गुरुवार, 15 दिसंबर 2022

मतदान केंद्र क्षेत्र में निर्वाचन तिथि से पूर्व लगातार फ्लैग मार्च करेंगे

  * नगरपालिका आम निर्वाचन-2022 के अवसर पर प्रथम चरण में 18 दिसंबर को जिला के 7 नगर निकायों में 209 मतदान केंद्रों पर होगा मतदान

* स्वच्छ एवं निष्पक्ष मतदान को लेकर 7 सुपरज़ोनल दंडाधिकारी, 20 जोनल दंडाधिकारी एवं 42 ज़ोनल दण्डाधिकारी किये गए हैं प्रतिनियुक्त

*जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा सभी प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों की संयुक्त ब्रीफिंग


नालंदा. नगरपालिका आम निर्वाचन -2022 के अवसर पर प्रथम चरण में जिला के 7 नगर निकायों में 18 दिसंबर को मतदान होगा.नगर परिषद हिलसा, नगर पंचायत एकंगरसराय, नगर पंचायत चंडी, नगर पंचायत हरनौत,नगर पंचायत नालंदा, नगर पंचायत सिलाव एवं नगर पंचायत गिरियक के 115 वार्डों में कुल 209 मतदान केंद्रों पर मतदान होगा.स्वच्छ एवं निष्पक्ष निर्वाचन को लेकर 7 सुपर जोनल दंडाधिकारी, 20 जोनल दंडाधिकारी एवं 42 सेक्टर दंडाधिकारी प्रतिनियुक्त किये गए हैं.

     आज जिला निर्वाचन पदाधिकारी नगरपालिका-सह- जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर एवं पुलिस अधीक्षक श्री अशोक मिश्रा द्वारा सभी प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों एवं सम्बद्ध पुलिस पदाधिकारियों की संयुक्त ब्रीफिंग की गई.सभी दंडाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को सम्बद्ध  मतदान क्षेत्रों में लगातार भ्रमणशील रहने को कहा गया. सभी पदाधिकारी एवं संबंधित थाना प्रभारी अपने मतदान केंद्र क्षेत्र में निर्वाचन तिथि से पूर्व लगातार फ्लैग मार्च करेंगे.


सभी प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारियों को सम्बद्ध मतदान केंद्र के मतदान दल पदाधिकारी, संबंधित निर्वाची पदाधिकारी एवं जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष से लगातार संपर्क में रहने का निर्देश दिया गया.

      राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्गत दिशा-निर्देश का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.इस अवसर पर अपर समाहर्त्ता, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, प्रतिनियुक्त जोनल/सेक्टर दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी आदि उपस्थित थे.


आलोक कुमार

बुधवार, 14 दिसंबर 2022

6 दशक पुरानी परियोजना का समग्र रिव्यू जरूरी

 * 22-23 दिसंबर को रिव्यु कमिटी की होने वाली बैठक के लिए मांग पत्र तैयार करने पर चर्चा



मुजफ्फरपुर.लंबे चले आंदोलनों के बाद दशकों पुरानी बागमती बांध परियोजना के रिव्यू हेतु बिहार सरकार ने कमिटी का गठन किया था. हालांकि इस कमिटी को अपना सुझाव बहुत पहले दे देना था, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका है. आगामी 22-23 दिसंबर को एक बार फिर से कमिटी की बैठक है. 

          इसके मद्देनजर चास वास जीवन बचाओ बागमती संघर्ष मोर्चा की पटना में एक बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ साथी देवेंद्र कुमार ने की. बैठक में मांगपत्र तैयार करने पर चर्चा हुई. और इस बीच जलसंसाधन मंत्री और विभागीय सचिव से एक प्रतिनिधिमंडल के मिलने का निर्णय हुआ.

      मोर्चा के संयोजक जितेन्द्र यादव के अलावा बैठक में खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा, नवल किशोर सिंह, जगरनाथ पासवान, मोनाजिर अहसन, रामलोचन सिंह,राम इकबाल राम, विवेक कुमार आदि शामिल हुए. वाटर एक्टिविस्ट रंजीव कुमार को पटना में कामकाज की जिम्मेवारी दी गई. 

