शुक्रवार, 17 मार्च 2023

जिला पदाधिकारी द्वारा जिला परिषद को क्रियान्वयन एजेंसी बनाने के लिए स्वीकृति दी गयी

 जिला परिषद के माध्यम से भी किया जायेगा मनरेगा की योजनाओं का क्रियान्वयन



नालंदा। आज हरदेव भवन में सभी  जिला परिषद सदस्यों को मनरेगा योजना के क्रियान्वयन के बारे में आयोजित एकदिवसीय कार्यशाला में विस्तृत जानकारी दी गयी।

           विदित हो कि अभी तक जिले में ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति के माध्यम से ही मनरेगा की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा था।विभागीय निर्देश के आलोक में जिला पदाधिकारी द्वारा जिला परिषद को क्रियान्वयन एजेंसी बनाने के लिए स्वीकृति दी गयी है।

  मुख्य रूप से सभी जिला परिषद सदस्यों एवं जिला परिषद के कर्मियों को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में सर्वप्रथम उप विकास आयुक्त ,


अपर समाहर्ता ,  जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष द्वारा कार्यक्रम का दीप प्रज्वलन कर विधिवत शुभारंभ किया गया।

          निदेशक डीआरडीए द्वारा सभी माननीय सदस्यों एवं पदाधिकारियों का स्वागत किया गया। प्रशिक्षण में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सभी कर्मियों द्वारा क्रमबद्ध ढंग से  क्रियान्वयन के बारे में जानकारी दी गयी।


आलोक कुमार

जीविका द्वारा तार के पत्तों से तैयार किए जा रहे टोकरी का प्रयोग करें

 गया।ज़िला पदाधिकारी, गया डॉ० त्यागराजन एसएम ने समाहरणालय सभा कक्ष में जिले के जीविका के पदाधिकारियों, जीविका नीरा उत्पादक समूह, तिलकुट उत्पादक समूह, जिला उद्योग पदाधिकारी, नगर निगम क्षेत्र में प्लास्टिक बैन इंफोर्समेंट टीम के सदस्यों तथा फूड इंस्पेक्टर के साथ बैठक करते हुए कहा कि पिछले वर्ष जीविका द्वारा नीरा उत्पादन तथा बिक्री के क्षेत्र में काफी बेहतर कार्य किया है। दो हजार से ऊपर नीरा उत्पादकों को फायदा पहुंचा है। इस वर्ष और अधिक लोगों को फायदा पहुंचे इस पर विशेष कार्य योजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि बिहार में प्लास्टिक को प्रतिबंध रखा गया है। इसलिए एनवोर्न्मेंट फ्रेंडली बनने में बेहतर कार्य करे।

      बैठक में उन्होंने सभी जीविका के बीपीएम को निर्देश दिया कि नीरा उत्पादन तथा नीरा की बिक्री का प्रतिवेदन निर्धारित समय अवधि में प्रस्तुत करें। नीरा उत्पादन तथा नीरा से बनने वाले खाद्य पदार्थों का दायरा और प्रभावी बने इसके लिए अभी से ही प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करायें। उन्होंने यह भी कहा कि जिले में छोटे-छोटे दुकानों तथा कोल्ड ड्रिंक से संबंधित दुकानों को भी नीरा के साथ टैग करें ताकि बड़े पैमाने पर नीरा की बिक्री हो सके तथा नीरा उत्पादक समूह को और बेहतर लाभ मिल सके।

उन्होंने जिले में बड़े पैमाने पर तिलकुल उत्पादन करने वाले समूहों से राय लेते हुए उन्हें बताया कि जिस तरह गया जिला तिलकुट के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। उसी में नीरा का तिलकुट को और बढ़ावा दे। नीरा पूरी तरह पौष्टिक आहार है नीरा में काफी स्वास्थवर्धक मिनिरल पाए जाते हैं। तिलकुट उत्पादक को कहा कि तिलकुट के बिक्री में जो पैकेजिंग दिया जाता है उसे और बेहतर बनाएं। प्लास्टिक को कम प्रयोग करते हुए ताड़ के पत्तों से (गुथ कर) बनाए जाने वाले टोंगा ( टोकरी)  को और आकर्षक बनाकर उसी में तिलकुट तथा अनरसा को पैकेजिंग करें।

