शनिवार, 21 जून 2014

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुतला फूंकने का सिलसिला शुरू




पटना। रेल किराये में वृद्धिदेश  हित में उठाया गया कठोर कदमहै। केंद्र सरकार ने रेल भाड़े में वृद्धि का ऐलान कर दिया है। रेल मंत्रालय के ऐलान के बाद मालभाड़े में करीब 6.4 फीसद की वृद्धि की गई है और रेल किराए को 14.2 फीसद बढ़ा दिया गया है। बढ़ा हुआ रेल किराया 25 जून से लागू हो जाएगा। इसकी घोषणा रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने की है।
आज रेलवे धन की कमी से जूझ रही है। पूंजी जुटाने के लिए यात्री किराए एवं मालभाड़े में बढ़ोतरी का प्रस्ताव लंबित था, सरकार के आज के इस कदम से रेलवे को तकरीबन 800 करोड़ का लाभ होगा,जो की देश की वर्तमान स्थिति को सुद्रिड बनाये रखने के लिए आवश्यक है।यूपीए सरकार ने यह वृद्धि करने की घोषणा की थी लेकिन चुनाव घोषित होने के बाद इसको लागू नहीं किया गया था।
देशवासियों को समय-समय पर नेताओं के द्वारा नारा दिया जाता है। उस नारा के मायावी जाल में लोग उलझकर रह जाते हैं। गरीबी दूर करना। संपूर्ण क्रांति।सामाजिक न्याय।फील गुड।  सुशासन सरकार।भारत नव निर्माण  के बाद बीजेपी ने अब अच्छे दिन आएंगे का नारा बुलंद किया। अब अच्छे दिन आएंगे की राह मजबूूती करने के संदर्भ में रेल किराये में भारी वृद्धि  के विरोध में स्वर मुखरित होने लगे। आज का दिन प्रधानमंत्री और बीजेपी के लिए ब्लैक फ्राइडे साबित हुआ। प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद पहली बार बिहार में पीएम नरेन्द्र मोदी जी का पुतला फूंका गया। यह कारनामा पटना के कारगिल चौक में किया गया। वहीं बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष कुमार आशीष ने कहा कि बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी की सरकार के द्वारा अप्रत्याशित रेल किराये बढ़ाने के विरोध में कल शनिवार को पूरे प्रदेश में मोदी और रेल मंत्री का पुतला दहन करेगी और २३ जून को एक दिवसीय जिला स्तरीय रेलवे प्लेटफार्म के समक्ष धरना देगी। आम लोगों का आह्वान किया गया है कि इस आंदोलन में भाग लेकर आंदोलन को धारधार बनायं।
रेल किराये में बढ़ोतरी करने पर प्रतिक्रिया स्वरूप गणेश तिवारी कहते हैं कि दावे के मुताबिक चुनाव अभियान के दौरान उस समय के पीएम पद के दावेदार ने चार हजार से अधिक सभाओं को सम्बोधित किया तो कम कम बीस हजार बार महंगाई की चर्चा होगी। दावे ऐसे कि बस पीएम बना दो महंगाई ख़त्म। लेकिन पीएम बनते ही कहर ढाना शुरू हो गया है। रेल यात्री किराया,माल भाड़ा बढ़ा दिए। अब तो महंगाई को पंख लग जाएंगे। मोतियाबिंद के शिकार मोदी भक्तों को इसमें भी अच्छा ही नजर आएगा, रेलवे में शत-प्रतिशत एफडीआई भी शीघ्र ही हो जाएगा। रेल जब निजी हाथों में होगा तो किराए-भाड़े की स्थिति क्या होगी इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अम्बानी को गैस की कीमत बढ़ाने की अनुमति कितनी जल्दी दी गई- सबको मालूम है। सीएजी नाटक करेगा तो पद और प्रक्रिया को ख़त्म कर देने में इनको कितना समय लगेगा। अच्छा हुआअच्छे दिन जल्दी-जल्दी रहे हैं
बिहार एथलेटिक एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी ऋषिकेश नारायण सिंह ने कहा कि रेल किराया बढ़ाना जनविरोधी कदम नहीं है, जनविरोधी कदम सुविधा कम करना है। अगर रेवले का इतिहास देखा जाये तो रेलवे ने लगातार सुविधा में कटौती की है। रेलवे का असली गुनाह सुविधा कम करना है, किराया बढाना तो व्यावसायिक कदम है। मोदी सरकार को किराया बदहने के साथ-साथ सुविधा बढाने की भी घोषणा करनी चाहिए थी। सिर्फ किराया बढ़ाने की घोषणा उचित नहीं है।
आम लोगों का मत यह भी है कि नीतीश कुमार,लालू प्रसाद यादव ,ममता बनर्जी और  पवन बसंल ने भारतीय रेल को जर्जर बनाया है इनके कार्यकाल में रेलवे मंत्रालय को क्षेत्रीय बनाकर रख दिया गया। रेल मंत्री क्षेत्रवाद के जाल में फंसकर रह गए। अब कयास लगाया जा रहा है कि मोदी सरकार और रेलमंत्री मिलकर रेलवे मंत्रालय में आवश्यक सुधार लाकर रेलवे टिकट सबके लिए हर वक्त उपलब्ध करवाएंगे। दो महीने पहले रिजर्वेशन कराने से मुक्ति देंगे। टिकट दलालों से देश की जनता को मुक्ति दिलवाएंगे।रेल गाड़ियों की संख्या में वृद्धि करवाएंगे।रेल टाइम पर चलवाएंगे। ट्रेन में मिलने वाले खाने को बेहतर से बेहतर उपलब्ध करवाएंगे। हमारी रेल यात्रा सुरक्षित करवाने में सफल होंगे। किसी हादसे के बाद रेल मंत्री जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा देंगे और रेलवे स्टेशन पर कुलियों और दलालों से मुक्ति दिलवाएंगे।
महरूम प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की रात में आपातकालीन स्थिति की घोषणा की थीं। नव निर्वाचित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेल भाड़ा में बढ़ोतरी कर लोगों के साथ अन्याय किया है। मोदी सरकार ने रेल किराए में 14.2 प्रतिशत और माल भाड़ा में 6.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी गयी है। इसे 25 जून 2014 से लागू किया जाएगा। तब सभी लोगों ने आपातकालीन स्थिति की आलोचना किए थे। इसी के साथ सत्ता परिवर्तन भी हुआ था। अभी मोदी सरकार ने कांग्रेस को पटकनी देकर सत्तासीन हुए हैं। फिर भी आवाज बुलंद कर ही सकते हैं। कि आने वाले दिन अच्छे नहीं होने वाले है।
आलोक कुमार

