रविवार, 2 जुलाई 2023

विभिन्न वर्गों के कुछ श्रद्धालुगण आस्था के साथ करेंगे लंगोट अर्पण

 "लंगोट मेला के आयोजन को लेकर जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने बाबा मनीराम अखाड़ा प्रबंधन समिति के साथ की बैठक.लंगोट अर्पण करने के लिए नहीं निकाला जाएगा कोई जुलूस, विभिन्न वर्गों के कुछ श्रद्धालुगण आस्था के साथ करेंगे लंगोट अर्पण...


राजगीर .बाबा मनीराम अखाड़ा पर लगने वाले वार्षिक लंगोट मेला का आयोजन इस वर्ष 3 जुलाई से  9 जुलाई की अवधि में किया जा रहा है.मेला के आयोजन पर विधि व्यवस्था एवं अन्य प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शनिवार देर संध्या जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर एवं पुलिस अधीक्षक श्री अशोक मिश्रा ने बाबा मनीराम अखाड़ा प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ बैठक किया.

     आयोजकों द्वारा बताया गया कि लिए गए निर्णय के अनुरूप लंगोट अर्पण करने के लिए किसी जुलूस का आयोजन नहीं किया जाएगा। विभिन्न वर्गों के कुछ श्रद्धालुगण यहाँ आकर लंगोट अर्पण करेंगे.अखाड़ा आने जाने वाले सभी मार्गों पर पैदल गश्तीदल के साथ साथ अलग से भी पेट्रोलिंग की जाएगी। इसके साथ ही सभी महत्वपूर्ण स्थलों पर स्टैटिक दंडाधिकारी एवं पुलिस बल पर्याप्त संख्या में प्रतिनियुक्त रहेंगे।

     मेला क्षेत्र में ड्रोन कैमरा से निगरानी रखी जायेगी। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है. मेला क्षेत्र के सभी बिजली के तारों को दुरुस्त रखने का निर्देश कार्यपालक अभियंता विद्युत आपूर्ति शहरी को दिया गया.नगर निगम को पूरे मेला अवधि में विशेष साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित रखने को कहा गया. मेला क्षेत्र में नियंत्रण कक्ष भी रहेगा, जहाँ दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी लगातार प्रतिनियुक्त रहेंगे। नियंत्रण कक्ष में पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाने का निर्देश दिया गया.

     इस अवसर पर नगर आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी बिहार शरीफ, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बिहार शरीफ, कार्यपालक अभियंता विद्युत आपूर्ति शहरी, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी बिहारशरीफ, अंचलाधिकारी बिहारशरीफ एवं अन्य पदाधिकारी तथा अखाड़ा प्रबंधन समिति के अमरकांत भारती एवं अन्य सदस्यगण उपस्थित थे.

आलोक कुमार



साधु-संत एवं पंडा समाज के प्रतिनिधियों के साथ आरआईसीसी सभागार में बैठक

  


राजगीर . राजकीय राजगीर मलमास मेला के आयोजन को लेकर आज जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर ने आरआईसीसी सभागार में साधु-संत एवं पंडा समाज के प्रतिनिधियों के साथ आरआईसीसी सभागार में  बैठक किया.एक-एक कर सभी प्रतिनिधियों द्वारा आवश्यक जानकारी एवं सुझाव दिया गया.

      संतों के विभिन्न अखाड़ों के लिए परंपरागत रूप से निर्धारित आवासन स्थलों पर पर्याप्त शौचालय एवं पेयजल की व्यवस्था का अनुरोध किया गया. उन्हें बताया गया कि धुनिवर, ब्रह्मकुण्ड से सामने(पीएचईडी मैदान) एवं ब्रह्मकुंड के पास प्रशासन द्वारा तमाम व्यवस्थाओं से युक्त यात्री शेड तैयार किया जा रहा है. संतो द्वारा दी गई जानकारी के अनुरूप उनके अन्य आवासन स्थलों में भी पर्याप्त संख्या में शौचालय, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. 4 जुलाई को विभिन्न  पदाधिकारियों द्वारा संत जनों के साथ उनके सभी निर्धारित आवासन स्थलों का स्थल निरीक्षण किया जाएगा तथा आवश्यकता को सूचीबद्ध करते हुए तमाम व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.