       तिलकुट तथा अनरसा विक्रेता समूहों को बताया कि तिलकुट तथा अनरसा को राज्य के साथ-साथ विदेशों में गया का तिलकुट और प्रसिद्ध हो इसके लिए पैकेजिंग तथा मार्केटिंग पर और अधिक प्लान तैयार करना होगा। उन्होंने जिला उद्योग पदाधिकारी को निर्देश दिया कि जिले के बड़े तिलकुट विक्रेता के साथ बैठक कर पैकेजिंग तथा मार्केटिंग को और कैसे डेवलप किया जाए, इसके लिए बैठक कर कार्य योजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि बेहतर पैकेजिंग तैयार करने के लिए उधमी योजना के तहत लोन उपलब्ध कराते हुए जिले में पैकेजिंग यूनिट मशीन संस्थापन करवाएं।

तिलकुट विक्रेता ने बताया कि वर्तमान समय में चीन एवं गुड़ से निर्मित तिलकुट की बिक्री अधिक होती है। नीरा उत्पादन नीरा से तैयार तिलकुट भी बड़े पैमाने पर बिक्री होंगे। जिला पदाधिकारी ने कहा कि नीरा से तिलकुट निर्माण को और बढ़ावा दें। उन्होंने यह भी कहा कि जीविका के माध्यम से नीरा से तिलकुट निर्माण तथा नीरा से अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण हेतु प्रशिक्षण करवाया जाएगा।

       उन्होंने फूड इंस्पेक्टर तथा नगर निगम के अधीनस्थ प्लास्टिक बैन इंफोर्समेंट टीम के सदस्यों को कहा कि जिस क्षेत्र में आप छापेमारी के लिए जाते हैं, तो दुकानदारों को प्रेरित करें कि जीविका द्वारा तार के पत्तों से तैयार किए जा रहे टोकरी का प्रयोग करें, जिससे जीविका समूह को प्रोत्साहन भी मिलेगा तथा गया जिला इको फ्रेंडली रहेगा।

       उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नालंदा जिले में सिलाव का खाजा काफी प्रसिद्ध है। सिलाव का खाजा भी पेपर से बने थैले तथा तार के पत्तों से गुथे हुए टोकरी में दिया जाता है। उसी तरह गया जिले में भी ताड़ के पत्तों से बनी टोकरी का प्रयोग करें।

     पिछले वर्ष जिले में नीरा उत्पादन को बढ़ावा देते हुए पारंपरिक रूप से ताड़ी के उत्पादन में लगे परिवारों को वैकल्पिक रोजगार से जुड़ने का अवसर दिया गया। जीविका सामुदायिक संगठनों के माध्यम से सर्वेक्षण कर जिले में जिले में 91 नीरा उत्पादक समूह का गठन किया गया। इन उत्पादक समूहों के माध्यम से लगभग 2500 से अधिक नीरा टैपर को जोड़ा गया। जिले में 400 अस्थाई एवं स्थाई नीरा बिक्री केंद्रों के माध्यम से 11 लाख लीटर नीरा का उत्पादन एवं बिक्री की गई। इससे ताड़ी के विकल्प के रूप एक पोषक प्राकृतिक पेय नीरा के उत्पादन को बढ़ावा मिला। नीरा उत्पादन एवं बिक्री में जिला का स्थान राज्य में प्रथम रहा है। साथ ही सतत् जीविकोपार्जन योजना के माध्यम से पारंपरिक रूप से ताड़ी के उत्पादन एवं बिक्री में जुड़े अत्यंत निर्धन परिवारों को वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराया गया।

आलोक कुमार

जल स्रोत के भूमि को अतिक्रमण मुक्त करावे

  गया। ज़िला पदाधिकारी गया डॉ० त्यागराजन एसएम ने जनता दरबार में आये हुए लगभग 400 व्यक्तियों के मामले को गंभीरतापूर्वक सुनते हुए संबंधित पदाधिकारियों को प्राप्त आवेदनों को जांच यथाशीघ्र कराते हुए जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। आवेदकों के कई मामलों में जिला पदाधिकारी द्वारा जिले के वरीय पदाधिकारी यथा उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी संबंधित प्रखंड के नामित जिला स्तरीय पदाधिकारी आदि द्वारा मामले को जांच करने का भी जिम्मा दिया गया है।