शनिवार, 24 मई 2014

जीर्वित में मिले ही और मौत के बाद भी मिल गए

Jirvit the meeting itself and the death of the latter also found that
पटना। आज धर्मपरायण महिला सिसिलिया पीटर (82 साल ) को अंतिम विदाई दे दी गयी। इसके पूर्व कुर्जी पल्ली के उप प्रधान पुरोहित फादर सुशील साह , फादर अरूण अब्राहम और फादर फिलिप के द्वारा मिस्सा किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में सैकड़ों की संख्या में मृतका के परिवार और उनके रिस्तेदार मौजूद दें। दीघा थानान्तर्गत बांसकोठी क्रिश्चियन कॉलोनी से शव यात्रा कर प्रेरितों की रानी ईश मंदिर में पहुंचे थे। इस बीच फादर अरूण अब्राहम और फादर फिलिप ने मिस्सा में भाग लेने वालों के बीच में पवित्र परमप्रसाद वितरण किए।
अपने संभाषण में कुर्जी पल्ली के उप प्रधान पुरोहित फादर सुशील साह ने कहा कि सिसिलिया पीटर ने नवज्योति निकेतन में सेवा कार्य की। यहां से अवकाश ग्रहण करने के बाद धार्मिक कार्य में लगाया। इस संसार के जंजाल से मुक्त होकर प्रभु येसु ख्रीस्त के दरबार में चली गयी हैं। वहां तो संसार में जन्म लेने वाले इंसान को जाना ही है। जो विधि के अनुसार सिलसिला चलता ही रहेगा।
पवित्र मिस्सा समाप्त होने के बाद फादर सुशील साह ने पवित्र जल के छिड़काव शव पर किया। इसके बाद शव को उठाकर कुर्जी कब्रिस्तान में लिया गया। फादर फिलिप ने प्रार्थना की। शव को कपड़े से मुंह ढक दिया गया। बॉक्स को कब्र में उतारा गया। बॉक्स को कब्र में उतारने के बाद सबसे पहले पुरोहितों ने मिट्टी डालना शुरू कर दिए। इसके बाद उपस्थित लोगों ने भी मिट्टी डालने लगे। तो इस ईसाई धर्मरीति के अनुसार सिसिलिया पीटर का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मौत को गले लगाने के बाद कब्र में ससुर , सास , देवर , पति और पुत्र मिल गए। सभी को एक ही कब्र में दफनाया गया है। इसके पूर्व इस कब्र में 6 लोगों को दफनाया गया है। इनको दफनाने के साथ 7 संख्या हो गयी। जीर्वित में मिले ही और मौत के बाद भी मिल गए।
Alok Kumar