   

इस अवसर पर नगर आयुक्त, अपर समाहर्त्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी, साधु-संत समाज के प्रतिनिधि, पंडा समिति के सदस्यगण आदि उपस्थित थे.


आलोक कुमार

पिछले 9 वर्षों में देश ने बदहाली का गर्त देखा

  पूरे प्रदेश में मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने की प्रेस वार्ता  


पटना. आज प्रदेश के सभी जिलों में कांग्रेस के जिलाध्यक्षों ने प्रेस वार्ता कर मोदी सरकार के नौ साल में हुए बदहाली की कहानी साझा की. यही काम पूरे प्रदेश के सभी प्रखंडों में भी बड़े जोर-शोर के साथ किया गया.कांग्रेस ने सभी स्तर पर लोगों के दुख दर्द और बदहाली का नौ साल से चला आ रहा सिलसिला दुनिया के सामने रखी.

      इस अवसर पर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि भाजपा के लिए उत्सव मनाने का यह आखिरी साल है. बदहाली, बदनीयती और फरेब से भरा मोदी सरकार का नौ साल पूरा हो गया है. देश की जनता हर मोर्चे पर अनगिनत दुखों का सामना कर रही है। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार नया रिकॉर्ड बना रहा है. गरीबों की थाली से पहले दाल छिनी गयी, अब सब्जी गायब. टमाटर गुस्से में लाल होता जा रहा है.  रसोई गैस की कीमत 12 सौ पहुँच गई. इसलिए चावल या रोटी बनाना भी मुसीबत. महंगाई की मार से महिला मरी जा रही हैं. नौजवान बेरोजगारी से त्रस्त है। समाज नफरत और उन्माद से कराह रहा है. पूरा माहौल निराशा, हताशा और कुंठा से ग्रस्त है. इस सबके लिए मोदी सरकार पूरी तरह जिम्मेवार है. पिछले 9 वर्षों में देश ने बदहाली का गर्त देखा है.

     उन्होंने कहा कि जुमलों से पेट नहीं भरता देश अब महसूस करने लगा है इसलिए कांग्रेस ने पूरे प्रदेश के हर जिला में, हर प्रखंड में मोदी सरकार के कुशासन के नौ साल का खुला चिट्ठा देश के सामने रख रही है. यह केवल शुरुआत है आने वाले दिनों में यह प्रदर्शन और धरना का रूप लेगी.


आलोक कुमार

शनिवार, 1 जुलाई 2023

मैतेई और कुकी जातीय के लोग अशांत होकर हिंसात्मक आंदोलन करने पर उतारू

 पटना. पटना महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा हैं. महाधर्माध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा कारितास  इंडिया के अध्यक्ष भी हैं.हाल के दिनों में 3 मई 2023 से मणिपुर राज्य में हिंसा भड़क गया है. मैतेई  और कुकी जातीय के लोग अशांत होकर हिंसात्मक आंदोलन करने पर उतारू हैं. सैकड़ों लोगों की हत्या हो गयी है.

                                                                                   बताया गया कि मैतेई एक जाति, जो पूर्वोत्तर भारत में मणिपुर राज्य में निवास करती है. राज्य में उनकी बहुसंख्यक आबादी है.इन्हें ‘मणिपुरी‘ भी कहा जाता है।.इनकी अर्थव्यवस्था का आधार सिंचित खेतों में धान की कृषि है. मैतेई रीति-रिवाजों के मिश्रण से बड़ी कट्टरता से दूर रहते हैं और गाय को पूजनीय मानते हैं.