     


जनता दरबार में प्रधानमंत्री आवास / मुख्यमंत्री आवास योजना से संबंधित आए मामलों को जिला पदाधिकारी ने उप विकास आयुक्त को संबंधित आवेदनों को यथाशीघ्र जांच करते हुए पात्रता रखने वाले व्यक्तियों को प्रधानमंत्री/ मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ देने के लिए अग्रेतर कार्य करने का निर्देश दिया।

       जनता दरबार में कई व्यक्तियों ने भूमि विवाद, आपसी बटवारा, अतिक्रमण, जमीन संबंधी दिक्कते आदि से संबंधित आवेदन दिए। उन सभी आवेदन के आलोक में जिला पदाधिकारी ने संबंधित अंचलाधिकारी तथा थानाध्यक्ष एवं अनुमंडल पदाधिकारी तथा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के अध्यक्षता में थाना स्तर एवं अनुमंडल स्तर पर हर शनिवार को आयोजित होने वाले जनता दरबार में दोनों पक्षों के व्यक्तियों को बुलाकर संबंधित मामलों को प्राथमिकता देते हुए निराकरण कराने का निर्देश दिए।

     

जनता दरबार में जमीन से संबंधित अत्यधिक मामले को देखते हुए जिला पदाधिकारी ने आए आवेदनों को सभी भूमि सुधार उप समाहर्ता को निर्देश दिया कि अच्छे तरीके से आए आवेदनों को जांच करते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमानुसार उचित कार्रवाई करने के लिए आदेशित करें। इसके साथ ही प्राप्त कई आवेदनों के विरुद्ध वरीय पदाधिकारी नामित कर जांच के लिए निर्देशित किया है। साथ ही जांच पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि प्राप्त आवेदन को अधिकतम 7 दिनों में जांच करते हुए दोषी कर्मी/ पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई हेतु प्रेषित करे।

             जनता दरबार में कई व्यक्ति परिमार्जन के संबंध में आवेदन दिए वजीरगंज, मोहरा, खिजरसराय, नगर, बोधगया, फतेहपुर, बथानी, आमस, शेरघाटी सहित अन्य अंचल के व्यक्ति ने परिमार्जन के संबंध में आवेदन देने पर जिला पदाधिकारी ने संबंधित अंचलाधिकारी एवं राजस्व पदाधिकारी को सख्त निर्देश दिया कि परिमार्जन के लिए लंबित आवेदनों को तेजी से निष्पादन करें। जनता दरबार के सुनवाई में आपदा विभाग के तहत विभिन्न लंबित आवेदन के विरुद्ध जांच करते हुए जिला आपदा पदाधिकारी उसे तेजी से अनुपालन करवाये।

             जनता दरबार में बिजली विभाग के बिजली बिल ज्यादा आने, घर का बिजली कनेक्शन जोड़ने सहित अन्य मामले पर जिला पदाधिकारी ने कार्यपालक अभियंता बिजली पदाधिकारी को प्राप्त आवेदनों को जांच करते हुए अग्रेतर कार्रवाई करने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली बिल ज्यादा आना तथा एवरेज बिल आना इत्यादि के मामले ज्यादा आ रहे हैं, ज़िला पदाधिकारी ने कहा कि उस एरिया के संबंधित जे०ई० से जांच करवाएं तथा खराब बिजली मीटर को बदलवाने का कार्य करे। जहां भी ज्यादा बिल आने की शिकायत है उसे जांच करवाकर मीटर बदले।

             जिले के कई जल स्रोतों यथा आहार, पइन,  पोखर इत्यादि के जमीन को भरकर अतिक्रमण करने की लगातार शिकायत प्राप्त हो रही है। ज़िला पदाधिकारी ने सभी अंचलाधिकारी को सख्त निर्देश दिया कि यदि आपके क्षेत्र से जल स्रोत में अतिक्रमण होने की सूचना मिलती है तो उसे तुरंत जांच कराएं इसके अलावा जिला पदाधिकारी तथा अन्य माध्यम से जो आवेदन प्राप्त हो रहे हैं उसके आलोक में निश्चित तौर पर भौतिक रूप से निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि जल स्रोत के जमीन में कहीं अतिक्रमण पाया जाता है तो निरीक्षण के पश्चात तुरंत प्राथमिकी दर्ज करते हुए संबंधित जल स्रोत के भूमि को अतिक्रमण मुक्त करावे। इस कार्य में थोड़ी सी भी शिथिलता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