धीरेन्द्र झा ने कहा कि 6 दशक पुरानी परियोजना का समग्र रिव्यू जरूरी है क्योंकि नदियों की संरचना-बहाव में भारी बदलाव आए हैं. अपस्ट्रीम में जहां तटबंध बने हैं, उससे तबाही और बर्बादी बढ़ी है. बैठक से निर्णय लिया गया कि आंदोलन के दायरे का विस्तार दरभंगा-समस्तीपुर की ओर तक किया जाएगा क्योंकि योजना अब इन जिलों में भी लागू हो रही है. 

       जितेन्द्र यादव ने कहा कि बिहार की जनता, जल विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों ने इस विनाश्कारी योजना का लगातार विरोध किया है.  यह पुरानी योजना अब अप्रासंगिक हो गई है. मुजफ्फरपुर जिले में जिस बागमती पर तटबंध बनाये जा रहे हैं, उन तटबंधों के दोनो ओर बागमती की कई छारण धराएं बह रही हैं. इस तरह तटबंध लाभ पहुंचाने के बदले अतिरिक्त परेशानी पैदा कर रहे हैं.

        अतः हमारी मांग रही है कि बागमती परियोजना के तहत चल रहे तटबंध निर्माण पर तत्काल रोक लगाते हुए मौजूदा भौगोलिक स्थिति के आधार पर नए सिरे से परियोजना की समीक्षा का रिव्यू हो, जिसमें नदी विशेषज्ञ तथा स्थानीय नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए.


आलोक कुमार

2022 में दीवार को गिरा दिया गया

 बर्लिन की दीवार की कुल लंबाई 155 किलोमीटर थी.लेकिन 1989 में इस दीवार को गिरा दिया गया.पटना नगर निगम के वार्ड नंबर 22 बी में स्थित बालूपर शक्ति नगर मोहल्ला की दीवार की लंबाई 60 फीट थी. 2022 में इस दीवार को गिरा दिया गया...


पटना.पटना नगर निगम के वार्ड नंबर 22 बी में है बालूपर शक्ति नगर मोहल्ला.यहां पर दबंग लोग राह बंद कर दिये थे.यहां के लोग 12 साल से परेशान थे.इस पर समाजसेवी पप्पू राय कहते है कि यहां के लोगों की परेशानी को देखते हुए अपने सहयोगियों के साथ आए और गैंता चलाकर दीवार ढाहने की शुरूआत कर दिये.देखते ही देखते बारह साल से खड़ी दीवार को तोड़ दिया गया.और तो और संपर्क पथ भी बना दिया गया.

    समाजसेवी पप्पू राय ने कहा कि हमलोग जनसंपर्क के दरम्यान बालूपर शक्तिनगर मोहल्ला में गये थे.यहां के लोगों के साथ बैठक की गयी.लोगों ने अपने व्यथा व्यक्त करने लगे.इसी दरम्यान लोगों ने एक स्वर से कहा कि दबंग लोगों के द्वारा राह बंद कर दिया गया है.और तो और इस राह पर दीवार भी खड़ा कर दिये.इस दीवार को हटाकर राह खोलने पर बल देने लगे.

    आगे समाजसेवी पप्पू राय ने कहा कि यहां के लोगों की भावना को देखते हुए कहा गया कि इस दीवार को ढाह कर तीन दिनों के अंदर आवाजाही करने के लिए राह खोल देंगे.जो कहा सो पप्पू राय ने कर दिखाया.अपने सहयोगियों के साथ आए और गैंता चलाकर दीवार ढाहने की शुरूआत कर दिये.देखते ही देखते बारह साल से खड़ी दीवार को तोड़ दिया गया.और तो और संपर्क पथ को बना दिया गया.

 यहां के लोगों का कहना है कि इस राह को खुलते ही हमलोग कुर्जी मोड़ और पाटलिपुत्र कॉलोनी रोड से जुड़ गए है.आसानी से टेम्पों घर तक आ जा रही है.बीमार लोगों को ले जाने के लिए एंबुलेंस भी घर तक पहुंच जा रहा है.

