पटना.विश्व पर्यावरण दिवस पर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 05 जून 2025 को “इनसे मिलिए” कार्यक्रम का अत्यंत प्रभावशाली आयोजन किया.यह विशेष आयोजन पटना स्थित सरदार पटेल भवन के सभागार में अपराह्न 3ः30 बजे से प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राधिकरण के माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत ने की. इस अवसर पर प्राधिकरण के माननीय सदस्यगण श्री पी.एन. राय, श्री कौशल किशोर मिश्र, श्री नरेंद्र कुमार सिंह एवं श्री प्रकाश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही.
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में देश के प्रख्यात जीवविज्ञानी एवं ‘डॉल्फिन मैन ऑफ इंडिया‘ के नाम से सुविख्यात पद्मश्री प्रो. (डॉ.) रवीन्द्र कुमार सिन्हा ने सहभागिता की। डॉ. सिन्हा, नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी और श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय, जम्मू के पूर्व कुलपति भी रह चुके हैं.
अपने प्रेरणास्पद संबोधन में डॉ. सिन्हा ने पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ आपदा प्रबंधन के परिप्रेक्ष्य में नदियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बीच गहरा और सीधा संबंध है, जिसे समझना और नीतियों में शामिल करना आवश्यक है. उन्होंने बताया कि गंगा का पारिस्थितिकी तंत्र जैविक एवं अजैविक घटकों से बना एक अत्यंत संवेदनशील संतुलन है, जिसमें बायोजियोकेमिकल साइकिल और ऊर्जा प्रवाह की महत्वपूर्ण भूमिका है.
डॉ. सिन्हा ने अपने 40 वर्षों के गंगा-अनुसंधान, विशेषकर गंगा डॉल्फिन संरक्षण, नदी पारिस्थितिकी तंत्र और जन-जागरूकता अभियान से जुड़े अनुभवों को साझा किया.
.उन्होंने बताया कि किस प्रकार संसाधनों की कमी के बावजूद, पटना विश्वविद्यालय में प्रारंभ किए गए शोध कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली.
डॉ. सिन्हा ने विकास के अंधाधुंध मॉडल पर भी गहरी चिंता जताई, विशेषकर नदियों पर अतिक्रमण, बालू खनन, और पर्यावरणीय सलाह के बिना किए जा रहे निर्माण कार्यों के दुष्प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान को विकास योजनाओं में उचित स्थान दिया जाता, तो न केवल पारिस्थितिकीय संकट टलते बल्कि जनकल्याणकारी विकास भी संभव होता.
उन्होंने ‘गंगा एक्शन प्लान’ और अन्य परियोजनाओं के उदाहरण देते हुए यह स्पष्ट किया कि नीति निर्माण में केवल पुस्तकीय ज्ञान पर निर्भर रहना नुकसानदायक होता है. स्थानीय साक्ष्य, भूगोल और जन-भागीदारी को केंद्र में रखकर ही स्थायी समाधान निकाले जा सकते हैं.
कार्यक्रम में प्राधिकरण के सचिव श्री मो. वारिस खान, सभी अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे. स्वागत भाषण मो. मोइएजुद्दीन द्वारा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजित द्वारा प्रस्तुत किया गया.
आलोक कुमार

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