आलोक कुमार

गुरुवार, 16 मार्च 2023

12056 रूपए मासिक मानदेय से समाज में मान-सम्मान नहीं बढ़ रहा है

 

पटना.विकास मित्रों का समय और जिंदगी बर्बाद हो गया है.यह सोच विकास मित्रों में विकसित हो गयी है.आखिर हो क्यों नहीं?12056 रूपए मासिक मानदेय से समाज में मान-सम्मान नहीं बढ़ रहा है.उल्टे सामाजिक- आर्थिक  स्थिति दिन प्रति दिन बहुत ही खराब होती जा रही है. 

   


विकास मित्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2010 में विकास मित्रों का नियोजन किया था.प्रारंभिक दौर में विकास मित्र का मानदेय मात्र: तीन हजार रुपये था.मानदेय में मंथरगति से वृद्धि कर 13 साल के बाद मात्र:12056 रुपये कर दिया है.यह राशि महंगाई डायन खात जात में ऊंट के मुंह में जीरा की तरह है.फिर भी हमलोग कमरतोड़ महंगाई में कम मानदेय में ही अधिकाधिक कार्य निष्पादन कर सरकार के अधिकारियों को खुश कर रहे हैं.

    महादलित विकास मिशन की तहत पंचायत के 21 विकास मित्रों को विकास रजिस्टर वर्जन 2.0 को अपडेट करने को लेकर प्रशिक्षण दिया गया. विकास मित्रों को सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न प्रकार की विकास योजनाओं में महादलित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की भागीदारी की स्थिति वर्तमान में क्या है, इसको महादलित विकास मिशन के पोर्टल पर विकास रजिस्टर 2.0 वर्जन में अपडेट करने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई. मास्टर ट्रेनर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि सरकार की सभी प्रकार की योजनाएं जैसे कौशल प्रशिक्षण, शौचालय, जलापूर्ति, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आईसीडीएस, बास भूमि, स्वास्थ्य दहेज प्रथा एवं बाल विवाह जैसी योजना से संबंधित डाटा संकलन कर उसे अपडेट किया जाना है.

      इस बीच जापानी इंसेफिलाइटिस (जेई) व (एईएस) चमकी बुखार को लेकर अब विकास मित्र महादलित टोलों के लोगों को जागरूक करेंगे. इसके लिए इन सभी को बैठक के माध्यम से निर्देशित किया गया है. विकास मित्रों के साथ बैठक में प्रखंड कल्याण कार्यालय में कल्याण पदाधिकारी रवि कुमार ने कहा कि इस कार्य में सभी जुट जाएं. उपस्थित विकास मित्रों को इस रोग से संबंधित जागरूकता के लिए पोस्टर भी उपलब्ध कराया गया.अधिकारी ने कहा कि इन्हें महादलित टोलों के सार्वजनिक स्थलों पर लगाना सुनिश्चित करें.लोगों को इस रोग के लक्षण, पहचान करने के तरीके व इससे बचाव के बारे में जानकारी दें। लोगों को समझाना है कि ओझा गुनी के चक्कर में नहीं पड़ कर ऐसे मरीजों को पीएचसी में लेकर जाएं.इसका उपचार संभव है. बस समय से इसकी पहचान व इलाज जरूरी है.

    इसके बाद राज्य में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद शराब निर्माण, बिक्री या इसके सेवन को लेकर चौकीदार एवं दफादारों को सूचना का मुख्य माध्यम बनाया गया था. पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समीक्षा के बाद कानून को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए नई रणनीति बनी है.अब विकास मित्र, आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका एवं सहायिका, आशा एवं एएनएम की भी मदद ली जाएगी. उनसे शराब निर्माण, बिक्री और सेवन की जानकारी ली जाएगी.

