शुक्रवार, 8 मार्च 2024

युवा कांग्रेस ने युवा न्याय का किया विमोचन

इंडिया गठबंधन की सरकार आते ही 30 लाख युवाओं को सबसे पहले नौकरी दी जाएगी

         

पटना.कांग्रेस पार्टी आम चुनाव को मद्देनजर रखते हुए युवाओं के लिए युवा न्याय किया शुरुआत की संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान की सरकार के पास कोई विजन नहीं है यह सरकार टेलीविजन की है इंडिया गठबंधन की सरकार आते ही 30 लाख युवाओं को सबसे पहले नौकरी दी जाएगी.

       पीएम मोदी की गारंटी थी कि, हर साल दो करोड़ नौकरी देंगे लेकिन मोदी जी की गारंटी कहां गई. हमारा सवाल है कि कहां है वो नौकरियां? नई गारंटी लाने से दस साल पहले दी गई गारंटी का रिपोर्ट कार्ड क्या है. 2024 की नई गारंटी से पहले 2014 की गारंटी का क्या हुआ?देश में रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी दस सालों में हुई है, ये सब मोदी जी और भाजपा की गलत नीतियों के कारण है. अडानी को दिनरात मजबूत करके युवाओं का रोजगार खराब कर मोदी जी वोट मांगने जा रहे हैं. उस अन्याय के खिलाफ रोजगार दो न्याय दो मुहिम की शुरुआत यूथ कांग्रेस कर रही है. युवा कांग्रेस सड़क पर उतर कर जनता के साथ खड़ी रहेगी.

      इस बार देश में आस्था भारी पड़ रही है वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि, आस्था अपनी जगह पर है, हम सब अपने धर्म के प्रति आस्था रखते हैं. धर्म में कोई भी आस्था रखने वाला व्यक्ति भी रोजी रोटी कमाने निकलता है. जनता बेरोजगारी से परेशान है, महंगाई बढ़ रही है, लोग बर्बाद होते जा रहे हैं, अच्छा और सस्ता इलाज देने में मोदी जी फेल हैं.

    प्रदेश उपाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी, खुर्रम , मुख्य प्रवक्ता विशाल यादव, लीगल सेल के चैयरमैन विकास झा , महासचिव तनु , अरशद कमल, अमितेश पांडे, राहुल सिंह, विकास सिंह अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहें.



आलोक कुमार 

गुरुवार, 7 मार्च 2024

भारतीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर कुलदीप यादव के 50 लेने में सफल

 कुलदीप यादव ने 15 ओवर में 72 रन देकर इंग्लैंड के पांच विकेट झटके

 

कानपुर. उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाले हैं कुलदीप यादव.उनका जन्म 14 दिसम्बर 1994 को हुआ है. एक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी है जो घरेलू क्रिकेट उत्तरप्रदेश के लिए खेलते हैं.उन्होंने अपने टेस्ट क्रिकेट के कैरियर की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के खिलाफ धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में 25 मार्च 2017 को की थी.

     आज तकरीबन 7 साल के बाद कुलदीप यादव ने 15 ओवर में 72 रन देकर इंग्लैंड के पांच विकेट झटके. उन्होंने जैक क्राउली (79), बेन डकेट (27), ओली पोप (11), जॉनी बेयरस्टो (29) और बेन स्टोक्स (0) को आउट किया. चार विकेट लेते ही कुलदीप ने टेस्ट क्रिकेट में 50 विकेट भी पूरे कर लिए.फिलहाल उनके नाम 12 टेस्ट में 51 विकेट हैं। 40 रन देकर पांच विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.इतना ही नहीं कुलदीप टेस्ट क्रिकेट में 50 विकेट पूरे करने वाले भारत के पहले बाएं हाथ के रिस्ट स्पिनर हैं.वहीं, ओवरऑल वह ऐसा करने वाले दुनिया के तीसरे स्पिनर हैं. उनसे पहले दक्षिण अफ्रीका के पॉल एडम्स (कुल 134 विकेट) और इंग्लैंड के जॉनी वार्डल (कुल 102 विकेट) ने यह मुकाम हासिल किया था.