  यहां पर रश्मि अपार्टमेंट में एक प्रोफेसर रहते हैं.उक्त प्रोफेसर का नाम जोन आलबर्ट हैं जो मैनेजमेंट कॉलेज में इंग्लिश के प्रोफेसर हैं.जनसंपर्क अभियान के दौरान प्रोफेसर साहब की मुलाकात समाजसेवी पप्पू राय से हो गयी.उनको देखते ही प्रोफ़ेसर साहब बोलने लगे कि आपको तो पटना नगर निगम की मेयर की प्रत्याशी रजनी देवी के पक्ष में कैंपेन करने की जरूरत ही नहीं हैं.आपने जो बंद राह को खोलवा दिए हैं.इसके चलते मेयर पद पर रजनी देवी की जीत निश्चित है.आप तो जन समस्या का समाधान करते चल रहे हैं तो आप ऐसे ही जीत जाएंगे!


आलोक कुमार

नए कर्मियों को राजगीर अंचल में किया गया पदस्थापित

  

प्रशासनिक दृष्टिकोण से राजगीर अंचल कार्यालय के लिपिक,कार्यपालक सहायकों, डाटा इंट्री ऑपरेटर एवं  SWANs  (NSA )  का किया गया स्थानांतरण, नए कर्मियों को राजगीर अंचल में किया गया पदस्थापित....

राजगीर. राजगीर अंचल के पुनर्नियोजित राजस्व कर्मचारी (प्रभारी अंचल निरीक्षक) आनंद कुमार द्वारा सरकारी भूमि के दाखिल खारिज की स्वीकृति देने तथा लोदीपुर स्थित वैसे भूमि के दाखिल खारिज की अनुशंसा करने, जिससे संबंधित मामला सक्षम न्यायालय में विचाराधीन है, की जांच भूमि सुधार उप समाहर्ता राजगीर से कराई गई थी. उनके जांच प्रतिवेदन के आधार पर आनंद कुमार से स्पष्टीकरण मांगा गया था, जो उनके द्वारा समर्पित नहीं किया गया.

       उनका उक्त कृत्य उनके पदीय दायित्वों के प्रतिकूल, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाला एवं कर्तव्यहीनता का द्योतक पाया गया. उक्त आलोक में कार्रवाई करते हुए जिला पदाधिकारी श्री शशांक शुभंकर ने आनंद कुमार ,पुनर्नियोजित राजस्व कर्मचारी अंचल कार्यालय, राजगीर के संविदा के आधार पर पुनर्नियोजन को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है.

         विगत दिनों अंचल कार्यालय राजगीर में पाई गई अनियमितता के आलोक में तत्कालीन अंचल अधिकारी को विभाग द्वारा निलंबित किया गया, साथ ही तत्कालीन राजस्व कर्मचारी संजय कुमार सिन्हा एवं शैलेंद्र कुमार को भी निलंबित किया गया.प्रशासनिक दृष्टिकोण से जिलाधिकारी द्वारा राजगीर अंचल के लिपिक, कार्यपालक सहायक, डाटा एंट्री ऑपरेटर एवं State Wide Area Networks (SWANs)  (NSA) का स्थानांतरण अन्य कार्यालय में करते हुए उनकी जगह नए कर्मियों  का पदस्थापन किया गया है.

     अंचल कार्यालय राजगीर के लिपिक धर्मवीर प्रसाद को अनुमंडल कार्यालय हिलसा में पदस्थापित करते हुए भूमि सुधार उप समाहर्ता हिलसा के कार्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया है. उनके स्थान पर अनुमंडल कार्यालय हिलसा में पदस्थापित एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता कार्यालय हिलसा में प्रतिनियुक्त लिपिक अमरेंद्र कुमार ओंदवार तथा प्रखंड कार्यालय बिहारशरीफ के लिपिक अरुण चौधरी को राजगीर अंचल में पदस्थापित किया गया है.

राजगीर अंचल के कार्यपालक सहायक श्री कुमार को प्रखंड कार्यालय बिंद तथा कार्यपालक सहायक कुंदन कुमार को अंचल कार्यालय हिलसा स्थानांतरित किया गया है. उनकी जगह विकास कुमार कार्यपालक सहायक अंचल कार्यालय हिलसा तथा रोशन कुमार सिंह कार्यपालक सहायक प्रखंड कार्यालय बिंद को अंचल कार्यालय राजगीर में पदस्थापित किया गया है.

   राजगीर अंचल के डाटा एंट्री ऑपरेटर( बेल्ट्रान) राहुल कुमार को अंचल कार्यालय एकंगरसराय में प्रतिनियुक्त किया गया तथा उनकी जगह अंचल कार्यालय एकंगरसराय के डाटा एंट्री ऑपरेटर (बेल्ट्रान) गोपाल कुमार को अंचल कार्यालय राजगीर में प्रतिनियुक्त किया गया है.