आलोक कुमार

कैंडल लाइट कर विरोध व्यक्त किया

 

कोच्चि.इन दिनों केरल में मलयालम लेखक फ्रांसिस नोरोन्हा की कहानी पर आधारित एक नाटक, 'कक्कुकली' को लेकर ईसाई समुदाय आक्रोशित हैं.इस संदर्भ में केरल राज्य में कैथोलिक चर्च की सर्वोच्च संस्था केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) ने राज्य सरकार से एक मलयालम नाटक के मंचन पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इसमें ईसाई धर्म के साथ-साथ इसकी मंडलियों और कॉन्वेंट को गलत तरीके से चित्रित किया गया है.वहीं कैंडल लाइट कर विरोध व्यक्त किया गया.

         बताया जाता है कि ईसाई धर्म केरल का तीसरा सबसे व्यापक धर्म है, भारत सरकार की जनगणना के अनुसार जनसंख्या का 18 प्रतिशत है. अल्पसंख्यक समुदाय होने के बावजूद केरल में ईसाई समुदाय संपूर्ण भारत के ईसाई समुदाय की तुलना में आनुपातिक रूप से बहुत बड़ा है.इस बड़ी जनसंख्या वाले ईसाई समुदाय को मलयालम लेखक फ्रांसिस नोरोन्हा की कहानी पर आधारित एक नाटक, 'कक्कुकली' हिलाकर रख दिया है.मलयालम लेखक ने 'कक्कुकली' नाटक में एक युवा नन और उसके संघर्षों और चुनौतियों के इर्द-गिर्द घूमती जिंदगी को दर्शाया है, जिसका सामना वह एक कॉन्वेंट में करती है.

        वास्तव में अलापुझा स्थित नेथल नाटक संघम द्वारा मंच पर लाया गया नाटक केबी अजय कुमार द्वारा लिखित और जॉब मडाथिल द्वारा निर्देशित है.यह एक ईसाई लड़की की कहानी बताती है जो ईसाई चर्च में शामिल हो गई और अपने पिता की इच्छा का विरोध करते हुए नन बन गई, जो एक कम्युनिस्ट थे.नाटक उस चुनौतीपूर्ण स्थिति से संबंधित है जिसका सामना एक कॉन्वेंट के नियमों और विनियमों के भीतर रहते हुए नन करती है.इसको आधार बनाकर मलयालम लेखक फ्रांसिस नोरोन्हा ने एक नाटक 'कक्कुकली' बना दिया है.अलप्पुझा स्थित नेथल नाटक संघम ने जॉब मदाथिल के निर्देशन में कहानी को एक मंचीय रूपांतर दिया है.

        कॉन्वेंट में एक युवा नन के संघर्ष से संबंधित एक नाटक से परेशान, विश्वासियों के एक वर्ग ने गुरुवयूर में इसके मंचन को रोकने की कोशिश की. उसने कुछ कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया है जो दावा करते हैं कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में घुसपैठ है और नाटक के लिए और अधिक चरणों का वादा किया है.मलयालम लेखक फ्रांसिस नोरोना की एक कहानी पर आधारित एक नाटक "कक्कुकली' तूफान के केंद्र में है, जिसमें केसीबीसी समर्थक जीवन कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह ईसाई धर्म का अपमान करता है.                                                                                       जब मंदिर में वार्षिक उत्सव के एक भाग के रूप में गुरुवायुर नगर पालिका के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रदर्शन करने के लिए नाटक तैयार किया गया था, तो केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी)  समर्थक जीवन कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और यहां तक कि आयोजकों को नाटक के मंचन से पीछे हटने के लिए प्रभावित करने की कोशिश की.

       केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) प्रो-लाइफ आंदोलन के जेम्स अझचांगड के अनुसार, "शुरुआत से लेकर अंत तक, कक्कुकली पूरे धर्म, विशेष रूप से ईसाई धर्म के पुजारियों और ननों का अपमान करने की कोशिश कर रही है." हालांकि, नाटक के समर्थन में एआईवाईएफ और अन्य संगठन सामने आए थे.एआईवाईएफ जिला समिति द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि नाटक के खिलाफ अनावश्यक विवाद केवल समाज में लोगों के बीच विभाजन को बढ़ावा देंगे और इस तरह की प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए.आधिकारिक बयान में कहा गया है, "इस तरह के हस्तक्षेप को केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में घुसपैठ माना जाएगा." एआईवाईएफ ने नेथल नाटक संघम के लिए चरणों की व्यवस्था करने की इच्छा भी व्यक्त की, अगर वे त्रिशूर में इसे फिर से करने के लिए तैयार थे.