    कुलदीप यादव, भारतीय क्रिकेट के प्रमुख नामों में से एक हैं.उन्होंने अपने उदार और आक्रमक बॉलिंग स्टाइल के लिए विख्यात हैं. कुलदीप को लेफ्ट-आर्म वार्म-अप बॉलर के रूप में जाना जाता है और उनका स्पिन बॉलिंग विशेषज्ञता में उच्च मान्यता प्राप्त है.वह चाइनामैन बॉलर है.उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रचते हुए स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर धाकड़ प्रदर्शन किया है.कुलदीप ने आईपीएल में मुंबई इंडियंस के साथ भी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की हैं. उनकी सटीक गेंदबाजी और बल्लेबाजी में चुनौतीपूर्ण भूमिका ने उन्हें क्रिकेट की दुनिया में महत्वपूर्ण नाम बनाया है.

   कुलदीप की तकनीकी शानदारी और मैच को बदलने में उनकी क्षमता ने उन्हें टीम इंडिया के एक कुंजी पथ प्लेयर बना दिया है. उन्होंने विभिन्न संघों के खिलाफ अपने माहिरातम उपयोग की ओर से टीम को जीत की दिशा में मदद की है.कुलदीप यादव का संघर्ष, उनका समर्पण और क्रिकेट के प्रति उनका प्यार उन्हें एक उदाहरण स्थान देते हैं जो आगे बढ़ने के लिए कठिनाइयों का सामना करता है और उच्चतम स्तर का क्रिकेट खेलता है.


आलोक कुमार

आईपीएस अधिकारी विकास वैभव के हाथों मोमेंटो एवं सर्टिफिकेट

 

पटना। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लेट्स इंस्पायर बिहार के संरक्षक सह आईपीएस अधिकारी विकास वैभव के हाथों मोमेंटो एवं सर्टिफिकेट मेरी आयरिन ओस्ता को प्रदान किया गया.वह संत पीटर स्कूल की निदेशिका हैं.जो गार्गी अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित की गयी.

        इस नारी शक्ति सम्मान समारोह में तीन साल बेमिसाल....इसे सत्यापित करते हुए इस साल भी बिहार की महिलाओं को सम्मानित कर उनकी नारी शक्ति से बिहार को चरम उत्कर्ष पर ले जाने का सफल प्रमाण भी दिया गया. यह उल्लेखनीय है कि एक मंच पर ऑटो चालक से लेकर संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त बिहार की महिलाओं को सम्मानित करते हुए समाज में महिलाओं की भागीदारी को विशेष स्थान दिया गया. यह भी कहा गया कि ये केवल सम्मान समारोह नहीं अपितु बिहार तथा बिहार से बाहर रह रही महिलाओं की कार्यकुशलता और समाज के प्रति उनके निःस्वार्थ योगदान को देखते हुए उन्हें एक बड़ी पहचान दिलाने की कोशिश है. विदेशों में भी रह रही बिहारी महिलाओं को उनके उत्कृष्ट योगदान को समाज में आदर्श रूप में स्थापित करने की पहल है.    

    वैदिक युग से बिहार विदुषियों की धरती रही है.आज भी बिहार की महिलाएँ समाज में बढ़-चढ़कर योगदान दे रही हैं.गार्गी पाठशालाओं में वंचित वर्ग के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने तथा गार्गी महिला कौशल प्रशिक्षण केन्द्र में वंचित महिलाओं को  कला-कौशल का निःशुल्क  प्रशिक्षण देने का पुनीत कार्य कर रही हैं.

      ये सभी प्रयास शुद्ध मन से किए जा रहे हैं. जिनके दिल में बिहार बसता है, वे सभी बिहार को समृद्ध बनाने में तत्पर हैं.नारीत्व का सम्मान करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित है.एक नई आशा और अंतर्दृष्टि के साथ हर रोज मुझ पर यानी मेरी आयरिन ओस्ता अपने अनंत आशीर्वाद की वर्षा करने के लिए सर्वशक्तिमान ईश्वर को धन्यवाद देती है. मेरी माता उषा जोसेफ ओस्ता और पिता जोसेफ पीटर ओस्ता.जिनके कारण मैं पहले से ही इस ग्रह पर उतरते ही सशक्त थी. मेरे सबसे प्यारे पति और मेरे सबसे अच्छे दोस्त हमेशा मेरे साथ हाथ में हाथ मिलाकर चलने के लिए और जिन्होंने मुझे माँ बनने का सर्वोच्च दर्जा दिया है. महिलाएं पहले से ही ब्रह्मांड द्वारा सशक्त हैं और पृथ्वी पर कुछ विशेष लोग हैं. आईपीएस अधिकारी विकास वैभव सर को मेरे दिल की गहराई से धन्यवाद एक प्यारी आत्मा होने के लिए हमें सशक्त बनाने के लिए और हम में से सर्वश्रेष्ठ लाने के हमारे छोटे प्रयासों को स्वीकार करने के लिए आइए बिहार को प्रेरित करें.