प्रखंड -सह- अंचल कार्यालय राजगीर के SWANs  (NSA )राहुल कुमार को कतरीसराय प्रखंड -सह- अंचल कार्यालय में प्रतिनियुक्त करते हुए वहां के कर्मी समीर कुमार को राजगीर अंचल-सह- प्रखंड कार्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया है.


आलोक कुमार

मंगलवार, 13 दिसंबर 2022

सबूतों के साथ सच को सामने लाने के लिए और सद्भावना वाले सभी लोगों का आभार

 

नई दिल्ली. जेसुइट्स फादर स्टेन स्वामी की विरासत समिति के संयोजक डॉ. फादर. जोसेफ जेवियर एस जे ने कहा है कि नई फॉरेंसिक रिपोर्ट से पता चलता है कि फादर स्टेन स्वामी को मनगढ़ंत सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया गया, जेल में डाल दिया गया और उनकी मृत्यु हो गई.

   आर्सेनल कंसल्टिंग, एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध डिजिटल फोरेंसिक फर्म ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भीमा-कोरेगांव मामले में वरिष्ठ मानवाधिकार रक्षक फादर स्टेन स्वामी को गिरफ्तार करने के लिए इस्तेमाल किए गए डिजिटल सबूत उनके कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव पर लगाए गए थे. यह रिपोर्ट पिछली रिपोर्ट का अनुसरण करती है जिसमें सह-प्रतिवादी रोना विल्सन और सुरेंद्र गाडलिंग के उपकरणों पर लगाए गए डिजिटल साक्ष्य का दस्तावेजीकरण किया गया था. फोरेंसिक विश्लेषण से पता चला है कि जिन हैकर्स ने फादर स्टेन के कंप्यूटर पर हमला किया, वे वही हैं जिन्होंने विल्सन और गाडलिंग पर हमला किया था.

    कई निष्कर्ष भारतीय राज्य को मानवाधिकार रक्षकों की इस हैकिंग से जोड़ते हैं.साइबर सुरक्षा फर्म Sentinel One ने पहले इस हमलावर की जांच की थी और निष्कर्ष निकाला था कि उनकी गतिविधि भारतीय राज्य हितों के साथ तेजी से संरेखित होती है.‘आर्सेनल की रिपोर्ट में कहा गया है, हमलावर फादर से समझौता करने के लिए जिम्मेदार है. स्वामी के कंप्यूटर में व्यापक संसाधन (समय सहित) थे और यह स्पष्ट है कि उनका प्राथमिक लक्ष्य निगरानी और दस्तावेज़ वितरण को कम करना था. आर्सेनल ने प्रभावी रूप से हमलावर को रंगे हाथ (फिर से) पकड़ा है, फ़ाइल सिस्टम लेनदेन, एप्लिकेशन निष्पादन डेटा और अन्य में पीछे छोड़ी गई उनकी गतिविधि के अवशेषों के आधार पर.                  

   जून 2022 में,वायर पत्रिका ने बताया कि  Sentinel One को पुणे पुलिस को हैकर्स से जोड़ने के सबूत मिले थे. फोरेंसिक निष्कर्षों से यह भी संकेत मिलता है कि हैकर्स को पुणे पुलिस द्वारा फादर स्टेन पर की गई छापेमारी की अग्रिम जानकारी थी. रिपोर्ट में हैकर्स द्वारा 11 जून, 2019 की रात को उनकी गतिविधियों के सबूतों को मिटाने का प्रयास करने का विस्तृत सबूत दिया गया है. पुणे पुलिस ने अगले ही दिन, 12 जून को फादर स्टेन का कंप्यूटर जब्त कर लिया. हैकर्स ने पहली बार 19 अक्टूबर, 2014 को नेटवायर नामक रिमोट एक्सेस ट्रोजन आरएटी का उपयोग करके फादर स्टेन के कंप्यूटर पर हमला किया. आरएटी एक हमलावर को किसी के कंप्यूटर का दूरस्थ रूप से सर्वेक्षण करने और कंप्यूटर से और कंप्यूटर पर फ़ाइलों को स्थानांतरित करने की अनुमति देता है. फादर स्टेन के मामले में, उनके द्वारा टाइप की गई हर एक चीज को ‘ कीलॉगिंग‘ नामक एक प्रक्रिया का उपयोग करके रिकॉर्ड किया गया था. रिपोर्ट में हैकर्स द्वारा उनके पासवर्ड को पढ़ने में सक्षम होने के उदाहरण दिखाए गए हैं, साथ ही साथ अन्य दस्तावेज़ और ईमेल भी.हैकर ने फादर स्टैन के डिवाइस की 24,000 फाइलों का भी सर्वेक्षण किया.