         राज्य में कैथोलिक चर्च की सर्वोच्च संस्था केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) ने राज्य सरकार से एक मलयालम नाटक के मंचन पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इसमें ईसाई धर्म के साथ-साथ इसकी मंडलियों और कॉन्वेंट को गलत तरीके से चित्रित किया गया है.

     केसीबीसी के अध्यक्ष कार्डिनल बेसेलियोस क्लेमिस की अध्यक्षता में धर्माध्यक्षों और विभिन्न कलीसियाओं के प्रमुखों की हाल ही में हुई एक बैठक में 'कक्कुकली' नाटक की निंदा की गई और कहा गया कि इसका मंचन केरल की संस्कृति पर एक धब्बा है.अलप्पुझा स्थित नेथल नाटक संघम ने जॉब मदाथिल के निर्देशन में कहानी को एक मंचीय रूपांतर दिया है.

    बैठक में केसीबीसी के प्रतिनिधियों ने कहा कि नाटक और साहित्यिक कृतियों का सुधार, परिवर्तन और सामाजिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करने का इतिहास रहा है.शीर्ष निकाय ने एक बयान में कहा, लेकिन अत्यधिक अपमानजनक सामग्री और इतिहास की विकृति के साथ महिमामंडन अस्वीकार्य है.

    यह घोर निंदनीय था कि समाज को अनूठी सेवाएं देने वाली हजारों ननों और मण्डलियों के आत्म-विश्वास और स्वाभिमान को ठेस पहुँचाने वाली 'कक्कूकली' को राज्य सरकार के अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य उत्सव में शामिल कर विशाल पुरस्कार दिया गया है.वामपंथी संगठनों द्वारा प्रचार, बयान में आगे कहा गया है.


कैथोलिक निकाय ने भी सांस्कृतिक समाज से नाटक की निंदा करने का आग्रह किया और सरकार से इसके मंचन पर प्रतिबंध लगाने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की.


हालांकि, नाटक के निर्देशक जॉब मैडाथिल ने आलोचनाओं को खारिज कर दिया है और कहा है कि मंडली इसके मंचन के साथ आगे बढ़ेगी. उन्होंने कहा, 'नाटक का मंचन 15 जगहों पर हो चुका था और मुझे समझ नहीं आया कि अब अचानक से विरोध क्यों शुरू हो गया .

आलोक कुमार

ईसाई समुदाय के द्वारा विरोध व्यक्त किया


पटना.बिहार जाति आधारित गणना,2022 का प्रथम चरण 7 जनवरी से 21 जनवरी तक मकानों की गणना की गई.अब द्वितीय चरण में 1 से 30 अप्रैल तक जातिवार गणना होगा.इस पर ईसाई समुदाय के द्वारा विरोध व्यक्त किया जा रहा है.प्रशांत कुमार नामक ईसाई का कहना है कि ईसाई धर्मावलंबी को केवल दो कोड में रखा गया है. ईसाई धर्मावलंबी (हरिजन) की जाति कोड 10 है और ईसाई धर्मावलंबी (अन्य पिछड़ी जाति) की जाति कोड 11 है.बिहार में जन्मे और रहने वाले ईसाई धर्मावलंबी आदिवासी का कोड नहीं दिया गया है.इसका मतलब आदिवासी कहकर उरांव,धागंड़ कहते ही (उरांव) की जाति कोड 12 में डाल देंगे.जो ईसाई धर्म नहीं दर्शाता है.उसे हिंदू ही समझा जाएगा.इसमें परिवर्तन करने की जरूरत है.         

   विदित हो कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार जाति आधारित गणना,2022 मुहिम के रूप में शुरू किया था.इसके प्रथम चरण में शनिवार 7 जनवरी से जातिगत जनगणना के तहत मकानों की गणना शुरू किया गया. खुद ही पटना में डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने मकान की गणना में लगाए गए कर्मियों के साथ इसकी शुरुआत की थी.राज्य सरकार के अनुसार जातिगत जनगणना से आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचितों एवं पिछड़ों की पहचान होगी और उनके हिसाब से योजनाएं बनाई जा सकेगी. सरकार का दावा है कि जून में पूरी रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी.