आलोक कुमार




2016 में इंटरनेशनल डेब्यू करते हुए वनडे मैच में पचासा

एक महीने के अंदर पांच इंटरनेशनल क्रिकेटरों ने संन्यास ले लिया

पटना.एक महीने के अंदर पांच इंटरनेशनल क्रिकेटरों ने संन्यास ले लिया.सबसे पहले फरवरी में सौरभ तिवारी ने रिटायरमेंट का फैसला लिया था. उसके बाद स्टार पेसर वरुण एरोन ने भी संन्यास ले लिया था. फिर उसी कड़ी में 2016 में इंटरनेशनल डेब्यू करते हुए वनडे मैच में पचासा लगाने वाले फैज फजल ने भी संन्यास ले लिया.फरवरी में ही घरेलू क्रिकेट के स्टार और भारत के बल्लेबाज मनोज तिवारी ने संन्यास का ऐलान कर दिया. अब इस कड़ी में पांचवां शाहबाज नदीम का नाम जुड़ गया है.

भारतीय इंटरनेशनल क्रिकेटर संन्यास लेने को मजबूर

भारतीय इंटरनेशनल क्रिकेटरों की तर्ज पर संन्यास लेने का रुझान हमारे क्रिकेट समुदाय में एक महत्वपूर्ण बदलाव का कारण बन रहा है. इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं, जिनमें ज्यादातर दबाव, तनाव, और खेलकूद के लिए आत्मसमर्पण में कमी शामिल है.पहले तो, खेलकूद की बढ़ती हुई मानव भीड़ और तनावपूर्ण तौर पर मुकाबला करने की जिम्मेदारी ने इन क्रिकेटरों को आत्मसमर्पण की अधिकता का सामना करना पड़ा है.वे निरंतर बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा और सामाजिक मीडिया के दबाव में रहते हैं, जिससे उन्हें अधिक दबाव महसूस हो रहा है. साथ ही, खेलकूद की चुनौतीयों का सामना करने के लिए खिलाड़ियों को दिन-प्रतिदिन अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना पड़ता है, जिससे उन्हें खेलने की उच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए जोरूरी सावधानियों का पालन करना होता है-इसके अलावा, कई बार क्रिकेटर अपनी करियर के बाद विभिन्न क्षेत्रों में रूचि लेते हैं, जिसके लिए वे खुद को समर्पित करना चाहते हैं. उन्हें खुद को नए चुनौतियों का सामना करने का एक मौका मिलता है, जिससे उनका व्यक्तिगत और पेशेवर विकास होता है.इस समीक्षा से साबित होता है कि क्रिकेट से संन्यास लेने का मुख्य कारण खिलाड़ियों को तनावपूर्ण स्थितियों से निपटना और अपने आत्म-समर्पण को नई दिशा में देना है, जिससे वे खुद को बेहतर बना सकते हैं.

टीम में प्रतिस्पर्धा अधिक होने के कारण टीम जगह नहीं मिलने से खिलाड़ी रिटायर हो रहे है

आजकल क्रिकेट खेलना एक बड़ी चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है, जिसमें खिलाड़ियों को टीम में अपनी जगह बनाए रखना मुश्किल हो रहा है. यह नई पीढ़ियों के आगमन, प्रतिस्पर्धा की बढ़ती हुई मात्रा, और समय-समय पर बदलते रूपयों के कारण हो रहा है.टीम में अधिक प्रतिस्पर्धा के कारण खिलाड़ियों को अपनी जगह बनाए रखना आरंभिक करियर से लेकर अंतिम समय तक कठिन हो रहा है. यह नए प्रतिभाग्रस्त खिलाड़ियों को मौका देने की अपेक्षा से हो रहा है, जिसके कारण स्थानीय


खिलाड़ियों का प्रोत्साहन हो रहा है और वे अपना नाम रोचकता और स्थायिता के साथ बना सकते हैं.इस समय के बदलते माहौल में, कुछ खिलाड़ी चुनौतीपूर्ण दौरों और महत्वपूर्ण स्थितियों में अच्छी प्रदर्शन करने के बावजूद भी अपने स्थान की निश्चितता को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. इसका सीधा प्रभाव है कि कई खिलाड़ी अब संन्यास लेने का निर्णय कर रहे हैं, ताकि उन्हें अपने शौक और विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर मिल सकें.क्रिकेट में टीम में जगह पाना और बनाए रखना एक लम्बा और कठिन कार्य है, और इसमें खिलाड़ियों को अपने आत्मसमर्पण, प्रदर्शन, और फिटनेस को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.