   निगरानी के अलावा, जुलाई 2017 से शुरू होने वाले और जून 2019 तक जारी रहने वाले दो हैकिंग अभियानों में फादर स्टेन की हार्ड ड्राइव पर डिजिटल फाइलों को लगाया गया था. माओवादी विद्रोह। फादर स्टेन पर छापे से एक सप्ताह पहले 5 जून, 2019 को फादर स्टेन के कंप्यूटर पर अंतिम आपत्तिजनक दस्तावेज लगाया गया था. इन दस्तावेजों के आधार पर ही फादर स्टेन को पहली बार भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किया गया था, जबकि विशेषज्ञों ने दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह जताया था.

    फादर स्टेन के कंप्यूटर का विश्लेषण आर्सेनल कंसल्टिंग द्वारा किया गया था, जो एक यूएस-आधारित डिजिटल फोरेंसिक फर्म है, जिसने तुर्की ओडीएटीवी मामले और बोस्टन मैराथन बम विस्फोट मामले सहित ऐतिहासिक डिजिटल फोरेंसिक मामलों पर काम किया है. आर्सेनल के पिछले निष्कर्षों को एमनेस्टी टेक और टोरंटो विश्वविद्यालय की सिटीजन लैब द्वारा दोहराया गया है, और वाशिंगटन पोस्ट और एनडीटीवी द्वारा रिपोर्ट किया गया है. आर्सेनल का कहना है कि इसके निष्कर्षों को किसी भी सक्षम डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ द्वारा दोहराया जा सकता है.                   

    आर्सेनल कंसल्टिंग के अध्यक्ष, मार्क स्पेंसर ने कहा, ‘फादर के साथ जो हुआ उसका पैमाना. स्वामी और उनके कुछ सह-प्रतिवादी, अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आक्रामक निगरानी के संदर्भ में, जो कि वर्षों के दौरान दस्तावेज़ वितरण को समाप्त करने में परिणत हुआ, वास्तव में अभूतपूर्व है.

हिरासत में फादर स्टेन स्वामी की मृत्यु की ब्रिटिश संसद सहित, अमेरिकी विदेश विभाग और संयुक्त राष्ट्र द्वारा दुनिया भर में निंदा की गई थी. मनमानी हिरासत पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह ने सहमति व्यक्त की कि हिरासत में फादर स्टेन की मृत्यु ‘हमेशा के लिए भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर एक धब्बा बनी रहेगी‘. जुलाई 2022 में, अमेरिकी कांग्रेस में फादर स्टेन के जीवन और कार्यों के सम्मान में एक प्रस्ताव पेश किया गया था.सत्य इतना कड़वा क्यों हो गया है, विरोध इतना असहनीय, न्याय इतना अप्राप्य - स्टेन स्वामी

   भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तारी के दौरान जुलाई 2021 में प्रसिद्ध मानवाधिकार रक्षक फादर स्टेन स्वामी का निधन हो गया. भीमा कोरेगांव मामले में 11 सह-प्रतिवादी अभी भी जेल में हैं और गौतम नवलखा घर में नजरबंद हैं.

मैं आर्सेनल कंसल्टिंग के प्रेसिडेंट मार्क स्पेंसर और उनकी टीम का सबूतों के साथ सच को सामने लाने के लिए और सद्भावना वाले सभी लोगों का आभारी हूं जो सच्चाई, अंतिम और सबसे कम न्याय और शांति के लिए खड़े हैं.

हम, भारत के जेसुइट, गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए विभिन्न जेलों में सड़ रहे लोगों के साथ एकजुटता से खड़े हैं, विशेष रूप से जिन्हें बीके16 मामले में झूठा फंसाया गया है और गरीबों और हाशिए पर रहने वालों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं और उनके साथ चलते हैं गरिमा, स्वतंत्रता और स्वतंत्रता के लिए उनकी खोज.


