों ओर का वह प्राकृतिक और मानव निर्मित ढाँचा है, जो जीवन को संभव बनाता है. हवा, पानी, भूमि, पेड़-पौधे, और जीव-जंतु मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं. इसके साथ ही, मानव की गतिविधियों और निर्माण भी इस पर्यावरण का हिस्सा हैं. पर्यावरण हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है, और इसकी सुरक्षा हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है. आज के युग में पर्यावरणीय समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं, जो मानव जीवन और पृथ्वी के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं. इस निबंध में, पर्यावरण के महत्व, उसके घटकों, समस्याओं और संरक्षण के उपायों पर विस्तार से चर्चा है. पर्यावरण न केवल हमारे अस्तित्व का आधार है, बल्कि यह हमारी समग्र भलाई के लिए भी महत्वपूर्ण है. पर्यावरण हमें स्वच्छ हवा, पीने का पानी, भोजन, और दवाइयां प्रदान करता है. यह जैव विविधता को संरक्षित करता है और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखता है. यह भूमि, वायु, और जल के बीच आपसी संबंधों को बनाए रखता है, जिससे जीवन चक्र सुचारू रूप से चलता रहता है.

पर्यावरण का महत्व केवल शारीरिक जरूरतों तक सीमित नहीं है. यह हमारी मानसिक और भावनात्मक स्थिति को भी प्रभावित करता है. हरे-भरे जंगल, स्वच्छ नदियाँ, और शांत वातावरण मानसिक शांति प्रदान करते हैं. यह मानव की रचनात्मकता और कल्पना को बढ़ावा देता है. इसलिए, पर्यावरण को संरक्षित रखना न केवल हमारी जरूरत है, बल्कि यह हमारा दायित्व भी है. इसके अलावा, यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को भी बनाए रखने में मदद करता है, जो समाज की पहचान का हिस्सा हैं.पिछले कुछ दशकों में, मानव की अंधाधुंध गतिविधियों ने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचाया है. औद्योगीकरण, शहरीकरण, और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरणीय समस्याओं का मुख्य कारण हैं.

     * ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन ने धरती के तापमान को बढ़ा दिया है. इसके परिणामस्वरूप ग्लेशियर पिघल रहे हैं, समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, और मौसम में अप्रत्याशित परिवर्तन हो रहे हैं.

     * वन हमारे पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.लेकिन अंधाधुंध वनों की कटाई ने न केवल जलवायु संतुलन को बिगाड़ा है, बल्कि वन्यजीवों का आवास भी नष्ट कर दिया है.

      * जल, वायु, और भूमि का प्रदूषण पर्यावरण के लिए एक गंभीर समस्या है. औद्योगिक कचरे, रासायनिक उर्वरकों, और प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग ने प्राकृतिक संसाधनों को दूषित कर दिया है. मानवीय गतिविधियों के कारण कई प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं.यह पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित करता है और हमारे अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करता है.

वृक्षारोपण और वनों का संरक्षण पेड़ों का संरक्षण और अधिक से अधिक वृक्षारोपण पर्यावरण को संतुलित रखने में मदद करता है. पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जिससे वायु की गुणवत्ता में सुधार होता है. नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, और जल ऊर्जा के नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग पर्यावरणीय क्षति को कम करता है. यह प्रदूषण को भी नियंत्रित करता है. प्रदूषण नियंत्रण वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें. इसके अलावा, औद्योगिक कचरे का सही तरीके से निपटान और रासायनिक उर्वरकों का सीमित उपयोग प्रदूषण को नियंत्रित कर सकते हैं. जल संरक्षण जल हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है. जल की बचत, पुनः उपयोग, और जल पुनर्चक्रण तकनीकों को अपनाना पर्यावरण को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण कदम है. पुनर्चक्रण और कचरे का प्रबंधन प्लास्टिक और अन्य कचरे के पुनर्चक्रण से पर्यावरणीय नुकसान को कम किया जा सकता है. कचरे को सही तरीके से अलग करना और उसका निपटान पर्यावरण संरक्षण में सहायक है. जागरूकता और शिक्षा लोगों को पर्यावरण के महत्व और संरक्षण के उपायों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है. पर्यावरणीय शिक्षा को स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल करना एक अच्छा कदम हो सकता है. इसके साथ ही, युवाओं को यह सिखाना कि वे अपने दैनिक जीवन में कैसे पर्यावरण को संरक्षित कर सकते हैं, एक लंबी अवधि के बदलाव की शुरुआत हो सकती है.