आलोक कुमार

इलेक्टोरल बॉन्ड मोदी सरकार का आर्थिक राजद्रोह: डा0 अखिलेश

 बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता आक्रोशित


पटना.बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता आक्रोशित है.आज आक्रोश का इजहार भारतीय स्टेट बैंक के सामने प्रदर्शन कर किया.माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा निर्धारित 6 मार्च तक इलेक्टोरल बाॅन्ड के तहत चंदा देनेवालों का नाम उजागर करना था.नाम उजागर न करके समय सीमा बढ़ाने की मांग कर दी है.

        आज बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रदेश भर में गुरुवार को धरना-प्रदर्शन किया गया. बिहार के करीब 40 संगठनात्मक जिलों और 534 प्रखंडों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया. इसके अलावा राजधानी पटना के गाँधी मैदान स्थित स्टेट बैंक आफ इंडिया के मुख्य शाखा के सामने सैकड़ों कांग्रेसजनों ने बैंक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया एवं जमकर नारेबाजी की.

          मालूम हो कि मोदी सरकार द्वारा राजनीतिक फंडिंग के लिए लाये गये इलेक्टोरल बॉन्ड को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया और एसबीआई को चंदा देने वालों का नाम सार्वजनिक करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार एसबीआई को 6 मार्च तक नाम की सूची सार्वजनिक करनी थी, लेकिन भाजपा सरकार के दबाव में बैंक तीन महीने का अधिक समय की मांग कर रही है.

           इसी बीच लोक सभा का चुनाव होना है, इसलिए कांग्रेस इस साजिश के खिलाफ उठ खड़ी हुई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा0 अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपने संदेश में कहा कि इलेक्टोरल बाॅन्ड वास्तव में मोदी सरकार का एक बड़ा घोटाला है. जिसके तहत मोदी सरकार ने विरोधी दलों एवं उनको दान देने वालों को दंडित करने की नापाक साजिश रची थी. हैरानी इस बात की है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद भी एसबीआई नाम सार्वजनिक करने से भाग रही है. साफ है कि बैंक मोदी के डर से ऐसा कर रहा है ताकि मोदी के पूंजीपति मित्रों का नाम उजागर न हो पाए. हकीकत यह है कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम मोदी सरकार द्वारा किया गया आर्थिक राजद्रोह है. इसकी जाँच होनी चाहिए.उन्होंने कहा कि कांग्रेस मांग करती है कि एसबीआई अविलम्ब भाजपा को इलेक्टोरल बाॅन्ड के द्वारा करीब बीस हजार करोड़ देनेवाले सरकारी मित्रों का नाम सार्वजनिक करे.

         इस विरोध प्रदर्शन में जो लोग शामिल हुए इनमें प्रमुख है- बृजेश प्रसाद मुनन, लाल बाबू लाल, कुमार आशीष, शशि रंजन, आनन्द माधव, डा0 विनोद शर्मा, अरविन्द लाल रजक, मधुरेन्द्र कुमार सिंह, सुमन कुमार मल्लिक, शशि कांत तिवारी, संजय यादव, धनंजय शर्मा, संजय पाण्डेय, उदय शंकर पटेल, सिद्धार्थ क्षत्रिय, सुधा मिश्रा, निधि पाण्डेय, रवि गोल्डेन, विमलेश तिवारी, सत्येन्द्र कुमार सिंह, सुनील कुमार सिंह, गुरदयाल सिंह, सुदय शर्मा, वशी अख्तर, विशाल झा, सरदार जगजीत सिंह, निशांत करपतने, अभय जायसवाल, धर्मेन्द्र कुमार, पवन केसरी, अब्दुल वाकी सज्जन, यशवंत कुमार चमन, विशाल यादव, समीम अख्तर, धीरज कुमार, शिवनारायण सिंह, दीपक शर्मा, आदित्य पासवान, गोपाल कृष्ण, डा0 परवेज, ललन यादव, पंकज पासवान, उमेन्द्र सिंह, शंकर झा, अशोक यादव, मो0 कामरान इत्यादि.