शुक्रवार, 23 मई 2014

मुसहर समुदाय को अनुसूचित जन जाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग


गया। नव निर्वाचित मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को बधाई! राष्ट्रीय मुसहर-भूइया विकास परिषद और मुसहर विकास मंच के सदस्यों ने आशा व्यक्त किए हैं, कि सूबे के 35 वें मुख्यमंत्री, व्यक्ति में 23 वें और महादलित में तीसरे मुख्यमंत्री के तौर पर सत्तासीन होने वाले मुख्यमंत्री विवेक से कार्य करके लोगों का कल्याण और विकास करने में पीछे नहीं रहेंगे। खुद मुख्यमंत्री के ही बिरादरी आजादी के 66 साल तक दूसरों की तकदीर और तस्वीर बनाने में जुटे रहे। अब मुख्यमंत्री को अवसर मिला है कि मुसहर समुदाय के विकास करने में कौताही नहीं बरतेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास माथा पटककर हार जाने वाले मुसहर समुदाय के नेतृत्व करने वालों को बल मिला गया है। बहुत ही जल्द मुख्यमंत्री के समक्ष मुसहर समुदाय को अनुसूचित जाति की श्रेणी से निकालकर अनुसूचित जन जाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग करेंगे। इस संदर्भ में राष्ट्रीय मुसहर-भूइया विकास परिषद के संयोजक उमेश मांझी और सचिव अजय मांझी ने कहा कि बिहार में मुसहर समुदाय की  40 लाख और देशभर में 66 लाख की संख्या है। हमलोगों की स्थिति बद से बदतर है। मात्रः वोट बैंक समझकर व्यवहार किया गया। हालांकि केन्द्र और राज्य सरकार ने योजना बना रखी है। जो जन्म लेने से पहले और मरने के बाद भी लागू रहती है। इन योजनाओं से सीधे लाभ मुसहर समुदाय को नहीं मिला। अगर लाभ मिला भी तोदलालसेंधमारी करने लगे। इंदिरा आवास योजना अधूरा ही बनकर रह गया। शौचालय निर्माण करने वाले सही ढंग से शौचालय बनाए ही नहीं। हमलोग बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। इसके आलोक में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महादलित आयोग बनाया। यह सोचकर कि समाज के किनारे रह जाने वालों का विकास करेंगे। वह भी राजनीति के बलिवेदी पर चढ़ गया। केवल रामविलास पासवान के बिरादरीपासवानको छोड़कर शेष सभी दलितों को महादलित आयोग में शामिल कर लिया। इसके कारण पूर्व मुख्यमंत्री की सोच का पर्दाफाश हो गया।
इस संदर्भ में राष्ट्रीय मुसहर-भूइया विकास परिषद के संयोजक उमेश मांझी ने आगे कहा कि हमलोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को स्मार-पत्र देकर मांग कर दिए कि अगर सच में आप मुसहर समुदाय के कल्याण और विकास करना चाहते हैं तो आप वर्तमान में अनुसूचित जाति की श्रेणी से निकालकर मुसहर समुदाय को अनुसूचित जन जाति की श्रेणी में शामिल कर लें। अगर उनके द्वारा स्मार-पत्र में उल्लेखित मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिए। अब बिहार की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन हो गया है। हमलोग चाहेंगे कि इस ओर बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी कदम उठाकर मुसहर समुदाय की मांग पूर्ण कर दें।एक सवाल के जवाब में श्री मांझी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कथनी का समर्थन किया कि मांझी ने थाम ली राज्य की पतवार को खेंवने में माहिर हैं। वह रिमोट कंट्रोल से नहीं चलने वाले हैं। अपने विवेक से राज्य चलाएंगे।
आलोक कुमार

