आलोक कुमार
गुरुवार, 4 सितंबर 2025
पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपना आधिकारिक बंगला खाली कर दिया
बुधवार, 3 सितंबर 2025
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लहटन चौधरी की 22वीं पुण्यतिथि
राजेश राम ने कहा कि स्व0 लहटन चौधरी लम्बे समय तक राज्य सरकार में कृषि, राजस्व एवं स्वास्थ विभाग के मंत्री रहे.उन्होंने कहा कि वे जिस जिस विभाग के मंत्री रहे वहाँ उन्होंने अपनी गहरी छाप छोड़ी। लहटन चौधरी, प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे तथा सभी दायित्वों को उन्होंने ईमानदारी से निभाया.
इस अवसर पर श्रद्धाँजलि अर्पित करने वालों में कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता डा0 शकील अहमद खान, विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता डा0 मदन मोहन झा, राष्ट्रीय सचिव सह बिहार प्रभारी सुशील पासी, पूनम पासवान, डा0 समीर कुमार सिंह, प्रेमचन्द्र मिश्रा, जितेन्द्र गुप्ता, कृपानाथ पाठक,, मोती लाल शर्मा,जमाल अहमद भल्लू, संजीव प्रसाद टोनी प्रतिमा कुमारी दास, इजहारूल हुसैन, अफाक आलम , अजय कुमार सिंह, संतोष मिश्रा, आनन्द शंकर, छत्रपति यादव, राजेश राठौड़, ब्रजेश प्रसाद मुनन, अजय चौधरी , अम्बुज किशोर झा, प्रवीण सिंह कुशवाहा, अमिता भूषण, आनन्द माधव, डा0 अजय कुमार सिंह, अनिल कुमार, उमेर खान, शशि रंजन, राजीव मेहता, मंजीत आनन्द साहू, असितनाथ तिवारी, ज्ञान रंजन, मुन्ना शाही, शिशिर कौंडिल्य, सत्येन्द्र कुमार सिंह, वैद्यनाथ शर्मा, गुंजन पटेल, कमलदेव नारायण शुक्ला, अशोक गगन, आशुतोष शर्मा, पंकज यादव,पूनम देवी, कमल कमलेश, मिन्नत रहमानी, शशि कुमार सिंह, सुनील कुमार सिंह,संतोष श्रीवास्तव,मो0 कामरान, सुदय शर्मा,शरीफ रंगरेज, वसी अख्तर, मृणाल अनामय, संजय पाण्डेय, कैसर खान, उमेश कुमार राम, रवि गोल्डन,रीता सिंह, मो0 शाहनवाज,विश्वनाथ बैठा, सहित अन्य कांग्रेसजन मौजूद थे.
आलोक कुमार
मंगलवार, 2 सितंबर 2025
अतीत की गहराइयों से — बेतिया से वर्तमान तक
अतीत की गहराइयों से — बेतिया से वर्तमान तक
बेतिया.भारत के इतिहास में ऐसे चरित्र कम ही मिलते हैं जिन्होंने अपनी आस्था, विद्वता और मानवता से किसी पूरे समुदाय की नियति बदल दी हो.फादर जोसेफ मैरी बर्निनी उन्हीं विरल हस्तियों में से एक थे। 1709 में लोम्बार्डी (गार्गनानो) में जन्मे बर्निनी ने बेतिया की भूमि पर न केवल मिशनरी कार्य किया, बल्कि एक ऐसा ईसाई समुदाय खड़ा किया जो आज भी जीवंत और सक्रिय है.
बेतिया राज के महाराजा धुरुप सिंह के साथ उनकी मित्रता और महारानी के स्वास्थ्य लाभ की चमत्कारिक घटना ने इस क्षेत्र में ईसाई मिशन की नींव रखी.1742 में पोप बेनेडिक्ट XIV से मिली अनुमति ने इसे वैधता दी और यही वह क्षण था जिसने उत्तर भारत के सबसे पुराने ईसाई समुदाय — बेतिया ईसाईयों को जन्म दिया.
बर्निनी केवल प्रचारक नहीं थे, वे संस्कृत और हिंदुस्तानी के गहरे ज्ञाता, चिकित्सक, अनुवादक और समाज-शास्त्री भी थे.उनकी पांडुलिपियाँ आज भी यूरोप के पुस्तकालयों और संग्रहालयों में सुरक्षित हैं, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व की गवाही देती हैं.