आलोक कुमार


मैं साक्ष्य के साथ मौजूद रहूँगा:सुमन सौरभ

 


*  प्रसव वार्ड में नर्स का प्रसूता के साथ होता है अमानवीय व्यवहार


*  नर्स को दिया जाए सॉफ़्ट स्किल का प्रशिक्षण


* यहां घूस के बिना हीमोग्लोबिन से लेकर अन्य किसी भी प्रकार की जांच करवाना है मुश्किल


* घावों पर टांका लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाला धागा (सूचर) भी उपलब्ध नहीं


*  प्रसव वार्ड में रात्रि पहर चिकित्सक उपलब्ध नहीं रहने के कारण मजबूरी में मरीज  जाते है निजी अस्पताल के शरण में


जमुई. प्रबोध जन सेवा संस्थान के सचिव व सामाजिक कार्यकर्त्ता सुमन सौरभ ने एक शिकायत पत्र के माध्यम से सदर अस्पताल की तमाम व्यवस्था पर प्रश्न उठाते हुए सोमवार को सिविल सर्जन को एक शिकायत पत्र सौंपा है. उस शिकायत पत्र में उन्होंने स्पष्ट तौर पर लिखा है जब भी सदर अस्पताल में आपका निरीक्षण होता है तो एक उम्मीद जगती है अब किसी प्रकार की समस्या आम लोगों को नहीं होगी पर बड़े ही दुःख के साथ कहना पड़ रहा है आपके निरीक्षण का असर कुछ घंटे तक ही सीमित रहता है.

   


वर्तमान में सदर अस्पताल का शायद ही कोई ऐसा विभाग है जहां बगैर पैसे (घूस) की काम होता नहीं है.यदि आपको इसकी जानकारी नहीं है तो शायद आपका निरीक्षण अधूरा है. प्रसव वार्ड की बात करें तो हीमोग्लोबिन से लेकर किसी भी प्रकार के जांच में कुछ ना कुछ पैसा (घूस) लिया ही जाता है. यदि पैसा ना दिया जाए तो उन्हें जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है या फिर मजबूर होकर जांच बाहर से करवाना होता है.

 यदि आप सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड का निरीक्षण किए होंगे तो आपको यह भी ज्ञात होना चाहिए जब सदर अस्पताल में जांच से लेकर अन्य सारी सुविधा उपलब्ध है तो आवश्यक जांच मरीज बाहर (प्राइवेट) से क्यों करवाते हैं. उसकी एकमात्र वजह है समय पर जांच कर्मी का उपलब्ध ना होना या फिर समय पर पैसा (घूस) ना देने पर जांच कर्मी की नाराजगी. यह सभी बातें मुझे पहले से ज्ञात थी पर दिनांक 9/ 12/2022 को सुबह लगभग 5ः00 बजे से लेकर सुबह 8 बजे तक मेरी उपस्थिति में ये सारा खेल प्रसव वार्ड में चलता रहा जो मेरे लिए तनिक भी आश्चर्य का विषय नहीं था.

  जांच कर्मी से लेकर रोस्टर के अनुसार जिन डॉक्टर की ड्यूटी थी वह भी अनुपस्थित थी. प्रसव के दर्द को जूझ रही कई महिलाएं डॉक्टर के इंतजार में तड़प रही थी. बेतहाशा दर्द को झेल रही दो प्रसव पीड़िता जो कई घंटे से डॉक्टर का इंतजार कर रही थी पर डॉक्टर की मौजूदगी ना होने के कारण व मौजूद कुछ नर्सों का व्यवहार प्रसूता के प्रति जहाँ सहानुभूति पूर्ण होना चाहिए वहीं उनका व्यवहार प्रसूता के साथ अमानवीय रहा जिससे आहत होकर उन्हें निजी अस्पताल के लिए जाना पड़ा. वहीं जो आर्थिक रूप से विपन्न परिवार की प्रसूता थी उनकी मजबूरी रही उस डॉक्टर के इंतजार में रहना.