   मणिपुर का अधिकांश क्षेत्र कभी पूरी तरह उन लोगों से बसा हुआ था, जो नागा और मिज़ो पर्वतीय जाति से मिलते-जुलते थे. परस्पर विवाह संबंधों और अपने राजनीतिक वर्चस्व के कारण धीरे-धीरे अन्य प्रभावशाली जातियों के इनके साथ विलीन होते जाने से मैतेई जाति बनी, जिसकी आबादी अब लगभग 7,80,000 है.

    मैतेई  लोग ऐसे कुलों में बंटे हुए हैं, उनमें परस्पर विवाह संबंध नहीं होते हैं. वंशागत रूप से मंगोल नस्ल के होने और तिब्बती-बर्मी भाषा बोलने के बावजूद हिन्दू परंपराओं का पालन करने के कारण मैतेई आसपास की पहाड़ी जातियों से भिन्न हैं.

   हिन्दू धर्म में परिवर्तित होने के पूर्व वे मांसाहार करते थे, पशुबलि और नरबलि भी देते थे, लेकिन अब वे मांसाहार, और मदिरा पान से परहेज़ करते हैं.मैतेई रीति-रिवाजों के मिश्रण से बड़ी कट्टरता से दूर रहते हैं और गाय को पूजनीय मानते हैं.

   ये लोग उच्च वर्ण का होने का दावा करते हैं. हिन्दू देवी-देवताओं, खासतौर से कृष्ण के उपासक होने के अलावा, वे हिन्दू बनने से पूर्व के अपने पंथ विशेष के देवी-देवताओं और भूत-प्रेतों की पूजा भी करते हैं.

इनकी अर्थव्यवस्था का आधार सिंचित खेतों में धान की कृषि है. वे अश्वपालन में निपुण हैं.पोलो इन लोगों का राजकीय खेल है. हॉकी, नौका दौड़, नाटक और भारत भर में मशहूर मणिपुरी नृत्य इनके मनोरंजन के अन्य साधन हैं.

 बताते चले कि कुकी भारत और म्यांमार के बीच की सीमा की मिज़ो पहाड़ियों पर रहने वाले दक्षिण-पूर्वी एशियाई लोग है. इस जनजाति की जनसंख्या 1970 के दशक में लगभग 12,000 थी. ये मुख्यतः अधिक संख्या वाले मिज़ो लोगों में उनकी प्रथाएँ व भाषा अपनाकर घुलमिल गए हैं. इसके बोंजुंग कुकी, बायटे कुकी, खेलमा कुकी आदि कई कुलवाची भेद हैं.ये बलिष्ठ एवं ठिंगने होते हैं और नागा लोगों की अपेक्षा अधिक खूंखार समझे जाते हैं. आज से लगभग सौ वर्ष पूर्व लुशाई और कुकी लोगों में युद्ध हुआ जिसमें कुकी लोगों की हार हुई और वे अपना निवास छोड़कर काचार में आ बसे. उन्हें तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने प्रश्रय दिया और 200 कुकियों को सीमांत रक्षार्थ सैनिक शिक्षा दी.

   कुकी लोग अपने सरदार की आज्ञा का पालन अपना धर्म समझते हैं सरदार उनका एक प्रकार से राजा होता है और समझा जाता है कि वह दैवी अंश है.इस कारण वे लोग उसका कभी अनादर करने का साहस नहीं करते वरना वह जो आदेश देता है उसका आँख मूंदकर पालन करते हैं. विशेष अवसर आने पर सरदार संकेत द्वारा आदेश जारी करता है. यदि कोई व्यक्ति सरदार का भाला सुसज्जित रूप में लेकर गाँव में घूमता है तो उसका अर्थ होता है कि सरदार ने सब लोगों को अविलम्ब बुलाया है. इस वर्ग का प्रत्येक व्यक्ति अपने सरदार को प्रति वर्ष कर स्वरूप एक टोकरी चावल, एक बकरी, एक कुक्कुट और अपने शिकार का चौथा भाग प्रदान करता है और चार दिन की कमाई देता है.सरदार की सहायता के लिए एक मंत्रिमंडल होता है जिसकी सहायता से वह न्याय करता है.