      पर्यावरण और मानव जीवन के बीच सहजीवी संबंध है. पर्यावरण मानव को जीवन के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करता है, जबकि मानव का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण की रक्षा करे. लेकिन दुर्भाग्य से, मानव ने अपनी स्वार्थी गतिविधियों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है.

      मानव और पर्यावरण के बीच का यह संबंध संतुलित होना चाहिए. यदि पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा, तो मानव जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा. इसलिए, यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम पर्यावरण को संरक्षित रखें.

          पर्यावरण से हमें अनगिनत लाभ मिलते हैं. यह हमें स्वच्छ वायु, पीने का पानी, भोजन, और औषधियां प्रदान करता है. यह जैव विविधता को संरक्षित करता है, जो पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित रखने में मदद करती है. इसके अलावा, पर्यावरण हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जरूरतों को भी पूरा करता है.

         पर्यावरण मानव जीवन को प्रभावित करता है और उसे आकार देता है.हमारा स्वास्थ्य, जीवन शैली, और सोचने का तरीका पर्यावरण से प्रभावित होता है. स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण में रहने वाले लोग शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ होते हैं. इसके अलावा, हमारा सामाजिक और सांस्कृतिक विकास भी पर्यावरण की परिस्थितियों पर निर्भर करता है. पर्यावरण हमारी धरती का आधार है और इसे संरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है. आज, जब पर्यावरणीय संकट हमारे सामने खड़ा है, हमें अपने प्रयासों को दोगुना करने की आवश्यकता है. हमें न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि सामूहिक रूप से भी पर्यावरण की रक्षा के लिए काम करना चाहिए.

        पर्यावरण के असंतुलन के कारण कई प्रकार की मानव बीमारियां, पानी का संकट, मौसम का बदलाव उत्पन्न होना अपने आप मे बहुत गंभीर समस्या बनती जा रही है. समिति कटनी जिले के बड़वारा व ढ़ीमरखेड़ा ब्लाॅक और दमोह जिले के तेन्दूखेड़ा व जबेरा ब्लाॅक मे किसानों के साथ पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, बायो पेस्टिसाईड यूनिट, प्राकृतिक खेती, पानी संरक्षण, वृक्षारोपण जैसे कई कामों से अच्छे परिणाम के साथ लगे है.

आइए, पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएँ और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और स्वस्थ पृथ्वी का निर्माण करें. पृथ्वी केवल हमारी नहीं है, यह उन सभी प्रजातियों का घर है, जो हमारे साथ यहां रहती हैं. पर्यावरण को बचाने के लिए हमारा हर छोटा कदम बड़ा बदलाव ला सकता है. पर्यावरण के लिए संकल्पित गांव कटनी जिले के ढ़ीमरखेड़ा ब्लाॅक अन्तर्गत कई ऐसे गांव है जहां पर पर्यावरण संरक्षण के कई आयामों पर काम किया जा रहा है. जिसमे महगवां पंचायत अंतर्गत दैगवां गांव के स्व सहायता समूह (जय दुर्गा भारती समूह) की महिलाओं के द्वारा बायो पेस्टिसाइड यूनिट (बीआरसी) की स्थापना कर जो जैविक एवं प्राकृतिक खेती करने मे काफी सहायक होती हैं. समूह की महिलाएं अपने खेतों मे जैविक दवाइयां डालती ही है इसके अलावा अपने एवं आसपास के गांव में बिक्री भी करते है. जिसमें पिछले साल रवि एवं खरीफ सीजन मे लगभग 80 से 85 हजार की दवाइयों की बिक्री किया है. गांव के ही पंजाब सिंह, धन सिंह, ओंमकार सिंह, हुकुम सिंह कहते है कि हमारे गांव मे जैविक खेती का रकवा पानी संरक्षण के लिए तालाब फसल चक्रीय मे औषधीय फसलों की खेती का रकवा बढ़ा है.