मंगलवार, 15 अप्रैल 2014

राष्ट्रीय महिला बैठक में बिहार से चार नेत्री शिरकत करेंगी


पटना। राष्ट्रीय महिला बैठक में एक साथ एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही.राजगोपाल, एकता परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रनसिंह परमार, एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी और राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य रमेश शर्मा नजर आएंगे। राष्ट्रीय महिला बैठक में शामिल होने बिहार से मंजू डूंगडूंग, सिंधु सिन्हा, देवन्ती देवी और मीना देवी जा रही हैं। बिहार की सभी नेत्री 26 अप्रैल की शाम अथवा 27 अप्रैल की सुबह रिसोर्स सेंटर, ग्वालियर, मध्यप्रदेश में प्रवेश कर जाएंगी। 27 से 29 अप्रैल तक राष्ट्रीय बैठक की जाएगी।
विख्यात गांधीवादी और एकता परिषद के संस्थापक पी.व्ही.राजगोपाल के द्वारा मूल रूप से अहिंसात्मक आंदोलन पर ध्यान केन्द्रित कर प्रशिक्षण देंगे। अंहिसात्मक आंदोलन क्या है। यह क्यों जरूरी है। कहां से शुरू और कहां पर अंत किया जा सकता है। यह अंहिसात्मक आंदोलन किसके लिए किया जाएगा। इसके बाद स्वयं के जीवन एवं सामाजिक जीवन में अहिंसा का महत्व क्या है? इसके पहले 27 अप्रैल को आगत अतिथियों का स्वागत पुष्पा सिंह करेंगी और बैठक का उद्देश्य श्रद्धा कश्यप पेश करेंगी।
राष्ट्रीय महिला बैठक के दूसरे दिन 28 अप्रैल को राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य रमेश शर्मा के द्वारा एकता परिषद रजत जयंती वर्ष में महिलाओं की भूमिका एवं कार्यक्रमों पर फोकस डालेंगे। उसके बाद वनाधिकार अधिनियम 2006 एवं भूमि मुद्दे पर चर्चा करेंगे। एकता परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष रनसिंह परमार सक्रिय एवं द्वितीय स्तर के लीडरषीप को तैयार करने की प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। राष्ट्रीय महिला बैठक के तीसरे दिन 29 अप्रैल को एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप प्रियदर्शी एकता परिषद के संगठनात्मक कार्यों में आने वाली समस्याएं,उनके समाधान और विकल्पों पर चर्चा करेंगे।
बिहार से राष्ट्रीय महिला बैठक में शामिल होने जा रही मंजू डूंगडूंग ने कहा कि  एकता महिला मंच का पुर्नगठन एवं भावी स्वरूप, जन संगठन का भावी स्वरूप, ग्राम वापसी अभियान एवं महिला आर्थिक समूह को सशक्त बनाने पर चर्चा होगी। इसके अलावे 5 वर्षों की क्रमबद्ध योजना बनायी जाएगी। इसके आलोक में अन्तरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन की तैयारियों पर भी चर्चा की जाएगी।

आलोक कुमार

वर्षों से इस मुद्दे को लेकर लगातार आंदोलन किया

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) की पूर्व संध्या पर देशभर के करोड़ों श्रमिकों, पेंशनभोगियों और विशेष रूप से ईपीएस-95 (Employees’ Pension Sche...