   कुकी लोगों में विश्वासघात की सजा मृत्यु है. खून के अपराध में खूनी और उसके परिवार को गुलामी करनी होती है.स्त्रियों को किसी प्रकार की स्वतंत्रता नहीं है उन पर सरदार का आदेश लागू होता है. कुकी लोग उथेन नामक देवता की पूजा करते हैं.

    परंपरागत रूप से कुकी जंगलों में छोटी बस्तियों में रहते थे, जिनमें प्रत्येक उसके अपने प्रमुख द्वारा शासित होती थी.मुखिया का सबसे छोटा पुत्र अपने पिता की संपत्ति का उत्तराधिकारी होता था, जबकि अन्य पुत्रों का गाँव की लड़कियों से विवाह करवाकर उन्हें स्वयं अपने गाँव स्थापित करने के लिए भेज दिया जाता था. कुकी बांस के जंगलों में एकाकी जीवन व्यतीत करते हैं, जो उन्हें निर्माण व हस्तकला सामग्रियां उपलब्ध कराते हैं. ये जंगल को जलाकर भूमि साफ़ करके चावल उगाते है, जंगली जानवरों का शिकार करते हैं और कुत्ते, सूअर, भैंस, बकरी व मुर्गियां पालते हैं.

   इस बीच 3 मई, 2023 से, मणिपुर दो जातीय समूहों के बीच जातीय संघर्ष के कारण जबरदस्त उथल-पुथल में है. यह हिंसा मैतेई लोगों द्वारा अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर भड़की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और 47,914 लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली.

 कारितास  इंडिया के अध्यक्ष सेबेस्टियन कल्लूपुरा, और कार्यकारी निदेशक फादर (डॉ.) पॉल मूनजेली ने 13 जून 2023 को मणिपुर के जातीय संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया.

 कारितास इंडिया प्रबंधन की यात्रा का उद्देश्य मणिपुर में मौजूदा हिंसक स्थिति के आधार पर स्थिति का आकलन करना और पुनर्वास कार्यक्रम की योजना बनाना है. यात्रा की शुरुआत इंफाल पूर्व की उपायुक्त सुश्री डायना देवी के साथ बैठक से हुई. डीएसएसएस के सहायक निदेशक, फादर. सोनी ने कारितास  प्रबंधन टीम का परिचय उपायुक्त से कराया. फादर पॉल ने मणिपुर के इम्फाल पूर्व और कांगपोकपी जिलों में आपातकालीन प्रतिक्रिया के दौरान कारितास इंडिया टीम को उनके बहुमूल्य और सकारात्मक समर्थन के लिए उपायुक्त के प्रति आभार व्यक्त किया.


आलोक कुमार

शुक्रवार, 30 जून 2023

नफरत फैलाने की कोशिश एक घृणित कृत्य

 

मोदी चलाते हैं धार्मिक उन्माद का फास्ट फूड चेन और अमित शाह हैं उनके डिलीवरी ब्यॉय - अखिलेश सिंह

पटना. बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने गृहमंत्री अमित शाह के लखीसराय में दिये गये भाषण के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आज बकरीद के पाक मौके पर गृहमंत्री अमित शाह की रैली और उसके द्वारा नफरत फैलाने की कोशिश एक घृणित कृत्य है. 

  उनकी बातें समाज में धार्मिक एकता और बन्धुत्व की भावना में जहर घोलने का काम करती है. सच तो यह है कि मोदी और अमित शाह की उपस्थिति ही उत्तेजना और उन्माद पैदा करती है. दरअसल मोदी जी धार्मिक उन्माद का फास्ट फूड चेन चला रहे हैं और अमित शाह हैं उनके डिलीवरी ब्यॉय. नफरत फैलाने की सारी कोशिशें केवल इसलिए हो रही हैं कि कहीं महागठबंधन के बनते ही सत्ता हाथ से फिसल न जाय. शिकस्त का खौफ मोदी-शाह के दिलो दिमाग को विचलित कर रहा है.

       डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने आगे कहा कि मोदी और अमित शाह को एकता, एकजूटता, सामाजिक समरसता और धार्मिक सद्भाव की बात से पीड़ा होती है. इसलिए जैसे ही इस तरह की कोई कोशिश फलीभूत होते हुए दिखाई देती है कि उनका मन बेचैन हो जाता है और हाथ तरकश पे चला जाता है. यही कारण है कि जबसे महागठबन्धन की बैठक हुई है तबसे मोदी और शाह के बोल बिगड़ते जा रहे हैं. यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात भी और कुछ नहीं बल्कि मोदी जी का शिकस्त के सामने करतब की कोशिश है.  

    उन्होंने कहा कि उनको मालूम नहीं कि बिहार की धरती पर केवल धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक समरसता की खेती संभव है. यहां के आवो हवा में नफरत का जहर घुल नहीं सकता चाहे मोदी और अमित शाह अपनी एड़ी चोटी भी एक क्यों न कर दें. यहाँ की सामाजिक समरसता और धार्मिक सहिष्णुता चट्टानी एकता के रूप में खड़ी है. मणिपुर हिंसा की आग मे झुलस रहा है और अमित शाह उसको छोड़कर बिहार भ्रमण कर रहे हैं ताकि बिहार भी जले.बिहार की गरीब जनता केन्द्र सरकार से विशेष राज्य का दर्जा की आश लगाये बैठी थी और बदले में धार्मिक उन्माद की घूँटी खिलायी जा रही है. यहाँ उनकी दाल नहीं गलने वाली है.


आलोक कुमार

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने विधान परिषद में घोषणा,हवा में

 पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने विधान परिषद में घोषणा की थी कि बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुंगेरी लाल के नाम से कुर्जी मोहल्ला का नाम मुंगेरी लाल मोहल्ला रखा जाएगा.जो आज तक पूरा नहीं हो सका....

पटना. राजनीति में स्टंटबाजी को कला के रूप में स्थापित करना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सबसे बड़ा योगदान है. मोदी जी खिलाड़ी हैं यह तो अंधभक्त भी मानते हैं, लेकिन कहना मुश्किल है कि वो खिलाड़ी बेहतर हैं या कलाकार. दरअसल मोदी जी ऐसे खिलाड़ी हैं जो शिकस्त देखते ही करतब दिखाने में लग जाते हैं.उनके 9 साल का शासनकाल कलाबाजी,
पैतरेबाजी और करतब से भरा हुआ है. इसका सबसे ताजा तरीन उदाहरण है यूनिफॉर्म सिविल कोड.

       यह बात बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने कही. डा0 सिंह स्वतंत्रता सेनानी एवं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री स्व0 मुंगेरी लाल जी के 22वीं पुण्यतिथि ( 29 जून) के अवसर पर पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित समारोह में बोल रहे थे. डा0 सिंह ने कहा कि मोदी जी का आत्मविश्वास महागठबंधन की बैठक से इस कदर हिला हुआ है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड जैसे स्टंट को लेकर मैंदान में कूद पड़े हैं. मोदी जी इस तरह का काम शुरू से करते आये हैं.

       इस अवसर पर डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि स्व0 मुंगेरी लाल उच्च कोटि के स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक थे.राज्य सरकार के मंत्री के रूप में उन्होंने दलितों के विकास की कई योजनाएं चलाईं. पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जो रिपोर्ट पेश की उसी के आधार पर आज तक बिहार में पिछड़ों एवं अति पिछड़ों के लिये आरक्षण की व्यवस्था है.