वर्तमान संदर्भ में
बर्निनी का सपना केवल आस्था तक सीमित नहीं था—उन्होंने मानवता की सेवा और संस्कृतियों के संवाद को ही अपने मिशन का केंद्र बनाया.यही कारण है कि बेतिया का ईसाई समुदाय आज भी स्थानीय समाज के साथ गहराई से रचा-बसा है.उनकी परंपराओं में भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई देती है—यह उनके "भारतीयकरण" के प्रयास का प्रमाण है.
समकालीन महत्व
आज जब दुनिया धर्म और संस्कृति के नाम पर बँटती जा रही है, बर्निनी का जीवन संदेश देता है कि संवाद, सह-अस्तित्व और परस्पर सम्मान ही समाज को स्थायी रूप से मजबूत कर सकते हैं. बेतिया ईसाई समुदाय की मौजूदगी, शिक्षा और सेवा की परंपरा उसी समर्पण की जीवित मिसाल है.
फादर बर्निनी की धरोहर केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी दिशा-सूचक है.
आलोक कुमार
सोमवार, 1 सितंबर 2025
फिर जवाबदेही क्यों नहीं?
नई दिल्ली. लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जनता के टैक्स से चलने वाली संसद ही अक्सर ठप पड़ी रहती है. दमन और दीव से निर्दलीय सांसद उमेश पटेल का संसद परिसर में किया गया विरोध इसी बीमार व्यवस्था पर सीधा प्रहार है.उनका सवाल बड़ा सरल है—जब सदन नहीं चलता, तो खर्च जनता क्यों उठाए? सांसदों की जेब से ही इसकी वसूली क्यों न हो?यह सवाल असहज करने वाला है, क्योंकि संसद का एक-एक मिनट करोड़ों रुपये का होता है.जब सत्ता और विपक्ष बहस छोड़कर हंगामा करते हैं, तो यह सीधे-सीधे राष्ट्रीय संसाधनों की बर्बादी है. उमेश पटेल का बैनर—“माफी मांगो, सत्ता पक्ष और विपक्ष माफी मांगो”—असल में हर उस करदाता की आवाज़ है, जो संसद टीवी पर हंगामे का तमाशा देखकर खुद को ठगा महसूस करता है.
इस बार के सत्र के आंकड़े बताते हैं कि 120 घंटे तय चर्चा में से महज़ 37 घंटे ही बहस हो सकी.बाकी वक्त शोर-शराबे की भेंट चढ़ गया.नतीजा यह हुआ कि 14 में से 12 विधेयक बिना चर्चा के पारित कर दिए गए.क्या यही है लोकतंत्र की आत्मा? संसद बहस के लिए बनी है, न कि ‘मशीनरी’ की तरह बिल ठेलकर पास करने के लिए.
ऐतिहासिक उदाहरण
भारत की संसदीय परंपरा में बहस और तर्क को ही लोकतंत्र की जान माना गया है। जवाहरलाल नेहरू से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक के दौर में तीखी बहस हुईं, लेकिन संसद का गरिमा और संवाद अभी भटका नहीं.आज की स्थिति इन आदर्श उदाहरणों के उलट है—जहाँ बहस की जगह नारेबाजी और जिद ने ले ली है.
अन्य देशों की मिसाल
दुनिया के कई लोकतंत्रों में ऐसी बर्बादी पर कड़ी व्यवस्था है.उदाहरण के तौर पर, ब्रिटेन की संसद में अगर सांसद लगातार गैर-हाजिर रहते हैं या अनुशासनहीनता करते हैं, तो उनके वेतन में कटौती हो जाती है.अमेरिका में भी टैक्स-पेयर से जुड़ी जवाबदेही पर संसद का अनुशासन बेहद सख्त है. जापान और दक्षिण कोरिया में तो सांसदों पर अनुशासनहीनता की स्थिति में भारी जुर्माना लगाया जाता है. सवाल उठता है कि भारत में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं?
असली बहस
सवाल यह नहीं कि सत्ता या विपक्ष कौन दोषी है, बल्कि यह है कि जनता के पैसों का अपव्यय आखिर कब तक चलेगा. जब आम नागरिक समय पर टैक्स देता है, तो उसे यह अधिकार भी होना चाहिए कि वह अपने प्रतिनिधियों से जवाब मांगे—आपका एक-एक घंटा कहाँ खर्च हुआ?उमेश पटेल की मांग आज सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की असल आत्मा को बचाने का आह्वान है. संसद में मौजूद हर दल को यह समझना होगा कि संसद हंगामे का अखाड़ा नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों का मंदिर है। अगर यह मंदिर बार-बार अपवित्र होगा, तो जनता अब और चुप नहीं बैठेगी.