आलोक कुमार

एक समर्थ उपाय अपनाना चाहिए ताकि समृद्धि और समाज में सामंजस्य बना रह सके

गरीब छात्रों को सुविधा मिले और वे अपनी पढ़ाई में सफल हो सकें

पटना। गरीबी एक बड़ी समस्या है, जिससे अनेक लोग प्रभावित हो रहे हैं। गरीबी हटाने का सामाजिक उद्देश्य रखने वाले लोगों को एक समर्थ उपाय अपनाना चाहिए ताकि समृद्धि और समाज में सामंजस्य बना रह सके। 

      सबसे पहले, शिक्षा को पहुंचाना आवश्यक है। शिक्षा गरीबी को हटाने का एक महत्वपूर्ण साधन है जो लोगों को अधिक और सुरक्षित रोजगार की दिशा में मार्गदर्शन कर सकता है। सरकार को शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करना चाहिए ताकि गरीब छात्रों को सुविधा मिले और वे अपनी पढ़ाई में सफल हो सकें।

        दूसरा, गरीबों को रोजगार के अवसरों की पहुंच देना महत्वपूर्ण है। सरकार और निजी संगठनों को उद्यमिता बढ़ाने के लिए योजनाएं बनानी चाहिए, जिससे गरीबों को सही मार्ग पर चलने में मदद मिले। 

           तीसरा, स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाना भी गरीबी को हटाने में मदद कर सकता है। आदेशपरक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने से लोग सकारात्मक और सुरक्षित जीवन जी सकते हैं, जिससे उनका उत्साह बढ़ेगा और वे सक्षम बनेंगे।

          आखिरकर, सामाजिक सांठ-गांठ को तोड़ना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोगों को समझाना चाहिए कि सभी को समान अवसर मिलने चाहिए और वे एक दूसरे की मदद करके समृद्धि की दिशा में बढ़ सकते हैं। इन सभी पहलुओं को मजबूती से लागू करने से गरीबी हटाने में सफलता मिल सकती है और एक समृद्ध और समाजवादी समाज की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।   गरीबी का असमानता के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध है । तीसरी दुनिया के देशों में जहाँ प्रति व्यक्ति आय का स्तर अत्यन्त निम्न है, आय और सम्पत्ति के वितरण की असमानताओं ने अनेक समस्याओं को जन्म दिया है, जिनमें सबसे गंभीर समस्या गरीबी है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्वतंत्रता के बाद भारत में आर्थिक प्रगति हुई है।गरीबी भारत में एक गंभीर समस्या है जिसका दुखद परिणाम हमारे समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। गरीबी के कई कारण हैं....

बेरोजगारी: बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है जो गरीबी को और भी बढ़ा देती है। अपातकालीन रूप से बेरोजगारी की स्थितियों में बढ़ोतरी हो रही है।

            शिक्षा की कमी:गरीब परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने में अक्सर कठिनाइयाँ आती हैं, जिसके कारण उनके जीवन की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की कमीः गरीब लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका स्वास्थ्य प्रशासनिक संकट का शिकार हो सकता है।

जातिवाद और सामाजिक असमानतारू भारत में जातिवाद और सामाजिक असमानता भी गरीबी को बढ़ावा देते हैं।

गरीबी के समाधान

गरीबी को कम करने के लिए हमें समृद्धि की दिशा में कदम उठाना होगा। सरकार को और अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में कदम उठाना होगा, जिससे बेरोजगारी कम हो सके।शिक्षा क्षेत्र में निवेश करके हम गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के पहुंच को बढ़ावा देने से हम गरीबों को अधिक उपचार और स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान कर सकते हैं।समाज में सामाजिक असमानता के खिलाफ कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि हर किसी को बराबरी का हक मिल सके। सरकार को गरीबों के लिए विभिन्न योजनाओं का आयोजन करना चाहिए, जैसे कि गरीबों को आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजनाएँ।

गरीबी को कम करना एक लम्बा और कठिन प्रक्रिया हो सकता है, लेकिन इसे समझना और उसके समाधान के दिशा में कदम उठाना हमारी समाज की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। हम सभी को एकमात्र इस समस्या का समाधान करने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा ताकि हमारा देश गरीबी से मुक्त हो सके।


आलोक कुमार 

सार्वजनिक चर्चा के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकलता

 बीजेपी ने 2014 में चायवाला, 2019 में चौकीदार और 2024 परिवार को मुद्दा बनाया

पटना। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है। हरेक दिन दिग्गज नेताओं के द्वारा एक दूसरे पर वार की धार और तेज होती जा रही है। रोज नए नारे गढ़े जा रहे हैं और नारों का जवाब नए नारे के साथ दिया जा रहा है। हर जनसभा में इन्हीं नारों का शोर है। मालूम हो कि बीजेपी ने 2014 में चायवाला, 2019 में चौकीदार और 2024 परिवार को मुद्धा बनाया था।