       इस अवसर पर पूर्व विधान पार्षद लाल बाबू लाल, निर्मल वर्मा, आनन्द माधव, आलोक हर्ष, कुमार आशीष, अमरेन्द्र सिंह, संजीव सिंह, प्रो0 रामायण प्रसाद यादव, अजय कुमार चौधरी, रीता सिंह, शशिकांत तिवारी, डा0 शशि कुमार सिंह, केशर कुमार सिंह, शशि रंजन, अरविन्द लाल रजक, संजय कुमार पांडेय, सुधा मिश्रा, दुर्गा प्रसाद, राजनन्दन कुमार, प्रदुमन राय, मृणाल अनामय, अखिलेश्वर सिंह, रवि गोल्डन, अविनाश सिंह, शशि भूषण राय, रमाशंकर पाण्डेय, अनूप कुमार, सत्येन्द्र पासवान सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित रहे.


आलोक कुमार 

बुधवार, 28 जून 2023

वेतन पर 11 हजार करोड़ का अतिरिक्त खर्च

 * वेतन पर 11 हजार करोड़ का अतिरिक्त खर्च



* सरकार मुकदमे में फंसा कर टालने का बहाना खोज रही है

पटना.बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि शिक्षक भर्ती में बिहार के स्थाई निवासी की शर्त को वापस लेने संबंधी तुगलकी फरमान को बिहार प्रतिभा का अपमान बताते हुए उसे तत्काल वापस लेने की मांग की है.

    श्री मोदी ने कहा कि मंत्री का यह बयान हास्यास्पद है कि अंग्रेजी, गणित, फिजिक्स में योग्य शिक्षक नहीं मिलने के कारण बिहार के बाहर के अभ्यर्थियों को बुलाया जा रहा है. बिहार के लड़के अखिल भारतीय सेवाओं तथा आईआईटी आदि में परचम फहरा रहे हैं और मंत्री कह रहे हैं कि इन विषयों में लड़के नहीं मिल रहे हैं.

       श्री मोदी ने कहा कि 15 जून के विज्ञापन में बिहार डोमिसाइल की शर्त अनिवार्य रखी गई थी, फिर अचानक उसे क्यों हटा दिया गया? क्या कक्षा 1-5 के लिए भी बिहारी प्रतिभा पढ़ाने योग्य नहीं है कि बाहर के लोगों को बुलाया जाए.

    श्री मोदी ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है. चार लाख नियोजित शिक्षकों एवं एक लाख से ज्यादा टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को पुनः परीक्षा में बैठने की बाध्यता उनके साथ विश्वासघात है। अब एक ही विद्यालय में तीन प्रकार के शिक्षक हो जाएंगे.

    श्री मोदी ने कहा कि अभी तक 8 बार विज्ञापन में संशोधन किया जा चुका है। नई नियुक्ति के कारण 11,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. इस कारण सरकार मुकदमे में फंसा कर परीक्षा टालने का बहाना खोज रही है.

    पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने नीतीश सरकार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि जिन्होंने कैबिनेट की पहली बैठक में 10 लाख लोगों को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था, वे नौ माह में एक आदमी को भी नौकरी नहीं दे पाए.दूसरी तरफ पहले से नियुक्त लोगों को दोबारा नियुक्ति-पत्र बांटने का फोटो सेशन कराकर धोखा देने की कोशिश की गई.उन्होंने कहा कि दस लाख नौकरी का वादा धोखा है.

   बिहार में अब दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी भी शिक्षक बन सकेंगे. मंगलवार (27 जून) को कैबिनेट से मुहर लगने के बाद इस निर्णय का विरोध भी शुरू हो गया है. शिक्षक संघ और अभ्यर्थी लगातार विरोध कर रहे हैं. आंदोलन तक की चेतावनी भी दे दी गई है. इन सबके बीच अब बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर (Bihar Education Minister Chandrashekhar) ने इसके पीछे की बड़ी वजह भी बता दी है कि ऐसा क्यों किया गया है.


आलोक कुमार

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