   बता दें कि पहले चरण में 7 जनवरी से 21 जनवरी तक मकानों की गणना शुरू की गई. इन 15 दिनों के दरम्यान गणनाकर्मी लगातार हर मकान में गए.  हर मकान को खास नंबर अलॉट किए.यह यूनिक नंबर लाल रंग से मकान पर मार्क भी किए और इस रिकॉर्ड को लोगों को रिकॉर्ड के रूप में इसे अपने पास भी लिखकर रख लेना चाहिए, क्योंकि यह एक तरह से पता हो जाएगा. अब तक नगर निगम मकान नंबर जारी किया करता था, लेकिन उसे पता के रूप में खोजना असंभव हो जाता था. दावा है कि इस बार दिया जा रहा नंबर हर आदमी के पते के रूप में रिकॉर्ड बनकर दर्ज हो जाएगा.मकान की गणना करते समय गणनाकर्मी घर के मुखिया का नाम भी लिख रहे हैं, ताकि यह रिकॉर्ड रहे कि मकान नंबर फलां किस व्यक्ति का है.गणनाकर्मी यह भी दर्ज कर रहे हैं कि उस परिवार में कुल कितने सदस्य हैं. साथ ही बेघर लोगों का भी रिकॉर्ड उनके अस्थायी आशियाने-ठिकाने पर लिया गया.प्रत्येक कर्मी 150 मकानों की गिनती किए. इसके लिए उन्हें हर रोज मैनुअल डेटा अपलोड करना पड़ा. अगर कोई घर बंद मिला तो मोबाइल नंबर लेकर उनसे उनकी पूरी जानकारी लिए.यह गणनाकर्मी की जिम्मेदारी थी.

दूसरे चरण में 1 से 30 अप्रैल तक जातिवार गणना होगा.इस दौरान जाति पूछेंगे, साथ ही काम और आय जानेंगे. मकान के मुखिया और परिवार के सदस्यों की कुल संख्या का रिकॉर्ड कागजों पर दर्ज किया जा रहा है.यह 21 जनवरी तक प्रक्रिया पूरी हो गयी. इसके साथ ही इस डाटा को अपलोड किए जाने पर ऑनलाइन फॉर्म तैयार होता चला गया.उसी फॉर्म में अगले चरण के दौरान बाकी जानकारी फीड की जाएगी.पूरे अप्रैल महीने गणनाकर्मी इसी ऑनलाइन फॉर्म में बाकी सूचनाएं भरेंगे. उस दौरान मकान नंबर के हिसाब से परिवार के मुखिया के पास पहुंच उनकी जाति के साथ परिवार के सदस्यों की जानकारी ली जाएगी. उनके पास कौन-कितनी गाड़ियां हैं, कितने मोबाइल है, आय का स्रोत क्या है, नौकरी करते हैं या स्वरोजगार या बेरोजगार हैं, क्या-क्या हुनर जानते हैं...जैसी जानकारी भी ली जाएगी.

आलोक कुमार

बुधवार, 15 मार्च 2023

अहिंसा को दुनिया में विस्तार देने के लिए राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन

  * जापान द्वारा 40वां निवानो शांति पुरस्कार की घोषणा पर विख्यात गांधीवादी राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन अहिंसा को दुनिया में विस्तार देने के लिए राजगोपाल का नागरिक अभिनंदन..


भोपाल. राजागोपाल पी व्ही जी को न्याय और शांति की सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था निवानो पीस फाउंडेशन, जापान ने 40वां निवानो शांति पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की है, इस उपलक्ष्य में गांधी भवन, भोपाल में उनका नागरिक अभिनंदन किया गया. इसके साथ ही सर्वधर्म सद्भावना मंच एवं समस्त समाज सेवी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में होली मिलन का आयोजन किया.

वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान ने विख्यात गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही. का परिचय देते हुए कहा कि राजगोपाल जी को लोग प्यार से राजू भाई कहते हैं.इन्हें याद करते हुए कबीर की याद आती है. कबीर जैसा जीवन और कबीर गायन में वे रचे-बसे हैं. वे कथककली नृत्य में परांगत हैं, इसलिए वे अपनी भाव-भंगिमा से अपने विचारों को व्यक्त कर पाते हैं. उन्होंने चंबल में हिंसा के ताने-बाने को अहिंसा के माध्यम से खत्म किया.यह दुनिया का अतुलनीय काम है.उन्होंने गांधीवादी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया, जो देश-दुनिया में अहिंसा के माध्यम से शांति, समानता एवं न्याय के लिए काम कर रहे हैं.


गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही. ने कहा कि अपने लोगों से मिला प्यार किसी भी पुरस्कार से बड़ा होता है.पुरस्कार का तीन महत्व इस समय है.पहला, आज सरकार द्वारा हर सामाजिक आंदोलन को दबाया जा रहा है, जबकि मानव अधिकार की बात संविधान में है.अलग-अलग तरह से संस्थाओं को परेशान किया जा रहा है, ऐसे समय में इस पुरस्कार का महत्व है. यह पुरस्कार गांधी जी के काम को स्वीकार करने का महत्व है, जब देश में उन्हें नकारने की बात हो रही है.तीसरी बात यह है कि यह पुरस्कार दुनिया में अहिंसा को महत्व देता है. आज देश में नफरत से बाहर आकर प्रेम एवं भाईचारे को बढ़ाने की जरूरत है.आज मैं चार स्तरीय तरीके से अहिंसा पर काम कर रहा हूं. यह मेरा पूरा जोर है कि सत्ता को कैसे अहिंसक बनाया जाए?  


वरिष्ठ पत्रकार लज्जा शंकर हरदेनिया ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी हिंसा के शिकार देश जापान है, वह अहिंसा के महत्व को समझता है.ऐसे देश से राजगोपाल को सम्मान मिलना देश के लिए गौरव की बात है. गांधीवादी विचारक सुश्री अनुराधा शंकर ने कहा कि मंच का काम मील का पत्थर है. राजा जी का काम सभी को जोड़ता है.राजा जी आज के जमाने के कबीर हैं.वे जिनसे मिलते हैं, उनको जोड़ते हैं. भारत माता में हम सभी लोग है.उन्होंने देश को जागृत किया है. समाज के अंतिम तबके के अधिकारों के लिए काम किया है. जापान का जो सम्मान पूर्वी दुनिया का नोबेल है. सद्भावना मंच के संयोजक महेन्द्र शर्मा ने कहा कि राजगोपाल जी ने गांधीवादी एवं सर्वोदयी विचारों को दुनिया में विस्तार दिया है.


भंते सागर थेरा जी ने कहा किं सभी धर्मों के व्यक्ति यहां मंच पर है, अपने-अपने सिद्धांत एवं मतों के अनुसार चलते हुए इंसानियत की बात कर रहे हैं.भोपाल इस तरह का आयोजन करने वाला इकलौता शहर है.फादर आनंद मुटुंगल ने कहा कि देश को शांतिमय एवं भाईचारा वाला देश बनाने की जरूरत है. राजगोपाल जी को जिस अहिंसक मूल्यों के लिए जापान से जो सम्मान मिला, उसे जीवन में अपनाने की जरूरत है. प्रो. मनोज जैन ने कहा कि राजगोपाल जी को सम्मान मिलने से देश गौरवान्वित हुआ है.सर्वधर्म सद्भावना मंच के हाजी हारुन ने कहा कि इस वक्त देश में कुछ लोग आग लगाने की की कोशिश कर रहे हैं, तो हम पानी डालने का काम कर रहे हैं.गदर करने वाले चंद लोग होते हैं. हम प्यार मोहब्बत की बात करते हैं.देश सदियों से धर्मनिरपेक्ष रहा है.

इस मौके पर प्रदेश भर से आए नागरिकों एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रन सिंह परमार, लेखक शैलेन्द्र शैली, जमीयत उलेमा के प्रदेश प्रमुख, संत पुजारी संघ के अध्यक्ष दीक्षित जी, पूर्व विधायक महेश मिश्रा सहित कई गणमान्यों ने अपने विचार व्यक्त किए. इस अवसर पर सैकड़ों नागरिक उपस्थित हुए. कार्यक्रम का संचालन सतीश पुरोहित ने किया.

आलोक कुमार


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