   मानव जीवन विकास समिति के सहयोग से हम अपने गांव मे प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, पानी संरक्षण, वृक्षारोपण आदि कार्य पर्यावरण संरक्षण के काम मे लगे है.इसी प्रकार ढ़ीमरखेड़ा ब्लाॅक के खंदवारा गांव के सुरेष सिंह एवं सोहन सिंह और भलवारा गांव से विजय सिंह भी उक्त कामों के साथ-साथ वर्मी खाद, नाडेप खाद और गौ-पालन के काम मे सक्रिय भूमिका निभा रहे है. इन गांव के अलावा भी मिलेट (श्रीअन्न) की खेती जिसमे कोदो, कुटकी, रागी की खेती का रकवा अच्छा बढ़ा है. ढ़ीमरखेड़ा ब्लाॅक मे ही दादर सिहुड़ी के गुमान सिंह कहते है कि हमारे गांव मे सिंचाई का साधन नही होने के कारण खरीफ की फसल अधिकतर बोई जाती है और मानव जीवन विकास समिति के संपर्क में आने के कारण हमको जैविक और पर्यावरण की दृष्टि से प्लास्टिक मुक्त गांव बनाने का काम एवं आगे की और तैयारी भी कर रहे हैं.




निर्भय सिंह

सचिव

मानव जीवन विकास समिति

कुढ़नी रेप पीड़िता के लिए न्याय की लड़ाई लड़ेगी कांग्रेस

कुढ़नी रेप पीड़िता के लिए न्याय की लड़ाई लड़ेगी कांग्रेस

पटना.मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी में नौ वर्षीय दलित बच्ची के साथ दुष्कर्म होने और उचित इलाज न मिलने से पीड़िता की मौत पर आक्रोशित बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने आज पटना प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार सरकार की भ्रष्ट, असंवेदनशील और निरंकुश तंत्र के कारण दलित बच्ची ने दम तोड़ दिया.       

           सत्ता के भूखे केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से सीधा सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि क्या आपको दलित का वोट केवल चाहिए और उनके वोट के बदौलत आप केंद्र की सत्ता में बैठे रहें लेकिन आपकी सत्ता के लालच में आप उस दलित बेटी के लिए मदद तो छोड़िए संवेदना के एक शब्द नहीं बोल सकें. आपकी बिहार में डबल इंजन की सरकार है, उसके आप सहयोगी हैं लेकिन फिर भी दलित बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और नृशंस कृत्य पर सरकार से न्याय नहीं दिला सकें..दलित बच्ची को अस्पताल में एक अदद बेड, ऑक्सीजन सिलिंडर तक ना दिला सकें और वो मासूम ये दुनिया को छोड़ कर चली गई. दलित वोट बैंक पर राजनीति करने वाले चिराग पासवान जब खुद को तथाकथित मुख्यमंत्री की रेस में खड़ा होने की घोषणा करते हैं तो कम से कम वें बताएं कि इस बच्ची के लिए आपने क्या किया?

       पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी खुद को दलित का नेता कहते हैं लेकिन उनकी संवेदना, वेदना अब तक दुष्कर्म पीड़िता दलित बच्ची के लिए सामने नहीं आई. आप अन्याय के खिलाफ बोलने से क्यों कतरा रहे हैं? क्या आरएसएस के एजेंडे और दबाव में आकर अपना मुंह बंद रखा है? आप कब दलित बच्ची के लिए न्याय मांगेंगे? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि कई मीडिया चैनल ने हमारे दलित बेटी के साथ जो निर्ममतापूर्ण घटना घटी उसके न्याय की लड़ाई के लिए सहयोग दिया और आप सबकी संवेदना व्यक्त की इसके लिए आप सभी धन्यवाद के पात्र हैं.

           संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राजेश राम ने इस घटना में भाजपा और जदयू के नेताओं के गैर जिम्मेदार मीडिया बाइट का एक वीडियो भी दिखाया.इसी मामले पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वाले असित नाथ तिवारी भी संवाददाता सम्मेलन में शामिल हुए उन्होंने कहा कि जिस समाज में हमें जीना है और रहना है उसके लिए संवेदना होनी चाहिए. मैंने फेसबुक पर इस मामले पर एक पोस्ट लिखा जिस पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने दबाव देकर पोस्ट डिलीट कराना चाहा. इस पर मैं पीछे नहीं हटा और सीधा प्रतिकार किया. मानवीय संवेदना को ऊपर रखते हुए मैंने भाजपा छोड़ दिया और सीधा सवाल किया कि मैं भावनाओं को मारकर राजनीति नहीं कर सकता हूं.

               एक मां बाप के तौर पर सभी को अपना बच्चा प्यारा होता है, उस नौ वर्षीय दलित बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसका पेट और सीना फाड़ दिया गया. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय दावा करते हैं कि एशिया में सबसे ज्यादा बेड वाला हॉस्पिटल पीएमसीएच है. जब मैंने इस मामले पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से संपर्क साधा और उनसे अनुरोध किया कि एक फोन कर देंगे तो उस बच्ची की जान बचाई जा सकती है तो उनका जवाब सुनकर मैं दंग रह गया. ‘ दिलीप जायसवाल ने कहा कि आप अब पत्रकार नहीं हैं भाजपा के नेता है, हजारों लोग बिहार के अस्पतालों के बाहर ऐसे ही खड़े रहते हैं छोड़िए ऐसे केस रोजाना आते हैं‘. इस घटनाक्रम के दौरान भाजपा प्रदेश मुख्यालय में कोल्ड कॉफी का लुत्फ उठाते हुए                         

                    कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के पीएमसीएच में संघर्ष को मजा लेकर देखा जा रहा था. भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल जो मौजूदा सांसद भी है और उसी पीएमसीएच से पढ़े हैं, उनका भी पीड़ित के संदर्भ में पोस्ट आया और उनको दबाव देकर भाजपा ने पोस्ट डिलीट करा दिया. यही प्रकरण मुझे भी सुनाया गया और मुझ पर दबाव दिया गया लेकिन मैंने समर्पण नहीं किया. राष्ट्रवाद का छद्म चोला जब उठाकर भाजपा के नेताओं का फेंकिए तो एक एक के अंदर कुलदीप सिंह सेंगर और धाकड़ जैसे अश्लील भाजपाई बाहर निकलेंगे. उनके अंदर आपकी बहन बेटियों के लिए कोई इज्जत नहीं है. मैं सीधे कहता हूं कि नीतीश व भाजपा का तंत्र, दलित का हितैषी बनकर राजनीति करने वाले चिराग पासवान और जीतन राम मांझी भी इस बच्ची की मृत्यु का प्रत्यक्ष रूप से दोषी है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के संघर्ष को देखने के बाद मैंने उनसे संपर्क किया और उनकी संवेदना को महसूस कर मैंने उसका साथ देते हुए भाजपा के प्राथमिक सदस्यता और पद से इस्तीफा दे दिया.

     संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री राजेश राम के अलावे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा, राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम, विधायक प्रतिमा कुमारी दास, छत्रपति यादव, राजेश राठौड़ ,प्रदेश महिला अध्यक्ष सरवत जहां फातिमा , प्रदेश अल्पसंख्यक अध्यक्ष उमैर खान मौजूद थे.


आलोक कुमार

बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तत्पर

          शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए  Patna Women’s College (स्वायत्त) ...