      बता दें कि साल 2014 में दिल्ली में कांग्रेस का सम्मेलन था, जिसमें उसके एक वरिष्ठ नेता ने ऐसी ही एक चूक की थी, जिसे भाजपा ने अपने सबसे बड़े हथियार में बदल दिया था. मणिशंकर अय्यर ने कहा था, ‘ मैं आपसे वादा करता हूं कि 21वीं सदी में नरेंद्र मोदी इस देश का प्रधानमंत्री कभी नहीं बन पाएंगे. लेकिन अगर वो यहां आकर चाय बेचना चाहते हैं, तो हम उन्हें इसके लिए जगह दिला सकते हैं.‘ दरअसल, इससे पहले कई बार नरेंद्र मोदी और भाजपा ये कहती आई थी कि वो बचपन में चाय बेचा करते थे. अय्यर का ताना इसी पर था लेकिन उल्टा पड़ा.

     इसी तरह 2019 में मध्य प्रदेश के सीधी में हुई रैली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा चुनावी सभाओं में लगाए जा रहे नारे ‘चौकीदार चोर है’ का जवाब मोदी ने अपने ही अंदाज में दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में नए तरीके से  चौकीदार  वाला नारा लगवाया।सीधी की चुनावी सभा के अंत में मोदी ने कहा, ‘गांव-गांव है’, जनता ने आवाज दी ‘चौकीदार है‘ फिर मोदी ने कहा, ‘शहर-शहर है‘ तो जनता ने आवाज लगाई ‘ चौकीदार  है।‘ इसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी कहते गए, ‘बच्चा-बच्चा है, डॉक्टर- इंजीनियर है, शिक्षक है, माताएं-बहनें हैं। सीमा पर भी हैं। खेत-खलिहान में है। लेखक-पत्रकार हैं। वकील-व्यापारी हैं। छात्र-छात्राएं हैं। पूरा हिंदुस्तान है। मोदी के पहली लाइन कहने के बाद इन सभी के अंत में जनता ने आवाज लगाई ‘ चौकीदार  है।‘ 

     ऐतिहासिक गांधी मैदान में 2024 में महागठबंधन द्वारा आयोजित जन विश्वास महारैली में राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि अगर प्रधानमंत्री मोदी का कोई परिवार नहीं तो इसमें वो क्या कर सकते हैं? इस पर मोदी ने कहा कि बचपन में जब मैंने घर छोड़ा था, तो एक सपना लेकर निकला था कि देशवासियों के लिए जीऊंगा। उन्होंने कहा, ‘इस देश के 140 करोड़ लोग मेरा परिवार हैं... मेरा भारत मेरा परिवार।‘इस ओर बीजेपी के राज्याध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के 14 करोड़ लोग मोदी के परिवार है। अब राजद के कार्यकर्ताओं ने बैनर टांग कर कहा है कि हमलोग मोदी के परिवार के लोग नहीं है।

     विपक्ष का वक्तव्य और सत्ताधारी का मुद्धा बनना सार्वजनिक विवेचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब विपक्ष सत्ताधारी के प्रति अपने विचार व्यक्त करता है, तो यह समाज को विभिन्न दृष्टिकोणों से सोचने का अवसर प्रदान करता है। विपक्ष का वक्तव्य विभिन्न रूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है, जैसे कि संसदीय भाषण, मीडिया कॉन्फ्रेंस, या सामाजिक मीडिया के माध्यम से। इसमें विपक्ष अपने पक्ष की राय और समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करके सत्ताधारी से अलग दृष्टिकोण प्रदान करता है।

      सत्ताधारी का मुद्दा बनाना इस विवेचना का दूसरा पहलू है। सत्ताधारी को विपक्ष के विचारों को सुनना और उनका उचित रूप से जवाब देना आवश्यक है। सत्ताधारी को चाहिए कि वह विपक्ष की बातचीत को सुने और उस पर विचार करें, ताकि सामाजिक समृद्धि और संवाद की भावना बनी रहे।इस प्रकार की विवेचना से समाज में विचार विनिमय होता है और नीतियों में सुधार होता है। सार्वजनिक चर्चा के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकलता है, जिससे राष्ट्र का विकास हो सकता है।

आलोक कुमार


The Configure Featured Post option in Blogger allows you to highlight a selected post prominently on

How to Configure Popular Posts in Blogger The Popular Posts widget highlights your most viewed post