   वैसे भी प्रसव वार्ड में प्रसूता बच्चे को जन्म देने के दौरान जितना दर्द झेलती है उस से कहीं ज्यादा आपके सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड में कार्यरत नर्स व डॉक्टर का व्यवहार उन्हें अंदर से तोड़ देता है. मेरा मानना है विशेष तौर पर प्रसव वार्ड में कार्यरत नर्सें गर्भवती महिलाओं के सबसे ज्यादा संपर्क में रहती हैं ऐसे में उन्हें सॉफ़्ट स्किल का प्रशिक्षण दिया जाना बहुत ही जरुरी है क्योंकि डिलीवरी के दौरान होने वाले बर्ताव से प्रसव वार्ड में इलाजरत प्रसूता खौफ में रहती है. उसी दौरान जब विभाग के अधिकारियों से इन सभी परेशानियों को लेकर मेरी बात हुई तो डॉक्टर साहिबा का आगमन सुबह लगभग 6ः 30 बजे हुआ लेट ही सही पर डॉक्टर साहिबा का आगमन हुआ पर आते के साथ उन्होंने नाराज होकर इलाजरत मरीज के परिजनों से कह दिया 8 बजे हम चले जायेंगे और वो चली भी गई.

  आश्चर्य है रोस्टर के अनुसार अस्पताल पहुंचने का समय निश्चित नहीं है पर जाने का समय निश्चित होता है। खैर मुझे खुशी है आप समय-समय पर सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड का निरीक्षण करते है तो क्या आपको यह ज्ञात नहीं घावों पर टांका लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाला धागा (सूचर) भी बीते कई दिनों से प्रसव वार्ड में उपलब्ध नहीं है जिसे परिजनों को बाहर से खरीदकर लाना होता है. वहीं जो प्रसव वार्ड में खाद्य सामग्री परोसी गई उसे बस मजबूरी बस ही इंसान खा सकता है.

    सुमन सौरभ ने आगे कहा शिकायत पत्र के माध्यम जितनी भी शिकायतें दर्ज कराई है उसका पूरा प्रमाण मेरे पास सुरक्षित है उन्हें ने सिविल सर्जन से आग्रह किया है शिकायतों की जांच निष्पक्ष तरीके से कर दोषी पर करवाई करें जिस से समाज में एक सकारात्मक संदेश जाए वहीं इस जांच में किसी भी प्रकार की यदि सहयोग की आवश्यकता है तो मैं साक्ष्य के साथ मौजूद रहूँगा.


आलोक कुमार


अंतिम संस्कार सेंट ऑगस्टाइन फोराने चर्च, प्रविथानम, पाला में किया गया

  


पटना.बिहार की राजधानी पटना है.पटना के बगल में ही हाजीपुर है. केरल से आकर ए.वी. जोसेफ ने हाजीपुर में स्कूल खोले.उक्त स्कूल का नाम संत जोंस एकेडमी है.संत जोंस एकेडमी के संस्थापक निदेशक ए.वी.जोसेफ थे.वे ए.वी.जोस से विख्यात थे.उनका निधन 11 दिसंबर को केरल में हो गया था.वे 69 साल के थे.अपने पीछे मारिया जोस,रोनी जोस, सोनी जे हर्ष,सिद्धार्थ हर्ष,नील जे हर्ष आदि को छोड़ गए.

     उनका घर केरल में है.श्री ए वी पृथ्वीदाथिल हाउस, नजंदुपारा, उरलीकुन्नम, पाला है.आज मंगलवार 13 दिसंबर को घर पर सुबह 10.00 बजे से अंतिम प्रार्थना करने के बाद पार्थिव शरीर को दोपहर 12.00 बजे से अंतिम संस्कार सेंट ऑगस्टाइन फोराने चर्च, प्रविथानम, पाला में किया गया.

       
पटना महाधर्मप्रांत में धार्मिक कार्य करने वाले ए.वी.जोस का अंतिम संस्कार में शामिल होने पटना महाधर्मप्रांत के विकर जनरल फादर जेम्स जौर्ज और फातिमा सुसमाचार केंद्र के निदेशक फादर सत्य प्रकाश गए थे.वहीं संत जोंस एकेडमी से जुड़े लोग भी गए थे.

  एक लोकधर्मी होने के कारण धार्मिक कार्य में सर्वाधिक योगदान जोस देते थे.इसके आलोक में पटना महाधर्मप्रांत के विकर जनरल फादर जेम्स जॉर्ज और फादर सत्य प्रकाश केरल गए थे.


आलोक कुमार


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