आलोक कुमार
रविवार, 31 अगस्त 2025
युवाओं को मिला नई दिशा का प्रशिक्षण
प्रमुख योजनाओं पर कार्यशाला
युवाओं को मिला नई दिशा का प्रशिक्षण
कटिहार का सामाजिक परिदृश्य शनिवार को कुछ अलग था.जगबंधु अधिकारी सामुदायिक भवन में “मेरा युवा भारत (माय भारत)” द्वारा आयोजित कार्यशाला ने न केवल युवाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश भी दिया.
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ.निदेशक डीआरडीए सुदामा प्रसाद सिंह, जिला युवा अधिकारी जनक राज मीना, महानिदेशक प्रतिनिधि बबन कुमार झा सहित अन्य अधिकारियों ने मिलकर यह संदेश दिया कि योजनाओं की रोशनी तभी जन-जन तक पहुंचेगी जब उसका प्रसार सही हाथों तक होगा.
प्रथम सत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल-जीवन-हरियाली जैसी योजनाओं की पात्रता और प्रक्रिया समझाई गई.यह पहल इस मायने में अहम रही कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आज भी कई पात्र लोग योजना से वंचित हैं, क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है. शिक्षा और वित्तीय सहायता से जुड़ी मुख्यमंत्री स्वयं सहायता योजना तथा स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की विस्तृत जानकारी युवाओं के लिए आशा की किरण रही.
कार्यक्रम का दूसरा हिस्सा रोजगार और कौशल विकास पर केंद्रित रहा. एनसीएस पोर्टल और रोजगार मेलों की जानकारी के साथ युवाओं को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया.कौशल विकास मिशन की चर्चा ने यह स्पष्ट किया कि बिना हुनर के रोजगार की संभावनाएं सीमित होती हैं.
स्वास्थ्य और खेल पर भी विस्तृत विमर्श हुआ. आयुष्मान भारत योजना से लेकर फिट इंडिया मूवमेंट और खेल विभाग की योजनाओं तक, संदेश साफ था—स्वस्थ और सक्रिय युवा ही सशक्त भारत का आधार हैं.कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा कलाकार पेंशन योजना और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की जानकारी ने सांस्कृतिक प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया.
अंततः 50 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए.यह केवल औपचारिकता नहीं बल्कि इस बात का प्रतीक था कि अब ये युवा योजना के प्रचार-प्रसार में torch bearer की भूमिका निभाएंगे.
निस्संदेह, इस प्रकार की कार्यशालाएं युवाओं को सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि उन्हें समाज के विकास की धारा से जोड़ती हैं.यह आयोजन कटिहार में युवाओं के लिए नई ऊर्जा और दिशा का वाहक बना है.अब आवश्यकता है कि ऐसे प्रयास सतत् हों और इन प्रशिक्षित युवाओं का इस्तेमाल समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने में हो.
आलोक कुमार
शनिवार, 30 अगस्त 2025
जलवायु परिवर्तन, शमन एवं अनुकूलन विषय पर क्षेत्रीय सम्मेलन
जलवायु परिवर्तन, शमन एवं अनुकूलन विषय पर क्षेत्रीय सम्मेलन में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन पर बैठक
पटना.बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में आज एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें हाल ही में आयोजित “जलवायु परिवर्तन, शमन एवं अनुकूलन विषयक क्षेत्रीय सम्मेलन” में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई.
बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, जल संसाधन विभाग, शहरी विकास एवं आवास विभाग, कृषि विभाग, उद्योग विभाग, ऊर्जा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, सूचना प्रावैधिकी विभाग, जल-जीवन-हरियाली मिशन, बिहार मौसम सेवा केंद्र, एवं बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित विभिन्न विभागों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं.
आलोक कुमार
शुक्रवार, 29 अगस्त 2025
भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय का गेट तोड़कर अंदर घुस गए थे. भाजपा कार्यकर्ताओं पर गाड़ियों में तोड़फोड़ का भी आरोप है. झड़प में कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को चोट आने की भी जानकारी है.
पटना. इन दिनों बिहार में वोटर अधिकार यात्रा जारी है. गत दिनों राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कथित रूप से अपशब्द कहे जाने के मामले ने शुक्रवार को पटना में हिंसक मोड़ ले लिया.बीजेपी कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे और राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी शुरू की. जवाब में कांग्रेस कार्यकर्ता भी आक्रामक हो गए और देखते ही देखते दोनों दलों के बीच झड़प शुरू हो गई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपशब्द कहे जाने के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ताओं ने पटना में कांग्रेस कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ता भिड़ गए. कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच लाठी युद्ध हो गया. दोनों पक्षों की तरफ से जमकर डंडे चले जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है
राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ से संबंधित एक मंच से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दिवंगत मां के लिए अभद्र भाषा के इस्तेमाल के विरोध में भाजपा द्वारा पटना में मार्च निकाला गया था. भाजपा कार्यकर्ताओं ने दरभंगा में नारे लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय सदाकत आश्रम तक मार्च निकाला. इसी दौरान भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई.
कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी ने पटना में पार्टी की बिहार इकाई के कार्यालय पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए शुक्रवार को कहा कि सत्य और अहिंसा के आगे, असत्य और हिंसा टिक ही नहीं सकते तथा कांग्रेस सत्य एवं संविधान की रक्षा करती रहेगी.
आलोक कुमार
गुरुवार, 28 अगस्त 2025
शैक्षणिक कैंपस का भगवाकरण कर रही है केंद्र सरकार: शाश्वत शेखर
*शैक्षणिक कैंपस का भगवाकरण कर रही है केंद्र सरकार: शाश्वत शेखर
बुधवार, 27 अगस्त 2025
असहायों के बीच राहत की किरण बने मुखिया राज कुमार भारती
असहायों के बीच राहत की किरण बने मुखिया राज कुमार भारती
समेली.कटिहार के समेली प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत राज मलहरिया में मुखिया राज कुमार भारती ने सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए करीब 400 असहाय वृद्धजनों, विकलांगजनों और घुटने-कमर-कान की बीमारी से पीड़ित परिवारों के बीच बहुमूल्य कीट का वितरण किया.
यह वितरण पंचायत के वार्ड संख्या 1 से 9 तथा 11, 12 और 13 में किया गया. इस अवसर पर व्हीलचेयर, घुटने व कमर का बेल्ट, कान की मशीन, स्टिक-छड़ी आदि उपकरण बड़े पैमाने पर वितरित किए गए.
मुखिया भारती ने बताया कि वितरण से पहले पंचायत का सघन सर्वेक्षण कराया गया था, जिसमें पाया गया कि अधिकांश वृद्धजन और दिव्यांगों चलने-फिरने में असमर्थ हैं या गंभीर रोगों से जूझ रहे हैं.इसी आधार पर वयोश्री योजना (आसरा), भारत सरकार की मदद से यह पहल की गई.
कार्यक्रम के दौरान मुखिया ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि उनका लक्ष्य है कि पंचायत के 1000 पीड़ित परिवारों तक इस तरह की सहायता पहुँचे.
इस वितरण कार्यक्रम में सरपंच प्रभाष कुमार मंडल, उप मुखिया चंदन कुमार, वार्ड सदस्य लुशी कुमारी, प्रीति कुमारी, वार्ड प्रतिनिधि चंदन रविदास, बबलू कुमार, पंच लुचाय मंडल, सोमिजा खातून समेत कई जनप्रतिनिधि सक्रिय रहे.
ग्रामीणों और लाभार्थियों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता का नजारा इस बात का प्रमाण था कि यह पहल उनके जीवन में राहत और उम्मीद की किरण लेकर आई है.
आलोक कुमार
मंगलवार, 26 अगस्त 2025
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को हुआ है
मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को हुआ है
उसकी 115 वीं जन्म जयंती है
कोलकाता . सर्वप्रथम मदर टेरेसा अपने पल्ली में एक जेसुइट पादरी द्वारा संचालित सोडालिटी नामक एक युवा समूह में शामिल हुईं और इसी में उनकी भागीदारी ने उन्हें एक मिशनरी नन के रूप में सेवा करने के लिए प्रेरित किया.
वह 17 साल की उम्र में लोरेटो की सिस्टर्स में शामिल हो गईं और उन्हें कलकत्ता भेज दिया गया जहाँ उन्हें एक हाई स्कूल में पढ़ाया.उन्हें टीबी हो गया और उन्हें दार्जिलिंग में आराम करने के लिए भेज दिया गया. दार्जिलिंग जाने वाली ट्रेन में ही उन्हें बुलावा आया - जिसे उन्होंने ईश्वर का "आदेश" कहा कि कॉन्वेंट छोड़कर गरीबों के बीच काम करना और रहना है.
उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि उन्हें ननों का एक संघ स्थापित करना है, या यह भी नहीं पता था कि उन्हें कहाँ सेवा करनी है. ट्रेन में बिताए उस पल को याद करते हुए उन्होंने एक बार कहा था, "मुझे पता था कि मेरा स्थान कहाँ है, लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि वहाँ कैसे पहुँचना है."
आलोक कुमार
सोमवार, 25 अगस्त 2025
बीमा क्लेम विवाद पर अदालत सख्त, नेशनल इंश्योरेंस की संपत्तियों की कुर्की का आदेश
बीमा क्लेम विवाद पर अदालत सख्त, नेशनल इंश्योरेंस की संपत्तियों की कुर्की का आदेश
नई दिल्ली. सात वर्षों से लंबित बीमा दावे के मामले में अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए संपत्ति कुर्की का वारंट जारी करने का निर्देश दिया है. यह मामला 018 से पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली में लंबित था.
वादी सुचिता डेविड, निवासी ए-ब्लॉक हट्स, धोबी घाट, किरबी प्लेस, नई दिल्ली, ने वाहन संख्या DL-ILS-5501 के लिए बीमा पॉलिसी संख्या 35101031176340031147 के तहत नेशनल इंश्योरेंस से बीमा कराया था। पॉलिसी 03 अप्रैल 2017 से 02 अप्रैल 2018 तक वैध थी. 23 जून 2017 की सुबह अकबर रोड, जिमखाना क्लब गोलचक्कर के पास उक्त वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया,वादी के अनुसार, वाहन का बीमा घोषित मूल्य ₹2,05,000/- था और दुर्घटना के बाद इसे मरम्मत से परे माना गया.
बीमा कंपनी से क्लेम न मिलने पर वादी ने 26 अप्रैल 2018 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद सुचिता डेविड ने 06 जुलाई 2018 को सिविल वाद (CS SCJ No. 875/2018) दायर किया. 08 दिसंबर 2023 को सीनियर सिविल जज, पटियाला हाउस कोर्ट ने कंपनी को ₹2,05,447/- राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया. लेकिन आदेश के बावजूद नेशनल इंश्योरेंस ने भुगतान नहीं किया.वर्तमान में वादी ₹2,20,477/- राशि के साथ 24% वार्षिक ब्याज की मांग कर रही है.
अदालत ने पाया कि आदेश पालन में जिला मजिस्ट्रेट भी विफल रहे हैं। अब निर्देश दिए गए हैं कि चल संपत्तियों की कुर्की का नया वारंट जारी किया जाए.1 जुलाई 2025 को बेलीफ नियुक्ति के लिए उपस्थित होने का निर्देश.19 अगस्त 2025 को अगली कार्यवाही की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश.यह मामला भारतीय बीमा क्षेत्र में दावों के निपटान में देरी और आदेश अनुपालन की गंभीर समस्या को उजागर करता है.धारा 151 CPC (न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों) के तहत अदालत ने कुर्की की कार्रवाई का निर्देश दिया है.
कंपनी का आदेश पालन न करना अवमानना के दायरे में आ सकता है.यह केस उपभोक्ता संरक्षण कानूनों और बीमा अधिनियम, 1938 के तहत दावों के समय पर निपटान के महत्व को रेखांकित करता है.अगर नेशनल इंश्योरेंस आदेश का पालन नहीं करता, तो संपत्तियों की नीलामी और वादी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अगली कार्यवाही और कठोर दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं.
आलोक कुमार
वर्षों से इस मुद्दे को लेकर लगातार आंदोलन किया
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (1 मई) की पूर्व संध्या पर देशभर के करोड़ों श्रमिकों, पेंशनभोगियों और विशेष रूप से ईपीएस-95 (Employees’ Pension Sche...
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मानव जीवन विकास समिति कटनी में है. जो एक एनजीओ है.इस समिति का कार्यक्षेत्र मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड, बघेलखण्ड और महाकौशल क्षेत्र है.यहां के...
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यह तिथि इतिहास, धर्म, साहित्य और संस्कृति के अद्भुत संगम का प्रतीक 23 अप्रैल का दिन विश्वभर में एक विशेष महत्व रखत...






